जीएडी की अनदेखी : आधा दर्जन प्रकरणों के बाद भी ..
- कार्मिक मंत्रालय को भेजे 20 नाम
इंदौर. विनोद शर्मा ।
आईएएस अवार्ड के लिए सामान्य प्रशासन मंत्रालय मप्र ने कार्मिक लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय दिल्ली को 20 अधिकारियों के नाम भेजे हैं। इनमें टाउन एंड कंट्री प्लानिंग इंदौर के संयुक्त संचालक रहे उन विजय सावलकर का नाम भी शामिल है आधा दर्जन पत्र लिखकर स्वयं टीएंडसीपी आयुक्त सह संचालक जिनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुसंशा कर चुके हैं। 1 जनवरी 2008 को 650 से अधिक आपत्तियां सूने बगैर मास्टर प्लान लागू कर देने वाले सावलकर के खिलाफ कई मामलों में लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू प्रकरण दर्ज करके जांच कर रहे हैं।
कार्मिक लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय पहुंचने के साथ ही जीएडी की सूची में शामिल नामों को लेकर आपत्तियों का दौर शुरू हो चुका है। ज्यादा आपत्तियां सावलकर के नाम पर है। आपत्तिकर्ताओं की मानें तो जिस अधिकारी के खिलाफ सैकड़ों शिकायतें और दर्जनभर जांच चल रही है उसे आईएएस की उपाधि थमाना ईमानदार अधिकारियों का अपमान है। लोकायुक्त से प्राप्त दस्तावेजों की मानें सावलकर के खिलाफ सात मामले दर्ज हैं। इनमें जांच प्रकरण क्र. 62/09, 219/09, 231/09, 232/09, 433/09, 133/10, और 134/10 शामिल हैं। जांच प्रकरण क्र. 62/09, 231/09 और 232/09 क्रमश: 8 जनवरी 2010, 6 फरवरी 2010 और 5 जनवरी 2010 को समाप्त हो चुके हैं। बाकी जांच प्रकरण क्र. 219/09, 433/09, 133/10, और 134/10 में जांच जारी है। गौरतलब है कि 2009 और 2010 में भी सावलकर का नाम आईएएस अवार्ड के लिए मंत्रालय भेजा गया था लेकिन उस वक्त भी आपत्तियों के बाद मामला टल गया। आपत्तियों के संबंध में जब दबंग दुनिया ने सावलकर से संपर्क किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
कार्रवाई की अनुसंशा भी...
पत्र क्र. 5722 (25 नवंबर 2010)- जांच प्रकरण 433/09 के तहत स्पष्टीकरण चाहा था। 14 सितंबर को स्पष्टीकरण मिला जिसे संतोषजनक न मानते हुए सावलकर के खिलाफ विभागीय जांच के लिए लिखा।
पत्र क्र. 4361 (09 सितंबर 2010)- जांच प्रकरण 219/09 के तहत सावलकर स्थल अनुमोदन के आवेदन बगैर फीस जमा कराए इनवर्ड करते थे। स्वीकृत होने वाले प्रकरणों में ही फीस जमा कराई जाती थी। बाकी में नहीं। आरोप सही पाए जाने पर सावलकर के खिलाफ मुख्य शास्तियां आरोपित किए जाने के लिए विभागीय जांच की जाना है।
पत्र क्र. 1500 (16 मार्च 2011)- जांच प्रकरण 134/10 के तहत सावलक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा गया था।
पत्र क्र. 3088 (20 अपै्रल 2011)- जांच प्रकरण 133/10 के तहत मास्टर प्लान में रेस्ट हाउस के लिए दो स्थानों पर अलग-अलग एफएआर का जिक्र है। अधिकारियों ने मौका मुआयना नहीं किया इसीलिए विसंगति हुई। इसीलिए अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के लिए लिखा है।
(सभी अनुशंसा आयुक्त सह संचालक आशीष उपाध्याय ने की..)
कारण बताओ नोटिस भी...
मप्र भूमि विकास नियम 1984 के नियम 21(3) के तहत सावलकर ने 4,22,500 रुपए की फीस लिए बगैर मप्र भूमि विकास नियम 1973 की धारा 29 के तहत 526 आवेदन निरस्त कर दिए थे। शिकायत के बाद सावलकर को आयुक्त टीएंडसीपी ने 9 सितंबर 2010 को कारण बताओ नोटिस थमाया। 14 अक्टूबर को सावलकर ने स्पष्टीकरण दिया जिसे अमान्य करार देते हुए विभाग ने इंदौर कार्यालय में जमा फीस की गिनती कराई। मामला सही पाए जाने के बाद 24 जनवरी 2011 को सावलकर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई।
....और भी है संगीन आरोप....
-- राऊ के पास पिगडम्बर गांव में बस स्टैंड और व्यावसायिक उपयोग के लिए आरक्षित जमीन पर आवासीय नक्शा पास किया।
-- मास्टर प्लान में प्रस्तावित 100 फीट की रोड के आधार पर ही दे दी बहुमंजिला इमारतों को मंजूरी।
-- आरई-2 की चौड़ाई 75 से घटाकर 30 मीटर की। बाकी 45 मीटर जमीन पर बिल्डरों ने कॉलोनियों, रो-हाउसेस और मल्टियों का काम शुरू किया।
-- आईडीए की राऊ स्थित स्कीम-165 की जमीन पर टीएंडसीपी ने बाले-बाले नक्शा पास कर दिया। नक्शा पास कराने वाले ने भी बिना मौका गंवाए टीएंडसीपी की अनुमति के आधार पर न केवल कॉलोनी काट दी बल्कि विकास कार्य भी जोर-शोर से शुरू कर दिए हैं। जिस जमीन पर कॉलोनी काटी गई है, वह राऊ के हसनजीनगर के पीछे (एमरल्ड हाइट्स स्कूल के पास) है।
-- प्राधिकरण और हाउसिंग बोर्ड की आवासीय योजनाओं के लिए प्रस्तावित जमीन पर पुलक सिटी और उसकी अप्रोच रोड को मंजूरी दी।
-- 2008 में स्वीकृत मास्टर प्लान को खसरे पर दर्शाने के बजाय सावलकर ने इंदौर में रहते बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए गरीब किसानों के खेत से रोड निकाली। योजनाओं के ले-आउट में फेरबदल किए।
- कार्मिक मंत्रालय को भेजे 20 नाम
इंदौर. विनोद शर्मा ।
आईएएस अवार्ड के लिए सामान्य प्रशासन मंत्रालय मप्र ने कार्मिक लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय दिल्ली को 20 अधिकारियों के नाम भेजे हैं। इनमें टाउन एंड कंट्री प्लानिंग इंदौर के संयुक्त संचालक रहे उन विजय सावलकर का नाम भी शामिल है आधा दर्जन पत्र लिखकर स्वयं टीएंडसीपी आयुक्त सह संचालक जिनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुसंशा कर चुके हैं। 1 जनवरी 2008 को 650 से अधिक आपत्तियां सूने बगैर मास्टर प्लान लागू कर देने वाले सावलकर के खिलाफ कई मामलों में लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू प्रकरण दर्ज करके जांच कर रहे हैं।
कार्मिक लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय पहुंचने के साथ ही जीएडी की सूची में शामिल नामों को लेकर आपत्तियों का दौर शुरू हो चुका है। ज्यादा आपत्तियां सावलकर के नाम पर है। आपत्तिकर्ताओं की मानें तो जिस अधिकारी के खिलाफ सैकड़ों शिकायतें और दर्जनभर जांच चल रही है उसे आईएएस की उपाधि थमाना ईमानदार अधिकारियों का अपमान है। लोकायुक्त से प्राप्त दस्तावेजों की मानें सावलकर के खिलाफ सात मामले दर्ज हैं। इनमें जांच प्रकरण क्र. 62/09, 219/09, 231/09, 232/09, 433/09, 133/10, और 134/10 शामिल हैं। जांच प्रकरण क्र. 62/09, 231/09 और 232/09 क्रमश: 8 जनवरी 2010, 6 फरवरी 2010 और 5 जनवरी 2010 को समाप्त हो चुके हैं। बाकी जांच प्रकरण क्र. 219/09, 433/09, 133/10, और 134/10 में जांच जारी है। गौरतलब है कि 2009 और 2010 में भी सावलकर का नाम आईएएस अवार्ड के लिए मंत्रालय भेजा गया था लेकिन उस वक्त भी आपत्तियों के बाद मामला टल गया। आपत्तियों के संबंध में जब दबंग दुनिया ने सावलकर से संपर्क किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
कार्रवाई की अनुसंशा भी...
पत्र क्र. 5722 (25 नवंबर 2010)- जांच प्रकरण 433/09 के तहत स्पष्टीकरण चाहा था। 14 सितंबर को स्पष्टीकरण मिला जिसे संतोषजनक न मानते हुए सावलकर के खिलाफ विभागीय जांच के लिए लिखा।
पत्र क्र. 4361 (09 सितंबर 2010)- जांच प्रकरण 219/09 के तहत सावलकर स्थल अनुमोदन के आवेदन बगैर फीस जमा कराए इनवर्ड करते थे। स्वीकृत होने वाले प्रकरणों में ही फीस जमा कराई जाती थी। बाकी में नहीं। आरोप सही पाए जाने पर सावलकर के खिलाफ मुख्य शास्तियां आरोपित किए जाने के लिए विभागीय जांच की जाना है।
पत्र क्र. 1500 (16 मार्च 2011)- जांच प्रकरण 134/10 के तहत सावलक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा गया था।
पत्र क्र. 3088 (20 अपै्रल 2011)- जांच प्रकरण 133/10 के तहत मास्टर प्लान में रेस्ट हाउस के लिए दो स्थानों पर अलग-अलग एफएआर का जिक्र है। अधिकारियों ने मौका मुआयना नहीं किया इसीलिए विसंगति हुई। इसीलिए अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के लिए लिखा है।
(सभी अनुशंसा आयुक्त सह संचालक आशीष उपाध्याय ने की..)
कारण बताओ नोटिस भी...
मप्र भूमि विकास नियम 1984 के नियम 21(3) के तहत सावलकर ने 4,22,500 रुपए की फीस लिए बगैर मप्र भूमि विकास नियम 1973 की धारा 29 के तहत 526 आवेदन निरस्त कर दिए थे। शिकायत के बाद सावलकर को आयुक्त टीएंडसीपी ने 9 सितंबर 2010 को कारण बताओ नोटिस थमाया। 14 अक्टूबर को सावलकर ने स्पष्टीकरण दिया जिसे अमान्य करार देते हुए विभाग ने इंदौर कार्यालय में जमा फीस की गिनती कराई। मामला सही पाए जाने के बाद 24 जनवरी 2011 को सावलकर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई।
....और भी है संगीन आरोप....
-- राऊ के पास पिगडम्बर गांव में बस स्टैंड और व्यावसायिक उपयोग के लिए आरक्षित जमीन पर आवासीय नक्शा पास किया।
-- मास्टर प्लान में प्रस्तावित 100 फीट की रोड के आधार पर ही दे दी बहुमंजिला इमारतों को मंजूरी।
-- आरई-2 की चौड़ाई 75 से घटाकर 30 मीटर की। बाकी 45 मीटर जमीन पर बिल्डरों ने कॉलोनियों, रो-हाउसेस और मल्टियों का काम शुरू किया।
-- आईडीए की राऊ स्थित स्कीम-165 की जमीन पर टीएंडसीपी ने बाले-बाले नक्शा पास कर दिया। नक्शा पास कराने वाले ने भी बिना मौका गंवाए टीएंडसीपी की अनुमति के आधार पर न केवल कॉलोनी काट दी बल्कि विकास कार्य भी जोर-शोर से शुरू कर दिए हैं। जिस जमीन पर कॉलोनी काटी गई है, वह राऊ के हसनजीनगर के पीछे (एमरल्ड हाइट्स स्कूल के पास) है।
-- प्राधिकरण और हाउसिंग बोर्ड की आवासीय योजनाओं के लिए प्रस्तावित जमीन पर पुलक सिटी और उसकी अप्रोच रोड को मंजूरी दी।
-- 2008 में स्वीकृत मास्टर प्लान को खसरे पर दर्शाने के बजाय सावलकर ने इंदौर में रहते बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए गरीब किसानों के खेत से रोड निकाली। योजनाओं के ले-आउट में फेरबदल किए।
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