Sunday, June 28, 2015

कोयले का काला सच --- सीआईएल के बाद बाकी कंपनियां भी जांच के दायरे में


भाटिया और अग्रवाल कोल कॉर्पोरेशन के भी दस्तावेज खंगाल रहे हैं डीजीसीआई और डीआरआई
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
कोल इंडिया कॉर्पोरेशन (सीआईएल) के खिलाफ उजागर हुई 750 करोड़ की रॉयल्टी और स्टोलिंग एक्साइज की टैक्स चोरी के बाद डायरेक्टर जनरल सेंट्रल एक्साइज इंटेलीजेंस (डीजीसीईआई) ने देशभर के कोयला उत्पादकों और के्रता-विक्रेताओं के दस्तावेज खंगालना शुरू कर दिए हैं। इस कड़ी में इंदौर की भाटिया इंटरनेशनल और अग्रवाल कोल कॉर्पोरेशन जैसी कंपनियां भी शामिल है। अहमदाबाद में बीते दिनों उजागर हुई 600 करोड़ की कर चोरी में भी डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) पहले ही इन दोनों कंपनियों सहित उन तमाम कोयला आयातक कंपनियों के खिलाफ छानबीन कर रहा है जो समंदर के रास्ते कोयला मंगवाती हैं।
डीजीसीआई के एक अधिकारी ने बताया कि सीआईएल में 10 फीसदी जनभागीदारी और 90 फीसदी भागीदारी सरकारी है। दूसरे अर्थों में यह भारत सरकार का उपक्रम है। बावजूद इसके सीआईएल व उसकी सहयोगी कंपनियों ने 750 करोड़ की रॉयल्टी और स्टोइंग एक्साइज की चोरी की। इस खुलासे के बाद इस बात का अनुमान लगाया गया कि जब सरकारी उपक्रम होकर सीआईएल यदि 750 करोड़ की कर चोरी कर सकता है तो रिलायंस, अडानी सहित देशभर की तमाम बड़ी कंपनियां ईमानदारी से कैसे काम करती होगी। इसी सवाल के जवाब में डीजीसीआई ने तमाम कोयला उत्पादक कंपनियों और के्रता-विक्रेताओं के दस्तावेज खंगालना शुरू कर दिए हैं।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि डीजीसीआई और डीआरआई कोयला कारोबार से जुड़ी कंपनियों को लेकर कस्टम, सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स, आयकर और वाणिज्यिक कर जैसे विभागों से भी जानकारी जुटा रही है। गौरतलब है भाटिया और अग्रवाल के खिलाफ आयकर और सेंट्रल एक्साइज के साथ डीजीसीआई पहले भी कार्रवाई कर चुका है।
क्या-क्या गड़बड़
-- जो कंपनियां केप्टिव पॉवर प्लांट के लिए कोयला खदाने लेती है वे निकाले गए कोयले का इस्तेमाल सिर्फ बिजली उत्पादन के लिए कर सकती हैं। कोयला बेच नहीं सकती। बावजूद इसके बड़ी-बड़ी कंपनियों ने अवैधानिक रूप से बेचा है। भाटिया कोल और अग्रवाल कोल आयातक-ट्रेडर कंपिनयों ने गैरकानूनी रूप से कोयला खरीदा है।
-- कंपनियां मिसक्लासीफिकेशन (गलत वर्गीकरण) करके बंदरगाहों से मंगवाए जाने वाले बिटुमिनस कोयले को स्टीम कोयला बताकर 10.3 प्रतिशत की टैक्स चोरी करती है जो करोड़ों में होती है।
-- कोयला कारोबार से जुड़ी कंपनियां कोयले को पानी डालकर पहले गिला करती हैं और बाद में बेचती है ताकि वजन बढ़ाकर ज्यादा कीमत वसूली जा सके। गिले कोयले के कारण पहले ही देशभर के पॉवर प्लांट परेशान है।
-- कई कंपनियां भारतीय कोयले के मुकाबले आयातीत कोयले को ज्यादा महत्व देती है ताकि टैक्स चोरी करके उस पर ज्यादा मुनाफा कमाया जा सके।



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