Monday, June 29, 2015

खिसकेगी 'ऑटम विंडÓ की जमीन doifode

- किसानों ने कोर्ट में लगाया रजिस्ट्री निरस्तीकरण का मुकदमा
- उधर, कॉलोनाइजर द्वारा बेचे गए प्लॉट खरीदने वाले फंसे
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
कॉलोनी की जमीन चिह्नित करो...। सौदा करते वक्त किसान को पोस्ट डेटेड चेक (पीडीसी) थमाओ...। दी हुई तारीख पर पीडीसी बाउंस हो उससे पहले जमीन अपने नाम करा लो...। बाद में किसान के हाथ न पैसा लगे, न जमीन...। किसान कानूनी लड़ाई लड़े तो उसी के खिलाफ यह कहते हुए नजदीकी थाने में एफआईआर करा दो कि अनुबंध के हिसाब से किसान ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की अनुमति लाकर नहीं दी। कायदे दरकिनार करके 'ऑटम विंडÓ की नींव रखने वाली स्पेसलैंड इन्फ्रा इंटरनेशनल प्रा.लि. के सुरेश डोईफोड़े की इसी रणनीति का खामियाजा किसानों के साथ उन लोगों को भी चुकाना पड़ रहा है जो उनकी कॉलोनियों में प्लॉट खरीदकर बैठे हैं। बहरहाल, हातोद के किसान परिवार  ने रजिस्ट्री निरस्ती के लिए कोर्ट में वाद दायर कर दिया है।
ऑटम विंड के लिए राधाकिशन भिलवाड़ा की सर्वे नं. 628 की और 631/1 की सात बीघा जमीन का सौदा 24 लाख रुपए/बीघा के हिसाब से हुआ था। सौदा 17 अक्टूबर 2011 को हुआ। कुल रकम हुई 1,67, 52,000 रुपए। 4 लाख रुपए नकद दिए। बाकी 1,63,52,000 के पीडीसी दिए जो नवंबर और दिसंबर में क्लीयर होना थे। डोईफोड़े ने राधाकिशन पिता हीराजी के नाम 30,70,666 रुपए का चेक (नं.269516, अपने एचडीएफसी अकाउंट नं. 00368630000477) से दिया जो 22 नवंबर 2011 को क्लीयर होना था। इसी तरह राधाकिशन पिता हीराजी के नाम 30,70,667 रुपए का चेक ( नं.269517, अपने एचडीएफसी अकाउंट नं. 00368630000477)  दिया था जो 28 नवंबर 2011 को क्लीयर होना था। दोनों ही चेक आज दिन तक क्लीयर नहीं हुए। उधर, अधिकारियों से मिलीभगत के चलते जब तक चेक बाउंस होते तब तक डोईफोड़े ने जमीन का नामांतरण अपने नाम करा लिया। परेशान किसान कभी कंपनी के चक्कर काटते रहे तो कभी अधिकारियों के। बहरहाल, परेशान होकर किसानों ने हाईकोर्ट एडवोकेट एस.के.ओझा के माध्यम से पहले तो डोईफोड़े को नोटिस दिया। नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने के बाद उन्होंने 18वें जिला सत्र न्यायालय में मुकदमा दायर कर दिया। वाद में किसानों ने स्पष्ट कर दिया कि चूंकि उन्होंने जमीन की कीमत पेटे दिए गए पीडीसी बाउंस हो चुके हैं और कंपनी पैसा देने को तैयार भी नहीं है लिहाजा उक्त सौदे को अमान्य करार देते हुए नामांतरण निरस्त किया जाए। इस संबंध में एडवोकेट ओझा ने बताया कि वाद रजिस्ट्री निरस्तीकरण का है।
अंग्रेजों की तरह लूटने आया है इंदौर....
जैसे अंग्रेज लंदन से भारत लूटने आए थे। इसी तरह डोईफोड़े नागपुर से इंदौर लोगों को लूटने आया है। सौदा हमसे हुआ लेकिन जाहिर सूचना (14 अगस्त, अग्रिबाण) में खरीदी हुई जमीन किसी ओर की बता दी। जमीन मालिक ने आपत्ति ली। इसी आपत्ति का हवाला देकर हमारा भुगतान रोक दिया। कुल 73 लाख के चेक बाउंस हुए हैं। नोटिस दिया। जवाब के बदले हमारे खिलाफ ही थाने में शिकायत दर्ज करा दी। रजिस्ट्री निरस्तीकरण के लिए कोर्ट में केस लगा दिया है।
राधाकिशन पिता हीराजी
डोईफोड़े के विश्वास में डूबा हमारा सौदा
स्पैसलैंड को जमीन बेचने के बाद तयशुदा तारीख पर पैसा मिल जाएगा इसी आस में हमने हातोद में ही बंसी चौधरी से जमीन खरीदी। बयाना पेटे 37 लाख रुपए दिए लेकिन तय तारीख पर डोईफोड़े से पैसा न मिलने के कारण अब अगला भुगतान नहीं कर सके और चौधरी ने दो दिन बाद ही सौदा किसी ओर से कर दिया। बयाना पेटे दिए जो पैसे डूबे वह भी हमें जमीन बेचने के बाद डोईफोड़े से ही मिले थे।
मदनलाल भिलवाड़ा, राधाकिशन के बेटे
पटेल के प्रतिनिधि भी हैं प्रॉपर्टी के फेर में
22 लाख का मेरा चेक बाउंस हुआ था। सुनील जोशी 'जो स्वयं को विधायक सत्यनारायण पटेल के प्रतिनिध बताता हैÓ, ने मुझसे सौदा करके जमीन डोईफोड़े को दी। चेक बाउंस हुए। कई चक्कर के बाद आधा पैसा जोशी ने दिया आधा डोईफोड़े ने।
गोविंद भिलवाड़ा, राधाकिशन के भाई

राधाकिशन पिता हीराजी
रणमलबिल्लौद में भी बाउंस हुए चेक...
सर्वे नं. 94, 95, 96 का सौदा 32.11 लाख रुपए/बीघा में सौदा हुआ था। चेक से भुगतान किया। 10.40 करोड़ में हुआ कुल सौदा। चतरसिंह जाट और शांताबाई जाट के नाम से जारी हुए 1.16 करोड़ के चेक बाउंस हो चुके हैं। चेक मार्च के पहले सप्ताह में बाउंस हुए। अभी 3.50 करोड़ के चेक और जो बैंक में लगाए जाना है अभी उनकी तारीख नहीं आई। जाट परिवार डेढ़ महीने से बाउंस हुई रकम लेने के लिए स्पैसलैंड के चक्कर काट रहा है।
डोईफोड़े ने लगाया आरोप : किसान ने दिया धोखा
जमीन निरस्तीकरण के वाद के संबंध में डोईफोड़े ने बताया अनुबंध में लिखा था कि जमीन की टीएंडसीपी किसान कराकर देगा। किसान ने टीएंडसीपी नहीं कराई। इसीलिए हमने चेक का भुगतान रोक दिया। इस संबंध में हातोद पुलिस को किसान की लिखित शिकायत भी की है।
रातोरात हुई रजिस्ट्री
राधाकिशन के बेटे कैलाश भिलवाड़ा ने बताया रजिस्ट्री रात में हुई। एक दिन डोईफोड़े के बिचौलिए घर आए थे उन्होंने दस्तावेज दिए और कहा आप फटाफट साइन कर दो। हमें दस्तावेज पढऩे का मौका तक नहीं दिया। जहां तक मुझे जानकारी है दस्तावेजों में टीएंडसीपी कराने जैसी बात का जिक्र नहीं है। उधर, एडवोकेट शुक्ला ने बताया सेल डीड में अनुबंध नहीं होता। सेल डीड होते ही अधिकार हस्तांतरित हो जाते हैं। लिहाजा डोईफोड़े यदि कहता है कि टीएंडसीपी कराने की बात अनुबंध में थी तो यह गड़बड़ है। 

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