Monday, June 29, 2015

डॉक्टरों को फेमा का 'डोजÓ ED

--विदेशी कंपनियों के खर्चे पर सैर-सपाटा करने वालों पर ईडी का शिकंजा
-- जनवरी के पहले सप्ताह में जारी होंगे नोटिस
इंदौर. विनोद शर्मा।
सरकारी मंजूरी के बगैर विदेश यात्रा करने वाले इंदौर के छह डॉक्टरों को लेकर सरकार का रवैया कितना ही सकारात्मक क्यों न हो लेकिन उन्हें यात्रा महंगी पड़ेगी यह तय है। एक तरफ संभागायुक्त ने जांच शुरू कर दी है। वहीं प्रवर्तन निदे्रशालय (ईडी) ने ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ फोरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के तहत प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। बहरहाल, जानकारी इक_ा कर ली गई है। सब कुछ ठीक रहा तो 2012 के पहले सप्ताह में डॉक्टरों को नोटिस भी जारी हो जाएंगे।
  आरटीआई के तहत प्राप्त दस्तावेजों की माने तो एमवायएच के डॉ. अपूर्व पौराणिक, डॉ. हेमंत जैन, डॉ. अशोक वाजपेयी, मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. पुष्पा वर्मा, डॉ. सलील भार्गव, डॉ. अनिल भराणी ने 2004 से 2010 के बीच कुल 12 विदेश यात्राएं की। इनमें 9 यात्राएं ऐसी हैं जिनके लिए सरकार से किसी तरह की मंजूरी नहीं ली गई। इसका खुलासा होते ही पहले डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय जांच हुई। बात नहीं बनी तो संभागायुक्त प्रभात पाराशर को जांच के आदेश देना पड़े। हालांकि संभागायुक्त के सख्त आदेश के बावजूद जांचकर्ता अधिकारियों ने डॉक्टरों को रियायत दी। इसी बीच ईडी को शिकायत हुई। छानबीन के बाद ईडी ने डॉक्टरों के खिलाफ फेमा का प्रकरण दर्ज करने की तैयारियां शुरू कर दी।
फेमा क्यों...?
ईडी अधिकारियों ने बताया विदेशी कंपनियां अपनी दवाओं को स्थानीय बाजार में प्रमोट कर रही हैं। इसी कड़ी में उन्होंने डॉक्टरों से संपर्क साधा। डॉक्टरों ने काम किया। कंपनी ने इनसेनटिव के रूप में इन डॉक्टरों को विदेश यात्राएं कराई। इसके लिए डॉक्टरों के पासपोर्ट बनाए गए। आने-जाने की टिकटें दी गई। विदेश में ठहरने की व्यवस्था की। खर्च के पैसे दिए। कुल मिलाकर डॉक्टरों ने यात्रा के दौरान अपना पैसा नहीं लगाया। विदेशी पैसे को इस्तेमाल किया। वह भी उस स्थिति में जब फेमा सेक्शन 3 के तहत कोई भी व्यक्ति हिंदुस्तानी पते पर रहते विदेशी पैसा किसी भी रूप में उपयोग नहीं कर सकता। इसीलिए डॉक्टरों ने विदेश यात्रा करके फेमा का उल्लंघन किया।
यह है ईडी के तर्क...
-- यदि डॉक्टरों ने यात्रा अपने पैसों से की तो उन्होंने आज दिन तक यह स्पष्ट क्यों नहीं किया कि विदेश जाने से पहले उन्होंने भारतीय मुद्रा का परिवर्तन विदेशी मुद्रा (जिस देश में जा रहे हैं वहां की मुद्रा) के रूप में भारतीय रिर्जव बैंक से कब और कैसे कराया।
-- यदि शासकीय सेवा में रहते कोई व्यक्ति निजी या सार्वजनिक हित में विदेश यात्रा करता है तो उसे विभाग के सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य है। डॉक्टर यदि यह कह रहे हैं कि उन्होंने अपने पैसे से यात्रा की तो उन्होंने मंजूरी ली या नहीं इसका खुलासा उनके खिलाफ जारी जांच कर देती है।
-- डॉक्टरों का वेतन तय है। विदेश यात्रा निजी हित में की। ऐसी स्थिति में यह भी देखा जा रहा है कि सालाना विदेश यात्रा पर लाखों रुपए फुंकने वाले यह डॉक्टर आयकर विभाग में कितना रिर्टन जमा करते हैं। इसके लिए आयकर से डॉक्टरों के खातों की जानकारी मांगी है।
बावजूद इसके यदि डॉक्टरों ने विदेश यात्रा पर लाखों रुपया खर्च किया है तो
-- यदि यह मान भी लिया जाए कि आरबीआई से मुद्रा परिवर्तन नहीं कराया तो आरबीआई से मंजूरी प्राप्त ऐसे सेंटरों के नाम बताएं जहां से उन्होंने मुद्रा परिवर्तन कराया।
-- यदि मुद्रा परिवर्तन नहीं कराया तो विदेश जाने का पैसा कहां से और कैसे आया?
-- यदि डॉक्टर कहते हैं कि उन्होंने कंपनियों से पैसा उधार लेकर यात्रा की तो फेमा के तहत विदेशी पैसा उधार लेना भी अपराध है।
ड्रग ट्रायल के आरोपी हैं सभी डॉक्टर
फेमा के फेर में उलझे सभी डॉक्टर ड्रग ट्रायल के आरोपी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. अनिल भरानी, डॉ. हेमंत जैन, डॉ. सलिल भार्गव, डॉ. अपूर्व पौराणिक, डॉ. अशोक बाजपेयी और डॉ. पुष्पा वर्मा ने कुल 3307 मरीजों पर ट्रायल किया, जिनमें से 81 की मौत हो गई. इनमें से किसी को मुआवजा नहीं दिया गया। जबकि चार साल में ट्रायल से डॉ. जैन ने 1.70 करोड़, डॉ.भरानी ने 1.53 करोड़, डॉ. भार्गव ने 1.05 करोड़, डॉ. पौराणिक ने 26 लाख, डॉ. वाजपेयी ने 48 लाख और डॉ. पुष्पा ने आठ लाख रु. अर्जित किए। डॉक्टरों को इनसेंटिव के रूप में विदेश यात्रा कराने वाली यह वही विदेशी कंपनियां है जिनकी दवाओं के लिए ट्रायल किए गए।

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