उज्जैन नगर निगम और तापी की जादूभरी मिलीभगत
इंदौर. विनोद शर्मा ।
'पेसेंजर ऑटो रिक्शा में 15 फीट लंबे और दो फीट डाया के आधा दर्जन पाइप आ सकते हैं...। टैंकर में भी इन पाइपों को आसानी से रखकर सप्लाई किया जा सकता है...।Ó किसी को यह बात हजम हो या न हो लेकिन नगर निगम उज्जैन को सौंपे तापी प्रिस्ट्रेस्ट प्रोडक्ट्स लि. के बिल तो यही कहानी कहते हैं। इतना ही नहीं नगर निगम ने बिल के रूप में कंपनी की इस जादूई कहानी को पहले मंजूरी देकर भूगतान कर दिया, आपत्ति बाद में ली। जिस वक्त भुगतान हुआ उस वक्त निगमायुक्त चंद्रमौली शुक्ला थे जिनके खिलाफ उज्जैन से जुड़े अलग-अलग मामलों में लोकायुक्त जांच जारी है।
जेएनएनयूआरएम के तहत उज्जैन में जलप्रदाय योजना के तहत पाइप लाइन डालने का ठेका नगर पालिका निगम ने भुसावल महाराष्ट्र की तापी प्रीस्ट्रेस्ड प्रॉडक्ट लिमिटेड कंपनी को 2009 में सौंपा था। कंपनी को 60.14 करोड़ में 400 किलोमीटर लंबी लाइन डालना थी। कंपनी का काम शुरू से विवादों से घिरा रहा। 2010 में मिली शिकायत के बाद लोकायुक्त ने जांच शुरू कर दी थी। इसके बाद अलग-अलग कई शिकायतें मिली। अरविंद पाटीदार, ईश्वर पाटीदार, संजय ठाकुर और रवि चौधरी ने संयुक्त शिकायत के साथ कंपनी के जो बिल लगाए हैं उनमें पाइप सप्लाई के लिए जिन वाहनों का इस्तेमाल बताया है उनमें एमपी09-6811 और एमपी-09-केए-७३९१ का जिक्र भी है। इसमें एमपी09-6811 रामसिंह पिता बलराम सिंह के ऑटो रिक्शा का नंबर है जबकि एमपी-09-केए-७३९१ बजरगनगर इंदौर निवासी यादवराव देशमुख का टैंकर है। न टेंकर मं पाइप आ सकते हैं न ही ऑटो रिक्शा में। दोनों गाडिय़ों से मई 2009 में पाइप आना बताए गए थे।
शिकायत तत्कालीन निगमायुक्त चंद्रमौली शुक्ला, सिटी इंजीनियर जगदीश डगावकर, अशोक शुक्ला और तापी प्रिस्ट्रेस्ट डायरेक्टर दीपेश कोटेचा के खिलाफ हुई है।
पहले अनुमति, बाद में आपत्ति
कंपनी ने 110, 140, 160, 200 और 250 एमएम के पाइपों का एक बिल 2009 में पकड़ाया था। 25 मार्च 2009 को इस बिल में 3,55,13,662 रुपए का भुगतान करने की मांग की थी। बिना भौतिक सत्यापन के नगर निगम ने इस बिल को मंजूरी देकर भुगतान कर दिया। 7 जनवरी 2010 को हुई समीक्षा बैठक में कंपनी की प्रगति अत्यंत असंतोषजनक पाई गई थी। यह बात भी सामने आई कि कंपनी के पास पर्याप्त मात्रा में तकनीकी स्टाफ नहीं है। इसीलिए 11 उपयंत्री और 5 सहायक यंत्री सिविल डिग्री धारी भर्ती है। 3 फरवरी 2010 को आयुक्त ने भुगतान पर आपत्ति ली।
शिकायत इन बिंदुओं पर भी...
- कार्य पूरा करने की समय सीमा 11 फरवरी 2011 थी। अब तक यह कार्य पूरा नहीं हो सका है।
- अनुबंध के अनुसार कार्य में पेटी कॉन्ट्रेक्टर या अन्य को शामिल नहीं किया जा सकता पर कंपनी द्वारा चौधरी एक्स सी कंस्ट्रक्शन कंपनी को करीब एक करोड़ से अधिक का कार्य दिया गया। अन्य पेटी कॉन्ट्रेक्टरों को भी कार्य देकर अनुबंध का उल्लंघन किया।
- 21, 22, 23 मार्च 2009 में 140 किमी पाइप का भुगतान कंपनी ने लिया जबकि 22 दिसंबर 2009 तक 140 किमी की पाइपलाइन का स्टाक गोडाउन में उपलब्ध नहीं था।
- खुदाई नक्शे अनुसार नहीं की गई। मानक स्तर अनुसार कम से कम 1.20 मीटर खुदाई होना चाहिए थी लेकिन पाइप ऊपरी सतर पर डालकर छोड़ दिए। जो बाद में वाहनों के दबाव से फुटने लगे।
- जितने पाइप डाले उनमें से ज्यादातर रिजेक्टेड पीस थे।
- कंपनी ने तकनीकी स्टाफ की तंगी के साथ किया काम।
- पाइप लाइन फिटिंग में उपयोग लाया गया मटेरियल मानक स्तर का न होकर निम्न स्तर का।
दिल्ली तक पहुंचा मामला...
शहर में कुल 400 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन योजना के तहत डाली जाना है। यह करीब 60 करोड़ की योजना है। दिसंबर 2012 तक काम पूरा नहीं हो सका है। करीब 150 किलोमीटर ही पाइप लाइन डाली जा सकी है। कार्य पूरा होने से पहली ही इसकी क्वालिटी पर सवाल उठे हैं। सांसद प्रेमचंद गुड्डू इसकी शिकायत दिल्ली तक कर चुके हैं।
इंदौर. विनोद शर्मा ।
'पेसेंजर ऑटो रिक्शा में 15 फीट लंबे और दो फीट डाया के आधा दर्जन पाइप आ सकते हैं...। टैंकर में भी इन पाइपों को आसानी से रखकर सप्लाई किया जा सकता है...।Ó किसी को यह बात हजम हो या न हो लेकिन नगर निगम उज्जैन को सौंपे तापी प्रिस्ट्रेस्ट प्रोडक्ट्स लि. के बिल तो यही कहानी कहते हैं। इतना ही नहीं नगर निगम ने बिल के रूप में कंपनी की इस जादूई कहानी को पहले मंजूरी देकर भूगतान कर दिया, आपत्ति बाद में ली। जिस वक्त भुगतान हुआ उस वक्त निगमायुक्त चंद्रमौली शुक्ला थे जिनके खिलाफ उज्जैन से जुड़े अलग-अलग मामलों में लोकायुक्त जांच जारी है।
जेएनएनयूआरएम के तहत उज्जैन में जलप्रदाय योजना के तहत पाइप लाइन डालने का ठेका नगर पालिका निगम ने भुसावल महाराष्ट्र की तापी प्रीस्ट्रेस्ड प्रॉडक्ट लिमिटेड कंपनी को 2009 में सौंपा था। कंपनी को 60.14 करोड़ में 400 किलोमीटर लंबी लाइन डालना थी। कंपनी का काम शुरू से विवादों से घिरा रहा। 2010 में मिली शिकायत के बाद लोकायुक्त ने जांच शुरू कर दी थी। इसके बाद अलग-अलग कई शिकायतें मिली। अरविंद पाटीदार, ईश्वर पाटीदार, संजय ठाकुर और रवि चौधरी ने संयुक्त शिकायत के साथ कंपनी के जो बिल लगाए हैं उनमें पाइप सप्लाई के लिए जिन वाहनों का इस्तेमाल बताया है उनमें एमपी09-6811 और एमपी-09-केए-७३९१ का जिक्र भी है। इसमें एमपी09-6811 रामसिंह पिता बलराम सिंह के ऑटो रिक्शा का नंबर है जबकि एमपी-09-केए-७३९१ बजरगनगर इंदौर निवासी यादवराव देशमुख का टैंकर है। न टेंकर मं पाइप आ सकते हैं न ही ऑटो रिक्शा में। दोनों गाडिय़ों से मई 2009 में पाइप आना बताए गए थे।
शिकायत तत्कालीन निगमायुक्त चंद्रमौली शुक्ला, सिटी इंजीनियर जगदीश डगावकर, अशोक शुक्ला और तापी प्रिस्ट्रेस्ट डायरेक्टर दीपेश कोटेचा के खिलाफ हुई है।
पहले अनुमति, बाद में आपत्ति
कंपनी ने 110, 140, 160, 200 और 250 एमएम के पाइपों का एक बिल 2009 में पकड़ाया था। 25 मार्च 2009 को इस बिल में 3,55,13,662 रुपए का भुगतान करने की मांग की थी। बिना भौतिक सत्यापन के नगर निगम ने इस बिल को मंजूरी देकर भुगतान कर दिया। 7 जनवरी 2010 को हुई समीक्षा बैठक में कंपनी की प्रगति अत्यंत असंतोषजनक पाई गई थी। यह बात भी सामने आई कि कंपनी के पास पर्याप्त मात्रा में तकनीकी स्टाफ नहीं है। इसीलिए 11 उपयंत्री और 5 सहायक यंत्री सिविल डिग्री धारी भर्ती है। 3 फरवरी 2010 को आयुक्त ने भुगतान पर आपत्ति ली।
शिकायत इन बिंदुओं पर भी...
- कार्य पूरा करने की समय सीमा 11 फरवरी 2011 थी। अब तक यह कार्य पूरा नहीं हो सका है।
- अनुबंध के अनुसार कार्य में पेटी कॉन्ट्रेक्टर या अन्य को शामिल नहीं किया जा सकता पर कंपनी द्वारा चौधरी एक्स सी कंस्ट्रक्शन कंपनी को करीब एक करोड़ से अधिक का कार्य दिया गया। अन्य पेटी कॉन्ट्रेक्टरों को भी कार्य देकर अनुबंध का उल्लंघन किया।
- 21, 22, 23 मार्च 2009 में 140 किमी पाइप का भुगतान कंपनी ने लिया जबकि 22 दिसंबर 2009 तक 140 किमी की पाइपलाइन का स्टाक गोडाउन में उपलब्ध नहीं था।
- खुदाई नक्शे अनुसार नहीं की गई। मानक स्तर अनुसार कम से कम 1.20 मीटर खुदाई होना चाहिए थी लेकिन पाइप ऊपरी सतर पर डालकर छोड़ दिए। जो बाद में वाहनों के दबाव से फुटने लगे।
- जितने पाइप डाले उनमें से ज्यादातर रिजेक्टेड पीस थे।
- कंपनी ने तकनीकी स्टाफ की तंगी के साथ किया काम।
- पाइप लाइन फिटिंग में उपयोग लाया गया मटेरियल मानक स्तर का न होकर निम्न स्तर का।
दिल्ली तक पहुंचा मामला...
शहर में कुल 400 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन योजना के तहत डाली जाना है। यह करीब 60 करोड़ की योजना है। दिसंबर 2012 तक काम पूरा नहीं हो सका है। करीब 150 किलोमीटर ही पाइप लाइन डाली जा सकी है। कार्य पूरा होने से पहली ही इसकी क्वालिटी पर सवाल उठे हैं। सांसद प्रेमचंद गुड्डू इसकी शिकायत दिल्ली तक कर चुके हैं।
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