Monday, June 29, 2015

'शक्करÓ से परहेज

बरलाई शक्कर कारखाना : तीन बार बुलाए टेंडर, किसी ने नहीं ली रूची 
- चुकाना है 20 करोड़ की देनदारी
- सहकारिता विभाग ने मानी हार, सरकार के पाले में छोड़ी गेंद
इंदौर. विनोद शर्मा । 
कर्मचारियों को वर्षों से वेतन नहीं मिला...। किसानों को गन्ने की कीमत आज तक नहीं मिली...। बकाया बिल के चक्कर में बिजली कंपनी कनेक्शन काट चुकी है...। अलग-अलग आशान्वित लेनदार आज नहीं तो कल पैसा मिल जाएगा, इसी उम्मीद में बैठे हैं। उधर, मशीन बेचकर सबका बकाया चुकाता करने की कोशिश की तो खरीदार नहीं मिले। यह कड़वी सच्चाई है उस बरलाई शक्कर कारखाने की जो कभी मालवा के लोगों के जीवन में मिठास घोलने के लिए जाना जाता था। उधर, सहकारिता विभाग की तमाम कार्रवाइयों से दूर मप्र पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी 19.23 लाख के बकाया बिल की वसूली के लिए तकरीबन 20 करोड़ के इस कारखाने पर कुर्की का तमगा टांग चुकी है।
बरलाई शक्कर कारखाना 2002 से बंद है। 11 वर्षों में कारखाने की देनदारी 20 करोड़ तक पहुंच गई है। इसी देनदारी को चुकाने के लिए वित्त वर्ष 2012-13 में सहकारिता विभाग ने तीन बार विज्ञप्ती निकाली। 7 मार्च 2013 को तीसरी बार बुलाए गए टेंडर की आखिरी तारीख थी लेकिन बीती दो बार की तरह इस बार भी किसी ने 1250 टीसीडी क्षमता  वाले इस पुराने कारखाने की मशीनों में रुचि नहीं ली। तीन बार की नाकामी से नाराज सहकारिता विभाग ने ठान लिया है कि वह कारखाने के भाग्य का फैसला सरकार के हाथ छोड़ देगी। फिर मशीने बिके या न बिके। देनदारों का बकाया कैसे चुकाया जाएगा? इसका फैसला फिर सरकार को करना है।
बिजली के बिल से लेकर गन्ने की कीमत तक चुकाना है..
20 करोड़ रुपए की देनदारी है कारखाने के माथे पर। इसमें 19.23 लाख रुपए बिजली का बिल है जबकि तकरीबन 60 लाख रुपए उस गन्ने की कीमत है जो कारखाना चालू रहते लोगों ने शक्कर बनाने के लिए कारखाने को बेचे थे। सूत्रों की मानें तो यह रकम 1000 से ज्यादा किसानों की बकाया है। कुछ किसान नाउम्मीद होकर अपना पैसा भूल चुके हैं जबकि कुछ ऐसे भी हैं जो अपने हक के लिए सरकारी दफ्तरों की दहलीज के चक्कर काटते-काटते थक चुके हैं।
गेट पर चस्पी है जब्ती-कुर्की की सूचना
मे. मालवा सहकारी शक्कर कारखाना, बरलाई (शिप्रा) इंदौर की संपत्ति को विद्याुत बिल की राशि 19,२३,३७८ रुपए बकाया होने के कारण भू-राजस्व संहिता १९५९ क्र. २० सन १९५९ की धारा २४ की उपधारा (1) की धारा 14(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग पर लाते हुए अधिग्रहित एवं सील करके कुर्क किया जाता है। एतद द्वारा-सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि उक्त संपत्ति की खरीदी बिक्री अमान्य होगी। यह न्यायालय तहसीलदार (मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी) का आदेश है जो कारखाने के मुख्य द्वार पर चस्पा नजर आता है।
तीन बार निकाले जा चुके हैं टेंडर...
पहली बार :- जून-जुलाई 2012
दूसरी बार :- अक्टूबर-नवंबर 2012
तीसरी बार :- फरवरी-मार्च 2013
-- तीनों बार विज्ञप्ति स्थानीय समाचार पत्रों के साथ अंतरराज्यीय समाचार-पत्रों में भी प्रकाशित की गई लेकिन बात नहीं बनी।
-- तीनों बार टेंडर डालना तो दूर किसी ने फोन करके यह तक नहीं पूछा कि बरलाई शक्कर कारखाना है कहां?
यह रहती है शर्त...
अक्टूबर 2012 में जारी विज्ञप्ति के अनुसार...। मशीन खरीदी में रुचि रखने वाले लोग संयुक्त आयुक्त कार्यालय सहकारिता विभाग कार्यालय, श्रम शिविर जेल रोड पर संपर्क कर सकते हैं। दूसरी बार निकाली गई इस विज्ञप्ति के मुताबिक 22 नवंबर की शाम 5.30 बजे तक इच्छुक कंपनियों को अपने प्रस्ताव देना थे। 15 लाख रुपए की धरोहर राशि के साथ। 24 नवंबर को अधिकृत विक्रय समिति की बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाना था। विक्रय के लिए प्लांट और मशीनरी का आरक्षित मुल्य 15 करोड़ रुपए तय किया गया है। आयुक्त सहकारिता मप्र द्वारा नियुक्त विक्रय समिति निविदा दर को बिना कारण दर्शाए स्वीकृत या निरस्त कर सकती है।
एक नजर में कारखाना
- मालवा सहकारी शक्कर कारखाना
- क्षेत्रफल 99 एकड़
- शुरू हुआ था 1980 में।
- 1.40 लाख वर्गफीट में अलग-अलग निर्माण है। इनमें 18,000 वर्गफीट के 3 शेड, 17250 वर्गफीट का एक शेड, 25425 वर्गफीट का एक शेड, ६५८६, ३७४४ और २२००० वर्गफीट के एक-एक शेड।
- इन शेड्स में कभी अलग-अलग कंपनियां जो कि ग्रामवार गन्ना खरीदती थी उनका गन्ना गोदाम था।
- 60 हजार वर्गफीट में कारखाना और उसकी मशीनरी है।
- 11000 वर्गफीट में दो टैंक बने हैं।
- 2002 से बंद है।

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