Monday, June 29, 2015

मप्र में नहीं है इंदौर, भोपाल, देवास ! vanijya kar

वाणिज्यिक कर के 2600 दस्तावेजों में इन शहरों से खरीदी-बिक्री को बताया आयात-निर्यात
इंदौर. विनोद शर्मा ।
इंदौर, भोपाल और देवास मप्र के प्रमुख जिले हैं लेकिन इन्हीं तीनों शहर को व्यापारी और वाणिज्यिक कर विभाग अन्य राज्यों का हिस्सा मानते हैं। शायद यही वजह है कि इन शहरों से होने वाली खरीद-फरोख्त को आयात-निर्यात का नाम देकर छूट ली-दी जा रही है। यह किसी एक दस्तावेज में हुई मानवीय भूल नहीं है बल्कि वाणिज्यिक कर विभाग की अलमारियों में कैद 2600 से ज्यादा दस्तावेजों का श्याह सच है। एक रिपोर्ट की मानें तो तकरीबन 2065 दस्तावेजों में माल दूसरे शहरों से खरीदा बताया गया लेकिन जिस शहर से माल आयात किया गया उसके नाम के स्थान पर इंदौर, भोपाल और देवास का जिक्र है। इसी तरह अन्य राज्यों के जिन जिलों को माल निर्यात किया गया उनमें इन तीन शहरों के साथ सतना का नाम भी जुड़ा हुआ है।
2011-12 में हुई जांच के आधार पर तैयार हुई रिपोर्ट जांच चौकियों को लेकर सरकारी दावों और अधिकारियों की मनमानी का दस्ता बयां करती है। रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2010 में सात जांच चौकियों के दस्तावेजों की जांच हुई थी। कुल 1,१२, ७८८ दस्तावेज मिले थे। इनमें 3600 दस्तावेजों में गड़बड़ मिली। 2065 दस्तावेजों में इंदौर, भोपाल, देवास से माल आयात करना बताया गया जबकि 604 दस्तावेजों में निर्यात करना। 853 दस्तावेजों में माल की मात्रा १००० मीट्रिक टन या उससे अधिक दर्ज पाई गई जो अविश्वसनीय आंकड़ा है। 22 रिकार्ड में बीजक मूल्य 50 करोड़ से 979 करोड़ दर्ज बताया जो वास्तविकता से कोसो दूर है। 1716 दस्तावेजों में ऐसी तीन वस्तुओं के नाम दर्ज है जो अपै्रल 2008 में से ही सूची से हटा दी गई थीं।
झूठ पर छूट की लूट
अक्टूबर 2010 से जनवरी 2011 के बीच जिन ७११ व्यावसाइयों की जांच की गई उसमें से १५० व्यापारियों से संबंधित ७९६ घोषणापत्रों में विभिन्न कमियां पाई गई जैसे खरीदी आदेश, वस्तु का नाम, मकसद, टिन, रेलवे प्राप्ती, ट्रक प्राप्ती का जिक्र न होना। जांच में पाया कि इन अधूरी घोषणाओं पर अधिकारियों द्वारा व्यापारियों को 7.29 करोड़ की छूट दी गई।
झूठे घोषणापत्र
विभाग के इंदौर कार्यालय द्वारा दो व्यापारियों को सी और एफ फार्म की दो घोषणाओं पर ४०,४९५ रुपए की छूट दी गई थी। इसके अलावा १३९२० रुपए की शास्ती भी आरोपित की गई। जांच में पता चला कि उप्र के जिन विक्रेताओं से माल खरीदी बताई गई थी उनसे बात करने पर पता चला कि उन्होंने बिल इन व्यापारियों को कभी दिए ही नहीं जिन्होंने दस्तावेजों में लगाकर छूट प्राप्त की। बिल उन अन्य व्यापारियों को दिए थे जिन्होंने माल खरीदा था।
अपै्रल 2009 में हुई जांच में भी विसंगतियां सामने आई थी...
२८५ दस्जावेज (आउटवार्ड) और 33 इनवार्ड में बिल्टियों की संख्या 0 बताई गई जो कि अमान्य है क्योंकि बिल्टी के बिना पारगमन पत्र जारी नहीं किया जा सकता।
११७ आउटवार्ड और 9 इनवार्ड में की मिस-मैच रिपोर्ट के तीन रिकार्ड में ट्रक नंबर एनए-00-एन.ए.0000 दर्ज है जो अवैध था।
5603 इनवार्ड दस्तावेजों और मिस-मैच रिपोर्ट के ५४० दस्तावेजों में परिवहनकर्ता का नाम लागू नहीं (एन.ए.) दर्शाया गया। ६८१ दस्तावेजों में परिवहनकर्ता के स्थान के नाम पर लागू नहीं दर्शाया गया है।

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