Sunday, June 28, 2015

MANGAL MERYLAND KI JAMMEN

इंदौर. स्कीम-54 स्थित मंगल मैरीलैंड की जमीन आईडीए को दोबारा मिल जाएगी। मप्र हाई कोर्ट ने मंगल एम्युजमेंट पार्क प्रा.लि. की याचिका खारिज कर दी है और आदेश दिए हैं कि आईडीए पार्क की जमीन ले सकता है। 7.66 एकड़ क्षेत्रफल वाली उक्त जमीन आईडीए ने 1994-95 में मंगल एम्युजमेंट पार्क को लाइसेंस आधार पर दी थी। पार्क का लाइसेंस 11 जून 1995 को 15 साल के लिए जारी किया गया था जिसकी अवधि 10 जून 2010 को खत्म हो गई। अभी प्रकरण हाई कोर्ट में विचाराधीन था इसलिए आईडीए ने अवधि खत्म होने के बावजूद पार्क को खाली नहीं कराया था।
19 मई को हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सैयद रफत आलम और जस्टिस आलोक अराधे की डबल बेंच ने यह फैसला सुनाया। आईडीए के विधि अधिकारी एम.बी. मूथा ने 'भास्करÓ को बताया एडवोकेट ने सूचना दी है कि हाई कोर्ट ने पार्क प्रबंधन की याचिका खारिज कर दी है। हालांकि अभी हमें फैसले की कॉपी नहीं मिली है।
लाइसेंस को लीज नहीं माना जा सकता- आईडीए की ओर से पैरवी करने वाले एडवोकेट अर्पण पंवार ने भी पार्क प्रबंधन की याचिका खारिज होने की पुष्टि की। पार्क प्रबंधन का कहना था कि भले ही आईडीए ने हमें लाइसेंस दिया है लेकिन यह तो लीज जैसा ही है और इसे बढ़ाया जा सकता है। इस पर हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आईडीए के लाइसेंस को लीज नहीं माना जा सकता। पार्क प्रबंधन जमीन पर अपने अधिकार का दावा नहीं कर सकता। जमीन आईडीए की ही है।

मंगल मैरीलैंड मामले का फ्लैश बैक- आईडीए द्वारा दिए गए लाइसेंस की शर्त आठ में उल्लेख था कि लाइसेंस नवीनीकरण 15 साल के लिए अधिकतम 40 प्रतिशत लाइसेंस फीस वृद्धि के साथ किया जाएगा। उक्त लाइसेंस पार्क प्रबंधन ने 1,97,800 रु. में लिया था।

वर्ष 2000 में तत्कालीन चीफ इंजीनियर ने उक्त जमीन की कीमत करीब 5.5 करोड़ रु. आंकी थी। इस बीच पार्क प्रबंधन ने आईडीए से पार्क में मनोरंजन क्लब और बैंक्वेट हॉल बनाने की अनुमति मांगी। बोर्ड ने तय किया कि यदि आवंटित प्रोजेक्ट रिपोर्ट में उल्लेख के अनुसार क्लब हाउस के सदस्यों से मिलने वाली नॉन रिफंडेबल राशि (करीब 35 हजार रु.) और हर महीने मिलने वाले शुल्क (250 रु.) का 25 फीसदी आईडीए कोष में जमा करवाता है तो शासन की अनुमति के बाद मनोरंजन क्लब व हॉल की अनुमति दी जाएगी।

बोर्ड ने तय किया कि ऑनररी सदस्यों की संख्या पेड सदस्यों की संख्या से 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगी।

शासन ने गलत माना था बोर्ड का निर्णय - शासन ने 23 सितंबर-03 को भेजे जवाब में आईडीए बोर्ड के निर्णय को नियम अनुकूल नहीं माना था और यह टिप्पणी भी की थी कि इसमें पारदर्शी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी इसलिए स्वीकृति संभव नहीं है। शासन ने निर्देश दिए कि आईडीए भूमि को स्वीकार्य उपयोग (हरियाली) के अंतर्गत पारदर्शी प्रक्रिया अपनाते हुए बेचे। इस पर आईडीए ने पार्क प्रबंधन को लाइसेंस निरस्ती का नोटिस जारी कर दिया। हालांकि बाद में विधिक परीक्षण के बाद पाया गया कि ऐसा संभव नहीं है इसलिए शासन को सारे तथ्य बताए जाएं।

2003 के नोटिफिकेशन को भी प्रबंधन ने 2008 में दी चुनौती

1975 के मास्टर प्लान में पार्क और इसके आसपास की जमीन का उपयोग कमर्शियल और पीयू3 (सी-21 मॉल के आसपास की जमीन) जमीन रीजनल पार्क की थी। बाद में शासन ने पाया कि दोनों क्षेत्रों के भू उपयोग की अदला-बदली होना चाहिए। चूंकि पार्क के आसपास की जमीन पर काफी हरियाली है इसलिए इसका उपयोग रीजनल पार्क और पीयू3 की मैदानी जमीन का उपयोग कमर्शियल होना चाहिए।

शासन ने 1979-80 में यह निर्णय तो ले लिया लेकिन इसका विधिवत गजट नोटिफिकेशन 2003 में किया गया। 2008 में पार्क प्रबंधन ने नोटिफिकेशन को चुनौती दी और इस बीच 5 फरवरी 2010 को आईडीए में आवेदन देकर 15 साल के लिए लाइसेंस नवीनीकरण का आवेदन भी दे दिया। हालांकि बाद में पार्क प्रबंधन ने आईडीए बोर्ड के समक्ष लाइसेंस नवीनीकरण पर निर्णय न लेने का आग्रह किया ।

1.60 अरब की जमीन!

प्रॉपर्टी क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक यदि जमीन का उपयोग वाणिज्यिक माना जाए तो क्षेत्र की गाइड लाइन 50 हजार रुपए वर्गमीटर के हिसाब से इसका मूल्य लगभग 1.60 करोड़ रुपए होगा। मंगल मैरीलैंड एक समय शहर का लोकप्रिय मनोरंजन पार्क था जहां हजारों लोग यहां के झूलों का आनंद लेते थे। फिलहाल पार्क बंद है।

No comments:

Post a Comment