Monday, June 29, 2015

जी उठेगी जीवनदायनी nvda

मुख्यमंत्री ने शिप्रा कुंड में अर्पित किया नर्मदा का नीर
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
सैकड़ों ग्रामीणों का हुजुम...।  'नर्मदे हरÓ, 'शिप्रा मैय्या की जयÓ के नारे और मंत्रोच्चार के बीच मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने उज्जैयनी गांव से लगी शिप्रा टेकरी के कुंड में जैसे ही नर्मदा का नीर समाहित किया तो लगा मानों वर्षों से प्यासी शिप्रा के हाथ जलकलश लग गया हो। माथे से बह रही उमस ने उन किसानों की आंखों से खुशी के आंसू दबा दिए जो लगातार गहराते जलसंकट के कारण खेती-बाड़ी से पलायन का प्लान बनाकर बैठ चुके थे। ग्रामीणों के स्नेह और पसीने से सराबोर मुख्यमंत्री ने नर्मदा और शिप्रा को जोडऩे की महत्वकांक्षी योजना के बारे में जैसे-जैसे बताना शुरू किया वहां खड़ा हर व्यक्ति आने वाले कल की कल्पना में खोता चला गया।
योजना की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री चौहान ने बताया योजना अलग-अलग चरण में पूरी होगी। 432 करोड़ के पहले चरण में हम सिंहस्थ 2016 से पहले बड़वाह से लगे सिसलिया से 5 क्यूसेक्स पानी शिप्रा में छोड़ेंगे। कुल 49 किलोमीटर लंबी लाइन डालना पड़ेगी। उम्मीद है इस काम में मालवा की जनता अड़ंगे नहीं लगाएगी, सहयोग करेगी। यदि ऐसा होता है तो सिंहस्थ में साधू-श्रृद्धालुओं को दो नदियों में स्नान का पूण्य भी प्राप्त होगा। शिप्रा बाराह महीने बहेगी। इससे मालवा के करीब 70 शहरों तथा तीन हजार गांवों के नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा । 'मालवा माटी गहन गंभीर डग-डग रोटी पग-पग नीरÓ जैसी कहावतें फिर जिंदा होगी। कोई मालवा को भविष्य का रेगिस्तान नहीं कह सकेगा। दूसरे चरण में नहर से पानी खींचेंगे ताकि खेत-खलिहान के साथ किसान भी जवान हो जाए लेकिन बिना स्प्रिंकलर के पानी नहीं लेने दूंगा। पानी का महत्व सबको समझना होगा। इससे पहले चौहान हेलीकॉप्टर से खरगोन के सिसलिया पहुंचे। यहां से कलश में नर्मदा का जल लेकर वे शिप्रा उद्गम स्थल शिप्रा टेकरी पहुंचे और शिप्रा कुंड में जल अर्पित किया।
घोषणा यह भी...
- शिप्रा टेकरी पर बनेगा शिप्रा और नर्मदा का भव्य मंदिर
- केवडेश्वर और देवगुराडिय़ा मंदिर के लिए 25-25 लाख
- देवगुराडिय़ा से डबलचौकी वाया सनावदिया-कंपेल-पिवड़ाय के लिए 40 करोड़ की सड़क का अनुमोदन जल्द।
- शिलान्यास के दौरान होगा भव्य आयोजन।
यह भी थे मौके पर...
स्वास्थ्य राज्यमंत्री महेन्द्र हार्डिया, विधायक जीतु जिराती, जिला पंचायत अध्यक्ष ओमप्रकाश परसावदिया, मुख्य सचिव आर.परशुराम, एनवीडीए के रजनीश वैश्य, कमिश्नर प्रभात पाराशर, कलेक्टर अकाश त्रिपाठी, आईजी अनुराधा शंकर सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे ।
क्यों पड़ी जरूरत...
- शिप्रा की बदहाली
- शिप्रा का महत्व, सिंहस्थ की प्लानिंग,
- मालवा में गिरता भू-जलस्तर, बढ़ता जलसंकट
- खेतीबाड़ी से किसानों का पलायन
- बढ़ते नगरीकरण, पेयजल की बढ़ती मांग
ऐसे जुटेगा पानी
प्रमुख सचिव परशुराम ने बताया औंकारेश्वर बांध के बायें तट पर औंकारेश्वर नहर निकलती है जिसमें 85 क्यूसेेक जल उपलब्ध है। दायीं तट नहर के जंक्शन स्थल से परियोजना के चरण 2 एवं 3 हेतु कुल 50 क्यूमेक जल की आवश्यकता है। बाकी 35 क्यूमेक में से 15 क्यूमेक जल औंकारेश्वर उद्वहन नहर के चरण 4 के लिये निर्माणाधीन सिलसिया तालाब में डाला जाना प्रस्तावित है । उद्वहन नहर के लिये जल उपयोग के बाद 20 क्यूमेक जल बचेगा। इसमें से 5 क्यूमेक जल सिलसिया तालाब से उज्जैनी ग्राम से लगे जिजलावंती नाले में डालेंगे। नाला तकरीबन 15 कि.मी. उपरांत क्षिप्रा नदी में मिलता है ।
योजना एक नजर में
जल मात्रा : 5 क्यूमेक्स लीटर
लंबाई : 49 किलोमीटर
सिलसिया तालाब की ऊंचाई समूद्र तल से : 576 मीटर
उद्वहन की ऊंचाई(उज्जैयनी) : 348 मीटर
पाइप लाइन का व्यास : 2 मीटर
मोटर पंप :3(१/3000कि.वॉट)
भू-अर्जन : 75 हेक्टेयर
बुस्टर पंप : सिसलिया, गवालू, बाई
लागत : 432 करोड़




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