1.72 करोड़ का बकाया रकम का भुगतान न करने पर संस्था अब बता रही है खरीदार को किराएदार
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
जिस स्कीम-71 में लोगों को 5 हजार रुपए महीने में टू-बीएचके का मकान किराए पर ढूंढे नहीं मिल रहा है वहां महज 50 हजार रुपए/महीने के भाड़े पर महावीर हॉस्पिटल को कुल 21500 वर्गफीट क्षेत्रफल में बनी तीन मंजिला इमारत मिल गई। इमारत पर 2006 से हॉस्पिटल का कब्जा है। 2012 तक किराया भी नहीं चुकाया। किराया भी उस वक्त चुकाया जब सहकारिता विभाग हरकत में आया। बहरहाल, अस्पताल प्रबंधन अपनी मिल्कियत बताते हुए इमारत को सौ प्रतिशत वैध करार दे रहा है जबकि सहकारिता विभाग और नगर निगम के दस्तावेजों में इमारत झूठ की नींव पर खड़ा फरेब का ताबूत है।
इमारत मित्र मंडल सार्वजनिक सहकारी चिकित्सालय के नाम पर दर्ज है। यह मित्र मंडल को-ऑपरेटिव बैंक की सहयोगी संस्था थी। संस्था और अस्पताल प्रबंधन इन दिनों संयुक्त पंजीयक, सहकारिता विभाग के एक फैसले को चुनौती देने के लिए कभी सहकारिता आयुक्त के चक्कर काट रहे हैं तो कभी किसी और के। एक जांच रिपोर्ट के बाद संयुक्त पंजीयक, सहकारिता ने संस्था संचालकों के उस एक निर्णय को अवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया है जिसकी बुनियाद पर संस्था और अस्पताल प्रबंधन के बीच इमारत का विक्रय अनुबंध साइन हुआ था। अनुबंध 2006 में साइन हुआ। अनुबंध जिन शर्तों के साथ हुआ था न उसका पालन संस्था ने किया। न ही अस्पताल प्रबंधन ने। इसीलिए जब सहकारिता विभाग ने अनुबंध को अवैधानिक माना तो संस्था ने सूर बदलते हुए अस्पताल को अपना किराएदार बता दिया।
2.32 रुपए/वर्गफीट का किराया...
पार्किंग सहित कुल क्षेत्रफल 21500 वर्गफीट है। किराया आता है 50 हजार। यानी हर महीने 2.32 रुपए/वर्गफीट का किराया। इतना कम किराया कैसे? इसके जवाब में संस्था के कर्ताधर्ता निर्मल कुमार मंडलोई ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने इमारत उस वक्त किराए पर ली थी जब न उसमें दरवाजे थे, न खिड़की। इसीलिए भाड़ा कम है। इमारत का जीर्णोद्धार अस्पताल प्रबंधन ने किन शर्तों पर कराया और किराएदारी का अनुबंध क्या है? जैसे सवालों का जवाब मंडलोई नहीं दे पाए।
इन सवालों का जवाब भी नहीं है संचालकों के पास...
- आवासीय प्लॉट और आवासीय इमारत में अस्पताल कैसे शुरू हुआ?
(मंडलोई ने कहा कि इमारत शुरू से अस्पताल के लिए बनी थी लेकिन जब उन्हें नगर निगम के दस्तावेजों में इमारत के आवासीय उपयोग के दर्ज होने की जानकारी दी तो वे सकपका गए। बोले जहां तक मेरी जानकारी है इमारत आवासीय नहीं बनी होगी।)
- किराएदारी का अनुबंध क्या है?
- 2006 में किराए की दर क्या थी? 2013 में क्या है..?
- नियमानुसार 10 प्रतिशत सालाना तक किराया बढ़ता है। इमारत का किराया सात वर्षों में कितना बढ़ा..?
- 2006 में यदि इमारत किराए पर दे दी थी तो 2012 तक किराया क्यों नहीं वसूला।
- कौनसे कानून के मुताबिक एकमुश्त किराया वसूला जा सकता है?
- यदि अस्पताल किराएदार है तो 2006 में विक्रय अनुबंध क्यों साइन हुआ?
- अनुबंध के दौरान जो 56 लाख रुपए का एडवांस मिला था उसका समावेश कैसे किया?
71 की जिस आवासीय इमारत में महावीर हॉस्पिटल चल रहा है मित्र मंडल सहकारी संस्था चिकित्सालय के संचालकों ने सदस्यों की सहमति के बिना बालेबाले ही उसका विक्रय अनुबंध साइन कर दिया था।
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
जिस स्कीम-71 में लोगों को 5 हजार रुपए महीने में टू-बीएचके का मकान किराए पर ढूंढे नहीं मिल रहा है वहां महज 50 हजार रुपए/महीने के भाड़े पर महावीर हॉस्पिटल को कुल 21500 वर्गफीट क्षेत्रफल में बनी तीन मंजिला इमारत मिल गई। इमारत पर 2006 से हॉस्पिटल का कब्जा है। 2012 तक किराया भी नहीं चुकाया। किराया भी उस वक्त चुकाया जब सहकारिता विभाग हरकत में आया। बहरहाल, अस्पताल प्रबंधन अपनी मिल्कियत बताते हुए इमारत को सौ प्रतिशत वैध करार दे रहा है जबकि सहकारिता विभाग और नगर निगम के दस्तावेजों में इमारत झूठ की नींव पर खड़ा फरेब का ताबूत है।
इमारत मित्र मंडल सार्वजनिक सहकारी चिकित्सालय के नाम पर दर्ज है। यह मित्र मंडल को-ऑपरेटिव बैंक की सहयोगी संस्था थी। संस्था और अस्पताल प्रबंधन इन दिनों संयुक्त पंजीयक, सहकारिता विभाग के एक फैसले को चुनौती देने के लिए कभी सहकारिता आयुक्त के चक्कर काट रहे हैं तो कभी किसी और के। एक जांच रिपोर्ट के बाद संयुक्त पंजीयक, सहकारिता ने संस्था संचालकों के उस एक निर्णय को अवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया है जिसकी बुनियाद पर संस्था और अस्पताल प्रबंधन के बीच इमारत का विक्रय अनुबंध साइन हुआ था। अनुबंध 2006 में साइन हुआ। अनुबंध जिन शर्तों के साथ हुआ था न उसका पालन संस्था ने किया। न ही अस्पताल प्रबंधन ने। इसीलिए जब सहकारिता विभाग ने अनुबंध को अवैधानिक माना तो संस्था ने सूर बदलते हुए अस्पताल को अपना किराएदार बता दिया।
2.32 रुपए/वर्गफीट का किराया...
पार्किंग सहित कुल क्षेत्रफल 21500 वर्गफीट है। किराया आता है 50 हजार। यानी हर महीने 2.32 रुपए/वर्गफीट का किराया। इतना कम किराया कैसे? इसके जवाब में संस्था के कर्ताधर्ता निर्मल कुमार मंडलोई ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने इमारत उस वक्त किराए पर ली थी जब न उसमें दरवाजे थे, न खिड़की। इसीलिए भाड़ा कम है। इमारत का जीर्णोद्धार अस्पताल प्रबंधन ने किन शर्तों पर कराया और किराएदारी का अनुबंध क्या है? जैसे सवालों का जवाब मंडलोई नहीं दे पाए।
इन सवालों का जवाब भी नहीं है संचालकों के पास...
- आवासीय प्लॉट और आवासीय इमारत में अस्पताल कैसे शुरू हुआ?
(मंडलोई ने कहा कि इमारत शुरू से अस्पताल के लिए बनी थी लेकिन जब उन्हें नगर निगम के दस्तावेजों में इमारत के आवासीय उपयोग के दर्ज होने की जानकारी दी तो वे सकपका गए। बोले जहां तक मेरी जानकारी है इमारत आवासीय नहीं बनी होगी।)
- किराएदारी का अनुबंध क्या है?
- 2006 में किराए की दर क्या थी? 2013 में क्या है..?
- नियमानुसार 10 प्रतिशत सालाना तक किराया बढ़ता है। इमारत का किराया सात वर्षों में कितना बढ़ा..?
- 2006 में यदि इमारत किराए पर दे दी थी तो 2012 तक किराया क्यों नहीं वसूला।
- कौनसे कानून के मुताबिक एकमुश्त किराया वसूला जा सकता है?
- यदि अस्पताल किराएदार है तो 2006 में विक्रय अनुबंध क्यों साइन हुआ?
- अनुबंध के दौरान जो 56 लाख रुपए का एडवांस मिला था उसका समावेश कैसे किया?
71 की जिस आवासीय इमारत में महावीर हॉस्पिटल चल रहा है मित्र मंडल सहकारी संस्था चिकित्सालय के संचालकों ने सदस्यों की सहमति के बिना बालेबाले ही उसका विक्रय अनुबंध साइन कर दिया था।
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