- बहनों को दस साल तक कमरे में कैद करने का लगाया आरोप
भास्कर ने एनजीओ संचालिका की जानकारी पर तथ्यों का तस्दीक किए बिना लिखी खबर
इंदौर. दबंग रिपोर्टर ।
मेरी दो बहने हैं सविता और नीलम। सविता 1996 से और नीलम 2010 से मानसिक रूप से अस्वस्थ्य हैं। दोनो का ईलाज डॉ. अशोक डागरिया द्वारा किया जा रहा है जो कि इस वक्त शहर के मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी (सीएमएचओ) हैं। समय-समय पर दोनों की जांच भी होती है। जांच घर में नहीं होती। ऐसे में मैंने पिता के साथ मिलकर दस साल तक एक कमरे में बहनों को कैद करके रखा है, ऐसा समाचार प्रचारित करना सरासर गलत है। यदि मेरे मन में खोट होती तो मैं 16 साल तक बहनों के ईलाज पर पैसा क्यों खर्च करता। वह भी उस स्थिति में जब मैं कपड़े सिलकर अपना और अपने परिवार का पेट भरता हूं।
दैनिक भास्कर ने 2 अक्टूबर के अंक में 'छोटे से कमरे में दस साल से कैद दो बहनेÓ शीर्षक से जो समाचार प्रकाशित किया था उसकी वास्तविकता बयां करते हुए मय दस्तावेजी प्रमाण के यह बात सविता और नीलम के भाई अरूण कल्डाले और उनके पिता गोपाल कल्डाले ने गुरुवार को एक पत्रकार वार्ता के दौरान कही। चूंकि मेरा घर शहर की व्यवस्ततम सड़कों में से एक पाटनीपुरा-परदेशीपुरा मेनरोड से लगा है और मेरी बहने मानसिक रोग से ग्रसित हैं इसीलिए किसी अनहोनी की आशंका के चलते उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने देते हैं। क्षेत्र में ऐसे कई माता-पिता हैं जो सड़क पर वाहनों की रफ्तार व वाहनों की भीड़ को देखते हुए सामान्य बच्चों को भी घर से नहीं निकलने देते हैं। फिर मेरी बहने तो मानसिक रोगी हैं। कल को उन्हें कुछ हो गया तो लोग यही कहेंगे कि जिम्मेदारियां नहीं संभाल पा रहे थे इसीलिए बहन को सड़क पर धक्का दे दिया।
कल्डाले परिवार और पड़ौसियों का आरोप है कि दैनिक भास्कर ने जिस महिला उत्कृष्ट संस्था की संचालिका सोनिया शर्मा द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारियों के आधार पर समाचार प्रकाशित किया उसने मुझे और मेरे परिवार को ब्लैकमेल करने के मकसद से उक्त कार्रवाई की। सोनिया स्वयं कह चुकी है कि कल्डाले परिवार की दो बेटियां कैद है इस बात का समाचार उसे कल्डाले परिवार के ही उन पड़ौसियों ने दिया जो उनसे द्वेष रखते हैं। जब मैंने उनसे पड़ौसियों के नाम पूछे तो उन्होंने बताने से मना कर दिया। आज सारे पड़ौसी साथ हैं अब वही बताएं कौनसे पड़ौसी ने क्या शिकायत की। सोनिया से पूर्व पहचान के सवाल के जवाब में नकारते हुए कल्डाले परिवार ने बताया कि मेडम अचानक घर में आई। हमें घर से बाहर कर दिया। बहनों से बात की। बहनों ने उन्हें क्या बोला या उनसे क्या बुलवाया किसे पता। उन्होंने तो वीडियो की और दैनिक भास्कर के संवाददाता को फोन करके बुला लिया। भास्कर संवाददाता ने जानकारी ली और हमारे द्वारा दिए गए सवालों के जवाब को तोड़मरोड़कर प्रकाशित कर दिया। मंगलवार और बुधवार पुलिस और समाज कल्याण विभाग की कागजी खानापूर्तियों में बीते। इसीलिए बहनों से गुरुवार को मिले। सोनिया शर्मा ने अपने एनजीओ का नाम ऊंचा करने के चक्कर में न सिर्फ उक्त कार्रवाई की बल्कि हम पर अनैतिक आरोप भी लगाए।
एक 16 साल से तो दूसरी 2 साल से है बीमार,10 साल से कैसे रही कैद..
पड़ौसियों का आरोप है कि अखबार में तथ्यों की तस्दीक किए बिना प्रकाशित किया। बड़ी बहन सविता 16 साल से मानसिक रोगी है जबकि छोटी नीलम 2 साल से। नीलम 2010 तक नौकरी करती रही। ऐसे में 10 साल से दोनों बहनों के कैद रहने का सवाल ही नहीं उठता। अचानक डिप्रेसन में आ जाने के कारण नीलम की हालत ऐसी हुई। सविता को भी कैद नहीं किया लेकिन उसमी दिमागी हालत को देखते हुए उसे अकेला बाहर नहीं जाने देते हैं।
विधायक और कलेक्टर को भी कर चुके हैं आवेदन
अरूण ने क्षेत्रीय विधायक रमेश मेंदाला द्वारा 11 अपै्रल 2012 को एसडीएम इंदौर को लिखे पत्र की कॉपी दिखाते हुए कहा कि आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण बहनों के ईलाज में वित्तीय मदद उपलब्ध कराने के लिए क्षेत्रीय विधायक और जनसुनवाई में कलेक्टर को कई बार आवेदन कर चुके हैं।
क्या कैद बहनों की हवा में ही हो गई इतनी जांच...
बहनों का ईलाज 1996 से 2012 तक मनोचिकित्सक डॉ. विजय बोधले के पास भी चला। 2010 से 2012 के बीच मन: चिकित्सक और मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक डागरिया का भी ईलाज चल रहा है। 10 मार्च 2011, 10 अपै्रल 2011, 13 मई 2011, 13 जून 2011 और 13 अगस्त 2011, 15 नवंबर 2011 को डॉ. डागरिया के मार्गदर्शन में दोनों बहनों की जांच कराई। 15 अपै्रल 2009, 8 अगस्त 2009, 11 नवंबर 2011, 16 दिसंबर 2009, 19 मार्च 2010, 21 अपै्रल 2012 को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग चिकित्सालय में एमडी न्यूरोसर्जन व सहायक प्राध्यापक एमवायएच एवं मानसिक चिकित्सालय एमजीएम डॉ. पाली रस्तोगी ने भी जांच की। ईलाज किया।
सेवाधाम में भर्ती करना चाहा था लेकिन...
बहनों की मानसिक दशा देखते हुए उन्हें उज्जैन जिले के ग्राम अमडोडिया में स्थित सेवाधाम आश्रम में भर्ती कराना चाहा था। सोचा था वहां उन्हें घर से अच्छा माहौल मिलेगा। नियमित सेवा हो जाएगी लेकिन संचालक डॉ. सुधीर गोयल ने कहा आश्रम निराश्रितों के लिए है। उन्होंने घर में ही एक हॉल बनाने की सलाह दी थी जिस पर दो लाख रुपए खर्च आना है। चूंकि मेरी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है इसीलिए हॉल नहीं बना पाया।
भास्कर ने एनजीओ संचालिका की जानकारी पर तथ्यों का तस्दीक किए बिना लिखी खबर
इंदौर. दबंग रिपोर्टर ।
मेरी दो बहने हैं सविता और नीलम। सविता 1996 से और नीलम 2010 से मानसिक रूप से अस्वस्थ्य हैं। दोनो का ईलाज डॉ. अशोक डागरिया द्वारा किया जा रहा है जो कि इस वक्त शहर के मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी (सीएमएचओ) हैं। समय-समय पर दोनों की जांच भी होती है। जांच घर में नहीं होती। ऐसे में मैंने पिता के साथ मिलकर दस साल तक एक कमरे में बहनों को कैद करके रखा है, ऐसा समाचार प्रचारित करना सरासर गलत है। यदि मेरे मन में खोट होती तो मैं 16 साल तक बहनों के ईलाज पर पैसा क्यों खर्च करता। वह भी उस स्थिति में जब मैं कपड़े सिलकर अपना और अपने परिवार का पेट भरता हूं।
दैनिक भास्कर ने 2 अक्टूबर के अंक में 'छोटे से कमरे में दस साल से कैद दो बहनेÓ शीर्षक से जो समाचार प्रकाशित किया था उसकी वास्तविकता बयां करते हुए मय दस्तावेजी प्रमाण के यह बात सविता और नीलम के भाई अरूण कल्डाले और उनके पिता गोपाल कल्डाले ने गुरुवार को एक पत्रकार वार्ता के दौरान कही। चूंकि मेरा घर शहर की व्यवस्ततम सड़कों में से एक पाटनीपुरा-परदेशीपुरा मेनरोड से लगा है और मेरी बहने मानसिक रोग से ग्रसित हैं इसीलिए किसी अनहोनी की आशंका के चलते उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने देते हैं। क्षेत्र में ऐसे कई माता-पिता हैं जो सड़क पर वाहनों की रफ्तार व वाहनों की भीड़ को देखते हुए सामान्य बच्चों को भी घर से नहीं निकलने देते हैं। फिर मेरी बहने तो मानसिक रोगी हैं। कल को उन्हें कुछ हो गया तो लोग यही कहेंगे कि जिम्मेदारियां नहीं संभाल पा रहे थे इसीलिए बहन को सड़क पर धक्का दे दिया।
कल्डाले परिवार और पड़ौसियों का आरोप है कि दैनिक भास्कर ने जिस महिला उत्कृष्ट संस्था की संचालिका सोनिया शर्मा द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारियों के आधार पर समाचार प्रकाशित किया उसने मुझे और मेरे परिवार को ब्लैकमेल करने के मकसद से उक्त कार्रवाई की। सोनिया स्वयं कह चुकी है कि कल्डाले परिवार की दो बेटियां कैद है इस बात का समाचार उसे कल्डाले परिवार के ही उन पड़ौसियों ने दिया जो उनसे द्वेष रखते हैं। जब मैंने उनसे पड़ौसियों के नाम पूछे तो उन्होंने बताने से मना कर दिया। आज सारे पड़ौसी साथ हैं अब वही बताएं कौनसे पड़ौसी ने क्या शिकायत की। सोनिया से पूर्व पहचान के सवाल के जवाब में नकारते हुए कल्डाले परिवार ने बताया कि मेडम अचानक घर में आई। हमें घर से बाहर कर दिया। बहनों से बात की। बहनों ने उन्हें क्या बोला या उनसे क्या बुलवाया किसे पता। उन्होंने तो वीडियो की और दैनिक भास्कर के संवाददाता को फोन करके बुला लिया। भास्कर संवाददाता ने जानकारी ली और हमारे द्वारा दिए गए सवालों के जवाब को तोड़मरोड़कर प्रकाशित कर दिया। मंगलवार और बुधवार पुलिस और समाज कल्याण विभाग की कागजी खानापूर्तियों में बीते। इसीलिए बहनों से गुरुवार को मिले। सोनिया शर्मा ने अपने एनजीओ का नाम ऊंचा करने के चक्कर में न सिर्फ उक्त कार्रवाई की बल्कि हम पर अनैतिक आरोप भी लगाए।
एक 16 साल से तो दूसरी 2 साल से है बीमार,10 साल से कैसे रही कैद..
पड़ौसियों का आरोप है कि अखबार में तथ्यों की तस्दीक किए बिना प्रकाशित किया। बड़ी बहन सविता 16 साल से मानसिक रोगी है जबकि छोटी नीलम 2 साल से। नीलम 2010 तक नौकरी करती रही। ऐसे में 10 साल से दोनों बहनों के कैद रहने का सवाल ही नहीं उठता। अचानक डिप्रेसन में आ जाने के कारण नीलम की हालत ऐसी हुई। सविता को भी कैद नहीं किया लेकिन उसमी दिमागी हालत को देखते हुए उसे अकेला बाहर नहीं जाने देते हैं।
विधायक और कलेक्टर को भी कर चुके हैं आवेदन
अरूण ने क्षेत्रीय विधायक रमेश मेंदाला द्वारा 11 अपै्रल 2012 को एसडीएम इंदौर को लिखे पत्र की कॉपी दिखाते हुए कहा कि आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण बहनों के ईलाज में वित्तीय मदद उपलब्ध कराने के लिए क्षेत्रीय विधायक और जनसुनवाई में कलेक्टर को कई बार आवेदन कर चुके हैं।
क्या कैद बहनों की हवा में ही हो गई इतनी जांच...
बहनों का ईलाज 1996 से 2012 तक मनोचिकित्सक डॉ. विजय बोधले के पास भी चला। 2010 से 2012 के बीच मन: चिकित्सक और मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक डागरिया का भी ईलाज चल रहा है। 10 मार्च 2011, 10 अपै्रल 2011, 13 मई 2011, 13 जून 2011 और 13 अगस्त 2011, 15 नवंबर 2011 को डॉ. डागरिया के मार्गदर्शन में दोनों बहनों की जांच कराई। 15 अपै्रल 2009, 8 अगस्त 2009, 11 नवंबर 2011, 16 दिसंबर 2009, 19 मार्च 2010, 21 अपै्रल 2012 को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग चिकित्सालय में एमडी न्यूरोसर्जन व सहायक प्राध्यापक एमवायएच एवं मानसिक चिकित्सालय एमजीएम डॉ. पाली रस्तोगी ने भी जांच की। ईलाज किया।
सेवाधाम में भर्ती करना चाहा था लेकिन...
बहनों की मानसिक दशा देखते हुए उन्हें उज्जैन जिले के ग्राम अमडोडिया में स्थित सेवाधाम आश्रम में भर्ती कराना चाहा था। सोचा था वहां उन्हें घर से अच्छा माहौल मिलेगा। नियमित सेवा हो जाएगी लेकिन संचालक डॉ. सुधीर गोयल ने कहा आश्रम निराश्रितों के लिए है। उन्होंने घर में ही एक हॉल बनाने की सलाह दी थी जिस पर दो लाख रुपए खर्च आना है। चूंकि मेरी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है इसीलिए हॉल नहीं बना पाया।
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