Saturday, December 27, 2025

नर्मदा के इंतजार में 2000 बीघा के गेहूं बर्बाद


तराना के 15 गांवों में नर्मदा-शिप्रा बहुउद्देशीय माइक्रो उद्ववहन सिंचाई परियोजना की हकीकत
मेढ़ में तक डली 2480 करोड़ की लाइन, फिर भी खेत रीते 
उज्जैन और शाजापुर के गांवों में जल संकट
इंदौर. विनोद शर्मा । 
उज्जैन का आबादखेड़ी गांव...। तराना से लगे इस गांव में कहने को सिंचाई के लिए नर्मदा की लाइन डली है...। जिसके भरोसे किसानों ने खेतों में गेहूं के बीजे रौंपे थे। आस थी मां नर्मदा से...। अबकि बार गेहूं की फसल जोरदार होगी। हुआ उलटा, नर्मदा के पानी के इंतजार में गेहूं खेत में पड़े-पड़े सड़ गए। अंकुरित ही नहीं हो पाए। पूरे खेत में कुछ-कुछ ही हिस्से हैं, जहां गेहूं की मुरझाई सी फसल चार-छह ऊंची नजर आती है।
 ये मैदानी हकीकत है नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) की महत्वकांक्षी नर्मदा-शिप्रा बहुउद्देशीय माइक्रो उद्ववहन सिंचाई परियोजना की। 2489 करोड़ रुपए से ज्यादा का खर्चा करके इस योजना के माध्यम से नर्मदा का पानी बागली से उज्जैन और शाजापुर के 100 गांवों के लिए लाया गया। मार्च में एनवीडीए के उतावले अफसरों ने मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव से इसका उद्घाटन भी करा दिया। 9 महीने हो चुके हैं उद्घाटन को। अब तक 75 गांव में ही पानी पहुंचा। 25 गांव में तकनीकि समस्या के कारण पानी पहुंचाने में योजना को अंजाम देने वाली कंपनी एलएंडटी भी नाकाम है। 
 जब-जब पानी की सप्लाई होती है, कहीं न कहीं लाइन फुट जाती है। जिसे सुधारने में समय लगता है। कभी टेक्नीकली। कभी लाइन फुटने से जिन किसानों का नुकसान हुआ, भरपाई के लिए उनके द्वारा की जा रही जिद के कारण। आबादखेड़ी, कनासिया, बिसनखेड़ा, इटावा, तोबरीखेड़ा, झरनावदा, दुधली, नानूखेड़ा व अन्य गांव। आबादखेड़ी गांव के जगदीश पंडाजी के अनुसार 15 नवंबर से अब तक एक ही बार पानी आया है। यदि मालूम होती कि पानी नहीं मिलेगा, तो हम गेहूं नहीं लगाते।  
किसानों के कारण फुटी लाइन 
एलएंडटी के कारिंदे कहते हैं कि लाइन खराब नहीं डली है, गुणवत्तायुक्त है। हर 300 मीटर पर एक पेटी लगी है। जिसमें 8 से 10 कनेक्शन हैं। जिससे कम्प्यूटराइज्ड जल आपूर्ति होती है। किसान अपने फायदे के लिए पेटी खोलकर कनेक्शन से छेड़छाड़ करता है, लाइन फुट जाती है। 
तराना में बनाया ऑफिस... 
योजना का ऑफिस तराना में बना है। जहां बीस लोगों का स्टाफ है। किसानों की शिकायत पर हिंदुस्तान मेल की टीम मौके पर पहुंची। जहां एलएंडटी के अफसरों से किसान बनकर बात की। उन्होंने हमें भी वैसे ही टाले दिए, जैसे किसानों को देते हैं। बोले आज पंप बंद है, कल से पानी आ जाएगा। हालांकि रविवार को जब हिंदुस्तान मेल ने अफसरों के दावे की तस्दीक की तो पता चला कि पानी नहीं पहुंचा। मतलब, किसानों की शिकायत 100 फीसदी सही थी। 
एक नजर में परियोजना 
लाभान्वित गांव : 100 
तराना-घट्टिया : 83 गांव में 27490 हेक्टेयर
शाजापुर : 17 गांव में 2728 हेक्टेयर 
उज्जैन इंडस्ट्री : 129.60 एमएलडी 
नागदा इंडस्ट्री : 129.60 एमएलडी 
घट्टिया व गुराड़िया : 21.60 एमएलडी पेयजल
आए दिन हो रही लड़ाई 
खेतों में सिंचाई के लिए किसानों के बीच आए दिन विवाद हो रहे हैं, लड़ाई हो रही है। पिछले दिनों तराना के बनावट गांव में पानी को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ। विवाद के बाद रात में किसान सुभाष पिता सीताराम गुर्जर पर हमला हुआ। घायल किसान को तराना के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे उज्जैन रेफर कर दिया गया।

sir मतदाता सूची से 23.64 लाख महिलाओं की छुट्टी

मतदाता सूची से हटने में भी लाड़ली ने मारी बाजी.... 
एसआईआर में कुल 42.74 लाख नाम कटे, इनमें 55.36 प्रतिशत महिलाएं 
पिछले चार चुनाव में रही महिलाओं की जोरदार भागीदारी 
विनोद शर्मा ।  
मप्र में महिलाएं अव्वल है। फिर स्कूल-कॉलेज की परीक्षाओं में बाजी मारने की बात हो या "लाड़ली बहना' जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में। और तो और...। अब चुनाव आयोग द्वारा कराए गए सिस्टमेटिक आइडेंटिफिकेश रिव्यू (एसआईआर) में भी बेटियों ने ही बाजी मारी है! यकीन न हो तो चुनाव आयोग के आंकड़े ही देख लो। जहां एसआईआर के आधार पर 42.74 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाना है। इनमें 19.19 लाख की वोटर पुरुष हैं जबकि महिलाओं की संख्या 23.64 प्रतिशत। मानें जिन मतदाताओं के नाम हटना है उनमें 55.36 प्रतिशत सरकार की लाड़लियां हैं।  
 एसआईआर के बाद मप्र की वोटर लिस्ट जारी कर दी गई है। एसआईआर 2025 में 42.74 लाख ऐसे मतदाता मिले हैं। जिनके नाम अन मैपिंग, शिफ्टेड, मल्टीपल एंट्री और डेड वोटर के रूप में एंट्री पाए गए हैं। प्रदेश में 42.74 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए हैं। 8.40 लाख नाम ऐसे हैं, जिनकी मैपिंग नहीं हुई है। इन्हें हटाने के बाद मप्र में मतदातओं की संख्या 5.74 करोड़ से घटकर 5.56 लाख रह गई है। जिसकी जानकारी पत्रकार वार्ता में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा ने दी थी। झा के अनुसार SIR का पहला चरण पूरा हुआ। प्रदेश में 5 करोड़ 74 लाख 6 हजार मतदाता थे। अब 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार गणना पत्रक प्राप्त हुए हैं। प्रक्रिया के दौरान 42 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। SIR के बेहतर क्रियान्वयन के लिए 2500 बीएलओ को सम्मानित किया है। 
 जिन मतदाताओं के नाम कटे हैं, वे प्रारूप 6 के माध्यम से नाम जुड़वा सकते हैं। 30 दिसंबर से 22 जनवरी के बीच दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो पाई है, उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे और जिनके दस्तावेज सही पाए जाएंगे, उन्हें अंतिम प्रकाशन में जोड़ा जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 21 फरवरी को किया जाएगा।
42 लाख 74 हजार 160 नाम हटे
दिवंगत : 8.46 लाख  
अनुपस्थित : 8.42 लाख   
डुप्लीकेट मतदाता : 2.77 लाख   
शिफ्टेड : 23.09 लाख 
मध्यप्रदेश के 865832 मतदाता ऐसे हैं। इनका नाम 2003 की SIR लिस्ट में था लेकिन 2025 की SIR लिस्ट में उनका नाम नहीं आया है।
कहां कितने मृत मतदाता
अधिकतम
जबलपुर 51 हजार
इंदौर 43 हजार
न्यूनतम   
पांढुरना 4981
हरदा 5303 
   अंतिम प्रकाशन मतदाता(SIR से पहले) मतदाता(SIR से बाद)
पुरुष 2,92,74,141 2,93,91,548 2,74,82,233
महिला 2,78,17,016 2,80,13,362 2,56,48,831
थर्ड जेंडर 1,210 1253 919
कुल 5,70,92,367 5,74,06,143 5,31,31,983
45 दिन चला एसआईआर 
7 नवंबर से शुरू हुई यह प्रक्रिया लगभग 45 दिन तक चली, जिसमें हजारों बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर जाकर मतदाताओं का भौतिक सत्यापन किया है। जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं, उन्हें इलेक्शन कमीशन की तरफ से नोटिस देकर अपने नाम दोबारा जुड़वाने का अवसर दिया जाएगा।
विधानसभा चुनाव में ज्यादा बढ़े वोटर 
अक्टूबर 2018 50394086 
अक्टूबर 2023 54377095 +39,83,009
फरवरी 2024 56340064 +19,62,969
जनवरी 2025 57092367 +7,52,303
दो साल में महिलाएं बढ़ी थी 15.67 लाख  
   2023 2025 अंतर
पुरुष 28126191 29274141 11,47,950
महिला 26249578 27817016 15,67,438
(अक्टूबर 2018 के मुकाबले 2025 तक 37,40,323 महिला वोटर बढ़ी हैं। वहीं पुरुष मतदाताओं की संख्या में 30,17,984 ही बढ़ी थी। जो महिलाओं के मुकाबले 7,22,339 अधिक है। )
8.65 लाख मतदाताओं को मिलेंगे नोटिस 
23 दिसंबर से प्रदेश में 8 लाख 65 हजार 832 मतदाताओं को नोटिस भेजे जाएंगे. इनमें इंदौर में सबसे ज्यादा 1 लाख 33 हजार 696 मतदाताओं को नोटिस भेजे जाएंगे.
किस जिले में कितने जाएंगे नोटिस
इंदौर - 133696
भोपाल - 116925
जबलपुर - 69394
ग्वालियर - 68540
उज्जैन - 48035
सबसे कम नोमैपिंग वाले जिले
सीधी-1356
निवाड़ी - 1448
झाबुबा - 1948
उमरिया - 2081
डिंडोरी- 2240

सबसे ज्यादा यहां पते पर नहीं मिले
इंदौर 1,75,424
भोपाल 1,01,053
जबलपुर 66678 
सबसे ज्यादा शिफ्टेड वोटर
भोपाल 2,86,661
इंदौर 1,57,898
ग्वालियर 1,48,273 
सबसे ज्यादा मृत मिले 
जबलपुर 51354
इंदौर 43741
सागर 36467

188.35 करोड़ के बैंकिंग घोटाला में ईडी का छापा

188.35 करोड़ के बैंकिंग घोटाला में ईडी का छापा 
डमी डायरेक्टरों के दम पर खेला रूचि का खेल उजागर 
इंदौर. विनोद शर्मा।
सीबीआई ने पांच साल पहले रूचि ग्रुप से जुड़े जिस मामले में छापेमार कार्रवाई की थी, उसी मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छानबीन शुरू कर दी। मामला कर्ज के नाम पर किए गए 188.35 करोड़ के बैकिंग घोटाले से जुड़ा है। इसमें ईडी की टीम ने शाहरा परिवार के साथ नंदानगर निवासी सचिन गुप्ता के ठिकानों पर भी कार्रवाई की। सचिन को उसके मामा ने रूचि से जोड़ा था। बाद में सचिन ने अपने खाते ऑपरेट करने की जिम्मेदारी रूचि समूह को देकर बड़ी पोस्ट ले ली थी। 
  ईडी ने 23 दिंसबर को छापे मारे थे। कार्रवाई उमेश शाहरा के साथ 112/7 नंदानगर निवासी सचिन गुप्ता के घर-दफ्तर पर भी हुई। ईडी के अनुसार रूचि समूह की कंपनियों के खिलाफ बैंक धोखाधड़ी, धन के गबन और दस्तावेजों में हेरफेर जैसे मामलों में सीबीआई ने प्रकरण दर्ज किया था। उसी प्रकरण के आधार पर ईडी ने छानबीन शुरू की। बताया जा रहा है कि मेसर्स रुचि ग्लोबल लिमिटेड, मेसर्स रुचि एक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड और मेसर्स आरएसएएल स्टील प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ जांच चल रही है। कैलाश चंद्र शाहरा और उमेश शाहरा द्वारा स्थापित कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी संस्थाओं, जाली साख पत्रों और फर्जी बिक्री/खरीद का इस्तेमाल करके धन की हेराफेरी की। कई बैंकों को नुकसान पहुंचाया।
 तलाशी के दौरान आरोपियों और उनके परिवार के खातों में 20 लाख रुपए बैलेंस मिला। 23 लाख रुपए नकद मिले, जिन्हें सीज कर लिया। बताया जा रहा है कि शिवानी गुप्तान एग्रोट्रेड, इंदिरा इंडस्ट्रीज में गजरा बिवल गियर्स, गोधा केबकॉन में सीएस है। सचिन गुप्ता का नाम आया है उसकी प्रोफाइल पर भी सीएस लिखा है। 

ऐसे खेला खेल... 
2015-16 में हुए फर्जीवाड़े के सूत्र 2019 में ही मिल गए थे। जिनके आधार पर बैंक ऑफ बड़ौदा ने 2020 तक गहरी छानबीन की। फिर इसी कड़ी में इसमें पंजाब नेशनल बैंक, जम्मू एंड कश्मीर बैंक समेत दो अन्य बैंकों में भी कंपनी के कर्ताधर्ताओं के फर्जीवाड़े सामने आए। जांच के तहत कंपनी द्वारा खरीद-फरोख्त में बड़े लेन-देन सामने आए। जिन कंपनियों से लेन-देन बताया उसमें अधिकांश रुचि ग्लोबल लिमिटेड के मुंबई पते पर ही रजिस्टर्ड है। कंपनियों में शाहरा परिवार ने करीबियों को डमी डायरेक्टर बना रखा है। रुचि ग्लोबल लिमिटेड पर करीब 300 करोड़ रु. बकाया था। बैंक 111.65 करोड़ की रिकवरी कर चुकी है। बैंकों का अभी 188.35 करोड़ से ज्यादा बाकी है।
इन कंपनियों में ऐसे किए खेल 
एग्रोट्रेड इंडिया लिमिटेड : इसका पुराना नाम रूचि ग्लोबल लिमिटेड है। दिसंबर 1996 में पंजीबद्ध कंपनी में 2019 तक साकेत बरोदिया, यामिनी जैन, ईश्वर कलांतरी, विजय गुप्ता के साथ उमेश शाहरा भी डायरेक्टर थे। शाहरा को छोड़ बाकि डमी डायरेक्टर थे। कंपनी पर देना बैंक का 343.40 करोड़ बकाया है। 
रूचि एक्रोनी इंडस्ट्री लिमिटेड : 1976 में बनी ये कंपनी अब स्टीलटेक रिसोर्सिंग लिमिटेड बन चुकी है। इसमें राजेश सोनी, नितेश नागर, प्रमोद झालानी,यामिनी जैन,प्रकाश देशमुख, इशिता खंडेलवाल डमी डायरेक्टर रहे हैं या हैं। कंपनी पर यूको बैंक का 61.50 करोड़ बाकि है। जो 2001 में बतौर लोन लिया था। 
आरएसएएल स्टील लिमिटेड : जो अब एलजीबी स्टील प्रा.लि. बन चुकी है। 2010 में कंपनी पंजीबद्ध हुई। इसमें अरविंद मिश्रा,सुनील विजय, शिवानी गुप्ता, इशिता खंडेलवाल, विजय महाजन और अखिलेश गुप्ता डायरेक्ट रहे हैं, जो डमी थे। 
इन तीनों कंपनियों का पता 611 तुलसिआनी चेम्बर नरिमन पॉइंट मुंबई है। जो रूचि समूह का ही पता है।

कचरे में कंचन ढूंढने वालों ने कंचन का कचरा कर दिया

सफाई में नंबर-1 इंदौर के नंबर-1 मार्केट में सफाई ने तोड़ा दम
शायद अफसर थक गए खिताब लेते-लेते
इंदौर. विनोद शर्मा ।
देश-दुनिया को कचरे से कंचन बनाने का हुनर सीखाने वाले इंदौर में "कंचन' का बाजार कचरे से परेशान है। हद तो यह है कि कचरे के कारण कारोबारी और उनके कारिंदे बीमार है। कंचन का कारोबार अपनी चमक खो रहा है। 311 से लेकर 181 तक पर शिकायतें की। निदान के नाम पर कर्मचारी आते हैं, चार तगारी माल उठाते हैं, इससे ज्यादा नहीं होगा कहते हैं और चलते बनते हैं। 
 स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर लगातार आठ बार से नंबर-1 है। भारत सरकार अवार्ड देते हुए नहीं थकी लेकिन लगता है कि इंदौर नगर निगम के जिम्मेदारों का अवार्ड से मन भर चुका है। इसीलिए देश के सबसे साफ शहर इंदौर का सबसे खास मार्केट (सराफा) में 100 मीटर लम्बी और 30 फीट चौड़ी बेकलेन कचरे और मलबे से ओवर फ्लो है। चैम्बर चौक है। ड्रेनेज का गंदा पानी ओवर फ्लो होकर 80 साल पुराने मार्केट की तल मंजिल पर बहता है। बदबू इतनी कि ग्राहक तो ग्राहक, दुकानदार बैठने की हिम्मत न कर पाए। ऊपर से मच्छर-मक्खी और चूहों का आतंक अलग।
 सबसे ज्यादा हालत बुलियन मार्केट की खराब है। जहां तल मंजिल पर 10 ज्वैलर्स की दुकानें हैं। पीछे दो चैम्बर हैं। दोनों चौक। गंदा पानी चार फीट नीचे मार्केट की फ्लोर पर रेलता नजर आता है। यही स्थित जोशी मार्केट व अन्य मार्केट की है। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने सीएम हैल्पलाइन से लेकर महापौर हैल्पलाइन तक पर शिकायत करके देख लिया, निदान नहीं होता। 
कचरा हटाकर निगम पार्किंग बना सकता है
बेकलाइन 100 मीटर लम्बी और 30 फीट चौड़ी है, कचरा साफ करके निगम इसका इस्तेमाल पार्किंग के तौर पर कर सकता है। 200 गाड़ियां लग सकती है। दिक्कत यह है कि शिकायत के बावजूद निगम के लोग ध्यान देने को तैयार नहीं। इसीलिए कचरा नहीं उठता। हर जगह शिकायत करके देख लिया, किसी को कोई मतलब नहीं। सभी को मेनरोड की सफाई से मतलब है, बेकलेन बर्बाद हो जाए, क्या लेना-देना। 
ललित बड़जात्या, बड़जात्या ज्वैलर्स 
दो तगाड़ी कचरा, चार दिन की चांदनी
पार्षद को बोलो तो कर्मचारी भेज देते हैं, जो बेमन से काम करते हैं, दो-चार तगारी माल हटाते हैं, उसके भी पैसे लेकर चले जाते हैं। चार दिन बाद फिर वही हालत। 
प्रवीण सोनी, बाबूलाल हेमराज फर्म
मार्केट नीचे, सीवरेज ऊपर 
पहले गली खुदी थी, पेवर लगने के लिए। तब सीवरेज लाइन डली थी। मार्केट की तल मंजिल से चार फीट ऊंची कर गए लाइन। इसीलिए चैम्बर का ओवर फ्लो बुलियन मार्केट से क्रॉस होता है। 
कौशल सोनी, सोनी ज्वैलर्स 
एक दिन में निदान नहीं, 15 दिन लगेंगे 
चैम्बर जाम है। मार्केट में पानी घुसता है। चूहें और कॉकरोच से व्यापारी परेशान है। गली के साथ ही दुकानें भी पोली कर दी है। व्यवस्था सुधारना, एक दिन का काम नहीं है। 15 दिन सतत काम करना होगा।  
अजय रांका, राजहंस 
कस्टमर बैठने की हिम्मत नहीं करता
बदबू के कारण हमारा बैठना मुश्किल होता है। कस्टमर पूरे टाइम मुंह पर रूमाल रखकर बैठता है। हमें तो बैठना है, मजबूरी है लेकिन मच्छरों के काटने से ग्राहक बीमार होता है सो अलग। 
आरती जैन, गौरव ज्वैलर्स
सेहत और कारोबार प्रभावित 
मैंने ऑनलाइन शिकायत की। कारीगर आते हैं, कचरा उठाते हैं, बदबू और कीड़ों का निराकरण नहीं होता। बदबू के मारे ग्राहक बैठता नहीं। कारोबार प्रभावित हो रहा है। 
अंकित राठौर, आदिनाथ ज्वैलर्स
चूहो ने कुरेद दी दुकानें 
कारोबार करना है तो बैठना है। मच्छर काटे या कीड़े। बस इसी चक्कर में बीमार हो रहे हैं। चूहे बड़े-बड़े हैं, दुकानों को पोला कर रहे हैं। गली सुधर जाएगी तो पार्किंग या अन्य काम भी आ सकती है।  
राधेश्याम जोशी, जोशी ज्वैलर्स 
हल्के में ले रहे हैं सराफे की समस्या 
सराफे की समस्या को हल्के में लिया जा रहा है। सराफा- चौपाटी धरोहर मानते हैं लेकिन सफाई नहीं होती। ड्रेनेज लाइन चौक रहती है। शिकायत करते हैं, दो बजे गाड़ी लेकर आते हैं, परेशान करते हैं। 
गगन गुप्ता, व्यापारी
बाजार खुलने के बाद नहीं आती कचरा गाड़ी
लम्बे समय से परेशान हैं। शिकायतों का निदान नहीं। कचरा गाड़ी सुबह 7 बजे आती है। बाजार खुलता है 12 बजे। फिर गाड़ी नहीं आती। बैकलाइन में जाने का रास्ता बंद कर रखा है। कहते हैं जाने की जगह नहीं।   
विजय सोनी, व्यापारी 
संवारने का बोला, तब से गली खराब
गली पहले अच्छी थी। निगम ने संवारने का सपना दिखाया था उसके बाद से हालात बद्तर हो गए। जगह बहुत है। कमसकम हम जैसे रहवासियों के बच्चों के ही खेलने के काम आ जाएगी, यदि साफ रहे तो।  
जम्बू जैन,व्यापारी-रहवासी

सबसे अलग, जनबस की झलक

 लोक परिवहन की तैयारियां तेज, इंदौर पहुंचा 24 बसों का लॉट
सभी एडवांस फेसिलिटिज से लैस है बसें 
इंदौर. विनोद शर्मा । 
मप्र की आवाम से सरकारी परिवहन सेवा देना को वादा मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पिछले दिनों किया था उस पर मैदानी काम शुरू हो चुका है। अप्रैल से इंदौर में जो लोक परिवहन शुरू होना है उसके लिए दो दर्जन बसें इंदौर पहुंच चुकी है। मुंडला नायता आईएसबीटी पर खड़ी ये बसें इलेक्टिक और फूली ऐसी है। बहरहाल, इन बसों की टेस्टिंग जारी है। 
 लोक परिवहन का पहला चरण इंदौर से शुरू होगा। इसके तहत 32 रूट तय हुए हैं। जहां कुल 310 बसें चलेगी। नए बस स्टैंड की दोपहिया-चार पहिया पार्किंग में ई-बसों (जनबस) का पहला लॉट आ चुका है। सबसे पहले हिंदुस्तान मेल ने इन बसों का जायजा लिया। बसें आइशर कंपनी की है। जिन्हें स्काईलाइन प्रो का नाम दिया है। इस बस में 25 लोगों के सीट पर बैठने की व्यवस्था है। फूली ऐसी है। आपको गर्मी का अहसास नहीं होगा। ड्राइवर सीट के सामने पंखा लगा है, ताकि ड्राइवर को हवा मिलती रहे।  
 फायर एस्टिंग्यूशर हैं। जीपीएस इंस्टॉल है। आगे-पीछे स्क्रीन लगी है, जिस पर यात्रियों को स्टॉप की जानकारी मिलेगी। इमरजेंसी सर्विस के तहत दो गेट है। दोनों ही ऑटोमेटिक हैं। मेनगेट वैसा ही बड़ा है, जैसा सिटी बसों में हम देखते आए हैं। इसके साथ आपातकालीन स्थिति में ड्राइवर को बस रोकने का संदेश देने के लिए हैंडल पर स्टॉप बटन लगा है। 
 सीटें दो-दो के सेट में लगी है। विंडो साइड दोनों तरफ पांच-पांच लाइन है। बीच का स्पेस खाली है। दो चेयर ड्राइवर के पीछे है। सीट स्ट्रेट हैं और कम्फर्टेबल है। इन बसों के लिए तकरीबन दो हजार वर्गफीट का चार्जिंग स्टेशन बनना है, जिसका काम शुरू हो चुका है। 
व्हीलचेअर भी अंदर चली जाएगी 
खास बात यह है कि मेनगेट और क्लीनर गेट के बीच तीन से साढ़े तीन फीट चौड़ा एक गेट अलग लगा है, जहां फोर्डेबल रैंप की व्यवस्था है। यदि कोई यात्री व्हीलचेयर पर है तो रैंप के माध्यम से उसकी व्हीलचेयर सीधे बस में चली जाएगी। यात्री को उतरने या उतारने या चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
भगवा रंग... 
दूसरी खास बात बसों का भगवा रंग है। चूंकि इंदौर से लेकर दिल्ली तक भाजपा की सरकार है और भाजपा भगवा-सनातन की पेरोकार है। इसीलिए पहले चरण की इन बसों का रंग भगवा रखा गया है। इन बसों का उपयोग लोकार्पण में होगा। 
अन्य सुविधाएं...
स्पीड गर्वनर, जीपीएस, ऑटोमेटिक ड्राइविंग सिस्टम (अडास), लाइव मॉनिटरिंग व अन्य।

Monday, November 10, 2025