Monday, June 29, 2015

आवासीय मंजूरी पर 'यूनिकÓ अस्पताल

- झूठ की बुनियाद पर खड़ी इमारत को कंपाउंडिंग के साथ नगर निगम ने कर दिया वैध 
- नगर निगम को नहीं दिखता अस्पताल, सुप्रीमकोर्ट में कहा जारी है आवासीय इस्तेमाल
इंदौर. दबंग रिपोर्टर । 
प्लॉट नं. 703, 704, 715, 716 विजय सिंडिकेट उषानगर। डॉ. प्रमोद नीमा के आवेदन पर नगर निगम ने 30 दिसंबर 1999 को दाखला (2109) मंजूर किया। संयुक्तिकरण पर प्रतिबंध के बावजूद नगर निगम ने चार प्लॉटों को जोड़कर बेसमेंट सहित चार मंजिला आवासीय इमारत मंजूर कर दी। दस्तावेजों में आवासीय मंजूरी लेने के बाद डॉ.नीमा ने बिल्डिंग में अस्पताल शुरू कर दिया। नाम दिया युनिक हॉस्पिटल। तमाम कानून-कायदों को तांक पर रखकर तानी गई इस इमारत को नगर निगम ने कंपाउंडिंग की आड़ में वैध कर दिया।
इमारत को लेकर नगर निगम का रवैया शुरुआत से ही संरक्षणात्मक रहा। दिसंबर 1999 में मंजूरी लेकर जैसे ही बिल्डर ने काम शुरू किया। 4 मई 2000 को कारण बताओ नोटिस  दिया। नगर निगम से प्राप्त दस्तावेजों की मानें तो नोटिस के बाद 4 अपै्रल 1998, 6 सितंबर 1998, 21 सितंबर 1998 को बिल्डिंग के लिए जारी की गई तमाम मंजूरियां निरस्त कर दी गई। मंजूरियों के क्रम क्रमश: 1, 5, 153 है। 9 अपै्रल 1999 को रिमुवल नोटिस (क्र.60) जारी किया। 15 फरवरी 2000, 26 जून 2001, 21 फरवरी 2005 को भी नोटिस (क्रमश : 113, 50 और 74) जारी किए। डॉ. नीमा कंपाउंडिंग के आवेदन के बाद 20 हजार रुपए कम्पाउंडिंग शुल्क जमा कराकर 24 अपै्रल 2003 को अपील कमेटी ने बिल्डिंग की कंपाउंडिंग कर दी। अवैध को वैध बना दिया। इसके बाद नगर निगम को बिल्डिंग के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ी।
यह भी अवैध निर्माण
-- स्वीकृति चौड़ाई से ज्यादा पर गैलेरी झुलाई। कब्जा किया।
-- ओपन डक्ट में कमरे बनाए।
-- पार्किंग एरिया को कवर करके हॉस्पिटल बनाया।
(दस्तावेजों के मुताबिक)
सवालों के घेरे में नगर निगम
जानकारी : परमानंद सिसोदिया और मप्र सरकार के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन प्रकरण (एसएलपी 24768) में अपना पक्ष मजबूति से रखते हुए नगर निगम ने जो दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं उनकी मानें तो आवासीय मंजूरी के साथ बनी इमारत में हॉस्पिटल चल रहा है।
सवाल : कुल मिलाकर स्वीकृति के विपरीत निर्माण। स्वीकृत उपयोग के विपरीत बनने के कारण ही 1998-99 में नगर निगम ने एलआईजी तिराहा स्थित 40 करोड़ की राज टॉवर को नेस्तनाबूद किया था। फिर यहां रियायत क्यों?
जानकारी : 4 अपै्रल 1998, 6 सितंबर 1998, 21 सितंबर 1998 को मंजूर बिल्डिंग का नक्शा निरस्त कर दिया
सवाल : नगर निगम के ही दस्तावेजों में बिल्डिंग की दाखला मंजूरी की दिनांक 30 अगस्त 1999 (1196) और 30 दिसंबर 1999 (2109) दी हुइ है।
जानकारी : 9 अपै्रल 1999 को रिमुवल नोटिस दिया।
सवाल : 4 अपै्रल 1998, 6 सितंबर 1998, 21 सितंबर 1998 की मंजूरी भी मान लें तो क्या 10618 वर्गफीट जमीन पर चार मंजिला इमारत सात महीनों में तन गई। वह भी उस स्थिति में जब नगर निगम मंजूरी की तारीख 30 अगस्त 1999 और 30 दिसंबर 1999 बता रहा है। यानी बिल्डिंग बनने से पहले रिमुवल नोटिस दिया नगर निगम ने?
जानकारी : नगर निगम द्वारा सुप्रीमकोर्ट में जो जानकारी पेश की उसमें स्पष्ट लिखा है बिल्डिंग का 16 साल से आवासीय उपयोग हो रहा है।
सवाल : इंदौर में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो युनिक हॉस्पिटल को न जानता हो। स्वयं नगर निगम भी अस्पताल की पुष्टि कर चुकी है बावजूद  इसके हॉस्पिटल को कोर्ट के सामने आवासीय क्यों बताया जा रहा है।
कंपाउंडिंग पर उठे सवाल...
मप्र भूमि विकास अधिनियम के तहत किसी इमारत में स्वीकृति के विपरीत किए गए उस 10 फीसदी निर्माण की ही कंपाउंडिंग की जा सकती है जो जन या शासकीय हितों को प्रभावित न करता हो। एमओएस और पार्किंग में कब्जे जैसे निर्माणों की कम्पाउंडिंग नहीं होगी। बावजूद इसके नगर निगम के अधिकारियों ने मोटी रकम लेकर उस इमारत की कंपाउंडिंग कर दी जिसकी बुनियाद ही झुठे दस्तावेजों पर रखी गई हो। हाईकोर्ट के बाद सुप्रीमकोर्ट जैसी सर्वोच्चय न्यायिक संस्था को दी गई झुठी जानकारियां भी अधिकारियों की मिलीभगत का बड़ा उदाहरण है।
सभी काम नियमों से
हमने कोई काम गलत नहीं किया सभी नियमों से ही हुआ। आपकों गलत जानकारी मिली हैं।
मनोज नीमा, डॉ. प्रमोद नीमा के भाई

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