संकट में गोल्ड लोन कंपनियां, बढऩे लगे डिफाल्टर
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
सोने की कीमतों में भारी गिरावट ने मुथूट फाइनेंस और मन्नापुरम फाइनेंस जैसी नॉन बैकिंग फाइनेंसियल कंपनियों (एनबीएफसी) की नींद उड़ा दी है। बीते सप्ताह कीमतों का ग्राफ गिरने का असर इन कंपनियों के शेयर पर दिखा है। जानकारों की मानें तो सोने टूटने से गोल्ड लोन के डिफाल्टर्स कई गुना तक बढ़ जाएंगे। बैंकों का मार्जिन कम होगा। वहीं 30 हजार रुपए/तोला के भाव का सोना बड़े पैमाने पर खरीदकर बैठे व्यापारी माथ पीट रहे हैं। हालात यह है कि इंदौर, भोपाल, सागर, रतलाम और मुंबई जैसे शहरों में भारी नुकसान से बचने के लिए दुकान बंद कर दी है। उनका कहना है जब भाव मिलेगा तब सोना बेचेंगे। कई दुकानदारों ने गढ़वाई का दाम बढ़ाकर नुकसानी बराबर करने में जुटे हैं। बाजार में बड़े पैमाने पर सोना आने के बाद जहां व्यापारियों की नींद हराम है वहीं पुलिस को भी चौकसी बढ़ानी पड़ी है। कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज जहां सोने की अवैध खेप पर निगाह रखे हुए हैं वहीं आयकर हर खरीद पर।
मणापुरम फाइनेंस सोने की कीमत 1850/ग्राम आंककर 88 प्रतिशत लोन देती है जो बाजार कीमत के मुकाबले सिर्फ 60 प्रतिशत है। यानी एक तोला (१० ग्राम) की कीमत हुई १८,५०० रुपए। इसका 88 प्रतिशत हुआ 16,280 रुपए। 2.09 प्रतिशत/माह ब्याज के साथ। मुथूट फाइनेंस और मणापुरम फाइनेंस के अधिकारियों की मानें तो सोने का जो बैंकिंग भाव आज १७५० से १८५० रुपए/ग्राम है वही 15 दिन पहले सोने का यही भाव 2200-२३५० रुपए/ग्राम था। उस वक्त जिन उपभोक़्ताओं ने 88 प्रतिशत लोन के रूप में जितनी रकम ली थी आज बाजार में सोने की कीमत उसके आसपास ही है। ऐसे में इस बात की संभावना कम हो जाती है कि उपभोक्ता ब्याज का पैसा चुकाने के साथ लोन की रकम भी चुका दें। इसीलिए सोने की कीमतें घटने के साथ इन कंपनियों के डिफाल्टर्स बढऩा भी तय है। गोल्ड लोन पर ब्याज एक साथ रीपेमेंट के वक्त लिया जाता है और अगर सोने के दाम घटे तो लोन की रिकवरी मुश्किल हो जाती है। बैंकों और गोल्ड एनबीएफसी को अब अपनी रणनीति बदलनी होगी। सोने में गिरावट का मंथली गोल्ड स्कीम पर पर ज्यादा असर नहीं होगा।
बैंकों का मार्जिन कम हुआ
इंडिया रेटिंग्स ने भी इसकी पुष्टि की है। संस्था का दावा है कि सोने में गिरावट आने के बाद बैंकों और गोल्ड एनबीएफसी की मुश्किलें बढ़ी हैं। बैंकों और गोल्ड एनबीएफसी के एसेट क्वॉलिटी पर दबाव आया है। बैंक और गोल्ड एनबीएफसी मार्जिन रखकर गोल्ड लोन देती हैंए ताकि दाम कम होने के बाद डिफॉल्ट होने पर सोना बेचकर लोन वसूल किया जा सके। लेकिन, सोने के टूटने से बैंकों और गोल्ड एनबीएफसी का मार्जिन कम हुआ है। सोने में और गिरावट आने पर ग्राहकों के पास लोन वापस करने का कारण नहीं रहता है। मुथूट फाइनेंस और मन्नापुरम फाइनेंस चौथी तिमाही में घाटे में आ सकते हैं। अगर कंपनियों को सोना बेचना पड़े तो उनके मार्जिन पर दबाव दिखेगा।
दक्षीण में ज्यादा डर...
जानकारों के मुताबिक कीमतें कम होने का सबसे ज्यादा असर उन बैंकों पर दिखेगा जिनके कुल पोर्टफोलियो में गोल्ड लोन का हिस्सा ज्यादा है। ऐसी बैंकों की तादाद दक्षिण भारतीय में ज्यादा है। मणापुरम फाइनेंस की देशभर में कुल ३१५० शाखाएं हैं। इनमें २२३० शाखाएं दक्षीण भारत के चार राज्यों में है। सबसे ज्यादा तमिलनाडू में ५८३, आंध्रप्रदेश में ५६७, कर्नाटक में ५६५, केरल में ५३० है। वहीं मप्र में ८५ शाखाएं हैं। हिमाचल और झारखंड में एक-एक शाखाएं हैं।
सोने के बदले लोन क्यों?
शायद ही कोई भरतीय परिवार होगा जिसे सोने से लगाव न हो। पैसों की तुरंत जरूरत होने पर सोने के बदले लोन लिया जा सकता है। इसके दो कारण हैं। एक तो इसकी प्रोसेसिंग में वक्त नहीं लगता, मतलब सोने के बदले आपको दो-तीन घंटे के भीतर कर्ज मिल सकता है। दूसरे इसकी ब्याज दरें भी कम होती हैं। आम तौर पर सोने के बदले लिए जाने वाले लोन की ब्याज दरें 11ण्75.15 प्रतिशत के बीच होती हैं। ज्यादातर बड़े बैंक और कुछ एनबीएफसी जैसे मुथूट फाइनेंस, मण्णपुरम गोल्ड आदि सोने के बदले लोन उपलब्ध कराते हैं। इस लोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें नियमित रूप से मासिक किस्तों का भुगतान करना जरूरी नहीं होता है।
मणापुरम गोल्ड
- 1850 रुपए प्रति ग्राम।
- ब्याज 2.09 प्रतिशत ।
- कुल कीमत पर 88 प्रतिशत लोन।
- ब्याज हर महीने।
- सालाना रिनुअल जरूरी।
मुथूट फाइनेंस
- 1७50 रुपए प्रति ग्राम।
- ब्याज 2.0 प्रतिशत ।
- बाजार कीमत के मुकाबले ६०-७० प्रतिशत लोन।
- ब्याज हर महीने।
- जैसे-जैसे पैसा जमा करो मुलधन-ब्याज कम होगा।
ग्राहक खुश, व्यापारी दुखी...
मुंबई का जवेरी मार्केट सोने-चांदी का थोक बाजार है। यहां व्यापारियों ने शादी सीजन को देखते हुए ३०,००० और ३१,००० प्रति तोला के भाव से खरीद रखा था। उम्मीद थी सीजन में भाव बढ़ेंगे, कमाई होगी। हुआ उलटा, सोने का भाव कम होकर २६५०० रुपए/तोला रह गया। 5 से 6 हजार रुपए/तोले की नुकसानी ने व्यापारियों के पेरों तले से जमीन खींच ली। गजजयंति ज्वैलर्स जैसी कई दुकानें बंद हो गई। सोना 20 से 22 हजार/तोला जाने की संभावनाओं ने कुछ व्यापारियों को सदमे में ला दिया है। गजजयंति ज्वलैर्स के संचालक मधुसूदन शर्मा ने बताया कि भाव गिरने के कारण घाटा बहुत हो गया। यदि घाटा खाकर माल बेचा तो जमा-पूंजी बिक जाएगी। नुकसान झेलने से अच्छा है जब भाव मिलेंगा तब बेचेंगे। कुछ ऐसी ही स्थिति इंदोर और रतलाम जैसी प्रदेश की बड़े बाजारों में भी है।
हिसाब बराबर...
जिन दुकानदारों ने दुकानें चालू रखी हैं उन्होंने बनवाई ५० रुपए/ग्राम से बढ़ाकर २५०-३०० रुपए/ग्राम तक कर दी है। अब बाजार में जो सोना २६५०० रुपए/तोले का है, बनवाई के बाद वही सोना २९,०००/ तोले में बिक रहा है। कीमतों में अंतर के कारण आए दिन झगड़े होते हैं इसीलिए मुंबई पुलिस ने जवेरी बाजार में चौकसी बढ़ा दी है।
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
सोने की कीमतों में भारी गिरावट ने मुथूट फाइनेंस और मन्नापुरम फाइनेंस जैसी नॉन बैकिंग फाइनेंसियल कंपनियों (एनबीएफसी) की नींद उड़ा दी है। बीते सप्ताह कीमतों का ग्राफ गिरने का असर इन कंपनियों के शेयर पर दिखा है। जानकारों की मानें तो सोने टूटने से गोल्ड लोन के डिफाल्टर्स कई गुना तक बढ़ जाएंगे। बैंकों का मार्जिन कम होगा। वहीं 30 हजार रुपए/तोला के भाव का सोना बड़े पैमाने पर खरीदकर बैठे व्यापारी माथ पीट रहे हैं। हालात यह है कि इंदौर, भोपाल, सागर, रतलाम और मुंबई जैसे शहरों में भारी नुकसान से बचने के लिए दुकान बंद कर दी है। उनका कहना है जब भाव मिलेगा तब सोना बेचेंगे। कई दुकानदारों ने गढ़वाई का दाम बढ़ाकर नुकसानी बराबर करने में जुटे हैं। बाजार में बड़े पैमाने पर सोना आने के बाद जहां व्यापारियों की नींद हराम है वहीं पुलिस को भी चौकसी बढ़ानी पड़ी है। कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज जहां सोने की अवैध खेप पर निगाह रखे हुए हैं वहीं आयकर हर खरीद पर।
मणापुरम फाइनेंस सोने की कीमत 1850/ग्राम आंककर 88 प्रतिशत लोन देती है जो बाजार कीमत के मुकाबले सिर्फ 60 प्रतिशत है। यानी एक तोला (१० ग्राम) की कीमत हुई १८,५०० रुपए। इसका 88 प्रतिशत हुआ 16,280 रुपए। 2.09 प्रतिशत/माह ब्याज के साथ। मुथूट फाइनेंस और मणापुरम फाइनेंस के अधिकारियों की मानें तो सोने का जो बैंकिंग भाव आज १७५० से १८५० रुपए/ग्राम है वही 15 दिन पहले सोने का यही भाव 2200-२३५० रुपए/ग्राम था। उस वक्त जिन उपभोक़्ताओं ने 88 प्रतिशत लोन के रूप में जितनी रकम ली थी आज बाजार में सोने की कीमत उसके आसपास ही है। ऐसे में इस बात की संभावना कम हो जाती है कि उपभोक्ता ब्याज का पैसा चुकाने के साथ लोन की रकम भी चुका दें। इसीलिए सोने की कीमतें घटने के साथ इन कंपनियों के डिफाल्टर्स बढऩा भी तय है। गोल्ड लोन पर ब्याज एक साथ रीपेमेंट के वक्त लिया जाता है और अगर सोने के दाम घटे तो लोन की रिकवरी मुश्किल हो जाती है। बैंकों और गोल्ड एनबीएफसी को अब अपनी रणनीति बदलनी होगी। सोने में गिरावट का मंथली गोल्ड स्कीम पर पर ज्यादा असर नहीं होगा।
बैंकों का मार्जिन कम हुआ
इंडिया रेटिंग्स ने भी इसकी पुष्टि की है। संस्था का दावा है कि सोने में गिरावट आने के बाद बैंकों और गोल्ड एनबीएफसी की मुश्किलें बढ़ी हैं। बैंकों और गोल्ड एनबीएफसी के एसेट क्वॉलिटी पर दबाव आया है। बैंक और गोल्ड एनबीएफसी मार्जिन रखकर गोल्ड लोन देती हैंए ताकि दाम कम होने के बाद डिफॉल्ट होने पर सोना बेचकर लोन वसूल किया जा सके। लेकिन, सोने के टूटने से बैंकों और गोल्ड एनबीएफसी का मार्जिन कम हुआ है। सोने में और गिरावट आने पर ग्राहकों के पास लोन वापस करने का कारण नहीं रहता है। मुथूट फाइनेंस और मन्नापुरम फाइनेंस चौथी तिमाही में घाटे में आ सकते हैं। अगर कंपनियों को सोना बेचना पड़े तो उनके मार्जिन पर दबाव दिखेगा।
दक्षीण में ज्यादा डर...
जानकारों के मुताबिक कीमतें कम होने का सबसे ज्यादा असर उन बैंकों पर दिखेगा जिनके कुल पोर्टफोलियो में गोल्ड लोन का हिस्सा ज्यादा है। ऐसी बैंकों की तादाद दक्षिण भारतीय में ज्यादा है। मणापुरम फाइनेंस की देशभर में कुल ३१५० शाखाएं हैं। इनमें २२३० शाखाएं दक्षीण भारत के चार राज्यों में है। सबसे ज्यादा तमिलनाडू में ५८३, आंध्रप्रदेश में ५६७, कर्नाटक में ५६५, केरल में ५३० है। वहीं मप्र में ८५ शाखाएं हैं। हिमाचल और झारखंड में एक-एक शाखाएं हैं।
सोने के बदले लोन क्यों?
शायद ही कोई भरतीय परिवार होगा जिसे सोने से लगाव न हो। पैसों की तुरंत जरूरत होने पर सोने के बदले लोन लिया जा सकता है। इसके दो कारण हैं। एक तो इसकी प्रोसेसिंग में वक्त नहीं लगता, मतलब सोने के बदले आपको दो-तीन घंटे के भीतर कर्ज मिल सकता है। दूसरे इसकी ब्याज दरें भी कम होती हैं। आम तौर पर सोने के बदले लिए जाने वाले लोन की ब्याज दरें 11ण्75.15 प्रतिशत के बीच होती हैं। ज्यादातर बड़े बैंक और कुछ एनबीएफसी जैसे मुथूट फाइनेंस, मण्णपुरम गोल्ड आदि सोने के बदले लोन उपलब्ध कराते हैं। इस लोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें नियमित रूप से मासिक किस्तों का भुगतान करना जरूरी नहीं होता है।
मणापुरम गोल्ड
- 1850 रुपए प्रति ग्राम।
- ब्याज 2.09 प्रतिशत ।
- कुल कीमत पर 88 प्रतिशत लोन।
- ब्याज हर महीने।
- सालाना रिनुअल जरूरी।
मुथूट फाइनेंस
- 1७50 रुपए प्रति ग्राम।
- ब्याज 2.0 प्रतिशत ।
- बाजार कीमत के मुकाबले ६०-७० प्रतिशत लोन।
- ब्याज हर महीने।
- जैसे-जैसे पैसा जमा करो मुलधन-ब्याज कम होगा।
ग्राहक खुश, व्यापारी दुखी...
मुंबई का जवेरी मार्केट सोने-चांदी का थोक बाजार है। यहां व्यापारियों ने शादी सीजन को देखते हुए ३०,००० और ३१,००० प्रति तोला के भाव से खरीद रखा था। उम्मीद थी सीजन में भाव बढ़ेंगे, कमाई होगी। हुआ उलटा, सोने का भाव कम होकर २६५०० रुपए/तोला रह गया। 5 से 6 हजार रुपए/तोले की नुकसानी ने व्यापारियों के पेरों तले से जमीन खींच ली। गजजयंति ज्वैलर्स जैसी कई दुकानें बंद हो गई। सोना 20 से 22 हजार/तोला जाने की संभावनाओं ने कुछ व्यापारियों को सदमे में ला दिया है। गजजयंति ज्वलैर्स के संचालक मधुसूदन शर्मा ने बताया कि भाव गिरने के कारण घाटा बहुत हो गया। यदि घाटा खाकर माल बेचा तो जमा-पूंजी बिक जाएगी। नुकसान झेलने से अच्छा है जब भाव मिलेंगा तब बेचेंगे। कुछ ऐसी ही स्थिति इंदोर और रतलाम जैसी प्रदेश की बड़े बाजारों में भी है।
हिसाब बराबर...
जिन दुकानदारों ने दुकानें चालू रखी हैं उन्होंने बनवाई ५० रुपए/ग्राम से बढ़ाकर २५०-३०० रुपए/ग्राम तक कर दी है। अब बाजार में जो सोना २६५०० रुपए/तोले का है, बनवाई के बाद वही सोना २९,०००/ तोले में बिक रहा है। कीमतों में अंतर के कारण आए दिन झगड़े होते हैं इसीलिए मुंबई पुलिस ने जवेरी बाजार में चौकसी बढ़ा दी है।
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