Tuesday, June 30, 2015

मतदान खत्म, कयासी किस्से शुरू

जरूरी नहीं ज्यादा वोटिंग भाजपा के लिए
देपालपुर, सांवेर और इंदौर-3 में हर बार टूटा यही भ्रम 
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
विधानसभा चुनाव 2013 संपन्न हो चुके हैं। उम्मीद्वारों का भाग स्ट्रांग रूम में बंद ईवीएम मशीन में कैद है। किस विधानसभा से कौन जीतेगा? और सरकार किसकी बनेगी? जैसे सवालों को लेकर न सिर्फ उम्मीद्वार बल्कि शहर की आवाम भी कयासी किस्से गढ़ रही है। चुनाव में हुए रिकार्डतोड़ मतदान को कांग्रेस समर्थक परिवर्तन की लहर बता रहे हैं वहीं भाजपा समर्थक देपालपुर-सांवेर जैसी सीटों पर अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं।
चुनाव संपन्न होते हुए भाजपा-कांग्रेस सहित तमाम दल विधानसभावार हुए मतदान के प्रतिशत का आंकड़ा लेकर समीक्षा करने बैठ गए हैं। हालांकि बीते चुनावों के परिणामों की समीक्षा करें तो पता चलता है कि वोटिंग कम हो या ज्यादा इससे पार्टी विशेष को फायदा मिलता है यह कोरा कयास है। इसका बड़ा उदाहरण इंदौर का देपालपुर है जहां 2003 में 73.94 प्रतिशत वोटिंग हुई। भाजपा के मनोज पटेल ने कांग्रेस के सत्यनारायण पटेल को 6927 वोटों से मात दी थी 2008 में 79.93 प्रतिशत मतदान के बावजूद सत्तू ने मनोज को 9491 मतों से मात देकर हिसाब चुकता कर दिया। सांवेर की कहानी भी कुछ यही कहती है। यहां 2003 में 70.01 मतदान हुआ और राजेंद्र मालवीय को 19637 वोटों से मात देकर बाजी मारी प्रकाश सोनकर ने। 2008 में हुए चुनाव में 73.66 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया लेकिन इस बार प्रकाश सोनकर की पत्नी निशा को शिकस्त दी कांग्रेस के तुलसीराम सिलावट ने।
इधर, इंदौर-3 में 2003 के चुनाव में शहर में सबसे ज्यादा वोट 71.80 प्रतिशत हुआ। बाजी मारी कांग्रेस के अश्विन जोशी ने। उन्होंने भाजपा के राजेंद्र शुक्ला को 4692 वोटों से हराया। 2008 के चुनाव में 65.95 प्रतिशत ही मतदान हुआ। इस बार भी जोशी जीते। 402 वोट से हारे गोपीकृष्ण नेमा। इस बार 68.88 प्रतिशत मतदान हुआ है। ऐसे में कांग्रेसी जहां अपनी जीत के लिए आश्वस्त हैं वहीं भाजपा को पूरी उम्मीद है बीते चुनाव में कम हुआ जीत का फासला इंदौर-3 में इस बार उषा ठाकुर को मौका दे सकता है।
इंदौर-5 में 2003 में 64.28 और 2008 में 62.65 प्रतिशत मतदान हुआ। दोनों ही बार भाजपा के महेंद्र हार्डिया जीते। शोभा ठाकुर को हराया। 2003 में 22998 और 2008 में 5684 वोटों से। महू में 2003 में 73.90 के बाद कांग्रेस के अंतरसिंह दरबार ने भेरूलाल पाटीदार को 3199 वोटों से हराया जबकि 77.24 प्रतिशत मतदान के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने दरकार को 9791 वोटों से मात दी।
भाजपा की गढ़ यह विधानसभाएं
इंदौर-2 से आखिरी बार 1990 में कांग्रेस की ओर से सुरेश सेठ जीते थे। इसके बाद 1993 से लेकर 2003 तक कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस को कोई मौका नहीं दिया। 2008 में कैलाश के जोड़ीदार रमेश मेंदोला ने 1990 के कांग्रेसी हीरो सेठ को 39937 वोटों से हराया। 2013 के चुनाव में मेंदोला का लक्ष्य जीत के इस अंतर को 50 हजार वोटों के पार ले जाने का रहा।
यही हाल इंदौर-4 का है जहां 1990 में विजयवर्गीय विजय हुए थे। इसके बाद से 2008 के चुनाव तक भाजपा को अच्छे से अच्छे दिग्गज यहां पटखनी नहीं दे पाए। हालात यह था कि इंदौर-2 की तरह यहां भी कांग्रेस को उम्मीद्वार नहीं मिलते। हालांकि पार्टी को इस बार सहज-सरल सुरेश मिंडा से उम्मीद है लेकिन मैदानी सर्वे उनकी उम्मीद से मेल नहीं खाते।
भाजपा का नया गढ़ होगा इंदौर-1 या इंदौर-5
इंदौर-1 और इंदौर-5 में बीते दो चुनाव से भाजपा का कब्जा है। 2008 में इंदौर-1 से कांग्रेस के रामलाल यादव और संजय शुक्ला किस्मत आजमाकर घर बैठ चुके हैं। 2013 में कांग्रेस केंडिडेट को लेकर कन्फ्यूज रही। इंदौर-5 में बीते दो चुनाव शोभा ओझा हारी। इस बार पंकज संघवी से उम्मीद् जताई जा रही है। यदि इनमें से एक भी सीट पर भाजपा काबिज होकर अपना नया गढ़ बना लेगी।

इंदौर जिला
2013 2008 2003
इंदौर-1 67.08 61.11 63.61
इंदौर-2 64.33 62.43 66.23
इंदौर-3 68.88 65.95 71.80
इंदौर-4 66.97 64.84 65.26
इंदौर-5 64.16 62.65 64.28
महू 70.04 77.24 73.90
राऊ 71.65 69.56 --.--
देपालपुर 78.59 79.93 73.94
सांवेर 72.21 73.66 70.01

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