- दिन-दुखी-द्ररीद दुनिया से दूर तलाश आत्मशांति की
करोड़ों में पहुंची 'मैंÓ के अस्तित्व को तलाशने वालों की तादाद
नवज्ञान-नवयुग महोत्सव के तहत आज इंदौर में ब्रह्माकुमार और ब्रह्माकुमारियों का डेरा
इंदौर.दबंग रिपोर्टर ।
''परमात्मा एक है, वह निराकार एवं अनादि है। वह विश्व की सर्वशक्तिमान सत्ता है और ज्ञान के सागर हैÓÓ
इस मूलभूत सिद्धांत का पालन करते हुए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय इन दिनों दुनियाभर में धर्म को नए मानदंडों पर परिभाषित कर रहा है। जीवन की दौड़-धूप से थक चुके मनुष्य आज शांति की तलाश में इस संस्था की ओर प्रवृत्त हो रहे हैं। यह कोई नया धर्म नहीं बल्कि विश्व में व्याप्त धर्मों के सार को आत्मसात कर उन्हें मानव कल्याण की दिशा में उपयोग करने वाली एक संस्था है। जिसकी विश्व के 137 देशों में 8,500 से अधिक शाखाएं हैं। इन शाखाओं में 10 लाख से अधिक विद्यार्थी रोज नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा ग्रहण करते हैं। इंदौर में भी तकरीनब सौ से अधिक सेंटर्स हैं। मुख्यालय ओम शांति भवन के रूप में न्यू पलासिया में स्थित है।
इस संस्था की स्थापना दादा लेखराज ने की जिन्हें आज हम प्रजापिता ब्रह्मा के नाम से जानते हैं। दादा लेखराज अविभाजित भारत में हीरों के व्यापारी थे। वे बाल्यकाल से ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे। 60 वर्ष की आयु में उन्हें परमात्मा के सत्यस्वरूप को पहचानने की दिव्य अनुभूति हुई। उन्हें ईश्वर की सर्वोच्च सत्ता के प्रति खिंचाव महसूस हुआ। इसी काल में उन्हें ज्योति स्वरूप निराकार परमपिता शिव का साक्षात्कार हुआ। इसके बाद धीरे-धीरे उनका मन मानव कल्याण की ओर प्रवृत्त होने लगा। उन्हें सांसारिक बंधनों से मुक्त होने और परमात्मा का मानवरूपी माध्यम बनने का निर्देश प्राप्त हुआ। उसी की प्रेरणा के फलस्वरूप सन् 1936 में उन्होंने इस विराट संगठन की छोटी-सी बुनियाद रखी। सन् 1937 में आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग की शिक्षा अनेकों तक पहुँचाने के लिए इसने एक संस्था का रूप धारण किया। इस संस्था की स्थापना के लिए दादा लेखराज ने अपना विशाल कारोबार कलकत्ता में अपने साझेदार को सौंप दिया। फिर वे अपने जन्मस्थान हैदराबाद सिंध (वर्तमान पाकिस्तान) में लौट आए। यहाँ पर उन्होंने अपनी सारी चल-अचल संपत्ति इस संस्था के नाम कर दी। प्रारंभ में इस संस्था में केवल महिलाएँ ही थी। बाद में दादा लेखराज को 'प्रजापिता ब्रह्माÓ नाम दिया गया। जो लोग आध्यात्मिक शांति को पाने के लिए 'प्रजापिता ब्रह्माÓ द्वारा उच्चारित सिद्धांतो पर चले, वे ब्रह्मकुमार और ब्रह्मकुमारी कहलाए तथा इस शैक्षणिक संस्था को 'प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालयÓ नाम दिया गया। विश्वविद्यालय की शिक्षा (उपाधियां) वैश्विक स्वीकृति और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त है। आज इस संस्था से हर आयू और सामाजिक-धार्मिक वर्ग के लोग जुड़े हैं। फिर कम पड़े लिखे ग्रामीण हो या शहर के पढ़े-लिखे सुविधा संपन्न लोग। ब्रह्माकुमारी का कारवां लगातार बढ़ता जा रहा है। पूरी दुनिया में आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी को मानने वालों की तादाद करोड़ों में हैं। इंदौर के ही हजारों घरों में ब्रह्माबाबा और उनका निराकार परब्रह्म का केंद्र बिंदु नजर आता है।
सच्चा ज्ञान क्यों?
हमें यह सौभाग्य है कि शिवबाबा जो बाप, शिक्षक, सदगुरु हैं, उनके ज्ञान का बेसिक परिचय और ज्ञान सागर से मिलने के लिए निमंत्रण आपको दे सकते हैं । शिवबाबा सब मनुष्यों को आमंत्रण दे रहे हैं कि आप आयें, सच्चा ज्ञान उठाएं और मुक्ति व जीवन मुक्ति की प्राप्ति करें। सच्चा ज्ञान ही मनुष्य को आज़ादी दे सकती है। सत्य उनका पहला नाम है। इसका मतलब क्या है? अगर कोई असत्य है, वह सुन्दर नहीं हो सकता। सत्यं शिवं सुंदरम... सत्य ही कल्याणकारी है। अगर कोई झूठा है, वह कल्याणकारी नहीं हो सकता। सच्चाई और कल्याणकारी - जिसके ये गुण हैं, वह ज़रूर सुन्दर भी होगा। वही सच्चा होगा, कल्याणकारी होगा, वही असल में सुन्दर होगा। इसीलिए भगवान को सत्य कहा जाता है।
इसीलिए जरूरी है आध्यात्म
---- आप ने कभी सोचा होगा 'वास्तव में मैं कौन हूं ?Ó इसी घर में क्यों जन्म लिया? यह दुनिया एसी क्यों है? दुनिया में इतने दुख अशांति क्यों हैं? मनुष्य इतने दुष्ट क्यों बन गए हैं? यह सब कुछ कब तक कलेगा? हर धर्म, हर पंथ, हर मत इन और दुसरे प्रश्नों को अलग-अलग उत्तर देते हैं। इन भिन्न-भिन्न मनुष्य मतों में सच्चाई क्या है? दुनिया में बहुत से मार्ग हैं। क्या वे सब किसी न किसी अर्थ में सच्चे हैं या तो चुने हुए मार्ग सच्चे हैं?
---- आपके अन्दर अपने को और मनुष्य इतिहास को जानने की थोड़ी-सी भी इच्छा हो रही है, तो शिवबाबा के ज्ञान का परिचय ले लीजिये। किसी मनुष्य धर्म या संस्था से भी सम्बंधित न होने वाले, सब प्रकार के प्रभाव से परे होने वाले, नि:स्वार्थ, निष्पक्ष शिवबाबा कल्प में एक ही बार इस मनुष्य सृष्टि में आकर मनुष्य आत्माओं को इतिहास की सच्ची कथा सुनाते हैं।
---- शिवबाबा के ज्ञान को जानने के लिए ज्यादा समय लगाने की दरकार भी नहीं। यहां सब मनुष्यों के प्रति शिवबाबा के सन्देश का सर है। अगर और जानने की इच्छा आप के अन्दर पैदा होगी, तो ज्ञान के सागर का द्वार उतना ही खुलेगा जितना ही आप की खोलने की इच्छा होगी। सच्चा ज्ञान मुक्ति और जीवन मुत्की का मार्ग है।
नवज्ञान-नवयुग महोत्सव आज
संस्था के 75 वर्षों की सफल यात्रा पूरी होने के बाद दो महत्वपूर्ण अवसर (अंतरराष्ट्रीय संस्था प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्लेटिनम जुबली वर्ष 2011-12 और आध्यात्म के प्रतिक राजयोगी ब्रह्माकुमार ओमप्रकाशजी 'भाईजीÓ के 75वें जन्मदिन) पर रविवार को अमृत महोत्सव आयोजित किया होगा। इसे नवज्ञान-नवयुग महोत्सव का नाम दिया गया है। समारोह में आबू पर्वत की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहनी, आस्था चैनल की प्रख्यात वक्ता ब्रह्माकुमारी शिवानी बहन, केन्या एवं युगांडा स्थित 50 उद्योगों के अध्यक्ष निजार जुमा, आबू मुख्यालय से निकलने वाली ज्ञानामृत पत्रिका के प्रधानसंपादक ब्रह्माकुमार आत्मप्रकाशजी, ऑस्ट्रेलिया की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बहन मोरिन चेन, मुख्यालय के मीडिया विंग के उपाध्यक्ष ब्रह्माकुमार करूणाजी, जर्मनी स्ििाति रिन्युअल एनर्जी एंड नेचुरल रिर्सोसेज के इंजीनियर क्लॉस पीटर हांकिल, मुख्यालय के कार्यकारी सचिव ब्रह्माकुमार मृत्युंजयजी, पोलेंड स्थित सोलर पॉवर कंसलटेंट की बहन ऐनिटा लोज और अतिरिक्त मुख्य सचिव मप्र अशोक दास विशेष रूप से शामिल होंगे। राजयोग की विधाओं से जुड़ी 'ज्ञानगंगाÓ बहने के साथ आयोजन में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। इसमें राज्थान, उड़ीसा, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, आसाम, पंजाब के कलाकार रंगारंग नृत्यों की प्रस्तूति देंगे। मौके पर लहरों का नृत्य, चक्र नृत्य, बुंदेलखंडी नृत्य और फोक फ्यूजन डांस होगा।
त्याग, तपस्या और सेवा की मूर्ति 'भाईजीÓ
(जिनके 75वें जन्मदिन पर अमृत महोत्सव हो रहा है)
ब्रह्माकुमार ओमप्रकाशजी 'भाईजीÓ का जीवन आध्यात्मिक ऊंचाइयों का जीवंत उदाहरण है। इंजीनियर में ग्रेज्यूएशन करने के बाद आजादी के पहले दशक में आप किसी उच्च सरकारी पद पर नौकरी कर सकते थे लेकिन आपने ऐसा नहीं किया। न ही किसी बड़े उद्योग में भाग्या आजमाया। लेकिन त्याग, तपस्या और आधत्मिक सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाकर उन्होंने 1956 में संस्था संस्थापक ब्रह्मा बाबा के सानिध्य में अपना जीवन जन कल्याणार्थ ईश्वरीय सेवाओं को समर्पित कर दिया। 14 साल की गुप्त तपस्या के बाद समाज में अपनी पहचान बनाने में प्रयासरत थी। उन दिनों ऐसे में इसके साथ जुडऩे वालों के लिए, पथ का औचित्य समझाने में और ध्येय की ओर अग्रसर होने में संघर्षों, सामाजिक विरोध का भारी सामना करना पड़ा लेकिन वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि लिए भाईजी की विचारधारा ने कई लोगों को आध्यात्मिक समाधान के बाद अपना सहयोगी बनाया। ईश्वरीय सेवाओं का जो दीप 1964 में भाईजी ने मप्र के जलबपुर से जलाया वही इंदौर में १९६९ से अब तक इतना बड़ा दीप स्तम्भ बन गया जिससे मप्र, छत्तीसगढ़ के साथ डड़ीसा, राजस्थान के कई हिस्सों के लोग लाभान्वित हैं।
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संस्था परिचय...
स्थापना 1930
मुख्यालय माउंट आबू, राजस्थान
आधिकारिक भाषा हिन्दी, अंग्रेजी
संस्थापक लेखराज कृपलानी (1876-1969)
मुख्य व्यक्ति जानकी कृपलानी, जयंती कृपलानी
कितने देशों में १३७
कुल विद्यार्थी नियमित 10 लाख
करोड़ों में पहुंची 'मैंÓ के अस्तित्व को तलाशने वालों की तादाद
नवज्ञान-नवयुग महोत्सव के तहत आज इंदौर में ब्रह्माकुमार और ब्रह्माकुमारियों का डेरा
इंदौर.दबंग रिपोर्टर ।
''परमात्मा एक है, वह निराकार एवं अनादि है। वह विश्व की सर्वशक्तिमान सत्ता है और ज्ञान के सागर हैÓÓ
इस मूलभूत सिद्धांत का पालन करते हुए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय इन दिनों दुनियाभर में धर्म को नए मानदंडों पर परिभाषित कर रहा है। जीवन की दौड़-धूप से थक चुके मनुष्य आज शांति की तलाश में इस संस्था की ओर प्रवृत्त हो रहे हैं। यह कोई नया धर्म नहीं बल्कि विश्व में व्याप्त धर्मों के सार को आत्मसात कर उन्हें मानव कल्याण की दिशा में उपयोग करने वाली एक संस्था है। जिसकी विश्व के 137 देशों में 8,500 से अधिक शाखाएं हैं। इन शाखाओं में 10 लाख से अधिक विद्यार्थी रोज नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा ग्रहण करते हैं। इंदौर में भी तकरीनब सौ से अधिक सेंटर्स हैं। मुख्यालय ओम शांति भवन के रूप में न्यू पलासिया में स्थित है।
इस संस्था की स्थापना दादा लेखराज ने की जिन्हें आज हम प्रजापिता ब्रह्मा के नाम से जानते हैं। दादा लेखराज अविभाजित भारत में हीरों के व्यापारी थे। वे बाल्यकाल से ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे। 60 वर्ष की आयु में उन्हें परमात्मा के सत्यस्वरूप को पहचानने की दिव्य अनुभूति हुई। उन्हें ईश्वर की सर्वोच्च सत्ता के प्रति खिंचाव महसूस हुआ। इसी काल में उन्हें ज्योति स्वरूप निराकार परमपिता शिव का साक्षात्कार हुआ। इसके बाद धीरे-धीरे उनका मन मानव कल्याण की ओर प्रवृत्त होने लगा। उन्हें सांसारिक बंधनों से मुक्त होने और परमात्मा का मानवरूपी माध्यम बनने का निर्देश प्राप्त हुआ। उसी की प्रेरणा के फलस्वरूप सन् 1936 में उन्होंने इस विराट संगठन की छोटी-सी बुनियाद रखी। सन् 1937 में आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग की शिक्षा अनेकों तक पहुँचाने के लिए इसने एक संस्था का रूप धारण किया। इस संस्था की स्थापना के लिए दादा लेखराज ने अपना विशाल कारोबार कलकत्ता में अपने साझेदार को सौंप दिया। फिर वे अपने जन्मस्थान हैदराबाद सिंध (वर्तमान पाकिस्तान) में लौट आए। यहाँ पर उन्होंने अपनी सारी चल-अचल संपत्ति इस संस्था के नाम कर दी। प्रारंभ में इस संस्था में केवल महिलाएँ ही थी। बाद में दादा लेखराज को 'प्रजापिता ब्रह्माÓ नाम दिया गया। जो लोग आध्यात्मिक शांति को पाने के लिए 'प्रजापिता ब्रह्माÓ द्वारा उच्चारित सिद्धांतो पर चले, वे ब्रह्मकुमार और ब्रह्मकुमारी कहलाए तथा इस शैक्षणिक संस्था को 'प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालयÓ नाम दिया गया। विश्वविद्यालय की शिक्षा (उपाधियां) वैश्विक स्वीकृति और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त है। आज इस संस्था से हर आयू और सामाजिक-धार्मिक वर्ग के लोग जुड़े हैं। फिर कम पड़े लिखे ग्रामीण हो या शहर के पढ़े-लिखे सुविधा संपन्न लोग। ब्रह्माकुमारी का कारवां लगातार बढ़ता जा रहा है। पूरी दुनिया में आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी को मानने वालों की तादाद करोड़ों में हैं। इंदौर के ही हजारों घरों में ब्रह्माबाबा और उनका निराकार परब्रह्म का केंद्र बिंदु नजर आता है।
सच्चा ज्ञान क्यों?
हमें यह सौभाग्य है कि शिवबाबा जो बाप, शिक्षक, सदगुरु हैं, उनके ज्ञान का बेसिक परिचय और ज्ञान सागर से मिलने के लिए निमंत्रण आपको दे सकते हैं । शिवबाबा सब मनुष्यों को आमंत्रण दे रहे हैं कि आप आयें, सच्चा ज्ञान उठाएं और मुक्ति व जीवन मुक्ति की प्राप्ति करें। सच्चा ज्ञान ही मनुष्य को आज़ादी दे सकती है। सत्य उनका पहला नाम है। इसका मतलब क्या है? अगर कोई असत्य है, वह सुन्दर नहीं हो सकता। सत्यं शिवं सुंदरम... सत्य ही कल्याणकारी है। अगर कोई झूठा है, वह कल्याणकारी नहीं हो सकता। सच्चाई और कल्याणकारी - जिसके ये गुण हैं, वह ज़रूर सुन्दर भी होगा। वही सच्चा होगा, कल्याणकारी होगा, वही असल में सुन्दर होगा। इसीलिए भगवान को सत्य कहा जाता है।
इसीलिए जरूरी है आध्यात्म
---- आप ने कभी सोचा होगा 'वास्तव में मैं कौन हूं ?Ó इसी घर में क्यों जन्म लिया? यह दुनिया एसी क्यों है? दुनिया में इतने दुख अशांति क्यों हैं? मनुष्य इतने दुष्ट क्यों बन गए हैं? यह सब कुछ कब तक कलेगा? हर धर्म, हर पंथ, हर मत इन और दुसरे प्रश्नों को अलग-अलग उत्तर देते हैं। इन भिन्न-भिन्न मनुष्य मतों में सच्चाई क्या है? दुनिया में बहुत से मार्ग हैं। क्या वे सब किसी न किसी अर्थ में सच्चे हैं या तो चुने हुए मार्ग सच्चे हैं?
---- आपके अन्दर अपने को और मनुष्य इतिहास को जानने की थोड़ी-सी भी इच्छा हो रही है, तो शिवबाबा के ज्ञान का परिचय ले लीजिये। किसी मनुष्य धर्म या संस्था से भी सम्बंधित न होने वाले, सब प्रकार के प्रभाव से परे होने वाले, नि:स्वार्थ, निष्पक्ष शिवबाबा कल्प में एक ही बार इस मनुष्य सृष्टि में आकर मनुष्य आत्माओं को इतिहास की सच्ची कथा सुनाते हैं।
---- शिवबाबा के ज्ञान को जानने के लिए ज्यादा समय लगाने की दरकार भी नहीं। यहां सब मनुष्यों के प्रति शिवबाबा के सन्देश का सर है। अगर और जानने की इच्छा आप के अन्दर पैदा होगी, तो ज्ञान के सागर का द्वार उतना ही खुलेगा जितना ही आप की खोलने की इच्छा होगी। सच्चा ज्ञान मुक्ति और जीवन मुत्की का मार्ग है।
नवज्ञान-नवयुग महोत्सव आज
संस्था के 75 वर्षों की सफल यात्रा पूरी होने के बाद दो महत्वपूर्ण अवसर (अंतरराष्ट्रीय संस्था प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्लेटिनम जुबली वर्ष 2011-12 और आध्यात्म के प्रतिक राजयोगी ब्रह्माकुमार ओमप्रकाशजी 'भाईजीÓ के 75वें जन्मदिन) पर रविवार को अमृत महोत्सव आयोजित किया होगा। इसे नवज्ञान-नवयुग महोत्सव का नाम दिया गया है। समारोह में आबू पर्वत की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहनी, आस्था चैनल की प्रख्यात वक्ता ब्रह्माकुमारी शिवानी बहन, केन्या एवं युगांडा स्थित 50 उद्योगों के अध्यक्ष निजार जुमा, आबू मुख्यालय से निकलने वाली ज्ञानामृत पत्रिका के प्रधानसंपादक ब्रह्माकुमार आत्मप्रकाशजी, ऑस्ट्रेलिया की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बहन मोरिन चेन, मुख्यालय के मीडिया विंग के उपाध्यक्ष ब्रह्माकुमार करूणाजी, जर्मनी स्ििाति रिन्युअल एनर्जी एंड नेचुरल रिर्सोसेज के इंजीनियर क्लॉस पीटर हांकिल, मुख्यालय के कार्यकारी सचिव ब्रह्माकुमार मृत्युंजयजी, पोलेंड स्थित सोलर पॉवर कंसलटेंट की बहन ऐनिटा लोज और अतिरिक्त मुख्य सचिव मप्र अशोक दास विशेष रूप से शामिल होंगे। राजयोग की विधाओं से जुड़ी 'ज्ञानगंगाÓ बहने के साथ आयोजन में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। इसमें राज्थान, उड़ीसा, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, आसाम, पंजाब के कलाकार रंगारंग नृत्यों की प्रस्तूति देंगे। मौके पर लहरों का नृत्य, चक्र नृत्य, बुंदेलखंडी नृत्य और फोक फ्यूजन डांस होगा।
त्याग, तपस्या और सेवा की मूर्ति 'भाईजीÓ
(जिनके 75वें जन्मदिन पर अमृत महोत्सव हो रहा है)
ब्रह्माकुमार ओमप्रकाशजी 'भाईजीÓ का जीवन आध्यात्मिक ऊंचाइयों का जीवंत उदाहरण है। इंजीनियर में ग्रेज्यूएशन करने के बाद आजादी के पहले दशक में आप किसी उच्च सरकारी पद पर नौकरी कर सकते थे लेकिन आपने ऐसा नहीं किया। न ही किसी बड़े उद्योग में भाग्या आजमाया। लेकिन त्याग, तपस्या और आधत्मिक सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाकर उन्होंने 1956 में संस्था संस्थापक ब्रह्मा बाबा के सानिध्य में अपना जीवन जन कल्याणार्थ ईश्वरीय सेवाओं को समर्पित कर दिया। 14 साल की गुप्त तपस्या के बाद समाज में अपनी पहचान बनाने में प्रयासरत थी। उन दिनों ऐसे में इसके साथ जुडऩे वालों के लिए, पथ का औचित्य समझाने में और ध्येय की ओर अग्रसर होने में संघर्षों, सामाजिक विरोध का भारी सामना करना पड़ा लेकिन वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि लिए भाईजी की विचारधारा ने कई लोगों को आध्यात्मिक समाधान के बाद अपना सहयोगी बनाया। ईश्वरीय सेवाओं का जो दीप 1964 में भाईजी ने मप्र के जलबपुर से जलाया वही इंदौर में १९६९ से अब तक इतना बड़ा दीप स्तम्भ बन गया जिससे मप्र, छत्तीसगढ़ के साथ डड़ीसा, राजस्थान के कई हिस्सों के लोग लाभान्वित हैं।
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संस्था परिचय...
स्थापना 1930
मुख्यालय माउंट आबू, राजस्थान
आधिकारिक भाषा हिन्दी, अंग्रेजी
संस्थापक लेखराज कृपलानी (1876-1969)
मुख्य व्यक्ति जानकी कृपलानी, जयंती कृपलानी
कितने देशों में १३७
कुल विद्यार्थी नियमित 10 लाख
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