अब नहीं लगेगी वाहनों की कतार
- सालाना बचेंगे: 1550 घंटे, र्इंधन के 7.30 करोड़
इंदौर. विनोद शर्मा।इंदौर-देवास सिक्सलेन और पुराने एबी रोड (मांगलिया) के साथ गुना बायपास पर अब टोल टैक्स चुकाने के लिए वाहनों को मिनटों तक कतार में नहीं खड़ा रहना पड़ेगा। सड़क परिवहन मंत्रालय की पहल और नेशनल हाईवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया (एनएचएआई) इसके लिए प्रदेश की इन तीनों टोल प्लाजाओं पर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ईटीसी) फास्टटैग लगाने जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो महीने-दो महीने में सिस्टम काम करने लगेगा। इससे 7 करोड़ तक के र्इंधन की बचत सालाना होगा।
2014 में सड़क परिवहन मंत्री की घोषणा पर एक के बाद एक हाईवे पर ईटीसी लग रहे हैं। 9 मार्च 2015 को एनएचएआई के अफसरों की बैठक हुई। इसी बैठक में 11 राज्यों की 24 टोल प्लाजाएं चिन्हित की गई जहां ईटीसी स्थापित किए जाना है। इनमें से तीन टोल प्लाजाएं मप्र की है। इंदौर-देवास सिक्सलेन की बायपास और मांगलिया। एक गुना जिले में गुना बायपास पर। तीनों स्थानों के लिए ईटीसी इक्यूपमेंट आॅर्डर किए जा चुके हैं। 17 मार्च, 19 मार्च और 23 मार्च को एनएचएआई इस संबंध में इंदौर-देवास टोलवेज लिमिटेड को पत्र लिखकर ईटीसी इंस्टॉलेशन जल्द पूरा करने को कह चुकी है।
ऐसे मिलेंगे फास्टैग
फास्टैग के लिए आईसीआईसीआइ बैंक और एक्सिस बैंक को सेंट्रल क्लीयरिंग हाउस (सीसीएच) सेवाएं प्रदान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यानी ये दोनों बैंक टोल प्लाजा के निकट बिक्री केंद्र (प्वाइंट आॅफ सेल) खोलने के अलावा अपने फ्रेंचाइजी/एजेंटों के जरिये वाहन मालिकों/चालकों को फास्टैग रेडियो फ्रिक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) टैग की बिक्री करेंगे। इसे रिचार्ज भी कराना होगा।
टोल कटने की जानकारी कैसे मिलेगी?
- बैंकों या उनके सेवा केंद्रों से मिलने वाला आरएफआईडी फास्टैग कार के सामने वाले हिस्से में लगाना होगा।
- आरएफआईडी में गाड़ी का नंबर और मालिक का नाम तक होगा।
- टोल प्लाजाओं पर ट्रेफिक मॉनिटरिंग कैमरों की तरह ही टैग रीडर लगेंगे।
- जैसे ही कार प्लाजा पर पहुंचेगी, रीडर टैग रीड कर लेगा। आॅटोमेटिकली आपकी इंट्री कम्प्यूटर में हो जाएगी। सामने का ट्रैफिक गेट भी खुल जाएगा।
- टोल टैक्स कटने की जानकारी तत्काल आपके मोबाइल पर एसएमएस के रूप में आ जाएगी।
जिन पर टैग नहीं उनका क्या?
- प्लाजाओं पर फास्ट टैग लगे वाहनों की लेन अलग होगी।
- बिना फास्ट टैग लगा वाहन अगर इस लेन में आते हैं तो दोगुना टोल लगेगा। ताकि अनावश्यक घुसकर कोई इस लेन में डिस्टरबेंस न करें।
बड़े फायदे...
अभी दोनों टोल प्लाजाओं पर तकरीबन 4 लाख कार, जीप और वेन हर महीने निकलती हैं। यानी हर दिन 13333 चार पहिया। एक-एक गाड़ी को यहां 5-10 मिनट तक लगते हैं। औसत यदि 7 मिनट भी हो तो इन वाहनों को 93331 हजार मिनट (1550 घंटे) यहां रूकना पड़ता है। अब रूकने की स्थिति नहीं बनेगी।
- लोगों का बेशकीमती वक्त बचेगा। एनएचएआई का अनुमान है कि देशभर में ईटीसी से टोल के कारण होने वाली देरी की वजह से 27,000 करोड़ रुपये की बचत में मदद मिलेगी। 7,000 करोड़ रुपये का ईंधन बचेगा। बात इंदौर की करें तो कतार में खड़े-खड़े फुर्राहट मारने से जलने वाला दो लाख रुपए रोज यानी 7.30 करोड़ रुपए तक का सालाना र्इंधन भी बचेगा।
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