- 8.5 एकड़ जमीन छोड़ पहले दिया 25 लाख रुपए साल का तोहफा
- फिर बिल में करते रहे खेल
इंदौर. विनोद शर्मा ।
खजाने में बढ़ोत्तरी के लिए संल्पित नगर निगम का राजस्व दस्ता महेश खंडेलवाल और सतीश भंडारी की ओमनी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जबरदस्त मेहरबान है। मौका देखे बगैर खाता खोलकर 3.62 लाख वर्गफीट से ज्यादा की रियायत दिए बैठा दस्ता कंपनी की बकाया रकम को लेकर भी मुंह सीले बैठा है। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो कंपनी पर 2007 से 2014 के बीच 6.49 करोड़ संपत्ति कर बना जिसमें से कंपनी ने जमा किए 2.20 करोड़ रुपए। यानी सिर्फ 30 प्रतिशत। बाकी 70 फीसदी रकम के लिए जोरआजमाइश करने के बजाय नगर निगम के जिम्मेंदारों ने मौजूदा डिमांड बिल में अग्रिम कर भुगतान के नाम पर 4.42 लाख रुपए की छूट दे डाली।
45 एकड़ जमीन के भू-उपयोग को लेकर विवादों का गढ़ बन चुकी ओमनी इन्फ्रास्ट्रक्चर को अधिकारियों ने संपत्ति कर में साढेÞ आठ एकड़ जमीन की छूट देकर निगम के खजाने में 24.71 लाख रुपए/साल की सेंधमारी की है। इस पर जुड़ने वाले शिक्षा उपकर, जल अभिकर, नगरीय विकास जैस कर और पेनल्टी अलग। कुल जमीन का संपत्ति कर 95 लाख 53 हजार 454 रुपए होता है जबकि अधिकारी ले रहे हैं 70 लाख 81 हजार 756 रुपए टैक्स।
सिर्फ बड़े-बड़ों को ही छूट क्यों?
कंपनी पर मौजूदा वित्त वर्ष में कुल 4 करोड़ 25 लाख 51 हजार 456 रुपए बकाया है। बीते वर्ष यह राशि 3 करोड़, 59 लाख 12 हजार 318 रुपए थी लेकिन कंपनी ने एक रुपया भी जमा नहीं किया। कंपनी 2009-10 से 2012-13 तक डिमांड के मुकाबले 20-25 प्रतिशत रुपए देकर अधिकारियों को टरकाती रही है। इसीलिए बकाया राशि बढ़ती गई। नगर निगम आम करदाताओं से बकाया रकम पर 15 प्रतिशत साल का ब्याज जोड़ता है जो कि चक्रवृति ब्याज की तरह बढ़ता जाता है। मसलन 100 रुपए पर 15 रुपए ब्याज हुआ 115 रुपए। यदि अगले वर्ष 115 रुपए जमा नहीं किए तो उस पर 15 प्रतिशत ब्याज लगेगा। राशि ऐसे ही बढ़ती रहती है।
ओमनी इन्फ्रास्ट्रक्चर
पुराना नाम- प्रोजोन ओमनी इन्फ्रास्ट्रक्चर
तर्फे : महेश खंडेलवाल और सतीश पिता संतोष भंडारी
खसरा नं. 394/1/1/, 401/1/2, 401/2/2/2, 354/2/2
पिन नं. 4080902306
क्षेत्रफल : 1532845
बकाया राशि : 4,25,51,465
गड़बड़ :- खसरा नं. 354/2/2(रकबा-1.429), 383/1(रकबा-0.377), 386 (रकबा-0.1.578), 387/1/3 (रकबा-0.118), 387/2(रकबा-0.360), 394/1/2 (रकबा-2.429), 394/2(रकबा-2.910) जैसे खाते छिपाए। कुल 20 खसरों में कुल 18,95,525 वर्गफीट जमीन है कंपनी के नाम। इसमें से खाता 1532845 वर्गफीट का ही खोला। अंतर 3,62,680 वर्गफीट का। 21 रुपए वर्गफीट (संपत्ति कर की दर जो आरोपित की गई) के हिसाब से 76 लाख, 16 हजार 280 रुपए का सिर्फ संपत्ति का फायदा पहुंचाया है। भू-उपयोग आवासीय है। व्यावसायिक टीएंडसीपी चाहकर भी नहीं कर पाया। मामला भोपाल में अटका है। इसी बीच एआरओ जितेंद्र पांडे ने 2008 में 51,87,041 रुपए की रसीद काटकर खाता खोल दिया था। 2009-10 से 2013-14 के बीच टैक्स बढ़कर 4,25,51,465 रुपए हो गया जबकि अधिकारी 25,93,524 रुपए साल की ही रसीद काटते रहे जो कि मूल संपत्ति कर के मुकाबले ंआधी या चौथाई थी।
यह है संपत्ति कर का बिल
सम्पत्ति कर 3218975
शिक्षा उपकर 643795
जल अभिकर 321898
जल-मल निकास कर 643795
नगरीय विकास उपकर 643795
समेकित कर 1609488
सेवा शुल्क 10
कुल 7081756
यह होना चाहिए संपत्ति कर का बिल
संपत्ति कर 39,80,602.50
शिक्षा उपकर (2% वार्षिक भाड़ा) 19,90,301
नगरीय विकास(1% वार्षिक भाड़ा) 3,98,060
समेकित कर (50 प्रतिशत) 19,90,301
जल अभिकर (10 प्रतिशत) 3,98,060
डेÑनेज टैक्स (20 प्रतिशत) 7,96,120
सर्विस टैक्स 10
कुल 9553454.5
यहां गड़बड़....
बिल ही बिल में कर दिया 3.19 करोड़ का खेल
- बकाया रकम पर निगम 15 प्रतिशत सरचार्ज लगाता है।
-2009-10 में 48,07,144 रुपए बकाया था इस पर 7,21,071 रुपए सरचार्ज बनता। 2010-11 की बकाया रकम हुई 5528216.61 रुपए और संपत्ति कर मिलाकर डिमांड निकलती 14004278.63 रुपए। इसमें से 2593524 रुपए जमा हुए। बाकी बचे 11410754.63 रुपए।
2011-12 में बकाया राशि थी 11410754.63 जो सरचार्ज मिलाकर हुुई 14833981.019 रुपए। कुल संपत्ति कर बना 24147306.95 रुपए। 2593524 रुपए जमा होने के बाद में बचे 21553782.95 रुपए।
2012-13 में 3233067.44 सरचार्ज और 10211560 लाख रुपए संपत्ति कर जोड़ने पर रकम हुई 38231477.83 रुपए। इसमें से 2593524 लाख जमा होने के बाद बचे 35637953.83 रुपए।
- 2013-14 में संपत्ति कर बना 10884795.54 रुपए जो बकाया और 15 प्रतिशत पेनल्टी जोड़कर होता है 51868441.90 रुपए। एक भी रुपया नहीं मिला।
- 2014-15 में 51868441.90 की बकाया रकम पर सरचार्ज ही 7780266.28 रुपए बनता है। 7081756 रुपए का संपत्ति कर अलग। 2014 में डिमांड 7 करोड़ 45 लाख 10 हजार 730 रुपए की निकलना थी निकली 4 करोड़ 25 लाख 51 हजार 465 रुपए।
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