Saturday, December 27, 2025

कचरे में कंचन ढूंढने वालों ने कंचन का कचरा कर दिया

सफाई में नंबर-1 इंदौर के नंबर-1 मार्केट में सफाई ने तोड़ा दम
शायद अफसर थक गए खिताब लेते-लेते
इंदौर. विनोद शर्मा ।
देश-दुनिया को कचरे से कंचन बनाने का हुनर सीखाने वाले इंदौर में "कंचन' का बाजार कचरे से परेशान है। हद तो यह है कि कचरे के कारण कारोबारी और उनके कारिंदे बीमार है। कंचन का कारोबार अपनी चमक खो रहा है। 311 से लेकर 181 तक पर शिकायतें की। निदान के नाम पर कर्मचारी आते हैं, चार तगारी माल उठाते हैं, इससे ज्यादा नहीं होगा कहते हैं और चलते बनते हैं। 
 स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर लगातार आठ बार से नंबर-1 है। भारत सरकार अवार्ड देते हुए नहीं थकी लेकिन लगता है कि इंदौर नगर निगम के जिम्मेदारों का अवार्ड से मन भर चुका है। इसीलिए देश के सबसे साफ शहर इंदौर का सबसे खास मार्केट (सराफा) में 100 मीटर लम्बी और 30 फीट चौड़ी बेकलेन कचरे और मलबे से ओवर फ्लो है। चैम्बर चौक है। ड्रेनेज का गंदा पानी ओवर फ्लो होकर 80 साल पुराने मार्केट की तल मंजिल पर बहता है। बदबू इतनी कि ग्राहक तो ग्राहक, दुकानदार बैठने की हिम्मत न कर पाए। ऊपर से मच्छर-मक्खी और चूहों का आतंक अलग।
 सबसे ज्यादा हालत बुलियन मार्केट की खराब है। जहां तल मंजिल पर 10 ज्वैलर्स की दुकानें हैं। पीछे दो चैम्बर हैं। दोनों चौक। गंदा पानी चार फीट नीचे मार्केट की फ्लोर पर रेलता नजर आता है। यही स्थित जोशी मार्केट व अन्य मार्केट की है। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने सीएम हैल्पलाइन से लेकर महापौर हैल्पलाइन तक पर शिकायत करके देख लिया, निदान नहीं होता। 
कचरा हटाकर निगम पार्किंग बना सकता है
बेकलाइन 100 मीटर लम्बी और 30 फीट चौड़ी है, कचरा साफ करके निगम इसका इस्तेमाल पार्किंग के तौर पर कर सकता है। 200 गाड़ियां लग सकती है। दिक्कत यह है कि शिकायत के बावजूद निगम के लोग ध्यान देने को तैयार नहीं। इसीलिए कचरा नहीं उठता। हर जगह शिकायत करके देख लिया, किसी को कोई मतलब नहीं। सभी को मेनरोड की सफाई से मतलब है, बेकलेन बर्बाद हो जाए, क्या लेना-देना। 
ललित बड़जात्या, बड़जात्या ज्वैलर्स 
दो तगाड़ी कचरा, चार दिन की चांदनी
पार्षद को बोलो तो कर्मचारी भेज देते हैं, जो बेमन से काम करते हैं, दो-चार तगारी माल हटाते हैं, उसके भी पैसे लेकर चले जाते हैं। चार दिन बाद फिर वही हालत। 
प्रवीण सोनी, बाबूलाल हेमराज फर्म
मार्केट नीचे, सीवरेज ऊपर 
पहले गली खुदी थी, पेवर लगने के लिए। तब सीवरेज लाइन डली थी। मार्केट की तल मंजिल से चार फीट ऊंची कर गए लाइन। इसीलिए चैम्बर का ओवर फ्लो बुलियन मार्केट से क्रॉस होता है। 
कौशल सोनी, सोनी ज्वैलर्स 
एक दिन में निदान नहीं, 15 दिन लगेंगे 
चैम्बर जाम है। मार्केट में पानी घुसता है। चूहें और कॉकरोच से व्यापारी परेशान है। गली के साथ ही दुकानें भी पोली कर दी है। व्यवस्था सुधारना, एक दिन का काम नहीं है। 15 दिन सतत काम करना होगा।  
अजय रांका, राजहंस 
कस्टमर बैठने की हिम्मत नहीं करता
बदबू के कारण हमारा बैठना मुश्किल होता है। कस्टमर पूरे टाइम मुंह पर रूमाल रखकर बैठता है। हमें तो बैठना है, मजबूरी है लेकिन मच्छरों के काटने से ग्राहक बीमार होता है सो अलग। 
आरती जैन, गौरव ज्वैलर्स
सेहत और कारोबार प्रभावित 
मैंने ऑनलाइन शिकायत की। कारीगर आते हैं, कचरा उठाते हैं, बदबू और कीड़ों का निराकरण नहीं होता। बदबू के मारे ग्राहक बैठता नहीं। कारोबार प्रभावित हो रहा है। 
अंकित राठौर, आदिनाथ ज्वैलर्स
चूहो ने कुरेद दी दुकानें 
कारोबार करना है तो बैठना है। मच्छर काटे या कीड़े। बस इसी चक्कर में बीमार हो रहे हैं। चूहे बड़े-बड़े हैं, दुकानों को पोला कर रहे हैं। गली सुधर जाएगी तो पार्किंग या अन्य काम भी आ सकती है।  
राधेश्याम जोशी, जोशी ज्वैलर्स 
हल्के में ले रहे हैं सराफे की समस्या 
सराफे की समस्या को हल्के में लिया जा रहा है। सराफा- चौपाटी धरोहर मानते हैं लेकिन सफाई नहीं होती। ड्रेनेज लाइन चौक रहती है। शिकायत करते हैं, दो बजे गाड़ी लेकर आते हैं, परेशान करते हैं। 
गगन गुप्ता, व्यापारी
बाजार खुलने के बाद नहीं आती कचरा गाड़ी
लम्बे समय से परेशान हैं। शिकायतों का निदान नहीं। कचरा गाड़ी सुबह 7 बजे आती है। बाजार खुलता है 12 बजे। फिर गाड़ी नहीं आती। बैकलाइन में जाने का रास्ता बंद कर रखा है। कहते हैं जाने की जगह नहीं।   
विजय सोनी, व्यापारी 
संवारने का बोला, तब से गली खराब
गली पहले अच्छी थी। निगम ने संवारने का सपना दिखाया था उसके बाद से हालात बद्तर हो गए। जगह बहुत है। कमसकम हम जैसे रहवासियों के बच्चों के ही खेलने के काम आ जाएगी, यदि साफ रहे तो।  
जम्बू जैन,व्यापारी-रहवासी

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