Sunday, June 28, 2015

बंद होगी बिल्डरों की बोलती

- सीसीआई ने कहा नहीं चलेगा एकतरफा अनुबंध 
इंदौर. विनोद शर्मा ।
बिल्डरों की मनमानी पर जल्द अंकुश लगाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। केंद्रीय शहरी आवास मंत्रालय द्वारा तैयार रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट बिल के मसौदे पर चर्चाओं का दौर जारी है वहीं कंपिटीशन कमीशन ऑफ  इंडिया (सीसीआई) ने भी दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि बिल्डरों के एकतरफा अनुबंध अब नहीं चलेंगे। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट बिल से सेक्टर में विश्वसनीयता आएगी वहीं सीसीआई की सख्ती के बाद बिल्डर एमिनिटीज के नाम पर अतिरिक्त वसूली नहीं कर पाएंगे।
जनवरी में डीएलएफ के खिलाफ सुनाए एक फैसले के बाद सीसीआई ने देशभर के बिल्डरों की मनमानी पर अंकुश लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए देश के तमाम बड़े बिल्डरों के काम करने के तौर-तरीकों का सर्वे शुरू किया जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट जल्द पेश होगी। सर्वे में इंदौर में काम करने वाली कंपनियां भी शामिल हैं। सर्वे बिल्डर-खरीदार के बीच करार और बिल्डरों के लुभावने विज्ञापनों को आधार पर होगा। माना जा रहा है कि मोनोपोली और कंपिटीशन लॉ की अनदेखी पाई गई तो कार्रवाई होगी। डीएलएफ के खिलाफ करोड़ों की पेनल्टी ठोककर सीसीआई अपने इरादे साल के शुरुआती सप्ताह में ही स्पष्ट कर चुकी है। डीएलएफ के खिलाफ दिए आदेश के बाद सीसीआई ने स्पष्ट कर दिया था बिल्डर और खरीदार के बीच जो अनुबध्ंा होगा उसमें बिल्डर को अपनी शर्तों के साथ खरीदारों के हितों से जुड़ी शर्तों का जिक्र भी करना होगा। मसलन, प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा? कब पजेशन मिलेगा? पजेशन में देर हुई तो क्या? निर्माण की वैधानिकता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं तो क्या?
अभी एग्रीमेंट की सारी शर्तें डेवलपर के पक्ष में होती है। पेड पार्किंग, गार्डन फेसिंग, कॉर्नर जैसी स्थितियों में अतिरिक्त राशि ली जाती है जो नियमों के विरुद्ध है। टाउनशिप में गार्डन फेसिंग और कॉर्नर के मकानों के लिए एक से डेढ़ लाख रुपए अतिरिक्त लिए जाते हैं।
इंदौर में क्या असर...
इंदौर में बायपास, कनाडिय़ा रोड, सुपर कॉरिडोर, देवासनाका, तलावली चांदा, धार रोड, उज्जैन रोड, हातोद रोड पर ऐसे कई आवासीय प्रोजेक्ट हैं जो सुविधाओं का सब्जबाग दिखाकर शुरू तो 2007-08 में हुए थे लेकिन आज दिन तक पूरे नहीं हो पाए। सहारा, डीएलएफ, ओमेक्स, आईबीडी, सिंगापुर, वास्तु, सेटेलाइट जैसी कई कंपनियां हैं जो खरीदारों को तय वक्त में पजेशन नहीं दे पाई। निर्माण के साथ पेमेंट शेड्यूल तो तय है लेकिन शेड्यूल के हिसाब से काम नहीं होता, हां पेमेंट जमा न करने पर सौदा जरूरत निरस्त कर दिया जाता है।
तीन साल से तैयार है मसौदा, फैसला जल्द..
पिछले कुछ सालों में रियल एस्टेट में आए उछाल और सिर पर छत का सपना संजोए लोगों को रियल एस्टेट कारोबारियों द्वारा ठगने की घटनाओं के बाद केंद्र सरकार की ओर से एक बिल का मसौदा तैयार किया गया। इसके मुताबिक नियामक प्राधिकरण बना कर बिल्डरों की मनमानी पर अंकुश लगाया जाएगा। यह मसौदा तैयार हुए तीन साल से अधिक समय हो गया हैए लेकिन अब तक इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। प्राइवेट बिल्डर अपने रसूखों का इस्तेमाल कर बिल को लगातार लटकाए हुए हैंए लेकिन अब सरकार सख्त हो गई है।

रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी बिल में शामिल प्रस्ताव
- सभी राज्यों में रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी बनाई जाएंगी
- सभी बिल्डरों-डेवलपरों, रियल एस्टेट एजेंटों को नियामक प्राधिकरण में पंजीकरण कराना होगा
- बिल्डरों को प्री.लांच के नाम पर पैसा इक_ा करने की इजाजत नहीं होगी
- लिखित समझौते के साथ बिल्डर अग्रिम राशि के रूप में दस फीसद से अधिक रकम नहीं वसूलेंगे
- तय समयसीमा के भीतर मकान या फ्लैट नहीं पर आवेदक ब्याज सहित पूरी रकम वापस ले सकते हैं
- बिल्डरों को अपने विज्ञापन या ब्रोशर में प्रोजेक्ट का पूरा ब्यौरा स्पष्ट तौर पर बिल में दिए गए दिशा निर्देश के मुताबिक देना होगा
- बिल्डर को केवल कारपेट एरिया ही बेचने की इजाजत होगी

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