वसूली में जीरो, लेटरबाजी में हीरो..
- दो साल में 60.80 करोड़ में से 6 करोड़ भी नहीं वसूले
- एक-दूसरे को पत्र लिखकर करते रहे दिखावा, कागजों पर होता रहा वसूली का खेल
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
कस्टम, सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट की आंखों में धूल झोकते हुए 60 करोड़ से ज्यादा की कस्टम और एक्साइज ड्यूटी चोरी करने वाले शारदा सॉल्वेंट पर अधिकारी मेहरबान हैं। इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 2005 से 2010 के बीच कंपनी की कारगुजारियां नजरअंदाज करते आए अधिकारी 2010 से दिसंबर 2012 के बीच एक-दूसरे को पत्र और कंपनी को यदाकदा नोटिस तो थमाते रहे लेकिन आज दिन तक आरोपित किए गए टैक्स की वसूली नहीं कर पाए। बाद में जब देखा कि मामला गड़बड़ाने लगा है तो बड़े अधिकारी अधिनस्थों को चमकाते रहे और अधिनस्थ आला अधिकारियों की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगाते रहे।
शिवपुरी के बांसखेड़ी स्थिति कंपनी पर 2011 से ५८,९७,५८,५४८ रुपए की कस्टम ड्यूटी और 1,88,43,277 रुपए की सेंट्रल एक्साइज की चोरी आरोपित की गई। कुल रकम हुई 60.86 करोड़ रुपए। विभागीय अधिकारियों ने इस राशि की वसूली के नाम पर दो वर्षों में सिर्फ और सिर्फ एक-दूसरे को पत्र ही लिखे। यदि कोई वजन करे तो इन पत्रों का वजन पांच किलोग्राम से ज्यादा निकलेगा। सबसे ज्यादा पत्राचार सहायक आयुक्त आर.के.मिश्रा और गुना-ग्वालियर रेंज के अधीक्षक रहे एम.सी.गुप्ता, बी.एस.चौहान और एम.सी.सिकरवार के बीच हुआ।
यूं ही टलता रहा मामला...
विभाग से जुड़े जानकारों की मानें तो शारदा सॉल्वेंट को लेकर विभाग का रवैया जैसा है, वैसा पहले किसी संस्थान के प्रति नहीं देखा। सबसे पहले तो इस बात की जांच की जाना चाहिए कि कंपनी जब 2005 से 2010 तक चोरी करती रही तो इस बीच विभागीय अधिकारी कहां गायब थे? वह भी उस स्थिति में जब आयातित माल, उसकी खपत और निर्यात किए गए माल की विस्तृत जानकारी हर महीने ली या दी जाती है। जब 2010 में 60.86 करोड़ की टैक्स चोरी उजागर की जा चुकी थी तो आज दिन तक वसूली क्यों नहीं हुई? तीन साल हो चुके हैं, इस दौरान वसूली गई राशि का ब्याज ही तकरीबन दो-चार करोड़ रुपए हो चुका होता। पत्रों की आड़ सिर्फ कंपनी को बचाने के लिए की गई।
तो क्या-क्या कर सकता था विभाग...
- आयुक्त के आदेश के बावजूद कंपनी के बॉन्ड इन्फोर्स (कंपनी द्वारा दी जाने वाली सुरक्षा ग्यारंटी जब्त) नहीं हुई।
- यदि आरोपित कर के खिलाफ कंपनी तथ्यात्मक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाई थी तो विभाग वसूली के लिए नोटिस जारी करके कंपनी की संपत्ति तक कुर्क कर सकता था।
- इस संबंध में जिला प्रशासन या वसूली तहसीलदार की मदद भी ली जा सकती थी।
- विभाग ने 2010 में 60.80 करोड़ की चोरी का खुलासा तो किया लेकिन 2010 के बाद कंपनी चोरी नहीं करेगी, न इसकी ग्यारंटी दे पाया। न ही किसी तरह की व्यवस्था सुनिश्चित कर पाया।
दिखावे की चिट्ठी का दस्तावेज..
तारीख किसे लिखा किसने लिखा
2 मार्च 2011 सहायक आयुक्त बी.एस.चौहान
7 मार्च 2011 सहायक आयुक्त बी.एस.चौहान, अधीक्षक
7 मार्च 2011 सहायक आयुक्त बी.एस.चौहान, अधीक्षक
7 मार्च 2011 शारदा सॉल्वेंट सहायक आयुक्त
7 मार्च 2011 आयुक्त आर.के.मिश्रा, सहायक आयुक्त
8 मार्च 2011 आयुक्त आर.के.मिश्रा, सहायक आयुक्त
14 मार्च 2011 सहायक आयुक्त (ग्वालियर) एम.एस.सिकरवार (अधीक्षक)
15 मार्च 2011 सहायक आयुक्त (ग्वालियर) एम.एस.सिकरवार (अधीक्षक)
18 मार्च 2011 सहायक आयुक्त (ग्वालियर) एम.एस.सिकरवार (अधीक्षक)
21 मार्च 2011 अधीक्षक(गुना रेंज) आर.के.मिश्रा, सहायक आयुक्त
21 मार्च 2011 अधीक्षक(गुना) आर.के.मिश्रा, सहायक आयुक्त
31 मार्च 2011 सहायक आयुक्त (ग्वालियर) एम.एस.सिकरवार (अधीक्षक)
31 मार्च 2011 सहायक आयुक्त (ग्वालियर) एम.एस.सिकरवार (अधीक्षक)
4 जुलाई 2011 अधीक्षक(गुना) आर.के.मिश्रा, सहायक आयुक्त
4 जुलाइ्र 2011 अधीक्षक आर.के.मिश्रा, सहायक आयुक्त
4 जुलाई 2011 अधीक्षक(गुना रेंज) आर.के.मिश्रा, सहायक आयुक्त
6 जुलाई 2011 सहायक आयुक्त (ग्वालियर) एम.सी.गुप्ता, अधीक्षक (गुना रेंज)
8 जुलाई 2011 सहायक आयुक्त एम.सी.गुप्ता, अधीक्षक
15 जुलााई 2011 अधीक्षक(गुना) आर.के.मिश्रा, सहायक आयुक्त
15 जुलाई 2011 अधीक्षक(गुना) आर.के.मिश्रा, सहायक आयुक्त
30 अगस्त 2011 सहायक आयुक्त एम.सी.गुप्ता, अधीक्षक
14 सितंबर 2011 अधीक्षक(गुना) आर.के.मिश्रा, सहायक आयुक्त
15 सितंबर 2011 अधीक्षक(गुना) आर.के.मिश्रा, सहायक आयुक्त
15 नवंबर 2011 अधीक्षक(गुना) आर.के.मिश्रा, सहायक आयुक्त
24 अक्टूबर 2011 सहायक आयुक्त अधीक्षक
26 दिसंबर 2012 सहायक आयुक्त अधीक्षक
2 मार्च 2012 अधीक्षक(गुना) आर.के.मिश्रा, सहायक आयुक्त
2 मार्च 2012 शारदा सॉल्वेंट एस.के.देशमुख, सहायक आयुक्त
15 मार्च 2012 एडजीक्यूटिव अथॉरिटी शारदा सॉल्वेंट
22 जून 2012 बी.एस.चौहान, अधीक्षक एडजीक्यूटिव अथॉरिटी
5 अक्टूबर 2012 शारदा सॉल्वेंट अधीक्षक (ग्वालियर)
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