Sunday, June 28, 2015

बाबा ने फेरा आचार संहिता पर ‘पानी’ CHUNAV SPECIAL

- एक ही रात में सात बोरिंगों में अवैध कनेक्शन, दो दिन में कुल नौ
- बिजली कंपनी ने कनेक्शन काटे, सामान जब्त
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
बिजली कंपनी द्वारा दो स्थानों पर कनेक्शन काटकर पंचनामा बनाने और शिकायतों के बावजूद इंदौर-3 में ‘पानी’ के नाम पर आचार संहिता का उल्लंघन बेखौफ जारी है। शनिवार को दो प्रकरण बनाने के बाद रविवार दिनभर बिजली वितरण कंपनी की टीम ने इंदौर-3 में एक के बाद एक कार्रवाई करके सात बोरिंगों में डाली गई मोटर के कनेक्शन काटे और पंचनामे बनाए। कार्रवाई स्नेहलतागंज, धार कोठी, मिल्लतनगर, उषा फाटक, नयापुरा में हुई। शिवाजीनगर में चार अवैध कनेक्शन की शिकायत फर्जी निकली। बिजली कंपनी के मुताबिक जितने बोरिंगों के कनेक्शन काटे उन पर अश्विन जोशी का नाम लिखा है। मामले की शिकायत भाजपा ने चुनाव आयोग को भी कर दी है।
स्नेहलतागंज में तीन बोरिंग, मिल्लतनगर राम मंदिर के पास एक, उषा फाटक में गोगादेव मंदिर के पास, नयापुरा में डॉ.अंसारी के घर के पास बोरिंग में शनिवार की रात कनेक्शन हुए। इनमें से कुछ कनेक्शन हो चुके थे, कुछ हो रहे थे। शिकायत मिलते ही बिजली वितरण कंपनी के एडिशनल सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर (पूर्व क्षेत्र) संजीव मालवीय ने सहायक इंजीनियर आर.के.उपाध्याय के नेतृत्व में टीम को मौके पर भेजा। टीम जिन-जिन स्थानों पर पहुंची वहां हर बोरिंग में बिजली का कनेक्शन अवैध मिला। टीम ने एक के बाद एक सभी कनेक्शन काट दिए। सामान जब्त कर लिया। पंचनामा बना दिया। उधर, कार्यपालन यंत्री (दक्षीण क्षेत्र) डी.एन.शर्मा के निर्देश पर एक टीम धार कोठी स्थित झुग्गी के पास पहुंची। वहां एक बोरिंग का कनेक्शन काटकर पंचनामा बनाया गया।
दोपहर में कनेक्शन, शाम को कार्रवाई, रात में हिमाकत...
इससे पहले शनिवार दोपहर नंदलालपुरा और रेशमवाला लेन में बोरिंग में निगम की ना के बावजूद मोटर डाली गई। शाम को बिजली कंपनी के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कनेक्शन काट दिए। सामान जब्त कर लिया। पंचनामा बनाया गया। बावजूद इसके पानी के नाम पर क्षेत्र में जारी खेल नहीं थमा। रात नौ बजे से लेकर रात दो बजे के बीच ताबड़तोड़ सात बोरिंगों में मोटर डालकर कनेक्शन किया गया। इनमें से कुछ बोरिंग ऐसे भी थे जिनमें कनेक्शन रविवार की सुबह हो ही रहा था कि बिजली कंपनी की टीम ने मौके पर पहुंचकर सामान जब्त कर लिया।
अश्विन जोशी का नाम लिखा है...
एडिशनल सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर (पूर्व क्षेत्र) संजीव मालवीय ने बताया कि कनेक्शन अवैध हैं जो रात में हुए हैं। इनमें से दो-तीन ऐसे हैं जिनमें कनेक्शन जोड़ने की तैयारी थी। कनेक्शन किसने जुड़वाया? इसके जवाब में उनका कहना है कि चूंकि मौके पर कोई भी सामने नहीं आता इसीलिए यह स्पष्ट कहना मुश्किल है लेकिन जो फोटोग्राफी करवाई गई है उनमें बोरिंग व स्टाटर बॉक्स पर विधायक अश्विन जोशी का नाम लिखा मिला है। हालांकि कनेक्शन किसने करवाया इसकी जांच अभी जारी है।
पहले भी बन चुके हैं निगमायुक्त और पार्षद के नाम प्रकरण...
इंदौर-3 में सार्वजनिक बोरिंग में मोटर डालने वाले का नाम बताने में हिचक रहे बिजली कंपनी के यही अधिकारी अवैध कनेक्शन को लेकर निगमायुक्त और पार्षद के खिलाफ संयुक्त रूप से प्रकरण बना चुके हैं। पार्षद तनूजा खंडेलवाल के वार्ड में यही हुआ। इसमें निगमायुक्त भी पार्टी बनाए गए। अब जबकि आचार संहिता लगी है और कंपनी के सख्ती की ज्यादा उम्मीद है ऐसे में अधिकारी विधायक के खिलाफ नामजद कार्रवाई से बच रहे हैं।
चुनाव आयोग को दी जानकारी, लिखित शिकायत आज
पानी वाले बाबा के बोरिंग पर रविवार को भी क्षेत्रीय भाजपा नेताओं के तेवर तीखे ही रहे। जैसे-जैसे अवैध कनेक्शन के मामले सामने आते गए वे बिजली वितरण कंपनी के साथ निर्वाचन अधिकारी को इसकी शिकायत करते रहे। हालांकि लिखित शिकायत रविवार के अवकाश के कारण नहीं हो पाई। इसीलिए मय दस्तावेजों के लिखित शिकायत सोमवार को होगी।
भाजपा पर सख्ती, कांग्रेस को राहत क्यों..?
भाजपा नेताओं की मानें तो चुनाव आयोग आचार संहिता को लेकर जितनी सख्ती भाजपा नेताओं पर दिखाई जा रही है उतनी ही सख्ती इंदौर-3 के विधायक और आगामी चुनाव में कांग्रेस के दावेदार जोशी के खिलाफ क्यों नजर नहीं आ रही है। शनिवार को हुई शिकायत के बावजूद अब तक नोटिस जारी नहीं हुए। इसीलिए जोशी ने आचार संहिता का मखौल उड़ाते हुए शनिवार की रात में 11 स्थानों पर अवैध कनेक्शन करके मोटर डाल दी। मकसद साफ है पानी के रास्ते लोगों के दिल में जगह बनाना।
दो जगह उपयोग नहीं, दो जगह है मीटर..
अवैध कनेक्शन की शिकायत पर टीम जब शिवाजीनगर पहुंची तो वहां दो स्थानों (मित्तल उद्योग के पास और विष्णु उस्ताद के अखाड़े के पास) पर वैध कनेक्शन मिला। वहां मीटर लगे हैं। इसके अलावा पूर्व पार्षद उमाशंकर तरेटिया और माली समाज धर्मशाला के पास जो बोरिंग बताए थे वे बंद मिले हैं। उनका उपयोग ही नहीं होता है।

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