Monday, June 29, 2015

yaswant club me compniyon ke farji sadasya

- 5 दर्जन कंपनियों  के खंगाले जा रहे रिकॉर्ड
- कई कंपनियों के बनाए गए डॉयरेक्टर ही नदारद
इंदौर, दबंग रिपोर्टर । 
नई सदस्यता पर लगे प्रतिबंध के बीच अपने बच्चों को सदस्यता देने का रास्ता खोजने में जूटे यशवंत क्लब प्रबंधन ने ऐसे सदस्यों की सूची बनाना शुरू कर दी है जो अर्से से गायब हैं। या जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सदस्यता प्राप्त की थी। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो ऐसे सदस्यों की संख्या 50 से ज्यादा है।
22 जून को क्लब की विशेष आमसभा होना है। मुख्य मुद्दा है प्रतिबंध के बीच नई सदस्यता के लिए रास्ता निकालना। इसके लिए सदस्यों ने जहां अपने बच्चों को सदस्यता देने का मुद्दा आगे बढ़ाया है वहीं प्रबधन कमेटी ने भी उन सदस्यों के दस्तावेज खंगालना शुरू कर दिए हैं जो अर्से से क्लब नहीं आए। पता चला, ऐसे भी कई सदस्य हैं जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों से सदस्यता ली। किसी ने स्वयं को कंपनी का डायरेक्टर बताकर सदस्यता ली थी तो कोई था डिस्ट्रीब्यूटर या सीएंडएफ लेकिन एजेंसी को कंपनी बताकर स्वयं को डायरेक्टर बताता रहा।
कई कंपनियों के डायरेक्टर लापता तो कई कंपनियां ही...
छानबीन के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ कंपनियां ऐसी है जिनके जिस डायरेक्टर को सदस्यता दी गई  थी वह वर्षों पहले ही इंदौर छोड़ चुका है। कुछ ऐसे हैं जिनकी कंपनियां बंद हुए अरसा हो चुका है। कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने एजेंसियों को ही कंपनियां बताकर स्वयं को डायरेक्टर साबित करके सदस्यता ली थी। कुछ कंपनियां ऐसी भी हैं जिनके एक से ज्यादा डायरेक्टर को सदस्यता दी गई थी। कई की तो क्लब सविंधान के फार्म 16 और 32 में जानकारी ही अब तक उपलब्ध नहीं हुई।
कैसे मिली थी इंट्री...
छानबीन के दौरान फर्जी सदस्यता के जब प्रमाण सामने आ रहे हैं तो सवाल यह भी उठने लगा है कि उस वक्त यह सब चीजें क्यों नहीं देखी गई। इस पर सदस्यों का कहना है कि वजनदार सदस्यों ने अपनी पसंद के लोगों को सिफारिश करके सदस्य बनवाया था। इतना ही नहीं उनके दस्तावेजों की तस्दीक तक नहीं करने दी गई। चार साल पहले भी यह मुद्दा गरमा चुका है।
ऐसे चला मामला
- शुरूआत में कंपनियों से आवेदन आए उनका छानबीन ही नहीं की गई।
- कई कंपनियों के सदस्य डॉयरेक्ट नहीं होकर, डिस्ट्रीब्यूटर थे। इसके बाद भी सदस्य दी गई।
- पुरानी कंपनी में छोडऩे के बाद भी उसी पद से जारी रही क्लब की सदस्यता।
- कंपनियों के नाम पर मिली क्लब में एंट्री में पसंदीदा के लोग ज्यादा।
मैंने सिर्फ आवेदन जमा करने के लिए कहा है...
मैंने महज कंपनियों के नियमनुसार आवेदन करने के लिए कहा है। आवेदन आने के बाद ही सदस्यता पर निर्णय लिया जाएगा। क्लब में ऐसे 50 कंपनियां है, जिसके सदस्य है। फिर भी इस बार क्लब संविधान के आधार पर सख्त है।
सुनील बजाज, क्लब सचिव

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