Tuesday, June 30, 2015

गड़बड़ियों से भरी मालवा काउंटी टॉउनशिप

ृ-ईओडब्ल्यु की प्रारंभिक जांच में 75 लाख से ज्यादा की गड़बड़ी
-टॉउनशिप को लाभ पहुंचाने के मामले में सांवेर के दो एसडीओ की खास भूमिका
-नियम विरुद्ध 25 प्रतिशत सिक्युरिटी की जमीन दे दी
-जल्द ही होगा धोखाधड़ी का केस दर्ज
इंदौर, दबंग रिपोर्टर।
बायपास स्थित करोड़ों की लागत की मालवा काउंटी टॉउनशिप के खिलाफ  राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यु) में हुई शिकायत की जांच अंतिम दौर में हैं। तीन साल पहले दर्ज हुई इस शिकायत में टॉउनशिप में ढेरों अनियमितताएं तो पाई ही गई लेकिन खास मामला सांवेर के तत्कालीन दो एसडीओ का है। इन दोनों अधिकारियों ने अपने पदों का दुरुपयोग करते हुए टॉउनशिप के कर्ताधर्ताओं को 75 लाख रु. से अधिक का लाभ पहुंचाया और शासन को चपत लगाई। ब्यूरो अगले माह इस मामले में कर्ताधर्ताओं सहित दोनों एसडीओ के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करने संबंधी प्रतिवेदन मुख्यालय को भेजेगा।
बायपास (नेशनल हाई वे आगरा-मुंबई) स्थित मालवा काउंटी टॉउनशिप को 2006 में निर्माण की अनुमति दी थी। यह टॉउनशिप दिल्ली के सत्य ग्रुप की है जिसकी अन्य शहरों में भी टॉउनशिप हैं। बहरहाल, निर्माण के दौरान ग्रुप ने शहरभर में इसके होर्डिंग्स लगाए और साथ ही लिटरेचर व अन्य माध्यम से इसका खासा प्रचार-प्रसार किया वटॉउनशिप में तमाम सुविधाएं देने की बात कही। इन सुविधाओं के नाम से कई लोगों ने कर्ताधर्ताओं से संपर्क साधा। इन्हें बताया गया कि इसका डिजाइन मे. राजिन्दरकुमार एसोसिएट (गुडगांव) द्वारा किया गया। उक्त ग्रुप देश का नंबर वन ग्रुप माना जाता है। हवाला दिया गया कि यह वही ग्रुप है जिसने जिसने गुडगांव में ग्रीन बिल्डंग, देशभर में कई अस्पतालों, कमर्शियल व रेसीडेंशियल कॉम्प्लेक्स की डिजाइन तैयार की है। टॉउनशिप की खूबसूरत डिजाइन व अत्याधुनिक सुविधाओं के मद्देनजर कई लोगों ने यहां अलग-अलग कीमतों के प्लॉट, फ्लैट आदि के लिए रुपए जमा कर दिए।
ये सुविधाओं का वादा
टॉउनशिप में हायपर मार्केट, शॉपिंग मॉल कम मल्टीप्लेक्स, आईटी पार्क, स्कूल, मेडिकल, सीवेज ट्रिटमेंट प्लांट, वाटर हारवेस्टिंग, क्लब, बैनक्वेट हॉल, पॉवर बेक अप, लिफ्ट, आरओ रूम, गार्डन, रिक्रिएशन हॉल, सिक्युरिटी गार्ड, इलेक्ट्रॉनिक सिक्युरिटी, इंटरकॉम, फायर अलार्म, विजिटर्स पार्किंग, तलघर, मेंटेनेंस स्टाफ, वाटर सप्लाय, स्टोरेज, बारिश का पानी की निकासी, वेस्ट डिस्पोजल आदि सुविधाएं देने का हवाला दिया गया। खास बात यह कि इसमें आईटी पार्क के लिए 6 एकड़ जमीन देने का वादा किया गया।
तीन साल का पजेशन छह साल बाद भी नहीं मिला
उक्त टॉउनशिप 110 एकड़ में विकसित की गई है। 2006 में जब लोगों ने यहां प्लॉट/प्लैट बुक कराए तो उन्हें 2000 में पजेशन देने का एग्रीमेंट किया गया था लेकिन 2011 तक नहीं दिया गया। ऐसे करीब 200 से ज्यादा लोग थे जिन्हें उस दौरान पजेशन नहीं मिला। इस पर इनमें से कुछ लोगों ने ईओडब्ल्यु को मामले की शिकायत की जिस पर मामला जांच में लिया गया।
ऐसे पता चली गड़बड़ियां
जांच में पता चला कि टॉउनशिप को लाभ पहुंचाकर शासन को चूना लगाने में सांवेर के दो एसडीओ की खास भूमिका रही है। दरअसल टॉउनशिप में रोड, पानी, बिजली व ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर य्नियम है कि कुल जमीन में से 25 प्रतिशत राजस्व विभाग द्वारा सिक्युरिटी बतौर रखा जाता है। यानी जब तक 75 फीसदी हिस्से में ये तमाम सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती तब तक यह 25 प्रतिशत हिस्सा निर्माण या अन्य कार्य के लिए नहीं दिया जा सकता लेकिन इसका भरसक मजाक बनाया गया। यह कारनामा 2006 से 2010 के बीच किया गया।
रेवेन्यू इंस्पेक्टर की शॉर्ट रिपोर्ट पर बेशकीमती जमीन सौंप दी
सूत्रों के मुताबिक 2010 में तत्कालीन एसडीओपी ने तो और भी बड़ी गड़बड़ी कर दी। शासन ने 25 प्रतिशत हिस्सा जो सिक्युरिटी बतौर के लिए रखा था, उसे एक रेवेन्यू इन्सपेक्टर (आरआई) की  शॉर्ट रिपोर्ट पर टॉउनशिप को दे दिया गया। विडम्बना यह कि इसके लिए अधिकारियों ने इसका भौतिक सत्यापन भी नहीं किया।
पंचायत को सुपरविजन के नाम 35 लाख रु. की चपत
जांच में पाया गया कि पंचायत को सुपरविजन शुल्क देने के मामले में भी अधिकारियों ने काफी मेहरबानी जताई। कुल निर्धारित शुल्क में से 35 लाख रु. की रियायत देकर शासन को राजस्व की चपत लगाई गई।
3 करोड़ पर तीन साल का ब्याज भी बख्शा
इसी तरह मप्र विद्युत कंपनी पर 3 करोड़ रु. देय था। इसका भुगतान 2009 में किया जाना था जो 2012 में किया गया। इसमें भी तीन साल की पेनल्टी व ब्याज करीब 15 लाख रु. नहीं जोड़ा गया। इस तरह अधिकारियों की मिलीभगत से 75 लाख रु. से ज्यादा की चपत लगाई गई। ईओडब्ल्यु अधिकारियों की माने तो यह आंकड़ा एक करोड़ रु. से ज्यादा का भी हो सकता है। इस मामले में अब अगले माह मुख्यालय को कर्ताधर्ताओं व एसडीपीओ पर केस दर्ज करने के लिए प्रतिवेदन तैयार कर मुख्यालय भेजा जा रहा है।

बस एक पखवाड़े में रिपोर्ट तैयार
जांच थोड़ी सी बाकी है। कई गड़बड़ियां मिली हैं। इसे क्रॉस चेक करने के लिए रेवेन्यू विभाग सहित अन्य विभागों से दस्तावेज मंगाए गए हैं। एक पखवाड़े में जांच पूरी हो जाएगी।
आनंद यादव, डीएसपी (ईओडबल्यु)


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