Monday, June 29, 2015

भास्कर की फोटोग्राफी तस्वीरों के साथ थमाया नोटिस db


- काम रुकवाया
- कहा ईंट भी जुड़ी तो नेस्तनाबूद हो जाएगी इमारत
- नए सिरे से मंजूरी की कवायद शुरू
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
देर से ही सही नगर निगम ने दैनिक भास्कर परिसर में बिना इजाजत बन रही चार मंजिला इमारत का काम रूकवा दिया है। निर्माणाधीन इमारत की फोटोग्राफी कराकर नगर निगम नोटिस थमाकर भास्कर प्रबंधन को चेता दिया है कि पर्मिशन लिए बिना अब एक ईंट भी यहां लगी तो पूरी इमारत नेस्तनाबूद कर दी जाएगी। घबराए भास्कर प्रबंधन ने नक्शा मंजूरी के लिए नए सिरे से आवेदन शुरू कर दिया है।
अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार अभियान चलाता आए  दैनिक भास्कर समूह ने बिना मंजूरी लिए कैसे चार मंजिला इमारत का काम शुरू कर दिया और कैसे अखबार के दबाव में अधिकारी अवैध निर्माण को नजरअंदाज करके बैठ गए? इसका खुलासा दबंग दुनिया ने 30 मार्च 2013 को 'भास्कर कॉम्पलेक्स 100 प्रतिशत अवैधÓ और 2 अपै्रल 2013 को 'नक्शे को ना, निर्माण को हांÓ शीर्षक से प्रकाशित समाचार में किया था। इसके बाद नगर निगम के अधिकारियों ने बिल्डिंग का काम रुकवा दिया है। फोटोग्राफी करवाई। फोटो के साथ नोटिस दिया। कहा कि अब यदि इससे आगे बिना अनुमति लिए एक ईंट भी लगाई तो पूरा निर्माण ध्वस्त कर देंगे।
हालांकि इस पूरे मामले में नगर निगम के शीर्षस्थ अधिकारियों की भूमिका पर भी अंगुली उठ रही है जिन्होंने न सिर्फ बिना मंजूरी के बन रही इमारत को नजरअंदाज किया। बल्कि अपना हाथ बचाने के लिए नक्शा आवेदन निरस्त करके काम रोकने या अवैध निर्माण तोडऩे से परहेज करते रहे। अब भी यही कहा जा रहा है कि आगे निर्माण किया तो कार्रवाई होगी? यानी जो निर्माण हो चुका है उसे निगम क्लीनचिट दे चुका है।
एडवोकेट अनिल नायडू ने बताया कि नियमानुसार निगम से नक्शा मंजूर कराए बिना बाउंड्रीवॉल तक नहीं बन सकती। बावजूद इसके भास्कर के अवैध निर्माण को न महापौर तोड़ पाए। न निगमायुक्त। यह नगर निगम का दोहरा रवैया है। नगर निगम यदि निर्माण को अवैध मानता है तो रिमुवल की कार्रवाई करे। नहीं तो क्लीन चिट दे दे।
मंजूरी टलती रही और काम चलता रहा...
स्कीम-54 (पीयू-3) स्थित प्लॉट नं. 4 का है। करीब 44 हजार वर्गफीट में फैले इस प्लॉट पर दैनिक भास्कर बना हुआ है। भास्कर प्रबंधन इसी प्लॉट के 4000 वर्गफीट हिस्से में जी+3 इमारत बना रहा है। बेसमेंट, ग्राउंड और पहली मंजिल की छत डल चुकी है। दूसरी मंजिल के बीम कॉलम भरे जा चुके हैं। उधर, बात मंजूरी की करें तो वह भास्कर प्रबंधन को निगम की तरफ से प्राप्त नहीं हुई है। उलटा, निगम फरवरी 2013 और मार्च 2013 में नक्शा आवेदन नामंजूर करके भास्कर प्रबंधन को अनपेक्षित झटका दे चुका है। हालांकि इससे निर्माण पर कोई असर नहीं पड़ा। बिना किसी मंजूरी के निर्माण बेधड़क चलता रहा।
इससे पहले 1996-97 में भी किया था अवैध निर्माण...
बात सिर्फ निर्माणाधीन इमारत की नहीं है, मौजूदा इमारत की नींव भी मनमानी के पत्थरों पर रखी गई है। निर्माण 1996-97 में हुआ था। उस वक्त भास्कर प्रबंधन ने जी+1 भवन निर्माण की मंजूरी ली थी। निर्माण तकरीबन ११,700 वर्गफीट (मूल इमारत) में था। मंजूरी के बाद कुल निर्माण २३,४०० वर्गफीट होना था जबकि हुआ ३५,१०० वर्गफीट से ज्यादा। भवन के जिस दूसरी मंजिल में बीटीवी का ऑफिस में उसकी अनुमति नगर निगम ने आज दिन तक नहीं दी। 2007-08 में पहली मंजिल पर तकरीबन तीन हजार वर्गफीट का निर्माण भी मनमाने ढंग से हुआ।

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