- कार्रवाई के नाम पर नगर निगम ने दे दिया कम्पाउंडिंग का टॉनिक
- बिना मंजूरी तनी इमारत को 1.27 लाख में कर दिया वैध
- 3000 वर्गमीटर से ज्यादा निर्माण, बताया 1700 वर्गमीटर
- बिल्डर के साथ अधिकारियों की भूमिका पर प्रश्नचिह्न
इंदौर. विनोद शर्मा।
कम्पाउंडिंग के नाम पर अवैध इमारतों को वैध करने में कितनी मनमानी हुई इसका अंदाजा सुयश हॉस्पिटल की उस इमारत को देखकर लगाया जा सकता है जो बगैर किसी मंजूरी के 10 साल से सीना ताने खड़ी है। कम्पाउंडिंग करते वक्त नगर निगम यह तक भी नहीं देखा कि बिल्डिंग कितनी जमीन पर बनी है और कितनी जमीन अभी खाली है। वह भी उस स्थिति में जब स्वीकृती के विपरीत निर्माण को नगर निगम अवैध मानकर जमींदोज कर देता है। कुल मिलाकर निगम दोहरी नीति से शायद यह समझाना चाहता है कि बिना मंजूरी निर्माण कर लो चलेगा लेकिन मंजूरी से कम-ज्यादा निर्माण बर्दाश्त नहीं है।
मामला 5/1 रेसीडेंसी एरिया, एबी रोड का है। यहां 1260 वर्गमीटर के प्लॉट पर सुयश हॉस्पिटल खड़ा है जो इंदौर के प्रमुख अस्पतालों में से एक है। परमानंद सिसोदिया और मप्र सरकार के बीच सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन प्रकरण (२४७६८/२००७) में नगर निगम ने अपना पक्ष रखते हुए जो दस्तावेज पेश किए हैं उनके मुताबिक अस्पताल का निर्माण बिना किसी मंजूरी के हुआ। उन्हीं दस्तावेजों में यह भी स्पष्ट लिखा है कि अपील कमेटी 1,27,500 रुपए में बिना किसी मंजूरी के किए गए इस निर्माण की कम्पाउंडिंग कर चुकी है। इसीलिए अब उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती है। कुल मिलाकर 'कम्पाउंंडेडÓ लिखकर फाइल बंद कर दी गई।
कम्पाउंडिंग करके बिल्डर के साथ अपने अधिकारियों के दामन पर लगे कई दागों को भी धो गया। बड़ा सवाल यह है कि एबी रोड जैसे शहर के सबसे व्यस्ततम क्षेत्र और नगर निगम के स्टेडियम जोन से बमुश्किल 400 मीटर की दूरी पर स्थित इस हॉस्पिटल का निर्माण बिना मंजूरी के हुआ और निगम के किसी अधिकारी को भनक तक नहीं लगी। यदि जानकारी थी तो रिमुवल क्यों नहीं किया। कम्पाउंडिंग की नौबत क्यों आई। वह भी उस स्थिति में जब भूमि विकास अधिनियम के तहत कम्पाउंडिंग सिर्फ उसी 10 फीसदी अवैध निर्माण की हो सकती है जो कि स्वीकृति के विपरीत बना हो लेकिन सार्वजनिक उपयोग प्रभावित न करता हो।
न मंजिल, न क्षेत्रफल..
-- अब यह मान भी लें कि नगर निगम ने विधिवत कम्पाउंडिंग की तो सवाल यह उठता है कि कम्पाउंडिंग किए जाने की तारीख का जिक्र दस्तावेजों में क्यों नहीं किया गया।
-- जिस दस्तावेज के एक हिस्से में निगम कहता है निर्माण बिना किसी मंजूरी के हुआ वहीं दूसरे हिस्से में 5 मई 1999 को दाखला मंजूरी (306) का जिक्र भी है।
-- अब यदि निगम कहता है कि कंपाउंडिंग के साथ 1999 में नगर निगम ने बिल्डिंग का दाखला मंजूर किया तो सवाल यह उठता है कि नक्शा मंजूर करके वक्त बिल्डिंग की फ्लोर वार जानकारियां फाइल में क्यों दर्ज नहीं की गई। यदि दर्ज की तो कोर्ट के सामने जानकारी स्पष्ट क्यों नहीं की गई।
-- निगम के दस्तावेजों में प्लॉट का क्षेत्रफल 1260 वर्गमीटर दर्ज है जबकि प्लॉट का क्षेत्रफल मौके पर कुल 3700 वर्गमीटर से ज्यादा दर्ज है। इसमें 882 वर्गमीटर क्षेत्र में बिल्डिंग बनी है। 160 वर्गमीटर में केंटिन, 630 वर्गमीटर एबी रोड की ओर खाली है, 960 मीटर पार्किंग, 452 वर्गमीटर खाली है, 456 वर्गमीटर में बगीचा और 224 वर्गमीटर में स्टोर है।
जबकि मौके पर 2400 वर्गमीटर से ज्यादा जमीन है। इसमें 882 वर्गमीटर पर हॉस्पिटल की बिल्डिंग बनी है जबकि 1600 वर्गमीटर का क्षेत्रफल पार्किंग और पार्क के रूप में आरक्षित है।
-- बिल्डिंग बी+जी+4 बनी है। यदि एक फ्लोर का क्षेत्रफल औसत 800 वर्गमीटर भी मानें तो कुल मिलाकर 4800 वर्गमीटर से ज्यादा निर्माण हुआ। वहीं दस्तावेजों में सिर्फ 1759.62 वर्गमीटर निर्माण ही दर्ज है। झूठ सीधे 3040.38 वर्गमीटर का।
-- बिल्डिंग में पेंटहाउस और केंटिन के साथ पार्किंग का निर्माण भी अवैध है। पेंटहाउस को मंजिल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
- बिना मंजूरी तनी इमारत को 1.27 लाख में कर दिया वैध
- 3000 वर्गमीटर से ज्यादा निर्माण, बताया 1700 वर्गमीटर
- बिल्डर के साथ अधिकारियों की भूमिका पर प्रश्नचिह्न
इंदौर. विनोद शर्मा।
कम्पाउंडिंग के नाम पर अवैध इमारतों को वैध करने में कितनी मनमानी हुई इसका अंदाजा सुयश हॉस्पिटल की उस इमारत को देखकर लगाया जा सकता है जो बगैर किसी मंजूरी के 10 साल से सीना ताने खड़ी है। कम्पाउंडिंग करते वक्त नगर निगम यह तक भी नहीं देखा कि बिल्डिंग कितनी जमीन पर बनी है और कितनी जमीन अभी खाली है। वह भी उस स्थिति में जब स्वीकृती के विपरीत निर्माण को नगर निगम अवैध मानकर जमींदोज कर देता है। कुल मिलाकर निगम दोहरी नीति से शायद यह समझाना चाहता है कि बिना मंजूरी निर्माण कर लो चलेगा लेकिन मंजूरी से कम-ज्यादा निर्माण बर्दाश्त नहीं है।
मामला 5/1 रेसीडेंसी एरिया, एबी रोड का है। यहां 1260 वर्गमीटर के प्लॉट पर सुयश हॉस्पिटल खड़ा है जो इंदौर के प्रमुख अस्पतालों में से एक है। परमानंद सिसोदिया और मप्र सरकार के बीच सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन प्रकरण (२४७६८/२००७) में नगर निगम ने अपना पक्ष रखते हुए जो दस्तावेज पेश किए हैं उनके मुताबिक अस्पताल का निर्माण बिना किसी मंजूरी के हुआ। उन्हीं दस्तावेजों में यह भी स्पष्ट लिखा है कि अपील कमेटी 1,27,500 रुपए में बिना किसी मंजूरी के किए गए इस निर्माण की कम्पाउंडिंग कर चुकी है। इसीलिए अब उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती है। कुल मिलाकर 'कम्पाउंंडेडÓ लिखकर फाइल बंद कर दी गई।
कम्पाउंडिंग करके बिल्डर के साथ अपने अधिकारियों के दामन पर लगे कई दागों को भी धो गया। बड़ा सवाल यह है कि एबी रोड जैसे शहर के सबसे व्यस्ततम क्षेत्र और नगर निगम के स्टेडियम जोन से बमुश्किल 400 मीटर की दूरी पर स्थित इस हॉस्पिटल का निर्माण बिना मंजूरी के हुआ और निगम के किसी अधिकारी को भनक तक नहीं लगी। यदि जानकारी थी तो रिमुवल क्यों नहीं किया। कम्पाउंडिंग की नौबत क्यों आई। वह भी उस स्थिति में जब भूमि विकास अधिनियम के तहत कम्पाउंडिंग सिर्फ उसी 10 फीसदी अवैध निर्माण की हो सकती है जो कि स्वीकृति के विपरीत बना हो लेकिन सार्वजनिक उपयोग प्रभावित न करता हो।
न मंजिल, न क्षेत्रफल..
-- अब यह मान भी लें कि नगर निगम ने विधिवत कम्पाउंडिंग की तो सवाल यह उठता है कि कम्पाउंडिंग किए जाने की तारीख का जिक्र दस्तावेजों में क्यों नहीं किया गया।
-- जिस दस्तावेज के एक हिस्से में निगम कहता है निर्माण बिना किसी मंजूरी के हुआ वहीं दूसरे हिस्से में 5 मई 1999 को दाखला मंजूरी (306) का जिक्र भी है।
-- अब यदि निगम कहता है कि कंपाउंडिंग के साथ 1999 में नगर निगम ने बिल्डिंग का दाखला मंजूर किया तो सवाल यह उठता है कि नक्शा मंजूर करके वक्त बिल्डिंग की फ्लोर वार जानकारियां फाइल में क्यों दर्ज नहीं की गई। यदि दर्ज की तो कोर्ट के सामने जानकारी स्पष्ट क्यों नहीं की गई।
-- निगम के दस्तावेजों में प्लॉट का क्षेत्रफल 1260 वर्गमीटर दर्ज है जबकि प्लॉट का क्षेत्रफल मौके पर कुल 3700 वर्गमीटर से ज्यादा दर्ज है। इसमें 882 वर्गमीटर क्षेत्र में बिल्डिंग बनी है। 160 वर्गमीटर में केंटिन, 630 वर्गमीटर एबी रोड की ओर खाली है, 960 मीटर पार्किंग, 452 वर्गमीटर खाली है, 456 वर्गमीटर में बगीचा और 224 वर्गमीटर में स्टोर है।
जबकि मौके पर 2400 वर्गमीटर से ज्यादा जमीन है। इसमें 882 वर्गमीटर पर हॉस्पिटल की बिल्डिंग बनी है जबकि 1600 वर्गमीटर का क्षेत्रफल पार्किंग और पार्क के रूप में आरक्षित है।
-- बिल्डिंग बी+जी+4 बनी है। यदि एक फ्लोर का क्षेत्रफल औसत 800 वर्गमीटर भी मानें तो कुल मिलाकर 4800 वर्गमीटर से ज्यादा निर्माण हुआ। वहीं दस्तावेजों में सिर्फ 1759.62 वर्गमीटर निर्माण ही दर्ज है। झूठ सीधे 3040.38 वर्गमीटर का।
-- बिल्डिंग में पेंटहाउस और केंटिन के साथ पार्किंग का निर्माण भी अवैध है। पेंटहाउस को मंजिल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
No comments:
Post a Comment