Monday, June 29, 2015

मकान रह गया, मौत नाम हो गई...

- नामांतरण कराने पहुंचे सिंघल की नगर निगम जोन पर मौत
नगर निगम के जोनल कार्यालय पर अधिकारियों की हीलाहवाली ने एमआईजी निवासी हीरालाल सिंघल की जान ले ली। पहले हाउसिंग बोर्ड परेशाान हुए। 15 दिन से नगर निगम जोनल कार्यालय के चक्कर काट रहे थे। हर बार अधिकारी कागजी कमीपेशी बताकर उन्हें बिदा कर देेते थे। सूत्रों की मानें तो नामांतरण के नाम पर अलग-अलग एनओसी मांग कर अधिकारी आवेदक को इतना परेशान कर देते हैं कि वह पैसा देने के लिए मजबूर हो जाए। कई बार लोग विधायक रमेश मेंदोला या पार्षद चंदू शिंदे की मदद लेते हैं तब कहीं जाकर होता है घर उनके नाम।
इंदौर.  विनोद शर्मा ।
दोपहर 2.30 बजे। एमआईजी निवासी हीरालाल सिंघल (52 वर्ष) नामांतरण के लिए नगर निगम के जोन नं. 9 (पंचम की फेल) पहुंचे। साइकिल टिकाई..।  कैरियर में दबी रसीदें  और कुछ दस्तावेज निकालकर वे बाबू के पास बैठ गए। नामांतरण के लिए और क्या फॉर्मलिटी लगेगी? इतना पूछने के बाद वे जैसे ही खड़े हुए, गिर पड़े। मुंह से खून आ गया। अधिकारियों ने 108 बुलाई। 108 उन्हें क्योरवेल अस्पताल ले गई। वहां डॉक्टरों ने सिंघल को मृत घोषित कर दिया। उधर, नगर निगम के अधिकारी अपने तरीके से हीरालाल की मौत के अलग-अलग कारण गिनाते रहे।
हीरालाल सिंघल 10 एमआईजी में रहते थे। मप्र हाउसिंग बोर्ड से उनके मकान का नामांतरण हो चुका था। बचा था नगर निगम के दस्तावेजों में अपना नाम चढ़वाना। इसके लिए वे दो-तीन मर्तबा पहले भी जोनल कार्यालय के चक्कर काट चुके थे। उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि मकान नाम कराने के चक्कर में मौत नाम हो जाएगी। हुआ भी यही। मंगलवार को भी वे रसीदें लेकर अधिकारियों से यही पूछने गए थे कि अब और क्या दस्तावेज लाकर दूं। चिलचिलाती धूप में पसीना-पसीना हीरालाल ने जोन पर पदस्थ बाबू मनोहर धंवाडे से बात की। धवांड़े ने एक कागज पर दस्तावेजों की फेहरिस्त और नामांतरण फीस तक की जानकारी लिखकर दे दी। इसके बाद हीरालाल उठे और गिर गश खाकर गिर पड़े। मौके पर मौजूद जोन अधिकारी कैलाश चौधरी व अन्य कर्मचारी यही सोचते रहे कि मिर्गी आने के कारण वे गिरे हैं। शुरुआती उपाय के बाद लगातार मुंह से आते खून को देख चौधरी ने 108 और पीसीआर वेन को सूचना दी।
108 के आने तक चौधरी-धवांडे ने फोन करके क्षेत्रीय पार्षद रूपेश देवलिया को सूचना दी। हीरालाल के परिजन का संपर्क नंबर मांगा। देवलिया ने भी वार्ड के प्रमुख सिंघल परिवारों से संपर्क करने के बाद हाथ खड़े कर दिए। इसी बीच हीरालाल की जेब में रखे मोबाइल में डायल पहले नंबर पर कॉल किया और परिजन से बात हुई। सूचना मिलते ही परिजन भी पहुंचे। परिजन 108 में लिटाकर जब तक क्योरवेल अस्पताल पहुंचते तब तक हीरालाल की मौत हो चुकी थी। मौत की पुष्टि क्योरवेल अस्पताल ने भी की।
---
मेरे पास हीरालाल आए थे। वे नामांतरण करवाना चाहते हैं। मुझसे कागजी फार्मेलिटी के बारे में पूछा था जो मैंने उन्हें बता दिया था। वे भरी दोपहर में साइकिल से आए थे। थके हुए थे। शायद इसीलिए चक्कर खाकर गिर पड़े थे। हमने उनके परिजन को बुलाकर उन्हें 108 के साथ रवाना कर दिया था। आगे कोई जानकारी नहीं।

मनोहर धवांडे, बाबू
मुझे लगा मिर्गी आ गई, 108 में लिटाया तब तक जिंदा थे..
घटना मेरे सामने की है। जब हीरालाल गिरे तो उनके मुंह से खून आ रहा था पहले मुझे लगा कि उन्हें मिर्गी का दौरा आया है लेकिन बाद में हालत बिगडऩे लगी। इससे पहले हम 108 पर सूचना दे चुके थे। मौत का समाचार शाम 7 बजे बाद मिला।
कैलाश चौधरी, जोनल अधिकारी
दोपहर में 108 हीरालाल को लेकर आई थी। यहां ड्यूटी डॉक्टर और नर्स ने ईसीजी चेक किया। पता चला, उनकी पहले ही मौत हो चुकी थी। इससे ज्यादा जानकारी न हमें है। न ही 108 को थी।
इनक्वायरी काउंटर
क्योरवेल हॉस्पिटल
पते की पुष्टि नहीं कर पाया...
जोन से फोन आने के बाद मैंने सभी प्रमुख सिंघल परिवारों से बात की लेकिन कोई पते या परिवार की पुष्टि नहीं कर पाया। इसकी जानकारी जब तक मैंने जोन पर दी तब तक वे उनके परिवार से बात कर चुके थे।
रूपेश देवलिया, पार्षद पति





No comments:

Post a Comment