- एमपीसीए ने कहा अनावश्यक कर रहे हैं परेशान
- कहा : एक शिकायत, 30 दिन और फर्म एंड सोसायटी ने 20 बार मांगे जवाब
- एसोसिएशन के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी हैरान
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
यशवंत क्लब के बाद मप्र के उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपने विभागीय अधिकारियों का दुरुपयोग करके मप्र क्रिकेट एसोसिएशन (एमपीसीए) के कामकाज में अनावश्यक दखलंदाजी कर रहे हैं। हालात यह हैं कि महीनेभर में उद्योग विभाग से ताल्लुक रखने वाले फर्म एंड रजिस्ट्रार कार्यालय ने 20 से ज्यादा पत्र लिखकर प्रदेश के विशुद्ध खेल संगठनों में से एक एमपीसीए के कामकाज को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। मंत्री को एमपीसीए के चुनाव लडऩा है तो लड़े। वे इसके लिए स्वतंत्र हैं। कृपया ऐसे मंत्री और उनके मातहतों के खिलाफ कड़ाई से कार्रवाई करते हुए खेल संगठनों के लिए श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करें।
शुक्रवार को मप्र के मुखिया शिवराजसिंह चौहान को लिखे एक पत्र में अपनी पीड़ा बयां करते हुए एमपीसीए के सदस्यों ने कुछ इस तरह अपनी बात रखी। पत्र में उन्होंने लिखा कि आप और आपकी सरकार जहां खेल-खिलाडिय़ों को प्रोत्साहित कर रहे हैं वहीं आपके उद्योग मंत्री विजयवर्गीय और उनके विभाग अनावश्यक दखलंदाजी करके एमपीसीए जैसे खेल संगठन को परेशान कर रहे हैं। दो महीने पहले की गई लीलाधर पालीवाल की एकपक्षीय शिकायत को आधार मानकर मंत्री के निर्देश पर फर्म एंड सोसायटी विभाग एमपीसीए को हर दूसरे दिन पत्र लिखकर जवाब मांग रहा है। कभी सदस्यों की संख्या पूछी जाती है। कभी सदस्यता दिए जाने के प्रमाण मांगे जाते हैं। केंद्रीय मंत्री और एमपीसीए के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया स्वयं विभाग की इस कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए पत्रों पर नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं। बावजूद, इसके बेजा परेशान करने का सिलसिला जारी है। वह भी उस स्थिति में जब एमपीसीए मप्र के उन संगठनों में से एक हैं जिन्हें विशुद्ध रूप से खेल संगठन कहा जाता है। ग्वालियर और इंदौर में संपन्न हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों में शरीक होकर आप स्वयं एसोसिएशन के कामकाज का जायजा ले चुके हैं। आप समझदार हैं। यदि हमारे काम में गड़बड़ी होती तो, आपसे नहीं छिपती।
चुनाव लड़ें, लेकिन तरीके से...
सदस्यों ने कहा कि यदि मंत्रीजी को एमपीसीए चुनाव लडऩा है तो वे इसके लिए स्वतंत्र हैं लेकिन चुनाव के नाम पर पद का दुरुपयोग करके क्लब की गरिमा को प्रभावित करने के अनावश्यक प्रयास न करें। उन्हें इस बात का पूरा अधिकार है कि वे चुनाव में अपनी दावेदारी पुख्ता करने के लिए सदस्यों को प्रभावित कर सकते हैं
एक विभाग दो नीति?
एमपीसीए सदस्य राजू चौहान ने बताया कि 1 अपैल 2011 को संपन्न हुए इंदौर संभाग क्रिकेट एसोसिएशन (आईडीसीए) के चुनाव में हुई धांधलियों की शिकायत 25 अपै्रल 2011 को स्वयं मैंने की थी। डेढ़ साल बाद फर्म एंड सोसायटी ने सुध ली जबकि लीलाधर पालीवाल की शिकायत पर तत्काल एमपीसीए से जवाब मांगे जा रहे हैं। यह उद्योग मंत्री और उनके विभाग के दोहरे चरित्र का बड़ा उदाहरण नहीं तो, क्या है?
स्वयं अधिकारी स्वीकार चुके हैं मंत्री का दबाव
सीएम को लिखे पत्र में सदस्यों ने बताया कि उद्योग मंत्री का अधिकारियों पर कितना दबाव है यह बात बीते महीने हाईकोर्ट में दायर हलफनामे में उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव ने साबित कर दी। उन्होंने कोर्ट के सामने यह कह दिया कि वे मंत्री के निर्देश पर बाध्य हैं।
इन संगठनों में अनावश्यक दखलंदाजी
यशवंत क्लब : कोषाध्यक्ष सुनील बजाज (सज्जन वर्मा समर्थक क्लब अध्यक्ष परमजीतसिंह छाबड़ा उर्फ पम्मी के विरोधी) के पक्ष में उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव ने दिए बयान।
भोपाल संभाग क्रिकेट एसोसिएशन : अपने समर्थितों की हार का अंदेशा लगते ही एनवक्त पर चुनाव स्थगित करवाए।
जबलपुर संभाग क्रिकेट एसोसिएशन : यहां भी चुनाव निरस्त करवाए।
- कहा : एक शिकायत, 30 दिन और फर्म एंड सोसायटी ने 20 बार मांगे जवाब
- एसोसिएशन के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी हैरान
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
यशवंत क्लब के बाद मप्र के उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपने विभागीय अधिकारियों का दुरुपयोग करके मप्र क्रिकेट एसोसिएशन (एमपीसीए) के कामकाज में अनावश्यक दखलंदाजी कर रहे हैं। हालात यह हैं कि महीनेभर में उद्योग विभाग से ताल्लुक रखने वाले फर्म एंड रजिस्ट्रार कार्यालय ने 20 से ज्यादा पत्र लिखकर प्रदेश के विशुद्ध खेल संगठनों में से एक एमपीसीए के कामकाज को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। मंत्री को एमपीसीए के चुनाव लडऩा है तो लड़े। वे इसके लिए स्वतंत्र हैं। कृपया ऐसे मंत्री और उनके मातहतों के खिलाफ कड़ाई से कार्रवाई करते हुए खेल संगठनों के लिए श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करें।
शुक्रवार को मप्र के मुखिया शिवराजसिंह चौहान को लिखे एक पत्र में अपनी पीड़ा बयां करते हुए एमपीसीए के सदस्यों ने कुछ इस तरह अपनी बात रखी। पत्र में उन्होंने लिखा कि आप और आपकी सरकार जहां खेल-खिलाडिय़ों को प्रोत्साहित कर रहे हैं वहीं आपके उद्योग मंत्री विजयवर्गीय और उनके विभाग अनावश्यक दखलंदाजी करके एमपीसीए जैसे खेल संगठन को परेशान कर रहे हैं। दो महीने पहले की गई लीलाधर पालीवाल की एकपक्षीय शिकायत को आधार मानकर मंत्री के निर्देश पर फर्म एंड सोसायटी विभाग एमपीसीए को हर दूसरे दिन पत्र लिखकर जवाब मांग रहा है। कभी सदस्यों की संख्या पूछी जाती है। कभी सदस्यता दिए जाने के प्रमाण मांगे जाते हैं। केंद्रीय मंत्री और एमपीसीए के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया स्वयं विभाग की इस कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए पत्रों पर नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं। बावजूद, इसके बेजा परेशान करने का सिलसिला जारी है। वह भी उस स्थिति में जब एमपीसीए मप्र के उन संगठनों में से एक हैं जिन्हें विशुद्ध रूप से खेल संगठन कहा जाता है। ग्वालियर और इंदौर में संपन्न हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों में शरीक होकर आप स्वयं एसोसिएशन के कामकाज का जायजा ले चुके हैं। आप समझदार हैं। यदि हमारे काम में गड़बड़ी होती तो, आपसे नहीं छिपती।
चुनाव लड़ें, लेकिन तरीके से...
सदस्यों ने कहा कि यदि मंत्रीजी को एमपीसीए चुनाव लडऩा है तो वे इसके लिए स्वतंत्र हैं लेकिन चुनाव के नाम पर पद का दुरुपयोग करके क्लब की गरिमा को प्रभावित करने के अनावश्यक प्रयास न करें। उन्हें इस बात का पूरा अधिकार है कि वे चुनाव में अपनी दावेदारी पुख्ता करने के लिए सदस्यों को प्रभावित कर सकते हैं
एक विभाग दो नीति?
एमपीसीए सदस्य राजू चौहान ने बताया कि 1 अपैल 2011 को संपन्न हुए इंदौर संभाग क्रिकेट एसोसिएशन (आईडीसीए) के चुनाव में हुई धांधलियों की शिकायत 25 अपै्रल 2011 को स्वयं मैंने की थी। डेढ़ साल बाद फर्म एंड सोसायटी ने सुध ली जबकि लीलाधर पालीवाल की शिकायत पर तत्काल एमपीसीए से जवाब मांगे जा रहे हैं। यह उद्योग मंत्री और उनके विभाग के दोहरे चरित्र का बड़ा उदाहरण नहीं तो, क्या है?
स्वयं अधिकारी स्वीकार चुके हैं मंत्री का दबाव
सीएम को लिखे पत्र में सदस्यों ने बताया कि उद्योग मंत्री का अधिकारियों पर कितना दबाव है यह बात बीते महीने हाईकोर्ट में दायर हलफनामे में उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव ने साबित कर दी। उन्होंने कोर्ट के सामने यह कह दिया कि वे मंत्री के निर्देश पर बाध्य हैं।
इन संगठनों में अनावश्यक दखलंदाजी
यशवंत क्लब : कोषाध्यक्ष सुनील बजाज (सज्जन वर्मा समर्थक क्लब अध्यक्ष परमजीतसिंह छाबड़ा उर्फ पम्मी के विरोधी) के पक्ष में उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव ने दिए बयान।
भोपाल संभाग क्रिकेट एसोसिएशन : अपने समर्थितों की हार का अंदेशा लगते ही एनवक्त पर चुनाव स्थगित करवाए।
जबलपुर संभाग क्रिकेट एसोसिएशन : यहां भी चुनाव निरस्त करवाए।
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