Sunday, June 28, 2015

शारदा सॉल्वेंट को बचाने में अधिकारी भिड़े db special


अधीक्षक ने पत्र लिखकर कहा पूर्वाग्रह से ग्रसित है संयुक्त आयुक्त
खूद की जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़कर हमें बेजा कर रहे हैं परेशान
दैनिक भास्कर समूह की है कंपनी
इंदौर. चीफ रिपोर्टर । 
तकरीबन 60.80 करोड़ की कस्टम ड्यूटी और सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी की चोरी करने वाली दैनिक भास्कर समूह की शारदा सॉल्वेंट प्रा.लि. को बचाने में कस्टम, सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट ने कोई कसर नहीं छोड़ी। इसका बड़ा उदाहरण है गुना रेंज के अधीक्षक द्वारा सहायक आयुक्त, ग्वालियर को लिखा गया पत्र। पत्र में अधीक्षक ने झंझुलाते हुए सहायक आयुक्त को लिखा था कि आप पूर्वागृह से ग्रसित हैं। शारदा सॉल्वेंट को लेकर जो कार्रवाई करना थी, आपने वह नहीं की। उलटा, सारा ठिकरा गुना रेंज पर फोड़ दिया। आप जानबुझकर मुझे परेशान कर रहे हैं।
अधीक्षक एम.पी.गुप्ता ने 26 दिसंबर 2011 को यह पत्र (जीएल-6/बॉन्ड/एसएसएल/रैं-गुना/०९/३७) लिखा था जो ३ जनवरी 2012 को सहायक उपायुक्त, ग्वालियर तक पहुंचा। गुप्ता ने लिखा आप पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं। आप को लगता है कि आपका कोई भी आदेश गलत हो या सही हम मान लेंगे फिर उससे चाहे सरकार को राजस्व का नुकसान ही क्यों न हो। हम सूचित कर चुके हैं कि आप ने अधीक्षक निवारक को दो मामलों में जांच के लिए अधिकृत किया था। अधीक्षक निवारक ने दोनों मामलों में प्रकरण दर्ज किया। कारण बताओ नोटिस का मसौदा आयुक्त को भेज दिया। आयुक्त ने नोटिस जारी नहीं किया, अपै्रल 2011 में रिकवरी के लिए बॉन्ड इन्फोर्स करने का आदेश दिया था। आयुक्त के इस आदेश को नजरअंदाज करके अधिकारियों ने न बॉन्ड इन्फोर्स किए, न कंपनी ने संबंधित रिकॉर्ड मेंटेन किया। बावजूद इसके बार-बार ग्वालियर रेंज को लिखना इस संदेह को साबित करता है कि कहीं कंपनी ने रिकॉर्ड तो तैयार नहीं कर लिए, जिसकी जांच के लिए आप रेंज पर अनावश्यक दबाव बना रहे हैं। इसकी पुष्टि इस बात से भी होती है कि पूर्व अधीक्षकों के पत्रों के साथ एक शीट 'जिस पर ओपनिंग बैलेंस/कंजमशन क्वांटिटी/क्लोजिंग बैलेंस दर्शाया गयाÓ, भेजी गई थी जो आज दिन तक रेंज कार्यालय में न कंपनी ने पेश की, न दोनों अधीक्षकों द्वारा वेरिफाई करके भेजी गई।
आपने कंपनी को पहुंचाया फायदा...
गुप्ता ने लिखा मे.शारदा सॉल्वेंट के मामले में शुरू से ही आपने खास रूचि ली। उन उपायुक्तों के साथ जिन्होंने नोटशीट पर स्पष्ट निर्देश मिलने के बाद भी पार्टी को तब तक अनुमति नहीं सौंपी जब तक पार्टी यह जानकारी पेश नहीं कर देती कि आयातित माल का उपयोग उत्पाद बनाने में किया गया या नहीं। इन तमाम तथ्यों को जानते हुए भी आपने न सिर्फ पूर्ववत अनुमति बल्कि बाद भी अनुमतियां दी। सबसे हास्यास्पद बात यह है कि आयुक्त के बॉन्ड इन्फोर्स करने के आदेश के बाद भी आपने एक अनुमति 'जिसके तहत कंपनी ने मटेरियल नहीं मंगाया थाÓ,  को भी निरस्त नहीं किया। इस अनुमति के आधार पर कंपनी ने सितंबर 2011 तक ड्यूटी फ्री मटेरियल खरीदा।
शंका है तो करा लें जांच....
आपने जिस तरह के निर्देश यह जानते हुए भी दिए कि गुना रेंज ग्वालियर से 215 किलोमीटर दूर है दर्शाता है कि आप पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं। कार्यालय पहले ही विधिक नोटिस का मसौदा भिजवा चुका है जबकि प्रभागीय कार्यालय में स्वतंत्र रूप से विधि शाखा है। उसका अपना स्वतंत्र स्टाफ है। हम आपको आखिरी बार स्पष्ट कर रहे हैं कि आयुक्त के तहत बॉन्ड इन्फोर्स करने का अधिकार सिर्फ आपके पास है। हमारे कार्यालय के स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं बची है। आपको निवारक शाखा द्वारा क्वांटिफाइड अमाउंड पर कोई शंका है तो उसकी नए सिरे से जांच करा सकते हैं।
यह भी कहा...
- आपका यह कहना गलत है कि हमने अपने स्तर पर प्रयास नहीं किए। हमने कई पत्र और समन्स जारी किए। बावजूद इसके पार्टी ने मटेरियल कंजम्शन का कोई रिकॉर्ड नहीं सौंपा। आपने इसकी जांच निवारक शाखा  को भी सौंपी थी। इस जांच के बाद ही 60.80 करोड़ की कर चोरी उजागर हुई।
- 13 जून 2011 तक सब जांच पूरी हो चुकी थी। इसके बाद मैंने ज्वाइन किया।
- आयुक्त द्वारा दिए बान्ड इन्फोर्स करने के आदेश के बाद हमारे स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं बचती। क्योंकि निवारक शाखा द्वारा निकाली गई कर चोरी की वसूली के आदेश जारी होने के बाद उसमें जोड़-घटाव नहीं हो सकता।
- सीपीओ (एक प्रकार का पदार्थ) के आपेनिंग बैलेंस/कंजमशन क्वांटिटी/क्लोजिंग बैलेंस की जानकारी पूर्व अधीक्षक ने दी, ऐसा आपने बताया लेकिन जब उनसे बात की तो उन्होंने इस बात को खारिज कर दिया।
- आपके भेजे गए चार्ट में सीपीओ की प्राप्त मात्रा जो बताई गई है वह कार्यालय में दर्ज आंकड़ों से मेल नहीं खाती।
- आपने पोर्ट अथॉरिटी को पत्र लिखने को कहा था जो हमारे अधिकार क्षेत्र से बाहर है।




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