- एमआरपी से 2-3 रुपए ज्यादा में बिक रहे हैं सिगरेट पैकेट
- पुरानी ड्यूटी के माल पर थौंपी नई कीमतें, 10 दिन में लाखों की हेराफेरी...
इंदौर. विनोद शर्मा ।
आम बजट में सिगरेट की कीमतों में इजाफे की घोषणा के साथ ही धुएं के कारोबार में महंगाई ने आग लगा दी। इंडिया टोबेको कंपनी (आईटीसी) लिमिटेड और गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया (जीपीआई) लिमिटेड जैसे मुख्य ब्रांडों की सिगरेट की बाजार में उपलब्धता सिकुड़कर 40 फीसदी रह गई। मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते अनुपात के कारण एमआरपी से अधिक दरों पर सिगरेट बाजार में बिक रही है। मनमानी की बुनियाद थोक कारोबारियों और डीलरों के की स्टाक होल्ड करने की प्रवृत्ति को बताया जा रहा है। जानकारों की मानें तो 2011-12 की तय ड्यूटी चुकाकर खरीदी गई सिगरेट को स्टॉक करके जमाखोर जो नई कीमत वसूल रहे हैं वह 2012-13 की ड्यूटी बढ़ोत्तरी के बाद वसूली जाना थी। उधर, चिल्लर संकट के कारण पहले ही खुली सिगरेट पर 40 से 60 पैसे ज्यादा लिए जा रहे हैं। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो मुनाफाखोरी का यह खेल 30 लाख से ज्यादा का है। महंगाई का असर पान मसाला-गुटखा के पाउचों पर भी पढ़ा है।
धुएं के कारोबार में महंगाई का तड़का आम बजट में सिगरेट की कीमतों में होने वाले उछाल के कयासों के साथ ही लग चुका था। 16 मार्च को बजट में कीमत बढ़ोत्तरी की पुष्टि भी हो गई। वित्त वर्ष 2012-13 के लिए प्रस्तावित ड्यूटी 16 मार्च की रात 12 बजे से लग चुकी है। कंपनी ने नई ड्यूटी के साथ नया माल बनाना शुरू भी नहीं किया था कि दाम बढ़ोत्तरी की आशंका के चलते सिगरेट स्टॉक करके बैठे स्टॉकिस्ट, डिलर और थोक व्यापारियों ने नई कीमतें तय करके पुराना माल बाजार में छोड़ दिया। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो छोटी गोल्डफ्लैक सिगरेट का पैकेट 14 मार्च तक 35 रुपए का थोक व्यापारियों को मिलता था। एमआरपी थी 38 रुपए। 38 रुपए की एमआरपी वाला पैकेट आज बिक रहा है 40 रुपए में। यानी अंतर एमआरपी से 2 रुपए/पैकेट रुपए ज्यादा। वहीं खुली सिगरेट का भाव 4 रुपए से बढ़कर सीधे 5 रुपए हो गया है। खुली सिगरेट पर एमआरपी से 12 रुपए ज्यादा की कमाई।
वहीं विल्स नेवी कट, विल्स फ्लैक, ब्रिस्टल और बड़ी गोल्डफ्लैक जैसी कुछ सिगरेट्स ऐसी भी है जिनकी खुदरा कीमत बजट से प्रभावित नहीं है। प्रभावित हुई तो पैकेट की कीमत। मसलन विल्स का पैकेट 44 रुपए की एमआरपी के बाद 46 से 47 रुपए में बेचा जा रहा है जबकि खुली सिगरेट पहले भी बाजार में 5 रुपए की बिक रही थी और अभी भी 5 रुपए की एक ही बिक रही है।
इसी तरह 24 रुपए एमआरपी वाली विल्स फ्लैक और 28 रुपए एमआरपी वाली ब्रिस्टल की एक सिगरेट पहले ही 3 रुपए में बेची जा रही थी। यानी बाजार में बजट से पहले ही सालभर से हर सिगरेट पर 40 से 60 पैसे ज्यादा वसूले जाते रहे हैं। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो सिगरेट का कुल बाजार 20 करोड का है। इसमें 10 करोड़ की सिगरेट खुली बिकती है बाजार में। अब यदि एक सिगरेट पर 40 से 60 पैसे ज्यादा वसूले जा रहे हैं तो मतलब साफ है कि हेराफेरी लाखों की नहीं, करोड़ों की है।
मांग के मुकाबले आधा भी नहीं माल...
इंदौर में सिगरेट का कुल कारोबार तकरीबन 20 करोड़ रुपए/महीने का है। इसमें 17-18 करोड़ का टर्नओवर आईटीसी का है जबकि 2 से 3 करोड़ का टर्नओवर जीपीआई का। सिगरेट के होलसेल व्यापारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया इंदौर में आईटीसी का जो डीलर है वह सामान्य दिनों में 16 से 17 करोड़ रुपए की सिगरेट कंपनी से खरीदते थे। बजट के बाद से कंपनी स्टॉक क्लीयर करने में लगी है। नया माल बन नहीं रहा। हालात यह है कि बमुश्किल 7 से 8 करोड़ का माल इंदौर आ रहा है।
यह है सिगरेट और उनके भाव...
सिगरेट पुराना(थोक)नया (थोक) एमआरपीग्राहक के हाथ
विल्स नेवी कट 40 43 44 46-48
विल्स फ्लैक 22 24 24 26-27
ब्रिस्टल 26 28 28 29-30
विल्स क्लासिक 100 110 110 112-115
बड़ी गोल्ड फ्लैक 50 55 55 57-58
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