Saturday, December 27, 2025

188.35 करोड़ के बैंकिंग घोटाला में ईडी का छापा

188.35 करोड़ के बैंकिंग घोटाला में ईडी का छापा 
डमी डायरेक्टरों के दम पर खेला रूचि का खेल उजागर 
इंदौर. विनोद शर्मा।
सीबीआई ने पांच साल पहले रूचि ग्रुप से जुड़े जिस मामले में छापेमार कार्रवाई की थी, उसी मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छानबीन शुरू कर दी। मामला कर्ज के नाम पर किए गए 188.35 करोड़ के बैकिंग घोटाले से जुड़ा है। इसमें ईडी की टीम ने शाहरा परिवार के साथ नंदानगर निवासी सचिन गुप्ता के ठिकानों पर भी कार्रवाई की। सचिन को उसके मामा ने रूचि से जोड़ा था। बाद में सचिन ने अपने खाते ऑपरेट करने की जिम्मेदारी रूचि समूह को देकर बड़ी पोस्ट ले ली थी। 
  ईडी ने 23 दिंसबर को छापे मारे थे। कार्रवाई उमेश शाहरा के साथ 112/7 नंदानगर निवासी सचिन गुप्ता के घर-दफ्तर पर भी हुई। ईडी के अनुसार रूचि समूह की कंपनियों के खिलाफ बैंक धोखाधड़ी, धन के गबन और दस्तावेजों में हेरफेर जैसे मामलों में सीबीआई ने प्रकरण दर्ज किया था। उसी प्रकरण के आधार पर ईडी ने छानबीन शुरू की। बताया जा रहा है कि मेसर्स रुचि ग्लोबल लिमिटेड, मेसर्स रुचि एक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड और मेसर्स आरएसएएल स्टील प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ जांच चल रही है। कैलाश चंद्र शाहरा और उमेश शाहरा द्वारा स्थापित कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी संस्थाओं, जाली साख पत्रों और फर्जी बिक्री/खरीद का इस्तेमाल करके धन की हेराफेरी की। कई बैंकों को नुकसान पहुंचाया।
 तलाशी के दौरान आरोपियों और उनके परिवार के खातों में 20 लाख रुपए बैलेंस मिला। 23 लाख रुपए नकद मिले, जिन्हें सीज कर लिया। बताया जा रहा है कि शिवानी गुप्तान एग्रोट्रेड, इंदिरा इंडस्ट्रीज में गजरा बिवल गियर्स, गोधा केबकॉन में सीएस है। सचिन गुप्ता का नाम आया है उसकी प्रोफाइल पर भी सीएस लिखा है। 

ऐसे खेला खेल... 
2015-16 में हुए फर्जीवाड़े के सूत्र 2019 में ही मिल गए थे। जिनके आधार पर बैंक ऑफ बड़ौदा ने 2020 तक गहरी छानबीन की। फिर इसी कड़ी में इसमें पंजाब नेशनल बैंक, जम्मू एंड कश्मीर बैंक समेत दो अन्य बैंकों में भी कंपनी के कर्ताधर्ताओं के फर्जीवाड़े सामने आए। जांच के तहत कंपनी द्वारा खरीद-फरोख्त में बड़े लेन-देन सामने आए। जिन कंपनियों से लेन-देन बताया उसमें अधिकांश रुचि ग्लोबल लिमिटेड के मुंबई पते पर ही रजिस्टर्ड है। कंपनियों में शाहरा परिवार ने करीबियों को डमी डायरेक्टर बना रखा है। रुचि ग्लोबल लिमिटेड पर करीब 300 करोड़ रु. बकाया था। बैंक 111.65 करोड़ की रिकवरी कर चुकी है। बैंकों का अभी 188.35 करोड़ से ज्यादा बाकी है।
इन कंपनियों में ऐसे किए खेल 
एग्रोट्रेड इंडिया लिमिटेड : इसका पुराना नाम रूचि ग्लोबल लिमिटेड है। दिसंबर 1996 में पंजीबद्ध कंपनी में 2019 तक साकेत बरोदिया, यामिनी जैन, ईश्वर कलांतरी, विजय गुप्ता के साथ उमेश शाहरा भी डायरेक्टर थे। शाहरा को छोड़ बाकि डमी डायरेक्टर थे। कंपनी पर देना बैंक का 343.40 करोड़ बकाया है। 
रूचि एक्रोनी इंडस्ट्री लिमिटेड : 1976 में बनी ये कंपनी अब स्टीलटेक रिसोर्सिंग लिमिटेड बन चुकी है। इसमें राजेश सोनी, नितेश नागर, प्रमोद झालानी,यामिनी जैन,प्रकाश देशमुख, इशिता खंडेलवाल डमी डायरेक्टर रहे हैं या हैं। कंपनी पर यूको बैंक का 61.50 करोड़ बाकि है। जो 2001 में बतौर लोन लिया था। 
आरएसएएल स्टील लिमिटेड : जो अब एलजीबी स्टील प्रा.लि. बन चुकी है। 2010 में कंपनी पंजीबद्ध हुई। इसमें अरविंद मिश्रा,सुनील विजय, शिवानी गुप्ता, इशिता खंडेलवाल, विजय महाजन और अखिलेश गुप्ता डायरेक्ट रहे हैं, जो डमी थे। 
इन तीनों कंपनियों का पता 611 तुलसिआनी चेम्बर नरिमन पॉइंट मुंबई है। जो रूचि समूह का ही पता है।

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