Monday, June 29, 2015

काम यहां, कर वहां income tax

- मप्र के हिस्से का 2 हजार करोड़ रुपया बतौर आयकर महाराष्ट्र-गुजरात में चुका रही है कंपनियां
- प्रदेश को सालाना 1400 करोड़ का घाटा
- संकट में आयकर...
विनोद शर्मा. इंदौर ।
इंदौर में 2011-12 में करोड़पतियों की संख्या 63 प्रतिशत बढ़ोत्तरी के साथ 260 से बढ़कर 423 हो गई है वहीं बड़े स्तर पर आयकर जमा करने वाली कंपनियों का पलायन जारी है। टाटा, रैनबेक्सी, आईशर, फोर्स, बजाज, एसकुमार जैसी कंपनियों के बीच रुचि, स्टेट बैंक ऑफ इंदौर और ब्रिजस्टोन जैसी कंपनियों का नाम भी इनमें जुड़ गया है। इन कंपनियों का कामकाज भले मप्र में हो लेकिन आयकर महाराष्ट्र-गुजरात में ही जमा होता है। शायद इसीलिए आयकर वसूली के मामले में महाराष्ट्र ने अव्वल दर्जे पर अपना मुकाम बना लिया लेकिन टॉप पांच की गिनती में मप्र नजर नहीं आता। ६,११,३०,७०४ आबादी वाला कर्नाटक, ७,२१,३८, ९५८ आबादी वाला तमीलनाडू और ६,०३,८३,६२८ आबादी वाले गुजरात ७,२५,९७,५६५ आबादी वाले मप्र पर भारी हैं। महाराष्ट्र आज जितना आयकर सालाना चुकाता है उतना मप्र 20 वर्षों में नहीं चुका पाया।
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
बीते दिनों रुचि सोया पर आयकर ने जो दबिश दी उसमें खुलासा हुआ कि 26000 करोड़ के सालाना टर्नओवर वाली यह कंपनी अपना 150 करोड़ का आयकर मुंबई में जमा करती है। वह भी उस स्थिति में जब समूह के कर्ताधर्ता और उनकी कर्मभूमी इंदौर ही रही है। न सिर्फ रूचि बल्कि 90 प्रतिशत बड़े औद्योगिक घराने ऐसे ही हैं जो काम भले मप्र में करते हों लेकिन उनका आयकर महाराष्ट्र में जमा होता है या फिर गुजरात में। कंपनियां जो भी फायदा गिनाए लेकिन इसका खामियाजा प्रदेश की आवाम के साथ उन लोगों को भी चुकाना पड़ता है जो परोक्ष या अपरोक्ष रूप से इन कंपनियों से जुड़े हुए हैं। सूत्रों की मानें तो सभी कंपनियां अपना आयकर यहीं जमा करें तो मप्र के खजाने में सालाना 1400 करोड़ से ज्यादा आएंगे जिनका उपयोग प्रदेश के बुनियादी विकास में ही होना है।
सोशल इकोनॉमिक के तहत मप्र के औद्योगिक विकास के लिए संकल्पि 'शिवÓ सरकार ने सैकड़ों औद्योगिक इकाइयों रियायती दरों पर जमीन तो उपलब्ध कराई ही सहुलियतों का पिटारा भी खोल दिया। रिलायसं, आइशर, फोर्स मोटर, काइनेटिक मोटर्स, महिंद्रा मोटर्स, गजरा गियर, टाटा, रेैनबेक्सी, किर्लोस्कर जैसे समूहों को मप्र रास भी आया। सस्ती जमीन और मेनपॉवर से इन समूहों ने उत्पादन लागत घटाकर अपना मुनाफा तो बढ़ाया लेकिन आयकर के रूप मुनाफे का हिस्सा मप्र में जमा करने के बजाय महाराष्ट्र या गुजरात के खजाने में डाल रहे हैं। आंकड़ों के लिहाज से मप्र में ऐसी 300 से ज्यादा औद्योगिक इकाइयां हैं जो सालाना 50 करोड़ से ज्यादा का आयकर चुकाती है लेकिन इनका केश काउंटर इंदौर नहीं बल्कि मुंबई या अहमदाबाद है। मप्र में आयकर के लिहाज से बात करें तो यहां करदाता करोड़पति बढ़े हैं लेकिन कंपनियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। इनमे मल्टीनेशनल कंपनियों के साथ रूचि, एसकुमार, मित्तल कॉर्प, मान और भास्कर जैसी वह कंपनियां भी शामिल है जिनका अस्तित्व ही मप्र से है।
पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष गौतम कोठारी इसके पीछे कारण बताते हैं कि मुंबई चूंकि बड़ी जगह है वहां 500 से 1000 करोड़ के बीच का आयकर जमा करने वाली सैकड़ों कंपनियां है। इसीलिए वहां 50 से 250 करोड़ तक का आयकर जमा करने वाली कंपनियां न गिनती में आती है। न किसी विभाग की नजर में आती हैं। प्राप्त आयकर का 74 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार राज्यों को लौटाती है। चूंकि हमारे यहां की कंपनियां महाराष्ट्र-गुजरात में आयकर चुकाती है इसीलिए मप्र के हिस्से आने वाली 74 प्रतिशत रकम भी उन्हीं राज्यों को मिलती है। तकरीबन 2000 करोड़ का आयकर ऐसा है जो मप्र में जमा होना चाहिए लेकिन जमा होता है महाराष्ट्र या गुजरात में। 74 प्रतिशत हिस्सेदारी के रूप में 1480 करोड़ रुपया मप्र के हिस्से का इन राज्यों के खजाने में जाता है। बाद में इन्हीं कंपनियों के कर्ताधर्ता यहां सार्वजनिक मंच पर कहते हैं महाराष्ट्र-गुजरात सबसे विकसित राज्य हैं, मप्र पिछड़ा हुआ।
कर बढ़ा लेकिन 'करदाताÓ घट गए
केंद्र सरकार ने मप्र-छत्तीसगढ़ में आयकर वसूली का लक्ष्य 2011-12 के लिए  8639.85 करोड़ दिया था। 2012-13 में लक्ष्य को 25 प्रतिशत बढ़ाते हुए 11 हजार करोड़ के पार पहुंचा दिया। इसमें तकरीबन 7500 करोड़ का राजस्व मप्र से और 3500 करोड़ से ज्यादा का राजस्व छत्तीसगढ़ से प्राप्त होता है। इंदौर वृत्त (इंदौर-उज्जैन संभाग) का लक्ष्य 1685 करोड़ था जो बढ़कर 2025 करोड़ हो गया है। 25 प्रतिशत बढ़ोत्तरी के साथ दिए इस लक्ष्य का पीछा करना मुश्किल लग रहा है। रुचि समूह के साथ इसका बड़ा उदाहरण स्टेट बैंक ऑफ इंदौर भी है जो 2008-09 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में संविलियन से पहले सबसे ज्यादा 250 करोड़ का आयकर चुकाता था। संविलियन के बाद जैसे ही बैंक का मुख्यालय बदला, वैसे ही कैश काउंटर भी बदल गया। इसी तरह टायर निर्माता कंपनी ब्रिजस्टोन जो कि 45 करोड़ का सालाना आयकर देती थी उसने भी अपना मुख्यालय पूणे करके 2012-13 के वित्तीय वर्ष के लिए एक करोड़ का आयकर चुकाया है।
कई बार उठा मुद्दा, नहीं बनी सहमति
पीथमपुर औद्योगिक संगठन और आयकर के अधिकारियों के बीच कई बार चर्चाओं का दौर चला। मुद्दा उठा कि कैसे उन तमाम कंपनियों से इंदौर में ही आयकर जमा कराया जाए जो अभी मुंबई या अहमदाबाद में आयकर जमा करती हैं। अधिकारियों की चिंता थी कि कंपनियां यूं ही अपना मुख्यालय या कॉर्पोरेट ऑफिस मुंबई बताकर वहां कर जमा करती रही तो वे आयकर वसूली के मामले में लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाएंगे। वह भी उस स्थिति में जब आयकर को सालाना 25 प्रतिशत तक लक्ष्य बढ़ाकर दिया जाता है। मीटिंग में दोनों पक्षों के बीच समन्वय बैठाने की जिम्मेदारी पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष गौतम कोठारी को सौंपी गई थी। बाद में बैठक में न औद्योगिक घरानों ने रुचि ली। न ही आयकर के अधिकारियों ने।
आयकर वसूली में बहुत दूर है मप्र...
24 फरवरी 2010 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र 1,43,587 करोड़ का सबसे ज्यादा आयकर चुकाता है। 1,17,868 करोड़ के साथ कर्नाटक दूसरे, 12,562 करोड़ के साथ तमीलनाडू तीसरे, 9077 करोड़ के साथ आंध्रप्रदेश चौथे और 7781 करोड़ के साथ गुजरात आयकर वसूली के मामले में पांचवे क्रम पर था। रिपोर्टर 2008-09 में जमा हुए आयकर के आधार पर बनी थी। उस वक्त मप्र-छत्तीसगढ़ में 5909 करोड़ का आयकर लक्ष्य था।
रिटर्न जमा में कोसो दूर है महाराष्ट्र-गुजरात से
भारत में जितना इनकम टैक्स फाइल होता है यदि उसका राज्यवार आंकड़ा निकालें तो 24,14, 526 ई-रिटर्न के साथ महाराष्ट्र नंबर एक पर है जबकि 13,10,269 ई-रिटर्न के साथ गुजरात दूसरे क्रम पर है। वहीं मप्र का क्रम 3,86,437 ई-रिटर्न के साथ मप्र 11वें क्रम पर है। कर्नाटक, दिल्ली, तमीलनाडू, उप्र, आंध्रप्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और पंजाब भी मप्र से ऊपर है।
क्यों जमा होता है बाहर आयकर...
--मप्र में 20 करोड़ से अधिक आयकर चुकाकर कंपनियां न सिर्फ विभाग बल्कि गुंडे-बदमाशों और चंदाखोरों के निशाने पर भी रहती हैं।
--मुंबई चूंकि औद्योगिक और आर्थिक दृष्टि से बड़ा क्षेत्र है। वहां 200-300 करोड़ तक आयकर जमा करने वालों की गिनती ही नहीं हो पाती। वहां आयकर जमा करने से विभागीय नजरों में आने से बच जाते हैं और आसामाजिक तत्वों से भी।
--जरूरत के हिसाब से एक्सपर्ट मिल जाते हैं। सहयोग करने वाली कंपनियां भी।
यहां पड़ता है असर...
-- प्रत्यक्ष कर या अप्रत्यक्ष कर के पेटे केंद्र सरकार के खजाने में जितनी राशि पहुंचती है उसका तय हिस्सा राज्यों को लौटा दिया जाता है।
-- यदि टैक्स की रकम मप्र में जमा कराई जाती तो केंद्र द्वारा लौटाई राशि भी मप्र को मिलती।
-- बतौर उदाहरण यदि मप्र को मिलने वाला 2000 करोड़ का कर भी मुंबई में जमा होता है तो उसके पेटे मिलने वाले 1500 करोड़ रुपए प्रदेश को नहीं मिल पाए। सालाना मिलने वाली यह रकम इतनी बड़ी है कि इससे किसी भी शहर या औद्योगिक क्षेत्र का विकास किया जा सकता है जो राशि न मिलने से नहीं हो पाता।
-- पैसे के बिना बुनियादी सुविधाओं का संकट न सिर्फ आम आदमी झेलता है बल्कि उन तमाम लोगों को भी चुकाना पड़ता है जो इन कंपनियां से जुड़े हुए हैं।
-- इससे शहरों में सुविधा तो बढ़ेगी ही, लोगों का आर्थिक स्तर भी सुधरेगा।
-- आयकर विभाग का टार्गेट पूरा नहीें होता। टार्गेट को पूरा करने के लिए सर्वे और छापों की संख्या बढ़ाई।
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देवास में बड़ी कंपनियां......
- देवास सोया लिमिटेड
- भास्कर एक्स ऑइल
- प्रेस्टीज फूड्स एंड मिल्स
- गेबरियल इंडिया लि
- ब्रिटिश मोटर कार
- टाटा प्रीसिजन इंडस्ट्रीज(इंडिया)
- प्रेस्टीज सोया इंडस्ट्रीज
- कीर्ति इंडस्ट्रीज ;इंडिया
- गजरा डिफ्रेंशियल गियर
- देवास मेटल
- टाटा होलसेट प्रा.लि.
- रैनबैक्सी लेबोरेटरीज लिमिटेड
- स्टील ट्यूब ऑफ इंडिया
- हिंद फि ल्टर लि
- किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेडण्
- टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड
- एस कुमार लिमिटेड
धार...
- मोइरा री-रोलिंग मिल्स लि.
- रूचि स्ट्रीप्स एंड अलॉय
- नेशनल स्टील इंडस्ट्री
इंदौर...
- इप्का लेबोरेट्रीज लिमिटेड
- रूचि सोया
- इंदौर दुग्ध विकास निगम
- पीडीपीएल
- स्टील ट्यूब ऑफ इंडिया
पीथमपुर--
प्रतिभा सिंटेक्स लिमिटेड
क्रॉम्पटन ग्रीव्स
मान इंडस्ट्री
एसकुमार टायर्स
एलएंडटी
हिंदुस्तान मोटर्स
डिजाइन ऑटो सिस्टम
काइनेटिक मोटर्स
फोर्स मोटर्स
आइशर
इंडोरामा टैक्स टाइल्स
निकोलस पिरामल इंडिया
रिट्सपीन सिंथेटिक


















जिलेवार पंजीकृत औद्योगिक इकाइयां...
इंदौर 12,726
भोपाल 11,512
ग्वालियर 10,986
जबलपुर 9,793
उज्जैन 12,276
देवास 10,643
सतना 12,138
पीथमपुर 634
मालनपुर 148
मंडीदीप 435
यूं बढ़े वर्षवार कर और करदाता
वर्ष पेन धारक प्राप्त राजस्व
2002-03 14,10,667 2102.31
2003-04 18,48,684 2505.83
2004-05 21,11,254 3336.61
2005-06 23,91,838 3570.28
2006-07 26,79,457 4085.58
2007-08 30,72,811 5416.18
2008-09 37,03,390 5909.66
2009-10 43,35,273 6981.88
2010-11 56,62,044 8639.85
2011-12 68,13,444 10700.00
इंदौर सर्कल मद कॉर्पोरेट टैक्स इनकम टैक्स अन्य कुल
इंदौर-1 कुल 519.84 444.78 2.65 967.28
रिफंड 19.95 94.56 0.051 114.57
नेट 499.89 350.22 2.599 852.71
इंदौर-2 कुल 211.25 224.67 0.53 436.56
रिफंड 4.31 59.51 0.03 63.86
नेट 206.94 165.15 0.50 372.70
उज्जैन कुल 95.01 185.55 0.32 280.89
रिफंड 3.27 59.67 0.006 62.95
नेट 91.74 125.88 0.314 217.94
पूरे मप्र में ....
कुल ३४९५.९५ २८२९.८९ 5.43 ६३३१.२७
रिफंड ३६७.१६ ४६१.४१ 0.168 ८२८.७३
नेट ३१२८.७९ २३६८.४८ 5.268 5502.54

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