विनोद शर्मा. इंदौर
प्रदेश के नीति निर्धारकों व आला अफसरों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने शहर की अधूरी योजनाओं के लिए समय सीमा तय कर विकास की नई उम्मीद जगाई है। हालांकि तीन साल में ऐसी कई योजनाएं बनीं और कागजों में ही रह गईं। नई-नई योजनाएं बनाकर करोड़ों की मंजूरी लेने वाले विभाग बड़ी बैठकों में पूर्व की योजनाओं का जिक्र तक नहीं करते। फिर वो नंदलालपुरा की ज्योतिबा फुले स?जी मंडी हो या खान नदी शुद्धिकरण।
नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकर, लोक निर्माण विभाग और मप्र हाउसिंग बोर्ड ने तीन साल में अरबों रुपए की योजनाएं हाथ में लीं लेकिन उन्हें अंजाम तक नहीं पहुंचाया। नतीजतन माणिकबाग बस स्टैंड, ज्योतिबा फुले स?जी मंडी, गोपाल मंदिर कॉम्प्लेक्स, राऊ के पास उपनगर और जवाहर मार्ग का एक्शन प्लान कागजों पर दम तोड़ गया। सिरपुर पक्षी अभयारण्य, पीपल्यापाला रीजनल पार्क, बायपास सर्विस रोड और संजय सेतु-पागनीसपागा मार्ग (जीवनरेखा) की सांसें भी थमने लगी हैं। एमआर-९, रवींद्र नाट्यगृह जीर्णोद्धार और हॉकर्स जोन सहित आधा दर्जन योजनाओं पर नए सिरे से काम शुरू किया गया जिन्हें पूरा होने में दो-तीन साल लगेंगे।
योजनाएं जो अंजाम तक नहीं पहुंची
चोइथराम चौराहा बस स्टैंड
मास्टर प्लान के मुताबिक प्राधिकरण ने कुछ साल पहले चोइथराम चौराहे के पास बस स्टैैंड के लिए जमीन अधिग्रहित की थी।
सिरपुर पक्षी अभयारण्य
'सरोवर हमारी धरोहरÓ योजना के तहत १९९५-९६ से सिरपुर तालाब का सौंदर्यीकरण कर पक्षी अभयारण्य विकसित करने की योजना बनाई थी ताकि प्रवासी पक्षी आएं। १२.५ करोड़ की इस योजना पर काम शुरू नहीं हुआ।
नई सब्जी मंडी
नंदलालपुरा सब्जी मंडी और वीर सावरकर फ्रूट मार्केट को व्यवस्थित करने के लिए निगम ने मुंबई की तरह नई मंडी विकसित करने की योजना बनाई। इसमें तीन गोलाकार भवन बनना थे लेकिन बना एक ही। दो भवन कागजों में ही हैैं। वीर सावरकर मार्केट व द?ा मंदिर के आसपास अतिक्रमण हटाकर उद्यान विकसित करना था।
गोपाल मंदिर कॉम्प्लेक्स
जनवरी २००२ में हाउसिंग बोर्ड ने मध्य शहर की पार्किंग समस्या हल करने के लिए गोपाल मंदिर और सरकारी प्रेस की बिल्डिंग को तोड़कर बहुमंजिला पार्किंग और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बनाने की घोषणा की थी। इसे पुनर्घनत्वीकरण नाम दिया गया था। बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष चंद्रप्रभाष शेखर ने इसमें काफी रुचि ली लेकिन बाद में योजना पर काम बंद कर दिया।
राऊ के पास उपनगर
२००४-०५ में हाउसिंग बोर्ड ने राऊ के पास उपनगर विकसित करने की योजना बनाई थी जो राजनीतिक कारणों से खटाई में पड़ गई। २२० एकड़ की योजना पर पहले चरण में २५ करोड़ रुपए खर्च होना थे। जून २००५ में काम शुरू होकर २००७-०८ में पूरा होना था।
जवाहर मार्ग एक्शन प्लान
मार्ग के अस्त-व्यस्त यातायात को दुरुस्त करने के लिए निगम ने एक्शन प्लान तैयार किया था। डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर तीन किलोमीटर लंबी डामर रोड बनना थी। जेलरोड की तरह पार्किंग व्यवस्था कर सभी चौराहे चौड़े करना थे। २० अक्टूबर २००५ को 1.14 करोड़ की मंजूरी के बाद भी यहां कोई काम नहीं हुआ। २००६ में यहां प्लास्टिक एस्फाल्ट से सड़क बनाने की अनुमति दी गई। वह काम भी शुरू नहीं हो पाया।
पलासिया ग्रेड सेपरेटर
पलासिया चौराहे के यातायात को व्यवस्थित करने के लिए नगर निगम की पूर्व परिषद ने तीन भुजाओं वाले ग्रेड सेपरेटर निर्माण की योजना तैयार की थी। सर्वे भी हुआ लेकिन परिषद के बदलते शुरू हुए विवाद के कारण मामला कागजों से आगे नहीं बढ़ा। नई परिषद पुरानी परिषद के डिजाइन से सहमत नहीं।
नहीं चली नाव
लोकनिर्माण मंत्री की घोषणा के बाद चिडिय़ाघर के पास खान नदी का सौंदर्यीकरण कर नाव चलाने की योजना तैयार की थी। १.७९ करोड़ की इस योजना पर करीब १० लाख रुपए खर्च हो चुके हैं, बाद में मामला गुटीय राजनीति की भेंट चड़ गया। उधर, महापौर डॉ. उमाशशि शर्मा ने ४० लाख की लागत से नहर भंडारा का सौंदर्यीकरण कर नाव चलाने की घोषणा की। पानी रोका और नाव भी आ गई लेकिन चली नहीं।
फॉच्र्यून सिटी
पुनर्घनत्वीकरण योजना के तहत हाउसिंग बोर्ड द्वारा २००२ में सौ करोड़ की फॉच्र्यून सिटी खटाई में पड़ गई है। बोर्ड द्वारा तय दरों पर ठेकेदारा काम करने को तैयार नहीं। सेंट्रल जेल की २४ एकड़ जमीन पर प्रथम चरण में ७ एकड़ जमीन पर १०५ मकान बनाने के लिए जनवरी २००५ में टैंडर बुलाए जो निरस्त हो गए। इससे पहले बोर्ड २००३ में १० प्रतिशत राशि लेकर बुकिंग की थी। ३० लोगों ने बुकिंग की, बाद में कई ने राशि वापस ले ली। बोर्ड ने २००७ में योजना तैयार करने का दावा किया था।
लसूडिय़ा चौराहा सौंदर्यीकरण
रिंग रोड को एबी रोड से जोडऩे वाले लसूडिय़ा चौराहा पर अस्त-व्यस्त यातायात के कारण लगने वाले जाम के निराकरण के लिए आईडीए ने १.५ करोड़ की लागत से चौराहा विकसित करने की योजना तैयार की थी। इसमें रोटरी निर्माण, आकर्षक विद्युत सज्जा और हाईमास्क लगना था।
फाइलों में बंद 'जीवनरेखाÓ
मध्य शहर के बेतरतीब यातायात को सुगम बनाने के लिए आईडीए ने संजय सेतु से खान नदी के किनारे सीधे पागनीसपागा और कलेक्टोरेट तक सड़क बनाने की योजना २००३-०४ में तैयार की थी। संजय सेतु पर आईडीए ने कलेक्टोरेट जाने का दिशासूचक लगा दिया लेकिन मामला फाइलों से आगे नहीं बढ़ा। क्रियान्वयन के बाद एमजी रोड और जवाहरमार्ग से हरसिद्धि या पागनीसपागा जाने के लिए नंदलालपुरा या पंढरीनाथ होकर नहीं आना-जाना पडेगा।
न खाद बनी न मिला स्वच्छ जल
राष्टï्रीय नदी संरक्षण योजना के तहत खान नदी शुद्धिकरण के लिए केंद्र ने ५५ करोड़ रुपए आवंटित किए थे। इसके तहत ३० करोड़ की लागत से कबीटखेड़ी ट्रीटमेंट प्लांट बना। वहां शहर के सभी नदी-नालों के ९० मिलियन लीटर गंदा पानी साफ कर शिप्रा में छोडऩा था। इसमें २५ करोड़ की लागत से निगम को कबीटखेड़ी प्लांट तक सीवरेज लाइन डालकर श्मशानघाट सुधारकर सुलभ कॉम्प्लेक्स बनाना था। वन विभाग को नदी के दोनों किनारों पर पौधरोपण करना था। ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरे से खाद बनाने की योजना भी अंजाम तक नहीं पहुंची।
पुराने योजनाओं पर नए सिरे से काम शुरू
(अ)व्यवस्थित बाजार
बाजारों में बढ़ती भीड़ के मद्देनजर नगर निगम ने २००३-०४ में ३० हजार से ज्यादा हॉकर्स के लिए शहर में १२ स्थानों पर हॉकर्स जोन की योजना तैयार की थी। दो करोड़ के इस प्रोजेक्ट में व्यवस्थित पार्किंग, शुद्ध पेयजल, महिला-पुरुष सुविधाघर, कांक्रीट सड़कें और छायादार दुकानें बनना थीं। नवलखा और हरसिद्धि में प्राथमिकता से निर्माण होना था।
एमआर-९
१९७६ के मास्टर प्लान में प्रस्तावित एमआर-९ का काम आईडीए ने २००५ में हाथ में लिया। हालांकि इसके लिए कोई योजना घोषित नहीं की गई। धन की कमी के कारण काम शुरू नहीं हुआ। दिसंबर 20०6 में जेएनएनयूआरएम की स्टीयरिंग कमेटी ने इसके लिए ४० करोड़ की मंजूरी दी।
सुपर कॉरिडोर
मास्टर प्लान में शामिल है। एरोड्रम से उज्जैन रोड के भौंरासला (एमआर-१० तिराहे) तक ८ किलोमीटर लंबी सड़क बनेगी। चौड़ाई २५० फीट होगी। इस पर तीन फ्लॉयओवर बनेंगे। १-एमआर-१० तिराहे पर २- छोटी लाइन रेलवे पटरी और तीसरा एरोड्रम के पास। योजना पर सौ करोड़ रुपए खर्च होंगे।
झुग्गी मुक्त इंदौर
योजना काम नाम वेम्बै थे बाद में जेएनएनयूआरएम के तहत निचली व गंदी बस्तियों में रहने वाले नगारिकों को ठीक से बसाने के लिए 40 हजार मकान निर्माण को मंजूरी मिली। निगम और प्राधिकरण १५ हजार मकान बनाएंगे। २५ हजार मकान अन्य एजेंसी बनाएगी।
बहुमंजिला पार्किंग
२० करोड़ की लागत से शहर के पांच प्रमुख स्थानों पलासिया चौराहा, जीपीओ चौराहा, बजाजखाना चौक, प्रेस क्लब के पास और नंदलालपुरा पर बहुमंजिला पार्किंग बनना है जिनमें रैम्प के साथ लिफ्ट भी होगी। योजना २००४ में बनी थी। बाद में जेएनएनयूआरएम में शामिल किया गया।
केसरबाग ब्रिज
पूर्वी रिंग रोड को पश्चिमी रिंग रोड से जोडऩे के लिए आईडीए केसरबाग रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज बनाएगा जिस पर १५ करोड़ से ज्यादा खर्च होंगे। आईडीए का दावा अपै्रल अंत से शुरू करेंगे काम।
चौपाटी-दुकानें
आईडीए ने १० करोड़ की लागत से २००० दुकानें बनाने की घोषणा की है। इनके नक्शे स्वीकृति के लिए नगर निगम भेजे हैं।
कहा जिम्मेदार लोगों ने
प्राधिकरण अध्यक्ष मधु वर्मा ने बताया किसी भी योजना को अधर में नहीं छोड़ा। कुछ पर काम चल रहा है तो कुछ पर शुरू होने वाला है। चोइथराम चौराहा बस स्टैंड चौराहे पर आ रहा था। उसे अस्पताल के पीछे किया गया है। १५-२० एकड़ जमीन पर जल्द ही काम शुरू होगा। एमआर-१० के दूसरे चरण का काम भी दो महीने में शुरू होगा। हाउसिंग बोर्ड के शरद पवार ने बताया राऊ सेटेलाइट टाउनशिप के लिए २२० एकड़ जमीन चाहिए। २३ और १७ एकड़ जमीन के दो टुकड़े लिए हैैं जो अलग-अलग दिशा में है। शेष १८० एकड़ जमीन आईडीए की स्कीम-१६५ में आती है।
प्रदेश के नीति निर्धारकों व आला अफसरों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने शहर की अधूरी योजनाओं के लिए समय सीमा तय कर विकास की नई उम्मीद जगाई है। हालांकि तीन साल में ऐसी कई योजनाएं बनीं और कागजों में ही रह गईं। नई-नई योजनाएं बनाकर करोड़ों की मंजूरी लेने वाले विभाग बड़ी बैठकों में पूर्व की योजनाओं का जिक्र तक नहीं करते। फिर वो नंदलालपुरा की ज्योतिबा फुले स?जी मंडी हो या खान नदी शुद्धिकरण।
नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकर, लोक निर्माण विभाग और मप्र हाउसिंग बोर्ड ने तीन साल में अरबों रुपए की योजनाएं हाथ में लीं लेकिन उन्हें अंजाम तक नहीं पहुंचाया। नतीजतन माणिकबाग बस स्टैंड, ज्योतिबा फुले स?जी मंडी, गोपाल मंदिर कॉम्प्लेक्स, राऊ के पास उपनगर और जवाहर मार्ग का एक्शन प्लान कागजों पर दम तोड़ गया। सिरपुर पक्षी अभयारण्य, पीपल्यापाला रीजनल पार्क, बायपास सर्विस रोड और संजय सेतु-पागनीसपागा मार्ग (जीवनरेखा) की सांसें भी थमने लगी हैं। एमआर-९, रवींद्र नाट्यगृह जीर्णोद्धार और हॉकर्स जोन सहित आधा दर्जन योजनाओं पर नए सिरे से काम शुरू किया गया जिन्हें पूरा होने में दो-तीन साल लगेंगे।
योजनाएं जो अंजाम तक नहीं पहुंची
चोइथराम चौराहा बस स्टैंड
मास्टर प्लान के मुताबिक प्राधिकरण ने कुछ साल पहले चोइथराम चौराहे के पास बस स्टैैंड के लिए जमीन अधिग्रहित की थी।
सिरपुर पक्षी अभयारण्य
'सरोवर हमारी धरोहरÓ योजना के तहत १९९५-९६ से सिरपुर तालाब का सौंदर्यीकरण कर पक्षी अभयारण्य विकसित करने की योजना बनाई थी ताकि प्रवासी पक्षी आएं। १२.५ करोड़ की इस योजना पर काम शुरू नहीं हुआ।
नई सब्जी मंडी
नंदलालपुरा सब्जी मंडी और वीर सावरकर फ्रूट मार्केट को व्यवस्थित करने के लिए निगम ने मुंबई की तरह नई मंडी विकसित करने की योजना बनाई। इसमें तीन गोलाकार भवन बनना थे लेकिन बना एक ही। दो भवन कागजों में ही हैैं। वीर सावरकर मार्केट व द?ा मंदिर के आसपास अतिक्रमण हटाकर उद्यान विकसित करना था।
गोपाल मंदिर कॉम्प्लेक्स
जनवरी २००२ में हाउसिंग बोर्ड ने मध्य शहर की पार्किंग समस्या हल करने के लिए गोपाल मंदिर और सरकारी प्रेस की बिल्डिंग को तोड़कर बहुमंजिला पार्किंग और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बनाने की घोषणा की थी। इसे पुनर्घनत्वीकरण नाम दिया गया था। बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष चंद्रप्रभाष शेखर ने इसमें काफी रुचि ली लेकिन बाद में योजना पर काम बंद कर दिया।
राऊ के पास उपनगर
२००४-०५ में हाउसिंग बोर्ड ने राऊ के पास उपनगर विकसित करने की योजना बनाई थी जो राजनीतिक कारणों से खटाई में पड़ गई। २२० एकड़ की योजना पर पहले चरण में २५ करोड़ रुपए खर्च होना थे। जून २००५ में काम शुरू होकर २००७-०८ में पूरा होना था।
जवाहर मार्ग एक्शन प्लान
मार्ग के अस्त-व्यस्त यातायात को दुरुस्त करने के लिए निगम ने एक्शन प्लान तैयार किया था। डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर तीन किलोमीटर लंबी डामर रोड बनना थी। जेलरोड की तरह पार्किंग व्यवस्था कर सभी चौराहे चौड़े करना थे। २० अक्टूबर २००५ को 1.14 करोड़ की मंजूरी के बाद भी यहां कोई काम नहीं हुआ। २००६ में यहां प्लास्टिक एस्फाल्ट से सड़क बनाने की अनुमति दी गई। वह काम भी शुरू नहीं हो पाया।
पलासिया ग्रेड सेपरेटर
पलासिया चौराहे के यातायात को व्यवस्थित करने के लिए नगर निगम की पूर्व परिषद ने तीन भुजाओं वाले ग्रेड सेपरेटर निर्माण की योजना तैयार की थी। सर्वे भी हुआ लेकिन परिषद के बदलते शुरू हुए विवाद के कारण मामला कागजों से आगे नहीं बढ़ा। नई परिषद पुरानी परिषद के डिजाइन से सहमत नहीं।
नहीं चली नाव
लोकनिर्माण मंत्री की घोषणा के बाद चिडिय़ाघर के पास खान नदी का सौंदर्यीकरण कर नाव चलाने की योजना तैयार की थी। १.७९ करोड़ की इस योजना पर करीब १० लाख रुपए खर्च हो चुके हैं, बाद में मामला गुटीय राजनीति की भेंट चड़ गया। उधर, महापौर डॉ. उमाशशि शर्मा ने ४० लाख की लागत से नहर भंडारा का सौंदर्यीकरण कर नाव चलाने की घोषणा की। पानी रोका और नाव भी आ गई लेकिन चली नहीं।
फॉच्र्यून सिटी
पुनर्घनत्वीकरण योजना के तहत हाउसिंग बोर्ड द्वारा २००२ में सौ करोड़ की फॉच्र्यून सिटी खटाई में पड़ गई है। बोर्ड द्वारा तय दरों पर ठेकेदारा काम करने को तैयार नहीं। सेंट्रल जेल की २४ एकड़ जमीन पर प्रथम चरण में ७ एकड़ जमीन पर १०५ मकान बनाने के लिए जनवरी २००५ में टैंडर बुलाए जो निरस्त हो गए। इससे पहले बोर्ड २००३ में १० प्रतिशत राशि लेकर बुकिंग की थी। ३० लोगों ने बुकिंग की, बाद में कई ने राशि वापस ले ली। बोर्ड ने २००७ में योजना तैयार करने का दावा किया था।
लसूडिय़ा चौराहा सौंदर्यीकरण
रिंग रोड को एबी रोड से जोडऩे वाले लसूडिय़ा चौराहा पर अस्त-व्यस्त यातायात के कारण लगने वाले जाम के निराकरण के लिए आईडीए ने १.५ करोड़ की लागत से चौराहा विकसित करने की योजना तैयार की थी। इसमें रोटरी निर्माण, आकर्षक विद्युत सज्जा और हाईमास्क लगना था।
फाइलों में बंद 'जीवनरेखाÓ
मध्य शहर के बेतरतीब यातायात को सुगम बनाने के लिए आईडीए ने संजय सेतु से खान नदी के किनारे सीधे पागनीसपागा और कलेक्टोरेट तक सड़क बनाने की योजना २००३-०४ में तैयार की थी। संजय सेतु पर आईडीए ने कलेक्टोरेट जाने का दिशासूचक लगा दिया लेकिन मामला फाइलों से आगे नहीं बढ़ा। क्रियान्वयन के बाद एमजी रोड और जवाहरमार्ग से हरसिद्धि या पागनीसपागा जाने के लिए नंदलालपुरा या पंढरीनाथ होकर नहीं आना-जाना पडेगा।
न खाद बनी न मिला स्वच्छ जल
राष्टï्रीय नदी संरक्षण योजना के तहत खान नदी शुद्धिकरण के लिए केंद्र ने ५५ करोड़ रुपए आवंटित किए थे। इसके तहत ३० करोड़ की लागत से कबीटखेड़ी ट्रीटमेंट प्लांट बना। वहां शहर के सभी नदी-नालों के ९० मिलियन लीटर गंदा पानी साफ कर शिप्रा में छोडऩा था। इसमें २५ करोड़ की लागत से निगम को कबीटखेड़ी प्लांट तक सीवरेज लाइन डालकर श्मशानघाट सुधारकर सुलभ कॉम्प्लेक्स बनाना था। वन विभाग को नदी के दोनों किनारों पर पौधरोपण करना था। ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरे से खाद बनाने की योजना भी अंजाम तक नहीं पहुंची।
पुराने योजनाओं पर नए सिरे से काम शुरू
(अ)व्यवस्थित बाजार
बाजारों में बढ़ती भीड़ के मद्देनजर नगर निगम ने २००३-०४ में ३० हजार से ज्यादा हॉकर्स के लिए शहर में १२ स्थानों पर हॉकर्स जोन की योजना तैयार की थी। दो करोड़ के इस प्रोजेक्ट में व्यवस्थित पार्किंग, शुद्ध पेयजल, महिला-पुरुष सुविधाघर, कांक्रीट सड़कें और छायादार दुकानें बनना थीं। नवलखा और हरसिद्धि में प्राथमिकता से निर्माण होना था।
एमआर-९
१९७६ के मास्टर प्लान में प्रस्तावित एमआर-९ का काम आईडीए ने २००५ में हाथ में लिया। हालांकि इसके लिए कोई योजना घोषित नहीं की गई। धन की कमी के कारण काम शुरू नहीं हुआ। दिसंबर 20०6 में जेएनएनयूआरएम की स्टीयरिंग कमेटी ने इसके लिए ४० करोड़ की मंजूरी दी।
सुपर कॉरिडोर
मास्टर प्लान में शामिल है। एरोड्रम से उज्जैन रोड के भौंरासला (एमआर-१० तिराहे) तक ८ किलोमीटर लंबी सड़क बनेगी। चौड़ाई २५० फीट होगी। इस पर तीन फ्लॉयओवर बनेंगे। १-एमआर-१० तिराहे पर २- छोटी लाइन रेलवे पटरी और तीसरा एरोड्रम के पास। योजना पर सौ करोड़ रुपए खर्च होंगे।
झुग्गी मुक्त इंदौर
योजना काम नाम वेम्बै थे बाद में जेएनएनयूआरएम के तहत निचली व गंदी बस्तियों में रहने वाले नगारिकों को ठीक से बसाने के लिए 40 हजार मकान निर्माण को मंजूरी मिली। निगम और प्राधिकरण १५ हजार मकान बनाएंगे। २५ हजार मकान अन्य एजेंसी बनाएगी।
बहुमंजिला पार्किंग
२० करोड़ की लागत से शहर के पांच प्रमुख स्थानों पलासिया चौराहा, जीपीओ चौराहा, बजाजखाना चौक, प्रेस क्लब के पास और नंदलालपुरा पर बहुमंजिला पार्किंग बनना है जिनमें रैम्प के साथ लिफ्ट भी होगी। योजना २००४ में बनी थी। बाद में जेएनएनयूआरएम में शामिल किया गया।
केसरबाग ब्रिज
पूर्वी रिंग रोड को पश्चिमी रिंग रोड से जोडऩे के लिए आईडीए केसरबाग रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज बनाएगा जिस पर १५ करोड़ से ज्यादा खर्च होंगे। आईडीए का दावा अपै्रल अंत से शुरू करेंगे काम।
चौपाटी-दुकानें
आईडीए ने १० करोड़ की लागत से २००० दुकानें बनाने की घोषणा की है। इनके नक्शे स्वीकृति के लिए नगर निगम भेजे हैं।
कहा जिम्मेदार लोगों ने
प्राधिकरण अध्यक्ष मधु वर्मा ने बताया किसी भी योजना को अधर में नहीं छोड़ा। कुछ पर काम चल रहा है तो कुछ पर शुरू होने वाला है। चोइथराम चौराहा बस स्टैंड चौराहे पर आ रहा था। उसे अस्पताल के पीछे किया गया है। १५-२० एकड़ जमीन पर जल्द ही काम शुरू होगा। एमआर-१० के दूसरे चरण का काम भी दो महीने में शुरू होगा। हाउसिंग बोर्ड के शरद पवार ने बताया राऊ सेटेलाइट टाउनशिप के लिए २२० एकड़ जमीन चाहिए। २३ और १७ एकड़ जमीन के दो टुकड़े लिए हैैं जो अलग-अलग दिशा में है। शेष १८० एकड़ जमीन आईडीए की स्कीम-१६५ में आती है।
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