- बंटवारे-पारिवारिक दान पर स्टॉम्प ड्यूटी 2.5 प्रतिशत घटी
- 5 प्रतिशत स्टॉम्प ड्यूटी पर ही होगी पॉवर
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
अपने मलाईदार बजट से व्यापारियों के दिल में जगह बनाने में काफी हद तक कामयाब रहे वित्त मंत्री जयंत मलैया जमीनी मामले में मिलाजुला रंग ही जमा पाए। उन्होंने बटवारे और परिवार के दान पत्र की संपत्तियों पर लगने वाली स्टॉम्प ड्यूटी में 2.5 प्रतिशत की राहत दी तो दूसरी तरफ पॉवर आॅफ अटर्नी के लिए 5 प्रतिशत की स्टॉम्प ड्यूटी तय कर दी। जानकारों की मानें तो एक फैसले ने राहत दी तो दूसरा बड़ी आफत साबित होगा।
बजट से पहले वित्तमंत्री और महानिरीक्षक पंजीयक से मुलाकात कर वकीलों ने कुछ मुद्दे रखे थे। बजट में इनसे से दो पर काम करते हुए मंत्री मलैया ने बटवारे और पारिवारिक दान पत्र पर संपत्तियों के आदान-प्रदान पर लगने वाली स्टॉम्प ड्यूटी 5 से घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दी है। एडवोकेट प्रमोद द्विवेदी ने बताया कि 1994 में जब स्टॉम्प ड्यूटी 12.5 प्रतिशत थी उस वक्त भी बंटवारे और पारिवारिक दान पत्र पर संपत्तियों के आदान-प्रदान पर 4-5 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी लगती थी। अब जबकि स्टॉम्प ड्यूटी घटकर 5 प्रतिशत रह गई है तब भी यह ड्यूटी इतनी है। यानी जितना पैसा सपंत्ति खरीदने पर चुकाना पड़ रहा था उतना ही दान या बंटवारे में मिलने पर चुकाना पड़ता था। इसीलिए हमने इस मामले में नितिगत निर्णय की मांग की थी। जवाब में मंत्री ने 2.5 प्रतिशत की कटौती की।
बड़ा फैसला यह भी...
पॉवर आॅफ अटर्नी के नियमों में बदलाव किया है। अब तक एक रुपए से लेकर अरबों तक की जमीन 1000 रुपए के स्टॉम्प पर पॉवर कर दी जाती थी। अब ऐसा नहीं होगा। अब पॉवर के लिए भी 5 प्रतिशत ड्यूटी चुकाना होगी जो कि संपत्ति की खरीदी-बिक्री के दौरान चुकाना पड़ती है। राहत के नाम पर सिर्फ यही है कि पॉवर आॅफ अटर्नी पर सौदे की तरह 1 प्रतिशत नगर निगम, 1 प्रतिशत पंचायत और 0.25 प्रतिशत उपकर नहीं चुकाना पड़ेगा।
महंगी हुई पॉवर
- अब तक हजार रुपए के स्टॉम्प पर पॉवर हो जाती थी जो कि सालभर तक मान्य रहती थी।
- अब 5 प्रतिशत स्टॉम्प के साथ साइन होने वाला पॉवर अनिश्चिितकालीन होगा।
- इससे पहले पॉवर पर 2 प्रतिशत स्टॉम्प शुल्क था जिसे सरकार ने हटाकर 1 हजार का स्टॉम्प तय कर दिया था। अपने ही नियम को बदलते हुए सरकार ने स्टॉम्प शुल्क फिर 5 प्रतिशत कर दिया जो कि अब तक की सबसे ऊंची दर है।
नुकसान ...
- छोटे-मोटे कामों के जरिए लाभ लेने के लिए जमीन कारोबार में जुड़े लोग कारोबार से दूर हो जाएंगे।
- मकान, दुकान, फ्लेट, प्लॉट और महंगे होंगे।
- क्योंकि स्टॉम्प ड्यूटी में होने वाला खर्च निवेशकर्ता को ही चुकाना होगा।
- चोरी के और तरीके बढ़ेंगे। लोग कच्चे कागजो, आवंटन पत्र और डायरी के आधार पर ही व्यापार करेंगे।
- भूमि विवाद और पुलिस की कमाई बढ़ेगी।
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