तराना के 15 गांवों में नर्मदा-शिप्रा बहुउद्देशीय माइक्रो उद्ववहन सिंचाई परियोजना की हकीकत
मेढ़ में तक डली 2480 करोड़ की लाइन, फिर भी खेत रीते
उज्जैन और शाजापुर के गांवों में जल संकट
इंदौर. विनोद शर्मा ।
उज्जैन का आबादखेड़ी गांव...। तराना से लगे इस गांव में कहने को सिंचाई के लिए नर्मदा की लाइन डली है...। जिसके भरोसे किसानों ने खेतों में गेहूं के बीजे रौंपे थे। आस थी मां नर्मदा से...। अबकि बार गेहूं की फसल जोरदार होगी। हुआ उलटा, नर्मदा के पानी के इंतजार में गेहूं खेत में पड़े-पड़े सड़ गए। अंकुरित ही नहीं हो पाए। पूरे खेत में कुछ-कुछ ही हिस्से हैं, जहां गेहूं की मुरझाई सी फसल चार-छह ऊंची नजर आती है।
ये मैदानी हकीकत है नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) की महत्वकांक्षी नर्मदा-शिप्रा बहुउद्देशीय माइक्रो उद्ववहन सिंचाई परियोजना की। 2489 करोड़ रुपए से ज्यादा का खर्चा करके इस योजना के माध्यम से नर्मदा का पानी बागली से उज्जैन और शाजापुर के 100 गांवों के लिए लाया गया। मार्च में एनवीडीए के उतावले अफसरों ने मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव से इसका उद्घाटन भी करा दिया। 9 महीने हो चुके हैं उद्घाटन को। अब तक 75 गांव में ही पानी पहुंचा। 25 गांव में तकनीकि समस्या के कारण पानी पहुंचाने में योजना को अंजाम देने वाली कंपनी एलएंडटी भी नाकाम है।
जब-जब पानी की सप्लाई होती है, कहीं न कहीं लाइन फुट जाती है। जिसे सुधारने में समय लगता है। कभी टेक्नीकली। कभी लाइन फुटने से जिन किसानों का नुकसान हुआ, भरपाई के लिए उनके द्वारा की जा रही जिद के कारण। आबादखेड़ी, कनासिया, बिसनखेड़ा, इटावा, तोबरीखेड़ा, झरनावदा, दुधली, नानूखेड़ा व अन्य गांव। आबादखेड़ी गांव के जगदीश पंडाजी के अनुसार 15 नवंबर से अब तक एक ही बार पानी आया है। यदि मालूम होती कि पानी नहीं मिलेगा, तो हम गेहूं नहीं लगाते।
किसानों के कारण फुटी लाइन
एलएंडटी के कारिंदे कहते हैं कि लाइन खराब नहीं डली है, गुणवत्तायुक्त है। हर 300 मीटर पर एक पेटी लगी है। जिसमें 8 से 10 कनेक्शन हैं। जिससे कम्प्यूटराइज्ड जल आपूर्ति होती है। किसान अपने फायदे के लिए पेटी खोलकर कनेक्शन से छेड़छाड़ करता है, लाइन फुट जाती है।
तराना में बनाया ऑफिस...
योजना का ऑफिस तराना में बना है। जहां बीस लोगों का स्टाफ है। किसानों की शिकायत पर हिंदुस्तान मेल की टीम मौके पर पहुंची। जहां एलएंडटी के अफसरों से किसान बनकर बात की। उन्होंने हमें भी वैसे ही टाले दिए, जैसे किसानों को देते हैं। बोले आज पंप बंद है, कल से पानी आ जाएगा। हालांकि रविवार को जब हिंदुस्तान मेल ने अफसरों के दावे की तस्दीक की तो पता चला कि पानी नहीं पहुंचा। मतलब, किसानों की शिकायत 100 फीसदी सही थी।
एक नजर में परियोजना
लाभान्वित गांव : 100
तराना-घट्टिया : 83 गांव में 27490 हेक्टेयर
शाजापुर : 17 गांव में 2728 हेक्टेयर
उज्जैन इंडस्ट्री : 129.60 एमएलडी
नागदा इंडस्ट्री : 129.60 एमएलडी
घट्टिया व गुराड़िया : 21.60 एमएलडी पेयजल
आए दिन हो रही लड़ाई
खेतों में सिंचाई के लिए किसानों के बीच आए दिन विवाद हो रहे हैं, लड़ाई हो रही है। पिछले दिनों तराना के बनावट गांव में पानी को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ। विवाद के बाद रात में किसान सुभाष पिता सीताराम गुर्जर पर हमला हुआ। घायल किसान को तराना के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे उज्जैन रेफर कर दिया गया।