Sunday, June 28, 2015

पारदी के बयान के बाद उलझ गई जांबाजों की कहानी SPECIAL

-सवालों में अटका इनाम
पारदी के बयान के बाद उलझ गई जांबाजों की कहानी
इंदौर. विनोद शर्मा।
तीन सौ से ज्यादा अपराधों को अंजाम देने वाले पारदी गिरोह के सरगना सूरज पारदी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारियों को एक बार फिर जांबाजी के नाम पर पुरस्कृत किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। एक गेलेंट्री अवॉर्ड की दावेदारी, दूसरा निजी पिस्तौल और तीसरा आउट ऑफ टर्न प्रमोशन। बहरहाल, स्वयं पारदी द्वारा किए गए उस खुलासे ने अवॉर्ड के रास्ते में सवालों का शिखर खड़ा कर दिया है जिसमें उसने कहा था मुठभेड़ नहीं हुई, पुलिस ने उसे घर से गिरफ्तार किया। पारदी के बयान के बाद से सवालों में उलझी मुठभेड़ को लेकर जाबांजों की जाबांजी की जांच की जरूरत जताई जा रही है।
9 जून की रात पुलिस ने रालामंडल के पास मुठभेड़ के बाद सूरज पारदी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद अब उसे पकडऩे वालों को पुरस्कृत किया जाना है। सूत्र बताते हैं कि तीन प्रस्ताव बने हैं। इनमें क्राइम ब्रांच निरीक्षक जयंत राठौर और भंवरकुआं थाना प्रभारी आनंद यादव को सरकार से पर्सनल रिवॉल्वर दिलाने की अनुशंसा, एडिशनल एसपी मनोज राय का नाम गेलेंट्री अवॉर्ड के लिए नामांंकन और पारदी की तलाश में ग्वालियर से आए एएसआई रामवीरसिंह का आउट ऑफ टर्न प्रमोशन किया जाना है।
अवॉर्ड की अड़चन...
एक तरफ जाबांजों को पुरस्कृत किए जाने की तैयारी हुई तो दूसरी तरफ सूरज पारदी ने यह कहकर पुलिस द्वारा रची गई मुठभेड़ की कहानी की कलई खोल दी कि उसे पुलिस ने उसके गांव (गुना) से गिरफ्तार किया, मुठभेड़ नहीं हुई, न ही उसने किसी अधिकारी पर गोली चलाई। पारदी के बयान और पुरस्कार की तैयारियां इस बात की ओर इशारा करती है कि मुठभेड़ की कहानी क्यों रची गई। सूत्र यह भी कहते हैं कि यदि मुठभेड़ में शामिल अधिकारियों और पारदी के मोबाइल की कॉल डिटेल और टॉवर लोकेशन की डिटेल निकाली जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
यह है मुठभेड़ की कहानी!
एएसआई रामवीर सिंह और सूरज पारदी दोनों के बीच अच्छे संबंध हैं। सिंह को पारदी का मुखबिर भी बताया जाता है। आधिकारिक दबाव के बाद सिंह ने पारदी को जिस दिन मुठभेड़ हुई उससे तीन दिन पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। क्राइम ब्रांच निरीक्षक राठौर से हुई बातचीत के आधार पर वह इंदौर पहुंचा। (रामवीर के साथ काम कर चुके अधिकारी कहते हैं आरपार रामवीर ने सुरक्षा का आश्वासन देकर पारदी को इंदौर बुलाया था।) 9 जून को इंदौर पहुंचने के बाद मुठभेड़ की योजना बनी। रात को रामवीरसिंह पारदी को लेकर राऊ जंक्शन पहुंचे। वहां एक ट्रक रुकवाया और उसमें दोनों बैठे। इसके बाद राठौर-यादव को इसकी सूचना दी गई। सिल्वर स्प्रिंग के पास दोनों ने ट्रक रुकवाया। जयंत राठौर ने गोली मारकर पारदी गिरफ्तार किया।
इसलिए भी सच हो सकती है मुठभेड़ की कही-सुनी
-- 1 दिसंबर 2011 को जयंत राठौर ने एमआईजी पुलिस के साथ मिलकर बॉम्बे हॉस्पिटल के पास से संजय शर्मा, आलोक शर्मा, गौरव शर्मा और मनीषा शर्मा को 18 किलो चांदी और चोरी की चार गाडिय़ों के साथ गिरफ्तार किया था। इसके दो दिन बाद गिरफ्तारी उजागर की गई, वह भी दबंग दुनिया में मामले का खुलासा होने के बाद। पहले संजय के भाई की गिरफ्तारी बताई गई फिर संजय की। इसके लिए अनूप मिश्रा (पूर्व मंत्री) के दबाव की बात भी कही गई।
-- भंवरकुआं पुलिस ने 11 मार्च को राजीव गांधी प्रतिमा के पास चेकिंग के दौरान चार कंटेनर शराब के पकड़े। सभी कंटेनर नागालैंड पासिंग थे। मालिक  से डील होने के बाद पुलिस ने चारों कंटेनर अलग-अलग जगह खड़े कर दिए थे। इनमें एक कंटेनर (एनएन 02 जी 9605) तेजाजीनगर चौकी पर खड़ा मिला। इसका खुलासा दबंग दुनिया ने किया था।
-- 9 जून को हुई मुठभेड़ में ग्वालियर के एएसआई रामवीरसिंह के हाथ में गोली लगी। इससे पहले 6 मार्च 2012 को मप्र-राजस्थान सीमा (धौलपुर) पर हुई एक मुठभेड़ (जिसमें 85 हजार के इनामी डकैत राजेंद्र गुर्जर सहित एक अन्य डकैत को मार गिराया गया था) मेंं जो एएसआई घायल हुआ था उसका नाम भी रामवीरसिंह था। उस वक्त भी रामवीर के हाथ में ही गोली लगी थी।
यह है सवाल...
- पुलिस कहती है पारदी इंदौर से गुना (अपने गांव) भाग रहा था। उसे रास्ते में रोका तो वह भागा और गोलियां चला दी।
सवाल : यदि पारदी वाकई गुना जा रहा था तो मुठभेड़ के दौरान रामवीरसिंह मौके पर कैसे पहुंचे।
सवाल : पारदी के इंदौर से गुना जाने की सूचना किसने दी?
सवाल : यदि मुठभेड़ हुई तो पारदी ने मुठभेड़ से इनकार क्यों किया?
पारदी ने चलाई गोली
सवाल : पारदी ने जिस रिवाल्वर से गोली चलाई उसे पेश क्यों नहीं किया गया?
सवाल : उस ट्रक का नंबर क्या था जिससे पारदी को गिरफ्तार किया गया?
सवाल : पारदी ने गुना से आए उस एएसआई पर ही गोली क्यों चलाई जिससे कि उसके अच्छे संबंध हैं। वह इंदौर के अधिकारियों को भी निशाना बना सकता था जो उसने नहीं बनाया?
सवाल : नियमानुसार मुठभेड़ के मामले में मजिस्ट्रियल जांच की जाती है, इस मामले में जांच क्यों नहीं हुई।
यह है जांबाज
एएसआई रामवीरसिंह
- ग्वालियर रेंज का अधिकारी
- गुना जिले में कोतवाली थाना और रुठीयाड़ी, धरनावदा में भी रहा पदस्थ।
- पारदी गिरोह में अच्छी पेठ
- रूठीयाड़ी में राजेश तोमर के थाना प्रभारी रहते कई पारदियों को गिरफ्तार किया। सरेंडर भी करवाया।
- सूरज से भी नजदीकी। फरार होने से पहले तक नियमित संपर्क में रहता था सूरज।
- 2002/03 में इंदौर से फरार एक पांच हजार के ईनामी बदमाश का एनकाउंटर किया था। इसमें सात अधिकारियों के प्रमोशन हुए थे। रत्नेश तोमर को एसआई से सीधे टीआई बनाया गया। सिंघल और सक्सेना भी टीआई बने। आरक्षक रामवीरसिंह प्रधान आरक्षक बने जबकि आरक्षक संजय शर्मा 'जिन्हें गोली लगी थीÓ को आईजी ने दीवान बना दिया था।
- गुना के बाद मुरैना ट्रांसफर। धोलपुर और मुरैना पुलिस की संयुक्त मुठभेड़ में डकैत राजेंद्रसिंह गुर्जर मारा गया था जिस पर 85 हजार का ईनाम तय था।
- मुरैना के बाद ग्वालियर डीआरपी में ट्रांसफर हुआ।
- ग्वालियर डीआरपी से एंटी डकैत (एडी) ऑपरेशन के तहत इंदौर अटैच किए गए।
- बीते दिनों सीएम के घर हुई चोरी की छानबीन के लिए रामवीरसिंह सूरज पारदी को साथ ले गया था।
ऐसा है पारदी का इतिहास...
सूरज उर्फ टैनी पिता बापूड़ा पारदी
उम्र, 35 साल
निवासी : खेजरा जिला गुना (धरनावदा चौकी, रुठीयाड़ी)
सालदर साल दर्ज हुए मामले
1979 : 2/79,
1990 : 6/90
1991 : 125/91
1993 : 77/93
1994 : 13/94, 28/94, 36/94, 44/94
1995 : 134/95
1996 : 76/96
1997 : 123/97, 200/97, 236/97, 230/97
1998 : 218/98
1999 : 11/99, 255/99
2002 : 178/04
2004 : 229/04, 240/04, 242/04 और 246/04
2006 : 410/06
2011 : 271/11
2012 : 83/2012, 154/12 (394, 395 का यह केस इंदौर में दर्ज हुआ)
(यह सभी प्रकरण धारा 440 आईपीसी,  147, 148, 149, 324, 326, 336, 323, 324, 330, 341, 506बी, 34 आईपीसी 302, 307, 34 आईपीसी के तहत दर्ज किए गए हैं। 25-27 आर्म्स एक््ट के तहत भी सूरज के खिलाफ आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। 1 बार कोटा पुलिस ने पकड़कर गुना पुलिस के हवाले किया था।)
जमीन जायदाद :- खेजड़ा, बिलाखेड़ी, कनेरा और मुरादपुर जैसे पारदी बाहुल्य गांवों में सूरज की जमीनें।
फर्जी मुठभेड़ के फायदे... डकैतों को
- अपराधों की लंबी फेहरिस्त के चलते पारदी किसी मुठभेड़ में एनकाउंटर का शिकार हो जाता।
- मुठभेड़ में गिरफ्तारी के बाद एनकाउंटर का डर नहीं।
... और पुलिस को
- आउट ऑफ टर्न प्रमोशन
- विभाग में झांकी
- गेलेंट्री अवार्ड की दावेदारी
- मिलीभगत के तथाकथित फायदे अलग...

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