Sunday, June 28, 2015

कुलीन क्लब में 'केटरिंगÓ कलह YC

- पांच साल पुराने केटरर की छूट्टी, कोषाध्यक्ष की निगाह क्लब के किचन पर
- अध्यक्ष-सचिव दे रहे हैं साथ
-महीनेभर से सदस्यों को नहीं मिला ढंग का खाना
इंदौर. विनोद शर्मा ।
कुलीनों के यशवंत क्लब में जो किचन है उस पर कोषाध्यक्ष का दिल आ गया है। इसके लिए अध्यक्ष और सचिव के साथ मिलकर उन्होंने पांच-छह साल साल पुराना केटरिंग का ठेका निरस्त कर दिया। नए सिरे से टेंडर निकाले जाने और कोषाध्यक्ष का टेंडर न्यूनतम रहने के बावजूद सदस्यों की आपत्ति के कारण क्लब केंटिन का फैसला नहीं हो पाया। इधर, ठेका निरस्त होने के बाद से ही सदस्यों को क्लब में ढंग का खाना नसीब नहीं हुआ। सबके सब अध्यक्ष-सचिव और कोषाध्यक्ष की मनमानी को लेकर नाराज हैं।
अध्यक्ष परमजीतसिंह छाबड़ा और पूर्व कोषाध्यक्ष व चुनाव बाद बतौर सचिव निर्वाचित सुनील बजाज के बीच की जंग जग जाहिर है। दोनों के बीच वैचारिक मतभेद भले दूर हुए हो या न हुए हो लेकिन कोषाध्यक्ष हेमंत जुनेजा उर्फ हंटू की केंटिन को लेकर दोनों एकमत है।  शायद यही वजह है कि बीते पांच-छह साल से क्लब में केटरिंग चला रहे विजय स्वामी और मनीष पाटील की छूट्टी कर दी है। बताया जा रहा है कि नई केटरिंग को लेकर टेंडर निकाले जा रहे हैं। हालांकि, क्लब के मौजूदा कोषाध्यक्ष और बायपास स्थित जलसा में केटरिंग की कमान संभालने वाले हंटू की केटरिंग दावेदारी की दौड़ में सबसे आगे है। उन्हें क्लब अध्यक्ष पम्मी का वरदहस्त भी प्राप्त है। क्लब कानून के हिसाब से दोबारा अध्यक्ष चुने जा चुके पम्मी तीसरी बार चुनाव नहीं लड़ सकते। इसीलिए इस बार उनकी प्राथमिकता अध्यक्ष पद की दावेदारी नहीं बल्कि अध्यक्ष पद पर रहते अपनों का भला करने की होगी। उधर, नजदीकी के चलते सचिव और अध्यक्ष के कट्टर प्रतिद्विद्वि सुनील बजाज भी न हंटू की मनमानी का विरोध कर रहे हैं, न ही उसकी केटरिंग का।
जुबान चढ़ गया था स्वाद
सूत्रों की मानें तो विजय स्वामी और मनीष पाटील पांच-छह साल से केटरिंग चला रहे हैं। उनकी केटरिंग का स्वाद इन पांच वर्षों में न सिर्फ क्लब के सदस्यों की जुबान चढ़ा बल्कि उनके साथ आने वाले देशी-विदेशी मेहमानों को भी भा गया था। आज दिन तक केटरिंग को लेकर किसी सदस्य ने शिकायत नहीं की। ऐसे में सवाल यह उठता है कि ठेका निरस्त करने का फैसला कहां तक जायज है।
उनका मजा, सबको सजा
चूंकि हेमंत जुनेजा कोषाध्यक्ष हैं और अध्यक्ष-सचिव दोनों से उनकी पटरी बैठती है। इसीलिए उन्होंने ठेका निरस्त करवाया। अलॉटमेंट में अध्यक्ष-सचिव भी उनसे सहमत हैं। ठेका निरस्त होने के बाद से केटरिंग करीब-करीब बंद है। एक महीना हो गया। आज हालात यह है कि सदस्यों को खाना तो दूर व्यवस्थित नाश्ता तक नसीब नहीं हो रहा है। वह भी उस स्थिति में जब त्योहारी सीजन में सदस्य दोस्तों या रिश्तेदारों के साथ क्लब में आते-जाते हैं।
आखिर क्यों नहीं दे रहे हैं पाटील को मौका
स्वामी-पाटील को सालाना ठेका दिया जाता है। हर साल के लिए उनकी समयसीमा तय है। जैसे ही समयसीमा खत्म होती है, उसे एक साल के लिए बढ़ा दिया जाता। ठेका भी हुआ तो काम इसी जोड़ी को मिला। फिर ऐसा क्या हुआ कि नया ठेका आवंटित होने से पहले ही क्लब के कर्ताधर्ताओं को स्वामी-पाटील का ठेका निरस्त करके वैकल्पिक व्यवस्था करना पड़ी।

केटरिंग का फैसला हुआ नहीं, होना है। अभी टेंडर निकाले गए हैं। एक-दो दिन में तय हो जाएगा कि केटरिंग किसे दी जाना है। हंटू की केटरिंग के बारे में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है।
सुनील बजाज, सचिव
यशवंत क्लब
यह थी उम्मीदें...
-- चुनाव बाद सदस्यों को उम्मीद थी कि विवाद खत्म होंगे और क्लब की गतिविधियां सुचारू रूप से चलेगी।
-- सदस्यों में एकता आएगी।
-- अध्यक्ष-कोषाध्यक्ष की जंग जिस तरह कोर्ट-कचहरी तक पहुंची और क्लब की साख दाव पर लगी। ऐसा नहीं होगा।

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