- अभिनव कला समाज का हॉल चार साल से खाली नहीं करा पाया निगम
२००९ में गैरकानूनी तरीके से दे दिया था हॉल किराए पर
- 2010 से जारी है पत्राचार
इंदौर. विनोद शर्मा ।
अभिनव कला समाज से किराए पर लिया जो हॉल भाजपा नगर अध्यक्ष शंकर लालवानी की संस्था लोक संस्कृति मंच को किराए पर दिया था नगर निगम उसे चार साल में खाली नहीं करा पाया। महापौर परिषद हॉल खाली कराने का निर्णय दे चुकी है जबकि 2010 से अब तक कार्रवाई के नाम पर जिम्मेदार पत्र लिखकर सिर्फ टाइम पास कर रहे हैं। उधर, अभिनव कला समाज के संचालक नगर निगम के रवैये से जबरदस्त नाराज हैं। वे सीधे-सीधे निगम पर अमानत में खयानत का आरोप मढ़ते हुए कहते हैं कि निगम लोक संस्कृति मंच से हॉल खाली कराना ही नहीं चाहता है।
गांधीहॉल परिसर में अभिनव कला समाज की बिल्डिंग है। इसके तलघर में तकरीबन 3000 वर्गफीट का एक हॉल है जिसे महापौर रहते डॉ.उमाशशि शर्मा और उनके एमआईसी सदस्यों ने 27 अक्टूबर 2009 को प्रस्ताव (क्र. 2390) पास करके लोक संस्कृति मंच को किराए पर दे दिया था। इस पर अभिनव कला समाज ने आपत्ति ली। आपत्ति और शिकवा-शिकायत के बाद 7 मई 2010 को महापौर कृष्णमुरारी मोघे व उनके एमआईसी सदस्यों ने 2009 का प्रस्ताव रद्द कर दिया। इसके लिए निगमायुक्त द्वारा 24 अपै्रल 2010 और 28 अपै्रल 2010 को लिखे पत्र (क्र. 191 और 229) हवाला देते हुए कहा गया कि हॉल खाली कराकर उपयोग निगम हित में सुनिश्चित करें। इसके बाद से आज दिन तक नगर निगम कार्रवाई के नाम पर सिर्फ और सिर्फ पत्र ही लिख रहा है। हॉल खाली नहीं करा पाया।
पद का कमाल, आचार सहिता में किया धमाल...
नगर निगम में सभापति रहते शंकर लालवानी ने जिस वक्त हॉल के लिए आवेदन किया था उस वक्त तक नगरीय निकाय चुनाव-2009 की तैयारियां शुरू हो चुकी थी। मतदन 11 दिसंबर 2009 को हुआ था। चुनाव से 45 दिन पहले आचार संहित लग जाती है। हॉल किराए पर देने का निर्णय 27 अक्टूबर 2009 को लिया गया। यही वह दिन था जिस दिन आचार संहिता लगी।
लाइब्रेरी के लिए लिया था लालच के लिए दे दिया..
प्रशासक के संकल्प क्रं. ९६ के तहत नगर निगम ने ६ मई 197८ को लाइब्रेरी के लिए इस हॉल को किराए पर लिया था। किराया तय हुआ था 2270 रुपए। 1990-92 तक लाइब्रेरी चली भी। बाद में नगर निगम का जोनल कार्यालय बना दिया। पालिका प्लाजा बनने के बाद जोनल कार्यालय वहां शिफ्ट हो गया। बाद में हॉल में हॉल को निगम स्टोर रूम की तरह इस्तेमाल कर रहा था। 2009 में हॉल लोक संस्कृति मंच को दे दिया जो निजी संस्था है।
असंवैधानिक है निगम का निर्णय...
अभिनव कला समाज के प्रधानमंत्री बसंत कुमार पांड्या कई बार निगम को पत्र लिख चुके हैं। हर बार लिखा संस्था सार्वजनिक है जिसका मकसद कला साहित्य संस्कृति का विस्तार है इसीलिए अनुबंध किया। अनुबंध के मुताबिक हॉल का उपयोग लाइब्रेरी के रूप में होना था। अनुबंध का उल्लंघन करते हुए निगम ने पहले जोनल कार्यालय शुरू किया, बाद में बालेबाले हॉल लोक संस्कृति मंच को दे दिया। संस्था ने राजा मानसिंह तोमर संगीता एवं कला विश्वविद्यालय, ग्वालियर से संबद्धता प्राप्त संगीता कॉलेज की स्थापना की है। शर्तों के उल्लंघन के बाद संस्था-निगम के बीच का अनुबंध स्वत: निरस्त हो चुका है। 2009 का निर्णय असंवैधानिक है। हॉल संस्था का है। हमें कॉलेज के लिए हॉल की जरूरत है। इसीलिए निगम लोक संस्कृति मंच से हॉल खाली कराकर दे।
कब-कब लिखे पत्र...
तारीख पत्र क्र.
8 मई 2010 380
6 अगस्त 2011 ७८७
27 अगस्त 2011 ८३९
26 सितंबर 2011 1145
24 दिसंबर 2011 1630
22 फरवरी 2012 1893
20 सितंबर 2012 ८७९-८०
18 दिसंबर 2012 १७८९
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