दौर. दबंग रिपोर्टर ।
मप्र की औद्योगिक राजधानी कहलाने वाले इंदौर की रफ्तार अव्यवस्थित पार्किंग और बदहाल यातायात के जाम में उलझ चुकी है। साल दर साल बढ़ते हादसों के आंकड़ों के कारण 23 लाख की आबादी में एक भी ऐसा शख्स नहीं होगा जिसकी ट्रेफिक ने कभी टेंशन न बढ़ाई हो। फिर भला वह किसी भी उम्र, लिंग, जाति और धर्म का ही क्यों न हो। सड़क का संकट सबके लिए समान है। यदि कोई सकारात्मक पहल हुई भी तो 'चिंतकÓ अड़ंगे डालकर बैठ गए। फिर 1.5 करोड़ के सर्वे के बाद पलासिया ग्रेड सेपरेटर के खात्मे का मुद्दा हो या किसी जिम्मेदार की जिद में जमींदोज हो चुके जवाहर मार्ग एलिवेटेड ब्रिज का।
सार्वजनिक मंचों पर जनहित की बात करने वाले इंदौर के तथाकथित खैरख्वाह बदहाल यातायात को लेकर असल में कितने गंभीर है, यह शुक्रवार को यातायात के मास्टर प्लान के प्रजेंटेशन के दौरान उनकी गैरमौजूदगी ने बयां कर दिया। हालात यह है कि प्रजेंटेशन के दौरान यातायात की ऐसी चिंता से चिंतित एक बाहरी चिंतक यहां तक बोल गईं कि इस शहर की हालत वाकई चिंताजनक है।
यातायात पुलिस यदि कहती है कि यातायात सुधारना है तो पहले स्वयं सुधारना होगा तो गलत नहीं है। डेढ़ साल में तकरीबन 68 लाख रुपए के खर्च के बाद मास्टर प्लान बनाने वाला नगर निगम आखिर 1782 करोड़ का करेगा क्या? क्या बनेगा? क्या बिगड़ेगा? पैसे आएंगे तो कहां से? जैसे सवालों को जानने और समझने वाले 23 लाख की आबादी वाले इस शहर में 23 भी नहीं मिले। शहर की चिंता से बढ़ा दूसरा ऐसा क्या काम था जिसके कारण 'चिंतकÓ प्रजेंटेशन देखने नहीं आ सके? इस सवाल के जवाब में कुछ जिम्मेदार कहते हैं कि उन्हें बुलाया ही नहीं। कुछ ने कहा जानकारी लेट मिली। गैरहाजिरों में सबसे पहला नाम स्वयं महापौर कृष्णमुरारी मोघे का है जो महिला मंडलों के छोटे से छोटे आयोजनों में जाना नहीं भुलते। गैरहाजिरों में भाजपा-कांग्रेस के वे विधायक-पार्षद भी शामिल है जो सालभर भजन-भंडारे और विवाह सम्मेलनों के साथ आरटीआई में बिल्डिंगों की जानकारी निकालने में अपना वक्त बिताते हैं।
क्यों नहीं पहुंचे प्रजेंटेशन में.....
अन्य व्यस्तताओं के कारण नहीं जा पाया?
कृष्णमुरारी मोघे
(महापौर, नगर निगम के साथ एनएचएआई और वन विभाग तक में आदतन दखल।)
भाजपा के धरने में थी। फ्री हुई तब तक कार्यक्रम खत्म हो चुका था।
मालिनी गौड़
(इंदौर-4 की विधायक और चुनिंदा दुकानदारों के हितों को देखते हुए जवाहरमार्ग एलिवेटेड ब्रिज का विरोध किया।)
मेरी जानकारी में नहीं था। जिस वक्त प्रजेंटेशन हुआ उस वक्त हम धरना दे रहे थे।
सुदर्शन गुप्ता
(इंदौर-1 के विधायक और राजमोहल्ला से बड़ा गणपति सड़क में बाधक निर्माणों के समर्थक)
''मुझे तो बुलाया ही नहीं था। महापौरजी को जो अच्छे लगते हैं वे उन्हीं को बुलाते हैं।ÓÓ
अश्विन जोशी
(इंदौर-3 के विधायक। शहरसीमा में कांग्रेस के इकलौते विधायक और भाजपा शासित नगर निगम और मप्र सरकार की व्यवस्था को कोसते रहते हैं।)
''एक दिन पहले पालिका प्लाजा में जो प्रजेंटेशन दिया था उसमें गया था। इस बार नहीं गया। ÓÓ
नरेंद्र सुराना
(नगर निगम के सेवानिवृत्त सिटी इंजीनियर हैं। सीईपीआरडी से जुड़कर पर्यावरण और जल बचाओ अभियान चलाते हैं)
''मैं नहीं गया। सूचना लेट मिली। मेरी मीटिंग भोपाल में दस दिन पहले ही फिक्स हो चुकी थी।ÓÓ
हितेंद्र मेहता, आर्किटेक्ट
(इंदौर के 90 फीसदी प्रोजेक्ट की डिजाइन बनाकर देने वाले और नगर निगम की परियोजनाओं में कंसलटेंट की भूमिका निभाने वाले)
एक दिन पहले आरडीसी में बैठक हो चुकी थी जहां मास्टर प्लान की खामियों और उन्हें दूर करने के मुद्दे पर पहले ही चर्चा हो चुकी थी।
अतुल सेठ
(वरिष्ठ इंजीनियर और निगम की तकनीकी समिति के सदस्य हैं। पलासिया गे्रड सेपरेटर का विरोध किया था और यातायात के बड़े चिंतक)
मुझे बुलाया नहीं था और वैसे भी सामान्य प्रजेंटेशन में मैं नहीं जाता।
चंद्रशेखर डगावंकर
(आईडीए से सेवानिवृत्ति इंजीनियर और शहर की मौजूदा सड़कों के बड़े चिंतक)
हमें बुलाया ही नहीं। बुलाते तो जरूर जाते।
प्रमोद टंडन
(शहर कांग्रेस अध्यक्ष और निगम की व्यवस्थाओं पर अंगुली उठाते रहते हैं।)
यह भी नहीं आए थे....
सांसद : सुमित्रा महाजन
विधायक : सुदर्शन गुप्ता, रमेश मेंदोला, महेंद्र हार्डिया, मालिनी गौड़, जीतू जिराती
महापौर : कृष्णमुरारी मोघे
एमआईसी : मुन्नालाल यादव, चंदू शिंदे, सुरेश कुरवाड़े, सपना चौहान, दिनेश शर्मा,
प्रतिपक्ष : नेता प्रतिपक्ष अभय वर्मा, रवि वर्मा और दिलीप कौशल सहित तकरीबन सभी कांग्रेूसी पार्षद
भाजपा : जिला अध्यक्ष रवि रावलिया और नगर अध्यक्ष शंकर लालवानी
कांग्रेस : जिला अध्यक्ष अंतरसिंह दरबार और शहर अध्यक्ष प्रमोद टंडन
मप्र की औद्योगिक राजधानी कहलाने वाले इंदौर की रफ्तार अव्यवस्थित पार्किंग और बदहाल यातायात के जाम में उलझ चुकी है। साल दर साल बढ़ते हादसों के आंकड़ों के कारण 23 लाख की आबादी में एक भी ऐसा शख्स नहीं होगा जिसकी ट्रेफिक ने कभी टेंशन न बढ़ाई हो। फिर भला वह किसी भी उम्र, लिंग, जाति और धर्म का ही क्यों न हो। सड़क का संकट सबके लिए समान है। यदि कोई सकारात्मक पहल हुई भी तो 'चिंतकÓ अड़ंगे डालकर बैठ गए। फिर 1.5 करोड़ के सर्वे के बाद पलासिया ग्रेड सेपरेटर के खात्मे का मुद्दा हो या किसी जिम्मेदार की जिद में जमींदोज हो चुके जवाहर मार्ग एलिवेटेड ब्रिज का।
सार्वजनिक मंचों पर जनहित की बात करने वाले इंदौर के तथाकथित खैरख्वाह बदहाल यातायात को लेकर असल में कितने गंभीर है, यह शुक्रवार को यातायात के मास्टर प्लान के प्रजेंटेशन के दौरान उनकी गैरमौजूदगी ने बयां कर दिया। हालात यह है कि प्रजेंटेशन के दौरान यातायात की ऐसी चिंता से चिंतित एक बाहरी चिंतक यहां तक बोल गईं कि इस शहर की हालत वाकई चिंताजनक है।
यातायात पुलिस यदि कहती है कि यातायात सुधारना है तो पहले स्वयं सुधारना होगा तो गलत नहीं है। डेढ़ साल में तकरीबन 68 लाख रुपए के खर्च के बाद मास्टर प्लान बनाने वाला नगर निगम आखिर 1782 करोड़ का करेगा क्या? क्या बनेगा? क्या बिगड़ेगा? पैसे आएंगे तो कहां से? जैसे सवालों को जानने और समझने वाले 23 लाख की आबादी वाले इस शहर में 23 भी नहीं मिले। शहर की चिंता से बढ़ा दूसरा ऐसा क्या काम था जिसके कारण 'चिंतकÓ प्रजेंटेशन देखने नहीं आ सके? इस सवाल के जवाब में कुछ जिम्मेदार कहते हैं कि उन्हें बुलाया ही नहीं। कुछ ने कहा जानकारी लेट मिली। गैरहाजिरों में सबसे पहला नाम स्वयं महापौर कृष्णमुरारी मोघे का है जो महिला मंडलों के छोटे से छोटे आयोजनों में जाना नहीं भुलते। गैरहाजिरों में भाजपा-कांग्रेस के वे विधायक-पार्षद भी शामिल है जो सालभर भजन-भंडारे और विवाह सम्मेलनों के साथ आरटीआई में बिल्डिंगों की जानकारी निकालने में अपना वक्त बिताते हैं।
क्यों नहीं पहुंचे प्रजेंटेशन में.....
अन्य व्यस्तताओं के कारण नहीं जा पाया?
कृष्णमुरारी मोघे
(महापौर, नगर निगम के साथ एनएचएआई और वन विभाग तक में आदतन दखल।)
भाजपा के धरने में थी। फ्री हुई तब तक कार्यक्रम खत्म हो चुका था।
मालिनी गौड़
(इंदौर-4 की विधायक और चुनिंदा दुकानदारों के हितों को देखते हुए जवाहरमार्ग एलिवेटेड ब्रिज का विरोध किया।)
मेरी जानकारी में नहीं था। जिस वक्त प्रजेंटेशन हुआ उस वक्त हम धरना दे रहे थे।
सुदर्शन गुप्ता
(इंदौर-1 के विधायक और राजमोहल्ला से बड़ा गणपति सड़क में बाधक निर्माणों के समर्थक)
''मुझे तो बुलाया ही नहीं था। महापौरजी को जो अच्छे लगते हैं वे उन्हीं को बुलाते हैं।ÓÓ
अश्विन जोशी
(इंदौर-3 के विधायक। शहरसीमा में कांग्रेस के इकलौते विधायक और भाजपा शासित नगर निगम और मप्र सरकार की व्यवस्था को कोसते रहते हैं।)
''एक दिन पहले पालिका प्लाजा में जो प्रजेंटेशन दिया था उसमें गया था। इस बार नहीं गया। ÓÓ
नरेंद्र सुराना
(नगर निगम के सेवानिवृत्त सिटी इंजीनियर हैं। सीईपीआरडी से जुड़कर पर्यावरण और जल बचाओ अभियान चलाते हैं)
''मैं नहीं गया। सूचना लेट मिली। मेरी मीटिंग भोपाल में दस दिन पहले ही फिक्स हो चुकी थी।ÓÓ
हितेंद्र मेहता, आर्किटेक्ट
(इंदौर के 90 फीसदी प्रोजेक्ट की डिजाइन बनाकर देने वाले और नगर निगम की परियोजनाओं में कंसलटेंट की भूमिका निभाने वाले)
एक दिन पहले आरडीसी में बैठक हो चुकी थी जहां मास्टर प्लान की खामियों और उन्हें दूर करने के मुद्दे पर पहले ही चर्चा हो चुकी थी।
अतुल सेठ
(वरिष्ठ इंजीनियर और निगम की तकनीकी समिति के सदस्य हैं। पलासिया गे्रड सेपरेटर का विरोध किया था और यातायात के बड़े चिंतक)
मुझे बुलाया नहीं था और वैसे भी सामान्य प्रजेंटेशन में मैं नहीं जाता।
चंद्रशेखर डगावंकर
(आईडीए से सेवानिवृत्ति इंजीनियर और शहर की मौजूदा सड़कों के बड़े चिंतक)
हमें बुलाया ही नहीं। बुलाते तो जरूर जाते।
प्रमोद टंडन
(शहर कांग्रेस अध्यक्ष और निगम की व्यवस्थाओं पर अंगुली उठाते रहते हैं।)
यह भी नहीं आए थे....
सांसद : सुमित्रा महाजन
विधायक : सुदर्शन गुप्ता, रमेश मेंदोला, महेंद्र हार्डिया, मालिनी गौड़, जीतू जिराती
महापौर : कृष्णमुरारी मोघे
एमआईसी : मुन्नालाल यादव, चंदू शिंदे, सुरेश कुरवाड़े, सपना चौहान, दिनेश शर्मा,
प्रतिपक्ष : नेता प्रतिपक्ष अभय वर्मा, रवि वर्मा और दिलीप कौशल सहित तकरीबन सभी कांग्रेूसी पार्षद
भाजपा : जिला अध्यक्ष रवि रावलिया और नगर अध्यक्ष शंकर लालवानी
कांग्रेस : जिला अध्यक्ष अंतरसिंह दरबार और शहर अध्यक्ष प्रमोद टंडन
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