Sunday, June 28, 2015

ज्जैन में आईटी पार्क घोटाला ISCKON

आईडीए सीईओ और उपायुक्त इंदौर संभाग फसे
- यूडीए सीईओ रहते रजिस्टे्रशन से सालभर पहले ही 1.42 करोड़ में दे दी थी 18. 74 की जमीन, दूसरे ने दी एनओसी
- लोकायुक्त ने प्राथमिकी दर्ज करके शुरू की जांच
- जल्द ही दर्ज हो सकता है प्रकरण
इंदौर. विनोद शर्मा ।
दुनियाभर में कृष्णभक्ति का प्रचार करने वाले इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ कृष्णा कॉन्सिक्यूसनेस(इस्कॉन) से संबंधित वराह मिहिर इन्फो डोमिन प्रा.लि. ने सरकार से रियायती दरों पर जमीन ली और आईटी पार्क का झांसा देकर बैंकों को करोड़ों की टोपी पहना दी। न आईटी पार्क बना। न ही बैंकों का पैसा लौटाया गया। बहरहाल, उज्जैन विकास प्राधिकरण, वराह मिहिर  और बैंक प्रबंधन की मिलीभगत से हुई करोड़ों की इस हैराफेरी  में लोकायुक्त के निशाने पर उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ रहे इंदौर विकास प्राधिकरण के सीईओ चंद्रमौली शुक्ला और उपायुक्त इंदौर संभाग निर्मल उपाध्याय भी निशाने पर है। उधर, लोकायुक्त स्पष्ट कर चुका है कि प्रथम दृष्टया जिस तरह की लापरवाही उजागर हुई है उसे देखते हुए जल्द ही प्रकरण दर्ज किया जाएगा।
वराह मिहिर इन्फो डोमेन प्रा.लि. के डायरेक्टर 33-37 महाश्वेतनगर भरतपुरी उज्जैन भक्तिचारु स्वामी उर्फ किशोरकुमार दास और गणेश कुमार सरकार हैं। स्वामी इस्कॉन, उज्जैन के प्रमुख संत हैं। यूडीए ने 2005 में कंपनी को आईटी पार्क बनाने के लिए 18.74 करोड़ रुपए की जमीन महज 1.42 करोड़ रुपए में आवंटित कर दी। अंतर 17.42 करोड़ का। जिस वक्त जमीन आवंटित की गई उस वक्त यूडीए सीईओ चंद्रमौली शुक्ला थे। शुक्ला के बाद सीईओ बने निर्मल उपाध्याय (फिलहाल  उपायुक्त इंदौर संभाग) ने भी एनओसी दी।  इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर वराह मिहिर ने इलाहबाद बैंक की फ्रीगंज तंबाकू बाजार शाखा से 13.40 करोड़ का लोन कराया।
्र इसमें से 8.50 करोड़ रुपए इस्कॉन से ही संबंधित एक अन्य कंपनी अलकॉक मेकफर जियोटेक प्रा.लि. ने इलाहबाद बैंक से निकाले। इस राशि से आईटी पार्क बनाया जाना था जो आज दिन तक नहीं बना बावजूद तत्कालीन सीईओ अवध क्षोत्रिय (फिलहाल जबलपुर विकास प्राधिकरण के सीईओ) लीज निरस्त नहीं की। उधर, इस मामले में डेढ़ माह पहले दर्ज प्राथमिकी में लोकायुक्त ने जांच तेज करते हुए इस्कॉन संत श्री भक्तिचारू स्वामी सहित यूडीए के तीनों पूर्व सीईओ को नोटिस जारी किए है।
तीन साल में बनना था आईटी पार्क
रियायती जमीन देते वक्त यूडीए ने आईटी पार्क बनाने के लिए तीन साल की समयसीमा निर्धारित की थी लेकिन सात साल बाद भी आईटी पार्क नहीं बना।
जमीन पर लगा नीलामी का नोटिस
ऋण नहीं लौटाने पर 17 मार्च 2011 को बैंक ने जमीन पर नीलामी नोटिस चस्पा दिया। नोटिस पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि कंपनी ने  8 करोड़ 13 लाख 48 हजार 365 रुपए नहीं लौटाए। करोड़ों रुपए का ऋण स्वीकृत करने व जमा नहीं करने के मामले में लोकायुक्त बैंक अधिकारियों की भी मिली भगत मान रही है।
2006 में पंजीयन, 2005 में दे दी जमीन
उधर, मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स से प्राप्त दस्तावेजों की माने तो यूडीए ने 2005 में इस्कॉन की जिस वराह मिहिर इन्फो डोमेन प्रा.लि. को आईटी पार्क के लिए वास्तविक कीमत से 93 फीसदी कम राशि लेकर जमीन लीज पर दे दी थी वह कंपनी 30 जनवरी 2006 को पंजीबद्ध हुई। कंपनी का पता 33-37 महाश्वेतनगर भरतपुरी उज्जैन दर्ज है जो यूडीए की बिल्डिंग से लगा हुआ है। कंपनी का पंजीयन ग्वालियर में हुआ था।
पूरा खेल 'भक्तिÓ का
वराह मिहिर के लिए आवंटित जमीन पर आईटी पार्क बनाने के लिए बैंक से पैसा निकालने वाली दूसरी कंपनी अलकॉक मेकफर जियोटेक प्रा.लि. है। 16 फरवरी 2005 को पंजीबद्ध हुई अलकॉक मुलत: पश्चिम बंगाल की कंपनी है। सुब्रत सिन्हा रे 20 मार्च 2008, अनिंदा बोस 7 मार्च 2007 और सुदिप्तो नाथ मुखर्जी 16 फरवरी 2005 को निदेशक बने। 21 जनवरी 2008 को वराह मिहिर के निदेशक और इस्कॉन के संत भक्ति चारू स्वामी भी निदेशक बने। अनिंदा बोस का डायरेक्टरशीप 18 दिसंबर 2012 और सुदिप्तो नाथ मुखर्जी की डायरेक्टरशीप 16 जनवरी 2011 को एक्सपायर हो चुकी है। जबकि स्वामी की भक्ति बरकरार है।
विश्वव्यापी मंदी की भेंट चढ़ा आईटी पार्क...
लोकायुक्त को दिए जवाब में इस्कॉन उज्जैन के पीआरओ राघव पंडित ने बताया कि वराहमिहिर इस्कॉन की सिस्टर कंपनी है। हालांकि कुछ निर्माण कार्य शुरू किया गया था लेकिन विश्वव्यापी मंदी के कारण हम आईटी पार्क नहीं बना सके।
मिल चुके हैं तीनों सीईओ के जवाब
नोटिस जारी किए थे। तीनों सीईओ ने 16 अपै्रल तक जवाब पेश कर दिए हैं। भक्तिचारू स्वामी व अन्य को समन्स भेजे गए। टीएनसीपी, उज्जैन के उन अधिकारियों से भी जवाब मांगे हैं जिनकी आपत्ति के बावजूद आईटी पार्क के लिए जमीन आवंटित की गई।
अरूण मिश्रा, लोकायुक्त एसपी
सवाल जिनके जवाब की तलाश
-- इस्कॉन जो कि धार्मिक संगठन है उसे आईटी पार्क बनाने की जरूरत क्या और क्यों पड़ी?
-- 2006 में पंजीबद्ध हुई कंपनी को 2005 में यूडीए ने जमीन क्यों दी?
-- लोन वराह मिहिर को मिला तो बैंक से पैसा अलकॉक ने विड्रॉल कैसे कराया? बैंक ने आपत्ति क्यों नहीं ली?
-- भक्ति चारू स्वामी अलकॉक के निदेशक कैसे बने? कितने रूपए निवेश किए? रुपए कहां से कैसे जुटाए गए?




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