Monday, June 29, 2015

1995 में पता था 1997 में बनेगी अवैध इमारत mahapor ke mahachor

- नगर निगम की दूरदृष्टिता का बड़ा उदारहण
- नक्शा मंजूर करने से ढ़ाई साल पहले ही थमा दिया था कारण बताओ नोटिस 
इंदौर. विनोद शर्मा । 
इंदौर नगर निगम भविष्य वक्ता है। 2014 में क्या होना है? कैसा होना है? नगर निगम को 2012 से ही पता है। कोई माने या न माने लेकिन दस्तावेज नगर निगम के भविष्यवक्ता होने की पुष्टि करते हैं। नगर निगम के अधिकारियों ने अपनी इसी दूरदृष्टिता का परिचय देते हुए मार्च 1995 में खातीवाला टैंक की उस इमारत को रिमुवल  का नोटिस थमा दिया था जिसे उन्हीं ने दिसंबर 1997 में मंजूरी दी थी। यानी ढ़ाई साल पहले ही अधिकारी भांप गए थे कि खाली प्लॉट पर अवैध इमारत ही बनेगी।
हम बात कर रहे हैं 827 खातीवाला टैंक का। 371.55 वर्गमीटर क्षेत्रफल के इस प्लॉट पर मनसुखलाल केसरीमल पोरवाल ने 19 दिसंबर 1997 को चार मंजिला आवाासीय इमारत मंजूर (459) कराई थी। पोरवाल ने कानून-कायदों को ठेंगा दिखाया। मंजूर नक्शे को दराज में दबाया और मनमाने ढंग से निर्माण करते हुए आवासीय इमारत को आवासीय-व्यावसायिक बना दिया। ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग के लिए आरक्षित जमीन हजम करते हुए बिल्डर ने दुकानें निकाल दी। बालकनी कब्जाई। ओपन डक्ट की जमीन को कमरों में तब्दील कर दिया। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
उधर, विचाराधीन प्रकरण (24768) में अपना पक्ष रखते हुए नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट को जो जानकारी दी उसके मुताबिक बिल्डर को 12 मार्च 1995 को ही कारण बताओ नोटिस (क्र. 252) थमाया गया था। 11 नवंबर 2011 को हुई 2007 से दर्ज इस प्रकरण की सुनवाई तक नगर निगम की ओर से बिल्डर को थमाया गया यह पहला और अंतिम नोटिस था। 11 नवंबर को कोर्ट के सख्त आदेश के बाद 170 विवादित इमारतों को जो नोटिस थमाए गए थे उन्हीं में से दो नोटिस (342 और 360) बिल्डर को भी 1 दिसंबर 2011 को भी जारी किया गया। उधर, नगर निगम की मिलीभगत के कारण 12 साल से आवासीय मंजूरी लेकर बनाई गई इस इमारत का उपयोग आवासीय-व्यावसायिक हो रहा है।
जब मालूम था तो निर्माण कैसे हुए...
जानकारी : 12 मार्च 1995 को नोटिस दिया।
सवाल : जब बिल्डिंग का नक्शा ही दिसंबर 1997 में मंजूर हुआ?
सवाल : यदि नगर निगम के अधिकारी जानते थे कि ढ़ाई साल बाद अवैध इमारत बनेगी तो उन्होंने इमारत को बनने से क्यों नहीं रोका? क्यों मुकदर्शक बने रहे?
सवाल : मतलब नगर निगम देश की पहली ऐसी संस्था है जो बिल्डिंग का नक्शा मंजूर होने से पहले तो बिल्डर को नोटिस नोटिस देती है लेकिन अवैध निर्माण के बाद एक भी नोटिस जारी नहीं किया। क्यों?
सवाल : बिल्डिंग में हुए अवैध निर्माण की शिकायतों की अनदेखी क्यों हुई?
जानकारी : बिल्डिंग का उपयोग आवासीय-व्यावसायिक हो रहा है।
सवाल : जब नगर निगम स्वयं इस तथ्य को स्वीकारता है तो बिल्डिंग के बनने के बाद दुकानें क्यों नहीं तोड़ी गई? दुकानों की वैधानिकता को निगम ने चुनौती क्यों नहीं दी?
जानकारी : 1 दिसंबर 2011 को दो नोटिस (342 और 360)  जारी किए।
सवाल : जिस बिल्डर को 1995 के बाद से 2011 के बीच एक भी नोटिस नहीं दिया गया उसे एक ही तारीख में दो-दो नोटिस जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी।
सवाल : एक नोटिस से बात नहीं बन रही थी या सुप्रीमकोर्ट के सामने नोटिसों की संख्या बढ़ाने के लिए नोटिस जारी किए गए।
जानकारी : कुल वैध निर्माण 40.82 वर्गमीटर ।
सवाल : प्लॉट एरिया 371.55 वर्गमीटर है। बिल्टअप को 367.16 वर्गमीटर। अब यदि नगर निगम कहता है कि 40.82 वर्गमीटर निर्माण ही वैध है तो क्या 326.34 वर्गफीट निर्माण अवैध है। 

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