Sunday, June 28, 2015

उसे पीड़िता मत कहो...AASHARAM BAPU KA INTERVEWS

संत आशाराम बापू पर नया आरोप अपने छिंदवाड़ा स्थित आश्रम में रहने वाली एक किशोरी के साथ दुष्कर्म का है। शनिवार रात इंदौर पहुंचे बापू से दबंग दुनिया ने इंदौर में उनसे खास और विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत है संत के साथ हुई उसी चर्चा के संपादित अंश।
संत आशाराम बापू से दबंग दुनिया की विशेष बातचीत
उसे पीड़िता मत कहो...
इंदौर। जिस बच्ची को सारा मीडिया पीड़िता लिख रहा है वह आज भी पाक-साफ है। उसे पीड़िता कहने से मेरे हृदय में पीड़ा होती है। मेरे उसके साथ कई तरह के संबंध हैं। उसकी मां मेरी शिष्या है, इसलिए वह मेरी नातिन है, उसका पिता मेरा शिष्य है इसलिए वह मेरी पोती है। वह खुद मेरी शिष्या है इसलिए वह मेरी बेटी है। उसे पीड़िता न कहा जाए। शांत और हमेशा की तरह अध्यात्म के आत्मविश्वास से भरे संत आशाराम बापू ने यह बात दैनिक दबंग दुनिया की टीम से खंडवा रोड स्थित अपने आश्रम के एकांतस्थल पर लंबी चर्चा के दौरान कही। आरोपों से अविचलित अपनी चिर-परिचित शैली में बापू ने दिए और भी कई सवालों के जवाब।
जोधपुर मामले की हकीकत क्या है?
सब झूठ है। षड़यंत्र है। दो-चार दिन में सबके सामने आ जाएगा। लड़की छिंदवाड़ा की है। उसके माता-पिता और भाई व वह सभी मेरे शिष्य हैं। बड़ा उदाहरण भाई है जिसने पुलिस की निगरानी में आश्रम छोड़ा। आश्रम छोड़ते वक्त उसने पुलिस के सामने वीडियो बयान दिया कि उसके पांच साल आश्रम में आनंद से बीते। बाहर निकलते ही लड़का बोला, मुझे तो आश्रम में मांस-मटन खिलाया। भूखा रखा। सोचिए यदि ऐसा होता तो वह पांच साल बाद ही क्यों आश्रम छोड़कर गया।
इस बार आप पर बड़ा आरोप लगा है..?
इससे पहले तंत्र विद्या से दो बच्चों की हत्या का आरोप लगा था। उस आरोप के मुकाबले यह कुछ नहीं। फर्क इतना है कि वह भयंकर आरोप था तो यह गंदा आरोप है।
एक के बाद एक षड़यंत्रों की विफलता ने क्या षड़यंत्रकारियों को परिपक्व बना दिया?
नहीं, उनकी प्लानिंग गंदी और कच्ची होती जा रही है। मजबूत होती तो आरोप साबित हो जाते।
जब इस तरह के इल्जाम लगते हैं तो आप विचलित नहीं होते?
विचलित होता तो बापू के कपड़े ही उताकर फेंक देता। मुझे गुरुजी ने ऐसा बना दिया है कि सत्य को आंच नहीं और झूठ को पैर नहीं। हां, इससे अनुयायी जरूर दुखी होते हैं।
जोधपुर आरोप और गिरफ्तारी  की मांग के बीच कार्यक्रम निरस्त किए?
मैंने अपने एक भी कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया है। सितंबर में मेरा पहले सूरत में सत्संग है। बाद में दिल्ली में।
विवादों से निपटने की क्या प्लानिंग.?
मैं प्लानिंग कुछ नहीं करता। ईश्वर सब जानता है। वैसे भी आज तक कुछ हो गया क्या? मेरा एक भी कार्यक्रम  निरस्त नहीं हुआ।
क्या एक के बाद एक विवादों के पीछे कोई राजनीति है?
- मैं इसकी चिंता नहीं पालता। किसी की निंदा मेरी फितरत नहीं है।
सबसे ज्यादा विवाद जुलाई-अगस्त में ही क्यों?
- क्योंकि जुलाई में ही षड़यंत्रकारी रूपी बरसाती मेंढकों को ताकत मिलती है। बरसात गई, बात गई।
आरोप राजनीति है या कुछ और...?
झूठे आरोप लगे हैं। आज दिन तक कितने आरोप साबित हुए यह भी देखें।
ऐसे कुप्रचार के खिलाफ आपका क्या हथियार है?
मेरे लिए ऐसे दुष्प्रचार का जवाब देना बहुत ही आसान है। मगर मुझे अपनी सहनशीलता पर पूरा भरोसा है। जब कुप्रचार सहनशीलता की सीमा से अधिक हो जाएगा तब मैं अपना हथियार चलाऊंगा। वैसे इसकी जरूरत नहीं है। भगवान उन्हें खुद जवाब दे देता है। मेरे अनुयायी बहुत उत्तेजित हो जाते हैं और ऐसे लोगों का जवाब देने की अनुमति मुझसे मांगते हैं, मगर मैं ही उन्हें समझाता हूं कि अपनी विनम्रता न छोड़ें। हम किसी की निंदा नहीं करेंगे, हम किसी को नंगा नहीं करेंगे। सांप को प्रेम से उठाओ तो उसका भी जहर निकल जाता है।
मीडिया की भूमिका निष्पक्ष पाते हैं?
मीडिया भी सनसनी पैदा करने के लिए झूठी खबरें प्रसारित करता है। अब कहा गया कि मैं इंदौर में एअरपोर्ट के पिछले दरवाजे से निकलकर गया जबकि मैं मुख्य निकास द्वार से ही बाहर आया। एक अखबार ने लिखा है मैं काले रंग की कार में बैठकर एअरपोर्ट से निकला जबकि कार सिल्वर रंग की इनोवा है। कहा मैं चार्टर्ड फ्लाइट से आया जबकि मैं जेट फ्लाइट से आया।
कहते हैं इंदौर आपके लिए सुरक्षित स्थान है इसीलिए हर गरबड़ के बाद आप यहां आ जाते हैं?
इंदौर में मैं पहले भी एकांत करने के लिए आता रहा हूं। मेरे गुरु ने मुझे बहुत मजबूत बनाया है। मेरे प्रवचन और मेरे व्यवहार में करोड़ो अनुयायी जानते हैं कि मैं झूठ का आश्रय लेने से बचता हूं। मैं झूठ नहीं बोलता, यह तो नहीं बोलता लेकिन झूठ से बचने की पूरी कोशिश करता हूं। यदि झूठ होता भी है तो भी मैं मंच से ही कह देता हूं कि इस वाक्य में मिलावट है।
आश्रम से निकले लोग ही आपके खिलाफ बोलते हैं?
40 साल में अगर 10-15 लोग निंदा करते हैं तो इसका कोई मतलब नहीं। आश्रम में रहते कुछ नहीं बोले और बाहर निकलने के तुरंत बाद भी कुछ नहीं बोले। बोले कब, जब उन्हें प्रलोभन मिला। मगर कुछ साबित न हो सका। बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। मगर ऐसे ही लोग बाद में आपस में लड़ते हैं।
अपने खिलाफ जारी राजनीति से परेशान हो कभी राजनीतिज्ञ बनने का विचार आया..?
- राजनीति में रुचि नहीं। परमात्मा की कृपा से मैं जिस मुकाम पर हूं, वह मुझे राजनीति में नहीं मिल सकता। मेरे गुरु ने मुझे मूल में पहुंचा दिया। मैं डाल-डाल नहीं भटकता।
आप तांत्रिक विद्या करते हैं?
हमारी विद्या वैदिक है, रास्ता लंबा है मगर यही हमारा रास्ता है। हमारे आश्रम में कंकू-धागा तक नहीं मिलता।
क्या भगवान से पूछते हैं- मैं ही क्यों?
नहीं, उलटा यह कहता हूं कि ओ गॉड फार्गेट में, प्लीज सेंड न्यू प्रोब्लम। बहुत दिन तक जीवन शांतिपूर्वक चलता रहता है तो मैं ईश्वर से पूछता हूं, बहुत दिन हुए कोई नई मुसीबत नहीं भेजी? तब वह कुछ न कुछ समस्या भेज देता है। स्वामी रामतीर्थ ऐसा किया करते थे। अभी कुछ दिन पहले ही मैंने भगवान से कहा था- हे भगवान, बहुत दिनों से कोई नया माल नहीं आया? और तभी यह आरोप आ गया। मगर जब-जब ऐसे आरोप लगते हैं, सतसंगियों की संख्या और बढ़ जाती है। बापू को बदनामी से फायदा हो रहा।्र
कौन लोग हैं जो आपको बदनाम करना चाहते हैं?
मैं उन्हें जानता हूं। मैं उनके बारे में बताऊंगा नहीं। संत के दुर्गुण देखने वाले की भी दृष्टि अपनी ही होती है। हां, कुछ विदेशी एनजीओ हिंदुस्तानी संस्कृति को नष्ट करना चाहते हैं।
कभी क्रोधित होते हैं?
अष्टावक्र गीता के अनुसार संत क्रोधित दिखे तो भी क्रोधित नहीं होता। आंखों में जो पढ़ा जाता है वह वाणी में नहीं आता।
सुन्या सखना कोई नहीं सबके भीतर लाल।
मूरख ग्रंथि खोले नहीं कर्मी भयो कंगाल।



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