संभागायुक्त, एमजीएम डीन और एसडीएम को रिमाइंडर
लिखा : 15 दिन में जानकारी नहीं तो भेजेंगे समन
इंदौर. दबंग रिपोर्टर ।
सुप्रीमकोर्ट के सख्त निर्देश और एमसीआई के तीखे तेवर के बावजूद ड्रग ट्रायल के आरोपी डॉक्टरों के प्रति अस्पताल प्रशासन का रवैया सकारात्मक है। यही वजह है कि संभागायुक्त, एमजीएम कॉलेज की डीन और एसडीएम ने प्रवर्तन निर्देशालय (ईडी) को न ड्रग ट्रायल की जानकारी देना मुनासिब समझा। न सरकारी मंजूरी के बगैर हुई डॉक्टरों की विदेश यात्रा की जानकारी देना। बहरहाल, ईडी ने तीखे अंदाज में रिमाइंडर जारी करके स्पष्ट कर दिया है कि यदि अब जानकारी नहीं मिली तो अगली बार समन जारी करके ही बुलाना पड़ेगा।
एमवायएच के डॉ. अपूर्व पौराणिक, डॉ. हेमंत जैन, डॉ. अशोक वाजपेयी, मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. पुष्पा वर्मा, डॉ. सलील भार्गव, डॉ. अनिल भराणी ने 2004 से 2010 के बीच कुल 12 विदेश यात्राएं की। इनमें 9 यात्राएं ऐसी हैं जिनके लिए सरकार से किसी तरह की मंजूरी नहीं ली गई। इसका खुलासा होते ही पहले डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय जांच हुई। बात नहीं बनी तो संभागायुक्त प्रभात पाराशर को जांच के आदेश देना पड़े। हालांकि संभागायुक्त के सख्त आदेश के बावजूद जांचकर्ता अधिकारियों ने डॉक्टरों को रियायत दी और जांच रिपोर्ट आज दिन तक सबमिट नहीं की।
इसी बीच जनवरी के पहले सप्ताह में ईडी ने संभागायुक्त प्रभात पाराशर, डीन पुष्पा वर्मा और एसडीएम एसएल प्रजापत को पत्र लिखकर ड्रग ट्रायल और डॉक्टरों की विदेश यात्रा की जानकारी मांगी थी। महीनाभर हो गया लेकिन तीनों की ओर से किसी तरह की कोई जानकारी ईडी तक नहीं पहुंची। लिहाजा डॉक्टरों के खिलाफ फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के तहत प्रकरण दर्ज करने का मन बना चुके ईडी को फरवरी के पहले सप्ताह में रिमाइंडर नोटिस जारी करना पड़े। नोटिस में लिखा है 15 दिन में जानकारी दे। अन्यथा समन जारी करके ऑफिस बुलाकर लेंगे जानकारी।
फेमा क्यों...?
विदेशी कंपनियों की दवाइयां प्रमोट करने पर कंपनियों ने इनसेंटिव के रूप में डॉक्टरों को अपने खर्च पर विदेश यात्राएं कराई। कुल मिलाकर डॉक्टरों ने विदेशी पैसा इस्तेमाल किया। वह भी उस स्थिति में जब फेमा सेक्शन 3 के तहत कोई भी व्यक्ति हिंदुस्तानी पते पर रहते विदेशी पैसा किसी भी रूप में उपयोग नहीं कर सकता।
लिखा : 15 दिन में जानकारी नहीं तो भेजेंगे समन
इंदौर. दबंग रिपोर्टर ।
सुप्रीमकोर्ट के सख्त निर्देश और एमसीआई के तीखे तेवर के बावजूद ड्रग ट्रायल के आरोपी डॉक्टरों के प्रति अस्पताल प्रशासन का रवैया सकारात्मक है। यही वजह है कि संभागायुक्त, एमजीएम कॉलेज की डीन और एसडीएम ने प्रवर्तन निर्देशालय (ईडी) को न ड्रग ट्रायल की जानकारी देना मुनासिब समझा। न सरकारी मंजूरी के बगैर हुई डॉक्टरों की विदेश यात्रा की जानकारी देना। बहरहाल, ईडी ने तीखे अंदाज में रिमाइंडर जारी करके स्पष्ट कर दिया है कि यदि अब जानकारी नहीं मिली तो अगली बार समन जारी करके ही बुलाना पड़ेगा।
एमवायएच के डॉ. अपूर्व पौराणिक, डॉ. हेमंत जैन, डॉ. अशोक वाजपेयी, मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. पुष्पा वर्मा, डॉ. सलील भार्गव, डॉ. अनिल भराणी ने 2004 से 2010 के बीच कुल 12 विदेश यात्राएं की। इनमें 9 यात्राएं ऐसी हैं जिनके लिए सरकार से किसी तरह की मंजूरी नहीं ली गई। इसका खुलासा होते ही पहले डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय जांच हुई। बात नहीं बनी तो संभागायुक्त प्रभात पाराशर को जांच के आदेश देना पड़े। हालांकि संभागायुक्त के सख्त आदेश के बावजूद जांचकर्ता अधिकारियों ने डॉक्टरों को रियायत दी और जांच रिपोर्ट आज दिन तक सबमिट नहीं की।
इसी बीच जनवरी के पहले सप्ताह में ईडी ने संभागायुक्त प्रभात पाराशर, डीन पुष्पा वर्मा और एसडीएम एसएल प्रजापत को पत्र लिखकर ड्रग ट्रायल और डॉक्टरों की विदेश यात्रा की जानकारी मांगी थी। महीनाभर हो गया लेकिन तीनों की ओर से किसी तरह की कोई जानकारी ईडी तक नहीं पहुंची। लिहाजा डॉक्टरों के खिलाफ फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के तहत प्रकरण दर्ज करने का मन बना चुके ईडी को फरवरी के पहले सप्ताह में रिमाइंडर नोटिस जारी करना पड़े। नोटिस में लिखा है 15 दिन में जानकारी दे। अन्यथा समन जारी करके ऑफिस बुलाकर लेंगे जानकारी।
फेमा क्यों...?
विदेशी कंपनियों की दवाइयां प्रमोट करने पर कंपनियों ने इनसेंटिव के रूप में डॉक्टरों को अपने खर्च पर विदेश यात्राएं कराई। कुल मिलाकर डॉक्टरों ने विदेशी पैसा इस्तेमाल किया। वह भी उस स्थिति में जब फेमा सेक्शन 3 के तहत कोई भी व्यक्ति हिंदुस्तानी पते पर रहते विदेशी पैसा किसी भी रूप में उपयोग नहीं कर सकता।
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