कोयला खदानों के आवंटन में हुई मनमानी को लेकर जारी कैग की रिपोर्ट में भास्कर ग्रुप की डीबी पॉवर का नाम आते ही चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। वैसे पॉवर प्लांट को लेकर डीबी के लिए विवाद का यह पहला विषय नहीं है। प्लांट के श्रीगणेश के साथ शुरू हुए विरोध सिलसिला अब भी जारी है। फिर मामला ग्रुप द्वारा किए गए मनमाने निर्माण का हो या किसानों की जमीनें हथियाने का।
इंदौर. दबंग रिपोर्टर ।
दस लाख करोड़ से ज्यादा की कोयले की लूट ने सबको हिलाकर रख दिया है। कोयला खदान लेने वाली कंपनियां लूटकर मालामाल हो गई और अब सीबीआई सारे कागजात खंगाल रही है। चार राज्यों में जांच चल रही है लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कत में रमन सिंह सरकार है। यहां पर लूट कुछ ज्यादा ही हुई है। कैग की रिपोर्ट में जिस डीबी पॉवर के नाम का जिक्र किया गया है उसका पॉवर प्लांट भी छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में ही है। डीबी पॉवर छत्तीसगढ़ के डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल, सुधीर अग्रवाल और पवन अग्रवाल हैं। कंपनी का रजिस्टे्रशन 10 जुलाई 2008 को हुआ और उसी दिन तीनों भाई डायरेक्टर बने।
सीबीआई ने चार साल के कागजात सरकार से ले लिए हैं। सारी जांच पड़ताल की जा रही है। एक-एक कागज को खंगाला जा रहा है। कोल ब्लाकों के आंवटन में धांधली के पुख्ता सबूत सीबीआई को मिले हैं। एक मोटे अनुमान के मुताबिक छत्तीसगढ़ में हर साल दो लाख करोड़ के कोयले की लूट होती है। कोयला मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार 2006 से 2009 के चार साल में रमन सिंह सरकार ने 51 उद्योगों एवं संस्थाओं को यहां पावर प्लांट,स्पंज आयरन और अन्य व्यावसायिक उपयोग के लिए कोल ब्लाक आवंटित किए थे। यही वही दौर था जब पॉवर प्लांट के नाम पर डीबी पॉवर ने भी कोल ब्लाक हथियाए। ज्यादातर उद्योग हंसदेव, अरंड, रायगढ़ के मांड इलाके के ही कोल ब्लाक पा गए थे। अखबार के दम पर पिछले दरवाजे से कोयला ब्लाक का आवंटन कर डी.बी. पावर सहित अनेक कंपनियों का रुपए 1.86 करोड़ का घोटाला आश् चर्यजनक है। केग की रिपोर्ट के मुताबिक, डी.बी. पावर को 6 नवंबर 2007 को छत्तीसगढ़ स्थित दुर्गापुर-2 और सरिया के दो ब्लॉक गैर-कानूनी रुप से आवंटित किए गए थे.
क्या है नियम...
सरकार कोयला मंत्रालय को सिफारिश करती है और इसके बाद कोयला मंत्रालय कोल ब्लाक आंवटित करता है। पर लगे हाथ राज्य सरकार ने कुछ कारोबारियों को धंधा करने के वास्ते भी कोयला ब्लाक देने की सिफारिश की थी।
ऐसे तोड़े नियम :- तमाम कोल ब्लाक नो गो एरिया में हैं। वहां वन मंत्रालय ने उन्हें अनुमति तक नहीं दी लेकिन इसके बावजूद कोयले की लूट होती रही।
इन्हें मिली थी मंजूरी...
जिंदल स्टील हिंदुस्तान जिंक, अक्षय इन्वेस्टमैंट, छत्तीसगढ़ स्टील, छत्तीसगढ़ इलेक्ट्रीसिटी कारपोरेशन, एमएसपी स्टील, सीके कोलमाइनिंग, इस्पात गोदावरी,इंड एग्रो सिनर्जी, डीबी पावर ग्रुप, नाकोडा इस्पात, वंदना, लोबल, बजरंग पावर, नल्वा स्पंज, जायसवाल निको, अल्ट्राटेक, सिंघल इंटरप्राइजेज, नवभारत कोलफील्ड, प्रकाश इंडस्ट्रीज, अंजनी स्टील, सन फ्लैग आयरन।
कहां है डीबी का पॉवर की कोल खदान..
दुर्गापुर-सरिया कोल ब्लॉक तराईमार, बायासी, मेदारमर, धरमजयगढ़, जिला रायगढ़ में। कोल ब्लॉक खरसिया, जिला रायगढ़ से उत्तर में 65 किलोमीटर दूर है और रायगढ़ से उत्तर-पश्चिम में 80 किलोमीटर दूर है। यहां 91.67 मिलियन टन कोयला उपलब्ध है। 38.85 मिलियन टन रिजर्व कोटा है जबकि 52.82 मिलियन टन का ठेका कंपनी के पास है। धरमजयगढ़ के हाई-वे के पास 2 मिलियन टन की खदान है।
परत-दर-परत..
कंपनी : डी.बी.पॉवर
एमओय : जनवरी 2008
प्रोजेक्ट : 1200 मेगावॉट थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट
खदान : पॉवर प्लांट के लिए दुर्गापुर-सरिया में 2 मिलियन टन पर एनम(एमटीपीए) आवंटित। इसके अलावा 5 एमटीपीए कोयला एमईसीएल और एसईसीएल जैसी कॉल ऑफ इंडिया की कंपनियों के साथ।
क्षेत्रफल : 366 एकड़। जांजगिर-चांपा
ग्राहक : जीएमडीसी 63 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ सरकार को 30 प्रतिशत और पीटीसी व अन्य को 7 प्रतिशत।
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