Sunday, June 28, 2015

गांव एक, गाइडलाइन अनेक PANJIYAK SPECIAL

- दंडोतिया का चमत्कार, संरक्षक अफसरों का इनकार
- मुनाफा देने की कीमत 40 प्रतिशत..
इंदौर, विनोद शर्मा ।
रुपए लेकर गाइड लाइन की दरों में फेरबदल करने वाले उप पंजीयक शैलेंद्रसिंह दंडोतिया ने मनमाने ढंग से एक ही गांव के लिए तीन-तीन गाइड लाइन तय करके बैठे हैं। 1300-2000 तो कहीं 3000 रुपए/वर्गमीटर। जिला प्रशासन द्वारा प्रकाशित गाइडलाइन पूरी तरह विसंगतियों का पुलिंदा है। जो जितना पैसा देता है उसे रजिस्ट्री में उतना ही फायदा देने के बाद निर्धारित रकम लेकर 'श्रीमानÓ अपनी जेब हरी कर लेते हैं। शिकायतें हुई भी। जिला पंजीयक ने कार्रवाई से कन्नी काटी भी लेकिन दंडोतिया से स्पष्टीकरण लेकर प्रत्यक्ष रूप से यह भी साबित कर दिया कि जो गाइडलाइन उन्हें तय करना थी उन्हीं के संरक्षण में वही गाइडलाइन उप पंजीयक तय करके बैठ गए। इससे पहले भी पंजीयक ने ऑफिस में बैठकर ही गाइडलाइन तय कर दी थी। मार्च 2011 की बैठक में कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने इस पर आपत्ति  ली और संशोधन के लिए सात दिन का अल्टीमेटम भी दे डाला था। बावजूद इसके विसंगतियां दूर नहीं हुई।
जिला मुल्यांकन समिति की समीक्षा के बाद  1 अपै्रल 2011 से इंदौर जिले की नई गाइड लाइन तय हुई। गाइडलाइन के पेज नं. 109 में जिस जंबुर्डी हप्सी की गणना 2000 रुपए/वर्गमीटर तय की उसकी गाइड लाइन 3000 रुपए/वर्गमीटर बताई जाती है। पेज नं. 104 में पालाखेड़ी की कृषि भूमि के लिए 3000 रुपए/वर्गमीटर की गाइड लाइन तय है। इसी गांव से लगी 'कुबेर स्पैक्ट्राÓ कॉलोनी की दरें 2000 रुपए/वर्गमीटर बताई जाती है। दुनियाभर में कृषि भूमि की गाइड लाइन से कॉलोनियों की गाइड लाइन ज्यादा रहती है। एक मात्र इंदौर ही ऐसा शहर है पंजीयन कार्यालय के पदाधिकारियों ने कॉलोनाइजरों को फायदा पहुंचाने के लिए कॉलोनियों के दरें कृषि से सीधे 1000 रुपए/वर्गमीटर कम कर डाली। जिला प्रशासन द्वारा प्रकाशित किताब के पेज नं. 104, 107, 108 और 109 पर ऐसी कई विसंगतियां हैं जिन्हें संबंधित अधिकारियों ने कमाई का जरिया बन गई। इससे विपरीत जंबुडी हप्सी से लगे अरिहंतनगर, ऋृषिनगर और गौमटेश सिटी की गाइडलाइन का भाव 3000 रुपए/वर्गमीटर तय है। जब यहां के किसान रजिस्ट्री कराने जाते हैं तो ले-देकर दरें कम कर दी जाती है।
हेराफेरी के मुनाफे में भागीदारी 40 प्रतिशत की.
पालाखेड़ी-लिम्बोदागारी गांव में जमीन की गाइड लाइन 1300 रुपए/वर्गमीटर है। बड़ा बांगड़दा की 2500 रुपए/वर्गमीटर तय है जब यही गांव वाले रजिस्ट्री कराने जाते हैं तो दरें 3000 रुपए/वर्गमीटर बता दी जाती है। लेन-देन की बात करने पर दरें 2000 रुपए/वर्गमीटर लगा दी जाती है। बाकी 1000 रुपए/वर्गमीटर के लिहाज से पार्टी को जितने रूपए बच रहे हैं अधिकारियों को उसका 40 प्रतिशत हिस्सा देना पड़ता है।
ऐसे होता है खेल..
-- दो एकड़ (810 आरए)
(70-80 गांवों में स्लैब सिस्टम है। जहां 80 से 90 प्रतिशत जमीन की रजिस्ट्री होती है।)
-- पहले 500(आरए)*3000(गाइडलाइन की दर)-20 प्रतिशत के मान से हुए 12 लाख।
-- बाकी .710(आरए)*60 लाख (कीमत) से बने 42.60 लाख रुपए।
-- 12 और 42.60 मिलाकर हो गए 54.60 लाख रुपए।
स्टॉम्प शुल्क लगा 3.41 लाख रुपए।

(इस स्टॉम्प शुल्क को बचाने के लिए ले-देकर गाइडलाइन की दरें कम कर दी जाती है। इससे यदि रजिस्ट्री कराने वाले को दो लाख रुपए भी बचे तो इसमें से 40 प्रतिशत 80 हजार रुपए श्रीमान को देना पड़ते हैं।)
जिला पंजीयक की भूमिका भी शंकास्पद...
1- जिला मुल्यांकन समिति में कलेक्टर, जिला पंजीयक, विधायक सहित कई लोग मौजूद रहते हैं। गाइडलाइन तय करने का काम जब समिति का है तो उप पंजीयक से स्पष्टीकरण क्यों मांगा गया।?
2-अपनी कॉलर को ऊंची करते हुए जो जिला पंजीयक यह कहते हैं कि वे दस्तावेजों की मासिक समीक्षा करते हैं। उनके पास इस बात का जवाब नहीं है कि एक ही प्लॉट की दो-तीन रजिस्ट्रियां हो कैसे जाती है?
3- लेन-देन के फोटो दबंग दुनिया में प्रकाशित किए जाने के बाद भी जिला पंजीयक ने जिस दंडोतिया पर कार्रवाई नहीं कि उसी के क्षेत्र में आने वाले पालाखेड़ी-जंबुर्डी हप्सी-लिम्बोदा गारी-बड़ा बांगड़दा की गाइडलाइन की दरों में विसंगतियां क्यों?
4- जिला पंजीयक ने किताब में विसंगतियों का संसोधन क्यों नहीं किया। यदि किताब छप चुकी थी तो संसोधन की सूचना सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
5- किताब में यदि कृषि भूमि से कॉलोनियों की दरें कम है तो इसका संज्ञान लेकर जिला पंजीयक ने किताब छपने से पहले ही संसोधन क्यों नहीं किया।
नोटिस नहीं दिया, स्पष्टीकरण मांगा था
1- दंडोतिया पर क्या कार्रवाई की..?
क्यों, काहे की कार्रवाई।
2- पैसा लेकर गाइडलाइन में फेरबदल करते हैं। लेन-देन करते उनके फोटो दबंग दुनिया में प्रकाशित है।
मुझे इसकी जानकारी नहीं है।
3- आपने दंडोतिया को नोटिस भी दिया था?
नहीं-नहीं नोटिस नहीं दिया।
4- दो महीने पहले ही दिया है आप कहें तो तारीख बताएं..?
वह नोटिस नहीं था। हमने तो सिर्फ स्पष्टीकरण मांगा था।
5- क्या आपने कभी दंडोतिया के दस्तावेजों की जांच की?
जांच तो करता रहता हूं। आज तक गड़बड़ नहीं मिली।
6- दंडोतिया अपने क्षेत्र में पैसे लेकर गाइड लाइन कम करता है इसकी भी जानकारी आपको नहीं होगी?
नहीं, सुपरकॉरिडोर के कारण कन्फ्यूजन रहता है। ऐसा कोई स्पेसिफिक केस(दस्तावेज के नंबर सहित) हो तो बताओ। मैं कार्रवाई करूंगा।
7- सुपर कॉरिडोर का रेट तो पहले ही आपने 6000 रुपए/वर्गमीटर तय कर रखा है। फिर 2000-3000 का झगड़ा क्यों?
देखना पड़ेगा।
7- दंडोतिया कहता है कि 1200 रुपए प्रति दस्तावेज ऊपर वाले अधिकारी भी लेते हैं।
बाहर कोई कुछ भी बोलता फिरे, इससे क्या फर्क पड़ता है।
8- क्या गाइडलाइन उप पंजीयक ने तय की?
कौन कहता है। गाइडलाइन जिला मुल्यांकन समिति ने तय की।
डॉ. श्रीकांत पांडे, जिला पंजीयक





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