संघ का मैनेजमेंट : डेढ़ लाख लोगों का कार्यक्रम, शहरवासियों के चेहरे पर नहीं आने देंगे शिकन
इंदौर. विनोद शर्मा ।
350 स्वयं सेवक शहर के प्रमुख चौराहों पर यातायात जवान की तरह तैनात होंगे जबकि 700 से ज्यादा वाहनों की पार्किंग और पेयजल व्यवस्था में। जब तक आखिरी गाड़ी न निकल जाए तब तक स्वयं सेवक चौराहों पर डटे रहेंगे...। मालवा प्रांत के एक लाख से ज्यादा कार्यकर्ताओं को एकत्र करने के साथ राष्ट्रीय स्वयं सेवक ने यह व्यवस्था की है शहर और शहर की आवाम को यातायात के दबाव और जाम जैसी दिक्कतों से दूर रखने के लिए। न सिर्फ यातायात बल्कि आयोजन से जुड़ी हर व्यवस्था में संघ के मैनेजमेंट ने मैंनेजमेंट इंस्टीट्यूट से जुड़े लोगों का ऐसा दिल जीता कि वे संघ से जुड़ गए।
आयोजन के लिए संघ ने 26 विभाग बनाकर व्यवस्थाओं को बांटा है। सेवा भारती को भोजन बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत को देखने या उनके भाषण सुनने का मोह छोड़कर तकरीबन 1200 कार्यकर्ता चौराहों, पार्किंग स्टेंड और अन्य कामों में अपनी सेवाएं देते नजर आएंगे ताकि आयोजन में शामिल होने वाले उनके स्वयं सेवी भाइयों या शहर की आवाम को दिक्कत न हो। सबसे ज्यादा जोर यातायात व्यवस्था पर दिया गया है। सुपर कॉरीडोर पर रेलवे क्रॉसिंग दिनभर में 16 बार बंद होता है जैसे बिंदु से लेकर यातायात क्रॉसिंग की टाइमिंग तक का बारीकी से ध्यान रखा है। इंदौर की सड़कों पर यातायात का दबाव न बढ़े इसके लिए शहर और दूसरे शहर से आने वाले स्वयं सेवकों के अपने स्थान से निकलने और इंदौर पहुंचने तक वक्त तय है।
आगंंतुकों को जिलावार विभागों में बांटा गया है। इंदौर विभाग 9 बजे आयोजन स्थल पहुंचेगा। बाद में इंदौर विभाग की जगह देवास विभाग ले लेगा। जिस वक्त देवास वाले इंदौर पहुंचेगे उस वक्त शाजापुर वाले देवास पहुंचेंगे। जब शाजापुर वाले देवास पहुंचेंगे उस वक्त शुजालपुर-पचौर तक के लोग शाजापुर पहुंचेंगे। यही व्यवस्था अन्य रूट पर लागू होगी। आगे वाले लोग जब इंदौर पहुंचेंगे तब बाद वाले उनकी जगह ले लेंगे। देवास, मक्सी, शाजापुर, शुजालपुर, पचौर तक के स्वयं सेवक बायपास-लाभगंगा-एमआर-10 होते हुए आयोजन स्थल तक पहुंचेंगे। बड़वाह-खंडवा-बुरहानपुर वालों का रूट भी यही होगा। खरगोन, बड़वानी, सेंधवा वाले राऊ जंक्शन, बायपास, एमआर-10 होते हुए आएंगे। घार, रतलाम, मंदसौर वालों के लिए दो रूट तय किए हैं। एक, बेटमा से देपालपुर-हातोद होते हुए। दूसरा, धरावराधाम के पास से एअरपोर्ट रोड, बिजासन होते हुए।
इसी तरह शहर के स्वयं सेवकों को भी कहा गया है कि वे पूर्वी रिंग रोड, पश्चिमी रिंग रोड सहित ऐसी सड़कों का इस्तेमाल करें जिनसे सहुलियत के साथ आयोजन स्थल तक पहुंचा जा सके। मंच और स्वयं सेवक के बैठने की व्यवस्था भी ऐसी की है कि आखिरी तक के व्यक्ति को संघ प्रमुख आसानी से दिख सके।
कितनी गाडिय़ां होगी शामिल...
बसें 2000
कारें 3500
दो पहिया 15,000
प्लास्टिक मुक्त होगा परिसर..
प्लास्टिक इस्तेमाल नहीं होगी आयोजन स्थल पर। पीने के पाऊच के स्थान पर ड्रम और लौटे की व्यवस्था। खाने के पैकेट भी पैपर पेकिंग में।
ऐसा होगा झंडा...
झंडे के लिए जो दंड स्थापित किया गया है उसकी ऊंचाई ही 60 फीट है। 3.5 फीट का कलश लगा। 5 फीट का स्टैंड है। 168 फीट, 84 फीट और 210 फीट लंबा होगा झंडा।
120 एकड़ जमीन तैयार की अपने दम पर..
आयोजन कुल 120 एकड़ जमीन पर होना है जिसे स्वयं सेवकों ने समतल किया है। इसी जमीन पर एक टिला भी था जिसे स्वयं सेवकों ने समतल किया।
इंदौर. विनोद शर्मा ।
350 स्वयं सेवक शहर के प्रमुख चौराहों पर यातायात जवान की तरह तैनात होंगे जबकि 700 से ज्यादा वाहनों की पार्किंग और पेयजल व्यवस्था में। जब तक आखिरी गाड़ी न निकल जाए तब तक स्वयं सेवक चौराहों पर डटे रहेंगे...। मालवा प्रांत के एक लाख से ज्यादा कार्यकर्ताओं को एकत्र करने के साथ राष्ट्रीय स्वयं सेवक ने यह व्यवस्था की है शहर और शहर की आवाम को यातायात के दबाव और जाम जैसी दिक्कतों से दूर रखने के लिए। न सिर्फ यातायात बल्कि आयोजन से जुड़ी हर व्यवस्था में संघ के मैनेजमेंट ने मैंनेजमेंट इंस्टीट्यूट से जुड़े लोगों का ऐसा दिल जीता कि वे संघ से जुड़ गए।
आयोजन के लिए संघ ने 26 विभाग बनाकर व्यवस्थाओं को बांटा है। सेवा भारती को भोजन बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत को देखने या उनके भाषण सुनने का मोह छोड़कर तकरीबन 1200 कार्यकर्ता चौराहों, पार्किंग स्टेंड और अन्य कामों में अपनी सेवाएं देते नजर आएंगे ताकि आयोजन में शामिल होने वाले उनके स्वयं सेवी भाइयों या शहर की आवाम को दिक्कत न हो। सबसे ज्यादा जोर यातायात व्यवस्था पर दिया गया है। सुपर कॉरीडोर पर रेलवे क्रॉसिंग दिनभर में 16 बार बंद होता है जैसे बिंदु से लेकर यातायात क्रॉसिंग की टाइमिंग तक का बारीकी से ध्यान रखा है। इंदौर की सड़कों पर यातायात का दबाव न बढ़े इसके लिए शहर और दूसरे शहर से आने वाले स्वयं सेवकों के अपने स्थान से निकलने और इंदौर पहुंचने तक वक्त तय है।
आगंंतुकों को जिलावार विभागों में बांटा गया है। इंदौर विभाग 9 बजे आयोजन स्थल पहुंचेगा। बाद में इंदौर विभाग की जगह देवास विभाग ले लेगा। जिस वक्त देवास वाले इंदौर पहुंचेगे उस वक्त शाजापुर वाले देवास पहुंचेंगे। जब शाजापुर वाले देवास पहुंचेंगे उस वक्त शुजालपुर-पचौर तक के लोग शाजापुर पहुंचेंगे। यही व्यवस्था अन्य रूट पर लागू होगी। आगे वाले लोग जब इंदौर पहुंचेंगे तब बाद वाले उनकी जगह ले लेंगे। देवास, मक्सी, शाजापुर, शुजालपुर, पचौर तक के स्वयं सेवक बायपास-लाभगंगा-एमआर-10 होते हुए आयोजन स्थल तक पहुंचेंगे। बड़वाह-खंडवा-बुरहानपुर वालों का रूट भी यही होगा। खरगोन, बड़वानी, सेंधवा वाले राऊ जंक्शन, बायपास, एमआर-10 होते हुए आएंगे। घार, रतलाम, मंदसौर वालों के लिए दो रूट तय किए हैं। एक, बेटमा से देपालपुर-हातोद होते हुए। दूसरा, धरावराधाम के पास से एअरपोर्ट रोड, बिजासन होते हुए।
इसी तरह शहर के स्वयं सेवकों को भी कहा गया है कि वे पूर्वी रिंग रोड, पश्चिमी रिंग रोड सहित ऐसी सड़कों का इस्तेमाल करें जिनसे सहुलियत के साथ आयोजन स्थल तक पहुंचा जा सके। मंच और स्वयं सेवक के बैठने की व्यवस्था भी ऐसी की है कि आखिरी तक के व्यक्ति को संघ प्रमुख आसानी से दिख सके।
कितनी गाडिय़ां होगी शामिल...
बसें 2000
कारें 3500
दो पहिया 15,000
प्लास्टिक मुक्त होगा परिसर..
प्लास्टिक इस्तेमाल नहीं होगी आयोजन स्थल पर। पीने के पाऊच के स्थान पर ड्रम और लौटे की व्यवस्था। खाने के पैकेट भी पैपर पेकिंग में।
ऐसा होगा झंडा...
झंडे के लिए जो दंड स्थापित किया गया है उसकी ऊंचाई ही 60 फीट है। 3.5 फीट का कलश लगा। 5 फीट का स्टैंड है। 168 फीट, 84 फीट और 210 फीट लंबा होगा झंडा।
120 एकड़ जमीन तैयार की अपने दम पर..
आयोजन कुल 120 एकड़ जमीन पर होना है जिसे स्वयं सेवकों ने समतल किया है। इसी जमीन पर एक टिला भी था जिसे स्वयं सेवकों ने समतल किया।
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