Monday, June 29, 2015

खाली बताकर जीमी जमीन

2000 रुपए/वर्गफीट की जमीन का सौदा 551 रुपए रुपए/वर्गफीट की दर से 
इंदौर. दबंग रिपोर्टर । 
सात दशक पुराने प्रेमकुमारी देवी पारमार्थिक हॉस्पिटल और दानशीला कंचनबाई देवी प्रसूति गृह की जमीन बेचने की मंजूरी सरकार की आंखों में धूल झोंकते हुए ली गई। सर सेठ स्वरूपचंद हुकुमचंद दिगम्बर जैन पारमार्थिक न्यास के कर्ताधर्ताओं ने पहले एक-एक करके अस्पताल की इमारतें तोड़ी, बाद में जमीन खाली बताकर मंजूरी के लिए आवेदन कर दिया। जमीन के एक हिस्से में  अब भी अस्पताल की एक इमारत और दूसरे हिस्से में कुछ लोगों के मकान है जो वहां तकरीबन 70-80 साल से वहां रह रहे हैं। उधर, गुगल अर्थ की सेटेलाइट इमेज साबित करती है कि जमीन को खाली बताकर बेचने का आवेदन 2011 में हुआ जबकि फरवरी 2012 तक जमीन पर अस्पताल की पांच इमारते खड़ी थी। बहरहाल, झूठ की बुनियाद पर ली गई मंजूरी और मंजूरी की बिनाह पर किए गए सौदे को रद्द करने की मांग भी क्षेत्रवासियों द्वारा की जा रही है।
न्यायालय पंजीयक लोक न्यास, इंदौर ने 30 अपै्रल 2011 को मप्र लोक न्याय अधिनियम की धारा-14 के तहत एक आदेश जारी करते हुए जमीन बेचने की मंजूरी दी थी।  आदेश में लिखा है यश कासलीवाल और धीरेंद्र कासलीवाल ने 9/1/1 वैद्य ख्यालीराम मार्ग स्थित प्रिंस यशवंतराव आयुर्वेदिक जैन औषधालय और प्रेमकुमारी देवी अस्पताल से लगी रिक्त 70531 वर्गफीट जमीन पर अन्य का सहयोग लेकर रेशो में निर्माण और उसे बेचने की मंजूरी चाही थी। न्यायालय के सामने धीरेंद्र कासलीवाल ने 24 अपै्रल 2011 को  अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि संस्था 70 साल से प्रेमकुमारी देवी अस्पताल चला रही है। अस्पताल का नवीनीकरण जरूरी है। नई मशीने लगाना है। आईसीयू बनाना है। न्यास द्वारा इसी परिसर में श्री यशवंतराव आयुर्वेदिक जैन औषधालय का संचालन भी किया जा रहा है। दोनों अस्पतालों के संचालन में काफी पैसा खर्च होता है। न्यास के पास दोनों अस्पतालों से लगी 70,531 जमीन है जो किसी उपयोग में नहीं आ रही है। जमीन पर अतिक्रमण की आशंका है। संस्था स्वयं के खर्च पर अस्पताल का विकास करने की स्थिति में नहीं है। इसीलिए 25 नवंबर 2010 को सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जमीन पर जमीन पर रेशों में निर्माण हो और निर्मित हिस्सा बेच दिया जाए। आवेदन के साथ न्यास के निर्णय के साथ जमीन का ले-आउट भी दिया गया। न्यास द्वारा प्राप्त राशि का उपयोग अस्पताल के संचालन में किया जाएगा। अनुमति प्राप्त करने की कानूनी कार्रवाई के लिए न्यास अध्यक्ष के रूप में यशकुमार सिंह कासलीवाल को अधिकृत किया गया।
आवेदन के बाद आपत्तियां बुलाई गई लेकिन कोई आपत्तिकर्ता सामने नहीं आया। इसी आधार पर न्यायालय लोक न्यास ने जमीन पर रेशों में निर्माण और किए गए निर्माण को बेचने की मंजूरी दी। यह भी स्पष्ट कर दिया कि शर्तों का उल्लंघन होने पर अनुमति स्वत: ही निरस्त मानी जाएगी।
जमीन खाली थी नहीं, कर रहे थे...
उधर, बात मैदानी हकीकत की करें तो 2010 तक प्रेमकुमारी-कंचनबाई प्रसूति गृह अच्छाभला चल रहा था। 2010 के बाद एक-एक करके अस्पताल की यूनिट बंद कर दी। जुलाई 2011 से पहले पेड़ों की कटाई शुरू हुई। बाद में एक-एक करके निर्माण तोडऩे का सिलसिला। जनविरोध के बाद जमीन पर काम रुू गया था जो फरवरी-मार्च 2012 से दोबारा शुरू हुआ। फरवरी 2012 तक पांच बड़े निर्माण मौके पर थे जिन्हें तोड़कर आज की स्थिति में एक ही निर्माण बचाया गया है।
किस संपत्ति का कितना मुल्य
70,531 वर्गफीट 3,93,30,000
निर्मित क्षेत्र 1800(5500 रुपए/वर्गमीटर की दर) 79,20,000
वृक्ष की कीमत 2,00,000
कुल 4,74, 50,000
4 करोड़ में कर दिया 14 करोड़ की जमीन का सौदा
संपत्ति का मुल्यांकन 551 रुपए/वर्गफीट के आधार पर किया गया जबकि बियाबानी रोड नं. 1-2, वैद्य ख्यालीराम मार्ग पर आवासीय प्लॉट की गाइडलाइन कीमत 2500/वर्गफीट है जबकि व्यावसायिक 3500 रुपए/वर्गफीट है। बात यदि बियाबानी आवासीय गली या वैद्य ख्यालीमार्ग से अंदर स्थित जमीनों की करें तो भी वहां जमीन की कीमत 1500 से 2000 रुपए/वर्गफीट है। यदि जमीन का औसत मुल्यांकन 2000 रुपए/वर्गफीट की दर से भी किया जाता तो जमीन की कीमत 14,10,62,000 होती जबकि मिले हैं 4,74, 50,000 रुपए वह भी 1800 वर्गफीट के निर्मित क्षेत्रफल और दो दर्जन से ज्याया पुराने पेड़ों की कीमत जोड़कर। अंतर 10 करोड़ रुपए का। इसीतरह निर्मित क्षेत्रफल का मुल्यांकन 550 रुपए/वर्गफीट की दर से हुआ जबकि कवेलू छत वाले पुराने स्ट्रक्चर की गाइडलाइन ही 2500 से 2800 रुपए/वर्गफीट है। जिला पंजीयक कार्यालय द्वारा ट्रस्ट को दी गई जमीन के मुल्यांकन में अधिकारियों की मेहरबानी की जांच होना चाहिए 

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