भारतीय निर्णायक प्राधिकरण ने दिया आदेश ईडी की कार्रवाई जायज, 50 लाख की संपत्ति राजसात
5 मकान-17 बीघा जमीन-एक स्कॉर्पियो-एक ट्रेक्टर ट्रॉली
इन्दौर, विनोद शर्मा।
उज्जैन में हुए लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये के स्टाम्प पेपर घोटाले के मुख्य आरोपी और कोषालय (ट्रेजरी) लिपिक अशोक शर्मा के खिलाफ प्रवर्तन निदे्रशालय (ईडी) द्वारा की गई संपत्ति अटैचमेंट की कार्रवाई को जायज ठहराते हुए न्यायिक प्राधिकरण ने संपत्ति को राजसात करने का आदेश जारी कर दिया। 11 अक्टूबर 2011 को जारी आदेश के मुताबिक शर्मा के पांच प्लॉट, एक सकॉर्पियो, एक ट्रेक्टर ट्रॉली और 17 बीघा जमीन अब सरकार की होगी। जिसकी रजिस्ट्री कीमत तकरीबन 50 लाख है जबकि बाजार कीमत 1.5 करोड़ रुपए।
उज्जैन में स्टाम्प पेपर का डिपो है जहां से प्रदेश के विभिन्न कोषालयों व उप कोषालयों को स्टाम्प पेपर भेजे जाते है। जनवरी से मार्च 2010 की अवधि के दौरान एक दर्जन से अधिक कोषालय और उपकोषालयों के नाम पर साढ़े तीन करोड़ रुपये के स्टाम्प पेपर आवंटित किए गए। जांच में पता चला कि यह स्टाम्प पेपर संबंधित स्थानों तक पहुंचे ही नहीं। तफ्तीश के बाद 16 सितंबर 2010 को माधवनगर थाना, उज्जैन में प्रकरण दर्ज हुआ। अशोक जोशी व उप कोषालय अधिकारी शरद गिरकर को माधव नगर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। 13 दिसंबर 2010 को ईडी ने प्रकरण दर्ज किया। 31 दिसंबर 2010 को पुलिस ने चालान पेश किया। 20 मई 2011 को शर्मा की 49,51,710 रुपए की संपत्ति चिह्नित की गई। इसमें 5 मकान, 17 बीघा जमीन, 1 स्कॉर्पियो और एक ट्रेक्टर ट्रॉली शामिल थी। 2 मकान शर्मा ने मित्र कंवलजीतसिंह सलूजा और ट्रेजरी के चपरासी विजय वरूणकर के नाम खरीदे थे। चिह्नित संपत्ति के अटैचमेंट के खिलाफ शर्मा परिवार ने 17 मई 2011 को निर्णायक प्राधिकरण में शरण ली। प्राधिकरण ने 11 अक्टूबर 11 को फैसला सुनाते हुए सारी संपत्ति ईडी के हवाले करने का आदेश दे दिया।
ईडी के अधिकारियों की मानें तो आदेश के बाद हमारी शर्मा और उसके सहयोगियों के खिलाफ प्राथमिकता प्रोसिक्यूशन फाइल करना है। यहां आरोपियों को 7 साल की सजा सुनाई जा सकती है।
ऐसे किया था खेल..
जिला कोषालय से स्टॉम्प प्राप्त करने के लिए वेंडरों को नियमानुसार कार्रवाई करना होती है। कोषालय से संबंधित चार बैंकों में चालान जमा करने के बाद स्टॉम्पों की सारणी जिला कोषालय अधिकारी को भेजना पड़ती है लेकिन अशोक शर्मा ने स्टॉम्प वेंडरों से सेंटिंग कर फर्जी चालान बनाए और स्वयं ने हस्ताक्षर कर दिए। उसने लेनदेन की प्रक्रिया से बैंक को पूरी तरह गायब कर दिया था। इस तरह शासकीय खातों में बैंकों के माध्यम से जमा होने वाले रुपए वह खुद हड़पता रहा। उसने फर्जी तरीके से कई स्टॉम्प वेंडरों को औने-पौने दामों में बेच दिए।
दो स्टॉम्प वेंडरों से लाखों का लेनदेन
शर्मा ने स्टॉम्प वेंडर राजेश बांठिया (पटनी बाजार) और रवि गुप्ता (देसाईनगर) से स्टॉम्प के बदले लाखों रुपए के लेनदेन की बात भी स्वीकार थी। राजेश पत्नी मंजू बांठिया के लाइसेंस पर स्टॉम्प का कारोबार करता है। दोनों वेंडरों के कार्यालय भरतपुरी क्षेत्र में है।
5 मकान-17 बीघा जमीन-एक स्कॉर्पियो-एक ट्रेक्टर ट्रॉली
इन्दौर, विनोद शर्मा।
उज्जैन में हुए लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये के स्टाम्प पेपर घोटाले के मुख्य आरोपी और कोषालय (ट्रेजरी) लिपिक अशोक शर्मा के खिलाफ प्रवर्तन निदे्रशालय (ईडी) द्वारा की गई संपत्ति अटैचमेंट की कार्रवाई को जायज ठहराते हुए न्यायिक प्राधिकरण ने संपत्ति को राजसात करने का आदेश जारी कर दिया। 11 अक्टूबर 2011 को जारी आदेश के मुताबिक शर्मा के पांच प्लॉट, एक सकॉर्पियो, एक ट्रेक्टर ट्रॉली और 17 बीघा जमीन अब सरकार की होगी। जिसकी रजिस्ट्री कीमत तकरीबन 50 लाख है जबकि बाजार कीमत 1.5 करोड़ रुपए।
उज्जैन में स्टाम्प पेपर का डिपो है जहां से प्रदेश के विभिन्न कोषालयों व उप कोषालयों को स्टाम्प पेपर भेजे जाते है। जनवरी से मार्च 2010 की अवधि के दौरान एक दर्जन से अधिक कोषालय और उपकोषालयों के नाम पर साढ़े तीन करोड़ रुपये के स्टाम्प पेपर आवंटित किए गए। जांच में पता चला कि यह स्टाम्प पेपर संबंधित स्थानों तक पहुंचे ही नहीं। तफ्तीश के बाद 16 सितंबर 2010 को माधवनगर थाना, उज्जैन में प्रकरण दर्ज हुआ। अशोक जोशी व उप कोषालय अधिकारी शरद गिरकर को माधव नगर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। 13 दिसंबर 2010 को ईडी ने प्रकरण दर्ज किया। 31 दिसंबर 2010 को पुलिस ने चालान पेश किया। 20 मई 2011 को शर्मा की 49,51,710 रुपए की संपत्ति चिह्नित की गई। इसमें 5 मकान, 17 बीघा जमीन, 1 स्कॉर्पियो और एक ट्रेक्टर ट्रॉली शामिल थी। 2 मकान शर्मा ने मित्र कंवलजीतसिंह सलूजा और ट्रेजरी के चपरासी विजय वरूणकर के नाम खरीदे थे। चिह्नित संपत्ति के अटैचमेंट के खिलाफ शर्मा परिवार ने 17 मई 2011 को निर्णायक प्राधिकरण में शरण ली। प्राधिकरण ने 11 अक्टूबर 11 को फैसला सुनाते हुए सारी संपत्ति ईडी के हवाले करने का आदेश दे दिया।
ईडी के अधिकारियों की मानें तो आदेश के बाद हमारी शर्मा और उसके सहयोगियों के खिलाफ प्राथमिकता प्रोसिक्यूशन फाइल करना है। यहां आरोपियों को 7 साल की सजा सुनाई जा सकती है।
ऐसे किया था खेल..
जिला कोषालय से स्टॉम्प प्राप्त करने के लिए वेंडरों को नियमानुसार कार्रवाई करना होती है। कोषालय से संबंधित चार बैंकों में चालान जमा करने के बाद स्टॉम्पों की सारणी जिला कोषालय अधिकारी को भेजना पड़ती है लेकिन अशोक शर्मा ने स्टॉम्प वेंडरों से सेंटिंग कर फर्जी चालान बनाए और स्वयं ने हस्ताक्षर कर दिए। उसने लेनदेन की प्रक्रिया से बैंक को पूरी तरह गायब कर दिया था। इस तरह शासकीय खातों में बैंकों के माध्यम से जमा होने वाले रुपए वह खुद हड़पता रहा। उसने फर्जी तरीके से कई स्टॉम्प वेंडरों को औने-पौने दामों में बेच दिए।
दो स्टॉम्प वेंडरों से लाखों का लेनदेन
शर्मा ने स्टॉम्प वेंडर राजेश बांठिया (पटनी बाजार) और रवि गुप्ता (देसाईनगर) से स्टॉम्प के बदले लाखों रुपए के लेनदेन की बात भी स्वीकार थी। राजेश पत्नी मंजू बांठिया के लाइसेंस पर स्टॉम्प का कारोबार करता है। दोनों वेंडरों के कार्यालय भरतपुरी क्षेत्र में है।
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