Sunday, June 28, 2015

सुगनीदेवी घोटाला --- विधायक मेंदोला और कोठारी सहित चार ईडी के प्रमुख आरोपी ED


- ईसीआईआर दर्ज, प्रथम दृष्टया माना दोषी
- अवैधानिक करार दिया सौदा
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
लोकायुक्त के बाद सौ करोड़ के सुगनीदेवी जमीन घोटाले में प्रवर्तन निर्देशालय (ईडी) ने इन्फोर्समेंट केस इन्फार्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज करके छानबीन शुरू कर दी। ईडी ने स्पष्ट कर दिया कि प्रथम दृष्टया विजय कोठारी, मनीष सिंघवी व अन्य ने रमेश मेंदोला तर्फे नंदानगर सहकारी साख संस्था को जमीन बेच दी। जमीन नगर निगम की मील्कियत थी और निगम ने उसे मे.धनलक्ष्मी केमिकल्स को लीज पर दिया था। सौदा नियमों को नजरअंदाज करके किया गया। बहरहाल, विधायक मेंदोला, कोठारी और संघवी सहित कुल चार लोगों को मुख्य आरोपी मानते हुए इन्हेंं नोटिस किए जाना है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत प्रकरण भी दर्ज होगा।
पूर्व मंत्री सुरेश सेठ की शिकायत पर लोकायुक्त ने 5 अगस्त 2010 को धारा 13(1)(डी), 13 (2) पीसीए 1988 के तहत एफआईआर (57//2010) दर्ज की थी। लोकायुक्त द्वारा दर्ज इसी एफआईआर के आधार पर सभी 17 लोगों के खिलाफ ईडी भी मनी लान्ड्रिंग एक्ट के तहत जांच शुरू कर दी। 7 मई 2012 को इंदौर पहुंचे ईडी के ज्वाइंट डायरेक्टर राजेश पांडे ने ईसीआईआर की मंजूरी दे दी। प्रारंभिक जांच में ईडी अधिकारियों ने भी माना कि गैरकानूनी सौदे को बारीकी से जांचने में यह पता चला कि 12 जनवरी 1981 को जमीन लीज पर लेने वाले धनलक्ष्मी केमिकल्स ने 1990-91 से लेकर 2002-03 तक लीज रेंट ही जमा नहीं किया। निर्धारित लीज रेंट के लिहाज से 11 वर्षों का लीज रेंट 1,95, 637,25 रुपए होती है जिसे जमा किए बगैर नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से जमीन का सौदा कर दिया गया। कुल मिलाकर नगर निगम को इस गैरकानूनी सौदे से दोहरा नुकसान हुआ। एक, 1.38 करोड़ रुपए में जमीन बिक गई। दूसरा, 1.95 करोड़ का लीज रेंट की सेंधमारी।
ईडी के अधिकारियों ने बताया कि लोकायुक्त द्वारा चिह्नित 17 लोगों में से हमने प्रमुख रूप से उन 4 लोगों को चिह्नित करके आरोपी बनाया है जो पूरे घपले के सूत्रधार हैं। इनमें विधायक रमेश मेंदोला, धनलक्ष्मी केमिकल्स के विजय कोठारी और मनीष संघवी शामिल हैं।
उद्योग के लिए जमीन लेकर तान दी मल्टी
दस्तावेजों के लिहाज से बात करें तो धनलक्ष्मी को नगर निगम औद्योगिक उपयोग के लिए 1981 में सुगनी देवी कन्या कॉलेज से तीन एकड़ जमीन थी। 30 साल की लीज पर। मास्टरप्लान में जमीन का भू-उपयोग आवासीय था। लोकायुक्त एफआईआर की मानें तो धनलक्ष्मी ने लीज अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया। 6,50,327 रुपए की डायवर्शन फीस भी जमा नहीं की। नगर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाया और जमीन का आवासीय उपयोग किया।
मल्टी में रहने वालों को भी उठाना पड़ सकता है खामियाजा
आïैद्योगिक उपयोग के लिए आवंटित कराई गई जमीन पर बनाई गई मल्टी में रहने वाले उन तमाम दो दर्जन से ज्यादा परिवारों को कोठारी व अन्य की मनमानी का खामियाजा चुकाना पड़ेगा। सूत्रों की मानें तो यदि पीएमएलए के तहत प्रकरण दर्ज होता है तो कोठारी द्वारा बेची गई इस जमीन का अटैचमेंट ईडी कर सकता है।
इनके नाम हैं एफआईआर में
लोकायुक्त द्वारा 6 अगस्त 2010 में दर्ज की गई एफआईआर में 17 नाम शामिल हैं। इसमें नंदानगर सहकारी संस्था मर्यादित के तत्कालीन अध्यक्ष व वर्तमान में विधायक रमेश मेंदोला, धनलक्ष्मी केमिकल्स के नगीन कोठारी, विजय कोठारी व मनीष संघवी, नगर निगम के तत्कालीन व वर्तमान अधिकारी जगदीश डगांवकर, नरेंद्र सुराणा, हंसकुमार जैन, नित्यानंद जोशी, विमलकुमार जैन, अशोक बैजल, एस.के. जैन, दिनेश शर्मा, राकेश शर्मा, दिवाकर गाढ़े, श्याम शर्मा, राकेश मिश्रा व स्व. के.आर. मंडोवरा के नाम हैं।

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