पांच भवनों को बचाने के लिए संकरा कर डाला 7 करोड़ का ब्रिज
-नाले पर स्थित मेडिकल दुकान के लिए ब्रिज को मोड़ दिया
-एक टॉउनशिप सहित चार भवनों को भी बख्शा
इंदौर, दबंग रिपोर्टर।
विकास के नाम पर किसी भी स्थिति में समझौता नहीं करने का दावा करने वाले नगर निगम ने 7 करोड़ की लागत के माणिकबाग ब्रिज के मध्य स्थित एक मेडिकल दुकान को बचाने के लिए ब्रिज को ही संकरा कर दिया। निगम के कर्ताधर्ता अधिकारियों ने न सिर्फ इस मेडिकल दुकान पर विशेष मेहरबानी की बल्कि इसकी सीध में आगे एक टॉउनशिप सहित चार भवनों को भी बख्शते हुए ब्रिज को आगे और भी ज्यादा संकरा कर दिया। चौंकाने वाली बात यह कि ब्रिज का निर्माण अंतिम दौर में है तथा अब सालों तक इस पर से गुजरने वाले लोगों को ऐसी विसंगतिपूर्ण निर्माण के रास्ते गुजरना होगा।
कुछ साल पर जब इस मार्ग के पहले हिस्से का ब्रिज का निर्माण शुरू हुआ जो लंबे समय तक चला। हालांकि ब्रिज बनने के बाद लोगों को राहत मिली। इस ब्रिज का एक छोर कलेक्टोरेट (हेमू कालानी चौराहे के पास है तो दूसरा खातीवाला टैंक के पास) है। इस मार्ग को आगे व्यवस्थित करने के लिए माणिकबाग ब्रिज (नाले के ऊपर) से एक और ब्रिज का प्रस्ताव बना। यह ब्रिज सिक्सलेन के लिए प्रस्तावित है और फिर तमाम प्रक्रियाओं के बाद इसे मंजूरी मिली। इसकी एक भुजा केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क के आॅफिस के सामने से शुरू ही गई जबकि दूसरी चोइथराम अस्पताल के पास से।
महत्वाकांक्षी इस ब्रिज बनाने के पीछे परिकल्पना यह है कि हेमू कालानी चौराहे के पास से शुरू हुआ यह पूरा मार्ग चोइथराम अस्पताल के आगे चौराहे पर खत्म होने के लिए इसके सहित दोनों ब्रिजों से ट्रैफिक निर्बाध गति से चले। यही कारण है कि यह नया ब्रिज सिक्स लेन के आधार पर शुरू किया गया। पहले इसका टेंडर केडी कंस्ट्रक्शन के नाम से हुआ लेकिन 2010 में यह कंपनी ब्लैक लिस्टेट घोषित होने के बाद ठेका सोम प्रोजेक्ट को दिया गया। अक्टूबर 2012 में ब्रिज का निर्माण शुरू हुआ और इसे दो साल में यानी अक्टूबर 2014 में पूरा करना है।
खास बात यह कि जब भी ब्रिज बनने की शुरुआत होती है तो उसका सही स्वरूप तब पता चलता है जब स्ट्रक्चर के साथ करीब 70 फीसदी से ज्यादा काम हो जाए। इस ब्रिज के साथ भी ऐसी ही स्थिति हुई लेकिन जब इसका स्वरूप सामने आया तो यह ब्रिज के नाम ही मजाक ही बनता दिख रहा है। दरअसल इस ब्रिज की चौड़ाई 30 मीटर है जबकि लंबाई 40 मीटर। इसके साथ ही इसके दोनों ओर 100-100 मीटर जमीन दी गई है जिससे ब्रिज की चौड़ाई काफी है लेकिन इसके मध्य आते ही निगम की सारी कारगुजारियां सामने आ जाती है।
यह है मामला
दरअसल सालों पुराने माणिकबाग नाले पर इस नए ब्रिज का मध्य हिस्सा बना है। यहां कई दुकानें व अन्य निर्माण थे जो तो हटा दिए गए लेकिन पांच दुकानों वाले एक भवन को हटाने में निगम को पसीने आ गए। इस भवन में सुरभि मेडिकोज की दो दुकानें हैं जबकि पास की अन्य दुकानें इसी मेडिकल के संचालक ने किराए से दी थी। चूंकि पूरा भवन ही बीचोबीच है इसलिए निगम ने इसे हटाने के लिए कोशिश की। इसमें पता चला कि उक्त भवन की रजिस्ट्री है। इस पर मशक्कत के बाद निगम ने इसमें से दो दुकानें तोड़ी जबकि तीन को वहीं (ब्रिज के मध्य) रहने दिया। इनमें दो दुकानों में अभी भी सुरभि मेडिकोज जबकि एक दुकान (किराए से) चोइथराम अस्पताल कर्मचारी साख संस्था को किराए से दी है।
इन तीन दुकानों के लिए ब्रिज को इसके पास से संकरा कर दिया। यानी इन दुकानों के आगे आने-जाने के लिए तीन फीट की जगह और छोड़कर ब्रिज आगे बढ़ा दिया गया। यानी अब ब्रिज सीधा नहीं होकर इन दुकानों को बचाते हुए काफी संकरा हो गया है। खास बात यह कि ब्रिज की ऊंचाई के हिसाब से उक्त दुकानें काफी नीचे चली गई है।
बहरहाल, निगम की मेहरबानी यह खत्म नहीं होती। इन दुकानों की लाइन में ही 500 मीटर आगे ब्लू मून पैलेस, राज टॉउनशिप, राज कॉम्प्लेक्स व एक अन्य भवन हैं। इन भवनों में 200 से ज्यादा दुकानें व फ्लैट हैं। इन सभी को न सिर्फ बचाया गया बल्कि इनके आगे पार्किंग को जगह देते हुए ब्रिज मार्ग को और भी संकरा कर दिया। मामले में निगम अधिकारियों का एक ही तर्क रहा कि वे हट नहीं रहे या उनके पास रजिस्ट्रियां हैं, ऐसे बयान देकर ब्रिज का 80 फीसदी से ज्यादा काम पूरा कर लिया गया। अब ब्रिज निर्माण की अवधि अक्टूबर 2014 को खत्म होने को है लेकिन संकेत हैं कि दिसंबर तक यह पूरा हो जाएगा। विडम्बना यह कि महत्वाकांक्षी यह प्रोजेक्ट भी ऐसी करतूतों के कारण न सिर्फ संकरा हुआ बल्कि लंबे समय तक लोग ऐसी विसंगतिपूर्ण बने ब्रिज से गुजरेंगे।
हम कहीं गलत नहीं
हमारी यहां 20 साल से ज्यादा समय से दुकानें हैं। पूरी रोजीरोजी इस मेडिकल की दुकान पर निर्भर है। भवन का निर्माण वैध है तथा इसकी रजिस्ट्री है। ब्रिज कोई संकरा नहीं हुआ बल्कि सिर्फ 60 सेमी का फर्क पड़ा और ब्रिज हल्का सा मोड़ा गया। हम कहीं भी गलत नहीं है।
रमेश नागवानी
संचालक (सुरभि मेडिकोज)
-नाले पर स्थित मेडिकल दुकान के लिए ब्रिज को मोड़ दिया
-एक टॉउनशिप सहित चार भवनों को भी बख्शा
इंदौर, दबंग रिपोर्टर।
विकास के नाम पर किसी भी स्थिति में समझौता नहीं करने का दावा करने वाले नगर निगम ने 7 करोड़ की लागत के माणिकबाग ब्रिज के मध्य स्थित एक मेडिकल दुकान को बचाने के लिए ब्रिज को ही संकरा कर दिया। निगम के कर्ताधर्ता अधिकारियों ने न सिर्फ इस मेडिकल दुकान पर विशेष मेहरबानी की बल्कि इसकी सीध में आगे एक टॉउनशिप सहित चार भवनों को भी बख्शते हुए ब्रिज को आगे और भी ज्यादा संकरा कर दिया। चौंकाने वाली बात यह कि ब्रिज का निर्माण अंतिम दौर में है तथा अब सालों तक इस पर से गुजरने वाले लोगों को ऐसी विसंगतिपूर्ण निर्माण के रास्ते गुजरना होगा।
कुछ साल पर जब इस मार्ग के पहले हिस्से का ब्रिज का निर्माण शुरू हुआ जो लंबे समय तक चला। हालांकि ब्रिज बनने के बाद लोगों को राहत मिली। इस ब्रिज का एक छोर कलेक्टोरेट (हेमू कालानी चौराहे के पास है तो दूसरा खातीवाला टैंक के पास) है। इस मार्ग को आगे व्यवस्थित करने के लिए माणिकबाग ब्रिज (नाले के ऊपर) से एक और ब्रिज का प्रस्ताव बना। यह ब्रिज सिक्सलेन के लिए प्रस्तावित है और फिर तमाम प्रक्रियाओं के बाद इसे मंजूरी मिली। इसकी एक भुजा केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क के आॅफिस के सामने से शुरू ही गई जबकि दूसरी चोइथराम अस्पताल के पास से।
महत्वाकांक्षी इस ब्रिज बनाने के पीछे परिकल्पना यह है कि हेमू कालानी चौराहे के पास से शुरू हुआ यह पूरा मार्ग चोइथराम अस्पताल के आगे चौराहे पर खत्म होने के लिए इसके सहित दोनों ब्रिजों से ट्रैफिक निर्बाध गति से चले। यही कारण है कि यह नया ब्रिज सिक्स लेन के आधार पर शुरू किया गया। पहले इसका टेंडर केडी कंस्ट्रक्शन के नाम से हुआ लेकिन 2010 में यह कंपनी ब्लैक लिस्टेट घोषित होने के बाद ठेका सोम प्रोजेक्ट को दिया गया। अक्टूबर 2012 में ब्रिज का निर्माण शुरू हुआ और इसे दो साल में यानी अक्टूबर 2014 में पूरा करना है।
खास बात यह कि जब भी ब्रिज बनने की शुरुआत होती है तो उसका सही स्वरूप तब पता चलता है जब स्ट्रक्चर के साथ करीब 70 फीसदी से ज्यादा काम हो जाए। इस ब्रिज के साथ भी ऐसी ही स्थिति हुई लेकिन जब इसका स्वरूप सामने आया तो यह ब्रिज के नाम ही मजाक ही बनता दिख रहा है। दरअसल इस ब्रिज की चौड़ाई 30 मीटर है जबकि लंबाई 40 मीटर। इसके साथ ही इसके दोनों ओर 100-100 मीटर जमीन दी गई है जिससे ब्रिज की चौड़ाई काफी है लेकिन इसके मध्य आते ही निगम की सारी कारगुजारियां सामने आ जाती है।
यह है मामला
दरअसल सालों पुराने माणिकबाग नाले पर इस नए ब्रिज का मध्य हिस्सा बना है। यहां कई दुकानें व अन्य निर्माण थे जो तो हटा दिए गए लेकिन पांच दुकानों वाले एक भवन को हटाने में निगम को पसीने आ गए। इस भवन में सुरभि मेडिकोज की दो दुकानें हैं जबकि पास की अन्य दुकानें इसी मेडिकल के संचालक ने किराए से दी थी। चूंकि पूरा भवन ही बीचोबीच है इसलिए निगम ने इसे हटाने के लिए कोशिश की। इसमें पता चला कि उक्त भवन की रजिस्ट्री है। इस पर मशक्कत के बाद निगम ने इसमें से दो दुकानें तोड़ी जबकि तीन को वहीं (ब्रिज के मध्य) रहने दिया। इनमें दो दुकानों में अभी भी सुरभि मेडिकोज जबकि एक दुकान (किराए से) चोइथराम अस्पताल कर्मचारी साख संस्था को किराए से दी है।
इन तीन दुकानों के लिए ब्रिज को इसके पास से संकरा कर दिया। यानी इन दुकानों के आगे आने-जाने के लिए तीन फीट की जगह और छोड़कर ब्रिज आगे बढ़ा दिया गया। यानी अब ब्रिज सीधा नहीं होकर इन दुकानों को बचाते हुए काफी संकरा हो गया है। खास बात यह कि ब्रिज की ऊंचाई के हिसाब से उक्त दुकानें काफी नीचे चली गई है।
बहरहाल, निगम की मेहरबानी यह खत्म नहीं होती। इन दुकानों की लाइन में ही 500 मीटर आगे ब्लू मून पैलेस, राज टॉउनशिप, राज कॉम्प्लेक्स व एक अन्य भवन हैं। इन भवनों में 200 से ज्यादा दुकानें व फ्लैट हैं। इन सभी को न सिर्फ बचाया गया बल्कि इनके आगे पार्किंग को जगह देते हुए ब्रिज मार्ग को और भी संकरा कर दिया। मामले में निगम अधिकारियों का एक ही तर्क रहा कि वे हट नहीं रहे या उनके पास रजिस्ट्रियां हैं, ऐसे बयान देकर ब्रिज का 80 फीसदी से ज्यादा काम पूरा कर लिया गया। अब ब्रिज निर्माण की अवधि अक्टूबर 2014 को खत्म होने को है लेकिन संकेत हैं कि दिसंबर तक यह पूरा हो जाएगा। विडम्बना यह कि महत्वाकांक्षी यह प्रोजेक्ट भी ऐसी करतूतों के कारण न सिर्फ संकरा हुआ बल्कि लंबे समय तक लोग ऐसी विसंगतिपूर्ण बने ब्रिज से गुजरेंगे।
हम कहीं गलत नहीं
हमारी यहां 20 साल से ज्यादा समय से दुकानें हैं। पूरी रोजीरोजी इस मेडिकल की दुकान पर निर्भर है। भवन का निर्माण वैध है तथा इसकी रजिस्ट्री है। ब्रिज कोई संकरा नहीं हुआ बल्कि सिर्फ 60 सेमी का फर्क पड़ा और ब्रिज हल्का सा मोड़ा गया। हम कहीं भी गलत नहीं है।
रमेश नागवानी
संचालक (सुरभि मेडिकोज)
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