Sunday, June 28, 2015

नौकरी : लुभावने विज्ञापनों ने लूटा

- डेढ़ से दो हजार रुपए रोज कमाने का लालच देकर माथे मढ़ दी चालीस हजार की मशीनें 
- काम शुरू करते ही बोल जाती हैं मशीनें

इंदौर, विनोद शर्मा।
ट्यूब लाइट का चोक या प्लास्टिक के दानों से खिलौने बनाने की मशीनें खरीदें। घर बैठे कमाएं दो से तीन हजार रुपए रोज। जैसे विज्ञापन देकर नौकरी का झांसा देने वाली कंपनियों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। कंपनियां कच्चा माल उपलब्ध कराने के साथ बना माल खरीदने का वादा करके युवाओं के माथे मशीनें मड़ रही हैं। काम का श्रीगणेश करते ही मशीने बोल जाती हैं। हैरान-परेशान लोग संपर्क करते हैं तो जवाब नहीं मिलता। लोगों के पहुंचने से पहले ही कंपनियां दफ्तर पर ताले डालकर फुर्र हो जाती हैं।
पांच साल पहले इंदौर में पनपी ये कंपनियां सरकारी सख््ती के बाद छोटे शहरों में अपना कारोबार फैला चुकी हैं। लुभावने विज्ञापनों से ये कंपनियां 10वीं-12वीं पास करने वाले युवाओं पर निशाना साधती हैं। कंपनियां पहले उन्हें एमबीए-इंजीनियरिंग किए युवाओं की बेरोजगारी के किस्से सुनाती हैं। बाद में 30 से 60 हजार रुपए महीना कमाने का जरिया बताकर मशीनें थमा दी जाती है। एक तो  25 से 45 हजार रुपए की कीमत बताकर युवाओं के माथे मढ़ी जा रही इन मशीनों की कीमत पांच-दस हजार से ज्यादा नहीं रहती। दूसरा मशीनें या तो दो-चार-छह दिन में जवाब दे जाती हैं या उतनी क्षमता से काम नहीं करती जितनी बताई जाती है। कुल मिलाकर ये कंपनियां युवाओं को नौकरी के नाम पर सिर्फ झांसा ही नहीं दे रही हैं बल्कि वक्त से पहले उन्हें मनोवैज्ञानिक रूप से कमजोर भी कर रही हैं।
श्रीगणेश करते ही जवाब दे गई कंपनियां
शाजापुर जिले के अकोदिया निवासी राकेश पिता बद्रीलाल राजपूत के साथ प्रमोद रामलाल निवासी फतेहपुर व आनंद सिंह निवासी बिजाना ने मार्च ११ मेें विज्ञापन पढ़कर इंदौर की वंशिका इंटरप्राइजेस से संपर्क किया। कंपनी ने प्लास्टिक के दानों से पेन-खिलौने व अन्य उपयोगी सामान बनाने की मशीन दिखाते हुए कीमत 45,000 बताई। घर बैठे दो से चार हजार रुपए रोज कमाने का लालच दिया तो हम स्वयं को रोक नहीं पाए। 25 हजार के कच्चे माल के साथ हमने दो मशीनें खरीद ली। घर ले जाकर काम शुरू किया ही था कि चौथे दिन मशीन जवाब दे गई। तमाम कोशिशों के बावजूद कंपनी से संपर्क नहीं हुआ। बाद में इंदौर पहुंचे तब तक कम्पनी ऑफिस कहीं ओर शिफ्ट कर चुकी थी। यदि कुछ बचा था तो हम जैसे आधा दर्जन युवाओं की फौज जो पूरी तरह लूट चुके थे।
जला दी दिमाग की बत्ती
उमरिया में कम लागत में ज्यादा कमाई के मकसद से ट्यूब लाईट का चोक बनाने वाली मशीन देकर जबलपुर की जे.के. ट्रेडिंग कम्पनी 30-30 हजार रुपए लेकर चंपत हो गई। ठगे गए राजेन्द्र महोबिया, शिव कुमार साहू, मनोज गुप्ता, प्रदीप विष्वकर्मा एवं पमोद कुमार ने बताया विज्ञापन देखकर कम्पनी के संचालक अमरदीप से संपर्क किया था। उसने कहा हम आपको मशीन के साथ कच्चा माल भी देंगे। बनाया हुआ माल भी हम खरीदेंगे। आपको दो हजार रुपए रोज की बचत होगी। राजी होकर हमने मशीन खरीद ली। बाद में देखा तो पता मशीन पांच हजार से ज्यादा कीमत नहीं रखती।  खैर हमने चोक बनाना शुरू किया तो पता बतायी गई क्षमता का आधा भी काम नहीं हो रहा है। संपर्क किया तो फोन बंद और पहुंचे तो कंपनी का दफ्तर बंद था।
एलआईसी के नाम
सीहोर के सुभाष नगर रेलवे कालोनी निवासी राजेन्द्र सिंह पंवार को नौकरी की चाह भारतीय जीवन बीमा निगम के एजेंट ग्राम थूना कलां निवासी रामगोपाल गड़ोदिया के पास ले गई। वहां गड़ोदिया ने एलआईसी में एलडीसी की नौकरी दिलाने का वादा किया। इसके बदले पंवार से उसने एक लाख रुपए ले लिए। 20०९ में रुपया देने के बाद से आज तक पंवार को नौकरी तो नहीं आश्वासन जरूर मिलते रहे। गड़ोलिया और उसकी एजेंसी ऐसे आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बना चुकी है।
जबलपुर की खमरिया फैक्टरी में नौकरी दिलाने के नाम पर जालसाजों की संस्था आर्यन कंसलटेंसी कई लोगों की आंखों में धूल झोंक गई। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अपना नेटवर्क फैलाकर बैठी संस्था लोगों को 15 लाख रुपए का झटका दे गई। पीडि़तों की मानें तो खमरिया फैक्टरी में नौकरी का विज्ञापन देख उन्होंने रुपए जूटाकर जालसाज युवकों को दिये थे। रुपये लेन के बाद उसने आठ-चार दिन रूकने को कहा। थोड़ा रुककर कंसलटेंसी कार्यालय पहुंचे तो पता चला जालसाज फरार हो चुके हैं।
यह भी हैं फर्जीवाड़े की जड़
जिस एमएएफपी को स्वयं मप्र सरकार के मंत्री गोपाल भार्गव फर्जी करार दे चुके हैं वह कभी स्वयं को गुडविल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की ईकाई बताकर 2400-2800 रुपए का डीडी मांगा। कभी गुजरात एग्रो इंजीनियरिंग वक्र्स की ईकाइ के रूप में 33,00 तो कभी मप्र ग्रामीण कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया का नाम लेकर 2250 रुपए की डीडी मांगी। कमोबेश यही स्थिति महाराष्ट्र स्टेट एग्रीकल्चर इनकॉर्पोरेशन प्रा.लि.की है। इसे कभी नेशनल एग्रीकल्चर एंड बायो फर्टीलाइजर रिसर्च सेंटर की इकाई बताया जाता है तो कभी किसकी। डीडी ली जाती है 1800 से 4000 तक की। जीसीआई इंटरप्राइजेश धोखाधड़ी की दौड़ में सबसे आगे हैं। कम्पनी 5 से 25 हजार रुपए महीने की नौकरी का झांसा देकर 2250, 2800, 3450 से 5500 रुपए तक का डीडी मांगती है।

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